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सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की उत्पत्ति और विकास 1:10:43
सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की उत्पत्ति और विकास

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया सर्वशक्तिमान परमेश्वर - लौटे हुए परमेश्वर यीशु – अंतिम दिनों के मसीह की उपस्थिति और काम की वजह से और उसके धर्मी निर्णय और ताड़ना के अधीन, अस्तित्व में आयी। कलीसिया में उन सभी लोगों का समावेश हैजो वास्तव में अंतिम दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करते हैं और परमेश्वर के वचन द्वारा जीते और बचाये जाते हैं। इसे पूरी तरह से सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से स्थापित किया गया था, और व्यक्तिगत रूप से उसके द्वारा नेतृत्व और मार्गदर्शन किया जाता है, और इसे किसी भी तरह से किसी भी व्यक्ति द्वारा स्थापित नहीं किया गया था। यह एक ऐसा तथ्य है जिसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया में सभी चुने हुए लोगों द्वारा स्वीकार किया गया है।

  • चीन में अंतिम दिनों के मसीह के प्रकटन और उनके कार्य की पृष्ठिभूमि के बारे में एक संक्षिप्त परिचय

    चीन, महान लाल अजगर के रहने का स्थान है और सम्पूर्ण इतिहास में, यही वह स्थान है जहां परमेश्वर का सबसे अधिक विरोध हुआ और निंदा की गई है। चीन दानवों के एक किले के समान है और शैतान के द्वारा एक अगम्य एवं अभेद्य जेल का नियंत्रण किया जाता है। इसके अलावा, महान लाल अजगर के प्रशासन के सभी स्तरों पर पहरेदारी है और प्रत्येक घर की मोर्चाबंधी की गयी है। परिणामस्वरूप, परमेश्वर के सुसमाचार को फैलाना और उनके कार्य करना इससे अधिक कठिन कहीं भी नहीं है । जब सन् 1949 में चीनी साम्यवादी पार्टी सत्ता में आई, तो चीन की मुख्यभूमि में धार्मिक विश्वास पर प्रतिबंध लगाकर उसे पूरी तरह से दबा दिया गया। लाखों मसीहियों ने सार्वजनिक अपमान,अत्याचार और क़ैद का सामना किया। सभी कलीसियाओं को पूरी तरह से बंद कर उनका सफाया कर दिया गया। यहां तक कि घर की सभाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। यदि कोई किसी सभा में भाग लेता हुआ पकड़ा जाता तो उसे जेल में डाल दिया जाता और यहां तक कि उसकी गर्दन उड़ा दी जाती । उस समय धार्मिक गतिविधियां बिना सुराग़ के लगभग गायब हो गईं । केवल कुछ ही संख्या में मसीहियों ने निरंतर परमेश्वर पर विश्वास बनाए रखा, परन्तु वे केवल ख़ामोशी से कलीसिया को पुनर्जीवित करने के लिए याचना करते हुए परमेश्वर से प्रार्थना और अपने हृदयों में उसकी आराधना के गीत गा सकते थे। अंततः 1981 में, कलीसिया वास्तव में पुनर्जीवित हुई और चीन में व्यापक पैमाने पर पवित्र आत्मा ने अपना कार्य करना प्रारम्भ कर दिया। कलीसियाएं अब बसंत की बारिश के बाद बांस की शाखाओं के समान फूट कर उभर रही थीं और अधिक से अधिक संख्या में लोगों ने परमेश्वर पर विश्वास करना प्रारम्भ कर दिया । सन् 1983 में, जब कलीसिया का पुनरुद्धार अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंच गया, तो चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी ने क्रूर दमन का एक नया दौर प्रारम्भ किया। लाखों लोगों को गिरफ्तार करके हिरासत में ले लिया गया और उन्हें श्रम के माध्यम से शिक्षित किया गया। महान लाल अजगर के प्रशासन ने परमेश्वर के विश्वासियों को केवल सरकार द्वारा गठित तीन-स्व देशभक्त चर्च में शामिल होने की अनुमति प्रदान की। सीसीपी सरकार ने तीन-स्व देशभक्त चर्च का गठन किया, भूमिगत चर्चों को पूरी तरह से हटाने और दृढ़ता से प्रभु में उन विश्वासियों को सरकार के नियंत्रण में लाने के लिए प्रयास किया। ऐसा माना जाता है सरकार कि विश्वास पर प्रतिबंध लगाने और चीन को बिना परमेश्वर का देश बनाने का लक्ष्य प्राप्त करने का यही एक ही रास्ता था। परन्तु पवित्र आत्मा ने घर की कलीसियाओं तथा परमेश्वर पर वास्तव में विश्वास करने वाले लोगों में अपना अत्याधिक कार्य जारी रखा, जिसे रोकने के लिए सीसीपी सरकार के पास कोई रास्ता नहीं बचा था। उस समय, घर की कलीसियाओं में पवित्र आत्मा के कार्य हो रहे थे, अंतिम दिनों के मसीह ने चुपचाप अपना कार्य प्रकट किया, सत्य को व्यक्त करना शुरू किया और परमेश्वर के घर से प्रारम्भ होने वाले न्याय के कार्य करने लगा।

  • पूर्वी बिजली अबाध प्रगति के साथ आगे क्यों बढ़ती है?

    अंतिम दिनों का मसीह मुख्य भूमि चीन में 20 से अधिक वर्षों से अपना कार्य करता आया है, एक ऐसा कार्य जिसने विभिन्न धार्मिक संप्रदायों को जड़ से हिला दिया ह…

  • चीन में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के राज्य के सुसमाचार का प्रसार

    1995 में, चीन के मुख्य भूभाग में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के राज्य के सुसमाचार के प्रमाणीकरण का कार्य औपचारिक रूप से शुरु हुआ। परमेश्वर के प्रति हमारे आभार और एक ऐसे प्रेम के साथ जो सच्चा था, हमने विभिन्न दलों और सम्प्रदायों के भाई-बहनों के सामने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के स्वरूप और कार्य का प्रमाण प्रस्तुत किया। हमने यह उम्मीद नहीं की थी कि उनके नेताओं से अत्यधिक विरोध और लांछन का सामना करना होगा। हम केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सामने आकर निष्ठापूर्वक प्रार्थना कर सकते थे, परमेश्वर से उनके व्यक्तिगत रूप में आने का अनुनय करते हुए। 1997 से आगे, हमने पवित्र आत्मा को एक भव्य स्तर पर कार्य करते हुए देखा। विभिन्न स्थानों पर स्थित कलीसियाएं के सदस्यों की संख्या में तेज बढ़ोतरी हुई। साथ ही, कई शुभ संकेत और चमत्कार हुए, और विभिन्न दलों और सम्प्रदायों के कई लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास लौट आये, उनके प्रकटीकरण और इन शुभ संकेतों और चमत्कारों को देख कर। यदि पवित्र आत्मा ने कार्य नहीं किया होता, तो मनुष्य क्या कर सकता था? इसने हमें यह बोध करा दिया : हालाँकि हमें कुछ सत्य समझ में आ रहे थे, हम केवल अपनी मानवीय ताकत के भरोसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सामने प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकते थे। विभिन्न दलों और सम्प्रदायों के इन लोगों के द्वारा सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार करने के बाद, वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के ही वचनों को खाने-पीने और उनसे आनंदित होकर, क्रमशः अपने दिलों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के विषय में निश्चयबद्ध हो गए, और कुछ समय के बाद, उनमें एक सच्ची आस्था और आज्ञाकारिता का उदय हुआ। इस तरह हर दल और सम्प्रदाय के लोगों का सिंहासन के सामने उत्थान हुआ, और अब उन्हें प्रतीक्षा नहीं रही थी “परमेश्वर से आसमान में मिलने” की, जैसी कि उन्होंने कल्पना की थी।

  • चमकती पूर्वी बिजली की सफलता का उद्गम

    हर बार जब चमकती पूर्वी बिजली का वर्णन होता है, प्रभु में रहने वाले कई भाई बहनें हैरानी महसूस करते हैं: ऐसा क्यों है कि जैसे-जैसे धार्मिक समुदाय पूरी त…

न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंतिम दिनों का मसीह राज्य के आगमन का सुसमाचार लाता है

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सत्य को प्रकट करना

भाई डिंग ने अभी कुछ अराजक कामों के बारे में बात की थी, इसलिए जब आप कहते हैं कि अराजकता बढ़ रही है, तो आपका मतलब ऐसे कौन से ख़ास कामों से होता है?

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पिछले कुछ सालों में हमने हमारे कलीसीया में बढ़ती हुई वीरानी को महसूस किया है। हमने अपने शुरुआती विश्वास और प्यार को खो दिया है, हम कमज़ोर और ज्‍़यादा नकारात्मक बन गए हैं। यहां तक कि कभी-कभी हम उपदेशक भी खोया-खोया महसूस करते हैं, और नहीं जानते कि किस बारे में बात करनी है। हमें लगता है कि हमने पवित्र आत्मा का कार्य खो दिया है। हमने पवित्र आत्मा के कार्य वाली किसी कलीसिया के लिए भी हर जगह खोज की। लेकिन जिस भी कलीसिया को हमने देखा, वह हमारी कलीसिया की तरह ही वीरान है। इतनी सारी कलीसियाएं भूखी और वीरान क्यों हैं?

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दो हजार वर्षों से, पूरी धार्मिक दुनिया का मानना है कि परमेश्वर एक ट्रिनिटी या रित्व है, और त्रित्व पूरे ईसाई सिद्धांत का एक उत्कृष्ट मत है। तो क्या "त्रित्व" की विवेचना सचमुच टिक पाती है? क्या त्रित्व वास्तव में मौजूद है? तुम यह क्यों कहते हो कि त्रित्व धार्मिक दुनिया का सबसे बड़ा भ्रम है?

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अगर प्रभु यीशु स्वयं परमेश्वर हैं, तो ऐसा क्यों है कि जब प्रभु यीशु प्रार्थना करते हैं, तो वे परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं। यहाँ निश्चित रूप से एक रहस्य है जिसे उजागर करना जरूरी है। हमारे लिए चर्चा करें।

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बाइबल परमेश्वर के कार्य का प्रमाण है; केवल बाइबल पढ़ने के द्वारा ही प्रभु पर विश्वास करने वाले लोग यह जान सकते हैं कि परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी और सभी चीजों को बनाया और इसी से वे परमेश्वर के अद्भुत कार्यों, उसकी महानता और सर्वशक्तिमानता को देख सकते हैं। बाइबल में परमेश्वर के बहुत सारे वचन और मनुष्य के अनुभवों की बहुत सारी गवाहियाँ हैं; यह मनुष्य के जीवन के लिए प्रावधान कर सकती है और मनुष्य के लिए बहुत लाभदायक हो सकती है, इसलिए मुझे जिसकी खोज करनी है वह यह है कि क्या हम वास्तव में बाइबल पढ़ने के द्वारा अनन्त जीवन को प्राप्त कर सकते हैं? क्या बाइबल के भीतर वास्तव में अनन्त जीवन का कोई मार्ग नहीं है?

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मैं आपकी बातों से सहमत नहीं हूँ! परमेश्वर में विश्वास, बाइबल में विश्वास है। बाइबल से दूर जाना परमेश्वर में विश्वास करना नहीं है!

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धार्मिक समारोह में शामिल होना क्या है?

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परमेश्वर के साथ कोई एक सामान्य सम्बन्ध कैसे स्थापित कर सकता है?

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मैं सोचा करती थी कि सीसीपी के दिन अब सीमित हैं और शीघ्र ही उसका पतन हो जाएगा, अगर विश्वास करने से पूर्व मैं उसके पतन की प्रतीक्षा करूं, तो क्या ढेरों मुश्किलों से मेरा बचाव नहीं हो जाएगा? लेकिन मैं अब देख रही हूं कि हमें प्रताड़ित और गिरफ़्तार करने में सीसीपी का उद्देश्य हमें नरक में भेजना है! अगर हम सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर में विश्वास करने के पूर्व सीसीपी के नष्ट होने की प्रतीक्षा करते हैं, तो भी क्या हम अंत के दिनों में परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश कर परमेश्‍वर का उद्धार पा सकेंगे? क्या हम उद्धार का हमारा अवसर खो देंगे?

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एक अविश्वासी व्यक्ति क्या होता है?

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स्वभाव के परिवर्तन और अच्छे व्यवहार के बीच क्या अंतर है?

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स्वभाव का परिवर्तन कैसे प्रकट होता है?

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