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23. एक लड़ाई

23. एक लड़ाई

लेखक झांग हुई, चीन

मेरा नाम झांग हुई है और 1993 में मेरे पूरे परिवार ने प्रभु यीशु में विश्वास करना शुरू किया। मैं एक उत्साही खोजकर्ता था, इसलिए मैं जल्दी ही एक प्रचारक बन गया। मैं अक्सर काम और प्रचार करने के लिए अलग-अलग कलीसियाओं में जाया करता था। कुछ सालों के बाद मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी और पूरे समय प्रभु की सेवा करने लगा। हालांकि कुछ अज्ञात कारणों से मेरे भाई-बहनों का उत्साह और प्रेम धीरे-धीरे ठंडा पड़ने लगा तथा सहकर्मियों के बीच ईर्ष्या और बैर बढ़ गया। मैंने भी महसूस किया कि मेरा उत्साह फ़ीका पड़ने लगा है और मेरे पास प्रचार के लिए कुछ भी नहीं बचा है। साल 2005 में मेरी पत्नी को कैंसर हो गया और कुछ ही दिनों बाद उसकी मौत हो गई। यह मेरे लिये बहुत बड़ा आघात था और मैं और ज़्यादा कमजोर पड़ गया। एक दिन मैं अपने चचेरे भाई के घर में रहने गया और वहां दो बहनों से मिला, जिन्होंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार सुनाया। कई दिनों की सहभागिता और चर्चा के बाद मुझे सचमुच विश्वास हो गया कि प्रभु यीशु लौट आये हैं और वे देहधारी सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़कर मेरे प्यासे हृदय को सिंचन और पोषण मिला, मैंने पवित्र आत्मा के काम की मिठास का स्वाद लिया तथा कई सत्यों और रहस्यों को समझा, जिन्हें मैं पहले कभी नहीं समझ पाया था। हालांकि, जब मैं प्रभु के साथ फिर से जुड़ने की खुशी में डूबा हुआ था, धीरे-धीरे शैतान के लालच और हमले मेरे ऊपर बढ़ने लगे ...

एक दिन दोपहर बाद मैं आध्यात्मिक भक्ति का अभ्यास कर रहा था, तभी अचानक दरवाज़े पर दस्तक हुई। जब मैंने दरवाज़ा खोला, तो मैंने पाया कि मेरी पुरानी कलीसिया के पादरी ली यांग और सहकर्मी वांग जुन बाहर खड़े हैं। मैंने हैरानी से उन्हें देखा और सोचा: "ये यहाँ क्या कर रहे हैं? क्या इन्हें सर्वशक्तिमान परमेश्वर में मेरे विश्वास के बारे में पता चल गया है? पहले, जब उन भाई-बहनों ने, जो कि अच्छे खोजी थे, सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करना शुरू किया, तो पादरी ली और सहकर्मी वांग ने उन्हें अफ़वाहों के ज़रिये डराया और उनके परिवारों को भड़काया कि वे उन्हें सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया से दूर रखने के लिए मजबूर करें। उन्होंने उन्हें सर्वशक्तिमान परमेश्वर का अनुसरण करने से रोकने के लिए यथाशक्ति हर प्रयास किया। पता नहीं, आज ये मुझे परेशान करने के लिए किस तरह की तरकीबें इस्तेमाल करने वाले हैं।" मैंने उनका अभिवादन किया और उन्हें बिठाया। कुछ ही देर बाद मेरी बेरी शाओयान और मेरा बेटा दायोंग भी वापस आ गये। मैं हैरान था: मेरे बच्चों ने कहा था कि वे दरअसल काम में व्यस्त थे, तो फिर दोनों आज घर कैसे आ गये? कहीं इन्हें पादरी ली ने तो नहीं बुलाया? ऐसा लग रहा था कि ली यांग और वांग जुन तैयार होकर आये थे! मैंने जल्दी से प्रभु से प्रार्थना की: "सर्वशक्तिमान परमेश्वर! आज ये निश्चित रूप से मुझे रोकने और अड़चनें पैदा करने आये हैं। परमेश्वर, मेरा आध्यात्मिक कद बहुत छोटा है। मैं आपसे विनती करता हूँ कि आप मेरा मार्गदर्शन करें और इनसे निपटने में मेरी मदद करें। मैं आपके लिए गवाही देना चाहता हूँ!" प्रार्थना करने के बाद मेरा हृदय शांत हो गया। उस क्षण ली यांग के चेहरे पर एक बनावटी मुस्कान उभरी और उन्होंने कहा: "भाई झांग, मैंने सुना है कि आप अब चमकती पूर्वी बिजली में विश्वास करते हैं। क्या यह सच है? चमकती पूर्वी बिजली में चाहे कितना भी सत्य क्यों न हो, हम उसे स्वीकार नहीं कर सकते। भाई झांग, हम सभी ने कई सालों से प्रभु में विश्वास किया है और हमने उनके लिए प्रचार और कार्य किया है। हम सबको यह तथ्य स्पष्ट रूप से पता है कि प्रभु यीशु को सूली पर चढ़ाया गया था और वे एक पाप बलि बने थे, इसी घटना ने हमें हमारे पापों से छुटकारा दिलाया है। हमने प्रभु के असीम अनुग्रह और उनके द्वारा हमें दी गई शांति और खुशी का आनंद भी उठाया है। इसलिए हमें हर समय प्रभु का नाम लेना चाहिए और उनके बताये मार्ग पर चलना चाहिए। हम किसी अन्य परमेश्वर पर विश्वास नहीं कर सकते। क्या आपका प्रभु यीशु से दूर जाना और सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करना प्रभु को धोखा देना नहीं है?"

मैंने शांतिपूर्ण ढंग से कहा: "भाई ली, बोलते समय हमें निष्पक्ष और व्यावहारिक होना चाहिए, अपने तर्कों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने चाहिये और मनमाने तरीके से निंदा नहीं करनी चाहिये। क्या आपने चमकती पूर्वी बिजली के मार्ग के बारे में जांच-पड़ताल की है? क्या आपने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ा है? आपने कभी इसकी जांच-पड़ताल नहीं की है, तो आप इस निष्कर्ष पर कैसे पहुँच सकते हैं कि चमकती पूर्वी बिजली को स्वीकार करके मैंने प्रभु को धोखा दिया है? क्या आप जानते हैं कि सत्य कहाँ से आता है? क्या आप जानते हैं कि सत्य कौन व्यक्त करता है? प्रभु यीशु ने कहा था, 'मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ' (यूहन्ना 14:6)। परमेश्वर सत्य है! आप यह कैसे कह सकते हैं कि चमकती पूर्वी बिजली में चाहे कितना भी सत्य क्यों न हो, आप इसे स्वीकार नहीं करेंगे? क्या यह जान-बूझकर सत्य का विरोध करना और परमेश्वर का विरोध करना नहीं है? अगर हम ऐसा करेंगे, तो क्या हम प्रभु के विश्वासियों में भी गिने जाएंगे? सच कहूँ तो, धार्मिक संसार के पादरियों और एल्डरों द्वारा खुले तौर पर अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य का विरोध और निंदा करने के कारण, जब मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करना शुरू किया तो मुझे भी यह भय था कि मैं गलत हो सकता हूँ और भटक सकता हूँ। लेकिन बाद में मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के बहुत-से वचन पढ़े और पाया कि वे सभी वचन सत्य हैं और वे बहुत-से रहस्यों को प्रकट करते हैं, जैसे कि परमेश्वर की 6,000 वर्षों की प्रबंधन-योजना के रहस्य और कार्य के तीन चरणों की अंदरूनी सच्चाई, परमेश्वर के देहधारी होने के रहस्य, बाइबल की सच्ची अंदरूनी कहानी, वगैरह-वगैरह। प्रभु में कई सालों के अपने विश्वास में मैंने जिन उलझनों और कठिनाइयों का सामना किया था, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों से उन सभी का समाधान हो गया। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को मैंने जितना अधिक पढ़ा, उतना ही अधिक मुझे यह महसूस हुआ कि ये पवित्र आत्मा के कथन हैं, परमेश्वर की वाणी हैं। मैं दृढ़ता से विश्वास करता हूँ कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर लौटकर आये प्रभु यीशु हैं और प्रभु हमारे सामने प्रकट हो रहे हैं! भाई ली, भाई वांग, सर्वशक्तिमान परमेश्वर और प्रभु यीशु एक ही परमेश्वर हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करना प्रभु के आगमन का स्वागत करना है! आइये, हम इसके बारे में विचार करें! जब प्रभु यीशु कार्य करने आये थे, कई लोगों ने उनका अनुसरण करने के लिए मंदिर छोड़ दिया था। उस समय, निश्चित रूप से ऐसे कई लोग थे, जिन्होंने यह कहते हुए उनकी आलोचना की थी कि उन लोगों ने यहोवा परमेश्वर को धोखा दिया है, और वे स्वधर्म-त्याग के दोषी हैं। अब हम सभी जानते हैं कि हालाँकि प्रभु यीशु का छुटकारे का कार्य यहोवा परमेश्वर के नियम जारी करने के कार्य से अलग था, और परमेश्वर का नाम भी बदल गया था, फिर भी प्रभु यीशु और यहोवा परमेश्वर एक हैं और वे एक ही परमेश्वर हैं। प्रभु यीशु में विश्वास करना यहोवा परमेश्वर को धोखा देना नहीं है, बल्कि यह परमेश्वर के पदचिह्नों के साथ तालमेल बनाकर चलना और उनके उद्धार को हासिल करना है। वास्तव में, जिन लोगों ने यहोवा परमेश्वर में विश्वास किया था लेकिन प्रभु यीशु का अनुसरण नहीं किया था, वे ऐसे लोग थे जो सचमुच परमेश्वर का परित्याग कर रहे थे और उनको धोखा दे रहे थे। यही आज भी हो रहा है। भले ही अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर का न्याय का कार्य प्रभु यीशु के छुटकारे के कार्य के समान नहीं है, और परमेश्वर का नाम भी बदल गया है, सर्वशक्तिमान परमेश्वर और प्रभु यीशु एक हैं और एक ही परमेश्वर हैं। यह एक अकाट्य तथ्य है। अनुग्रह के युग में प्रभु यीशु के छुटकारे के कार्य ने सिर्फ़ मनुष्य के पापों को क्षमा किया था, लेकिन मनुष्य के शैतानी स्वभावों और पापी प्रकृति को क्षमा नहीं किया था। अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर का न्याय का कार्य मनुष्य के शैतानी स्वभावों और पापी प्रकृति का समाधान करना है, ताकि उनको पूरी तरह से बचाया जा सके, शैतान के प्रभाव से उनको मुक्त किया जा सके और परमेश्वर द्वारा उन्हें हासिल किया जा सके। स्पष्ट है कि कार्य के ये दोनों चरण एक-दूसरे के पूरक हैं, आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं और अपनी प्रगति के साथ गहरे होते जाते हैं। यह सचमुच एक परमेश्वर द्वारा किया गया है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर में मेरा विश्वास प्रभु यीशु को धोखा देना नहीं है। यह मेमने के पदचिह्नों के साथ तालमेल बनाकर चलना है। अगर हम सिर्फ़ प्रभु यीशु में विश्वास करते हैं और सर्वशक्तिमान परमेश्वर का अनुसरण करने से इनकार करते हैं, तो हम न सिर्फ़ उन फ़रीसियों के समान होंगे जिन्होंने केवल यहोवा परमेश्वर में विश्वास किया था और प्रभु यीशु को अस्वीकार कर दिया थाऔर इस तरह परमेश्वर के उद्धार को गँवा दिया था, बल्कि हम भी परमेश्वर के दंड के भागी बनेंगे। सिर्फ़ यही सही मायनों में प्रतिरोध और प्रभु को धोखा देना है! क्या आप ऐसा नहीं कहेंगे?"

जब ली यांग ने मुझे ऐसा कहते हुए सुना तो वे बहुत परेशान हो गये, और वांग जुन ने यह कहकर स्थिति को सामान्य करने की कोशिश की: "एल्डर झांग, पादरी ली आपको यह सलाह आपके जीवन के प्रति जिम्मेदारी के एहसास के कारण दे रहे हैं। उन्हें भय है कि आप गलत मार्ग चुन सकते हैं। आपने कई सालों से प्रभु में विश्वास किया है और आपने साथ मिलकर प्रभु की सेवा की है। बीते सालों में इन सारे उतार-चढ़ावों के दौर से निकलना आसान नहीं रहा है। आप हमारी कलीसिया के एल्डर हैं और आपने कलीसिया के कार्य के लिए बहुत-कुछ दिया है। हमारे सभी भाई-बहन आपका आदर करते हैं और आप पर विश्वास करते हैं, लेकिन आपका कलीसिया को छोड़ना और सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करना उनके लिए काफ़ी निराशाजनक रहा है! एल्डर झांग, कृपा करके जल्दी वापस आ जाइये!"

फिर ली यांग ने मुझे बहलाने के लिये यह कहते हुए मोर्चा संभाला: "भाई वांग सही कह रहे हैं। आपने इन बीते सालों में काफ़ी मेहनत से काम किया है। आप कलीसिया में बनाये अपने रुतबे और साख को इतनी बेपरवाही से कैसे दांव पर लगा सकते हैं? यह कितना शर्मनाक है! अभी वापस मुड़ जाइये। हर कोई आपके वापस आने का इंतज़ार कर रहा है! हमारी कलीसिया ने एक सेवानिवृत्ति-गृह बनाया है, हमने दूसरे देशों की कलीसियाओं के साथ संबंध स्थापित किया है और वे हमें आर्थिक सहयोग दे रही हैं। अगर आप वापस लौटते हैं, तो हम फ़ौरन आपको एक कार देंगे। अगर आप सेवानिवृत्ति गृह का प्रबंधन करना चाहें या कलीसिया का प्रबंधन करना चाहें या कलीसिया के वित्तीय मामले सँभालना चाहें, तो यह सब आपके ऊपर निर्भर है। आप जो भी करना चाहें, कर सकते हैं!" मैं उनकी जितनी अधिक बातें सुनीं, उतना ही अधिक मुझे कुछ छूटा हुआ लगा। वे जो भी कह रहे थे, वह बिलकुल भी वैसा नहीं लग रहा था, जैसा कि प्रभु के विश्वासी कहते हैं। प्रभु यीशु को दिये गए दुष्ट शैतान के प्रलोभन की बात मेरे मन में आ गई, जैसा कि बाइबल में कहा गया है: "फिर इब्लीस उसे एक बहुत ऊँचे पहाड़ पर ले गया और सारे जगत के राज्य और उसका वैभव दिखाकर उससे कहा, 'यदि तू गिरकर मुझे प्रणाम करे, तो मैं यह सब कुछ तुझे दे दूँगा'" (मत्ती 4:8-9)। वे लोग जो कह रहे थे, क्या उसमें बिलकुल वही भाव और वही अंदाज़ नहीं था, जैसा कि शैतान ने कहा था? क्या यह शैतान का प्रलोभन नहीं था? उनका लक्ष्य शोहरत, रुतबे और धन का लालच देकर मुझे बहलाना था, ताकि मैं सच्चे मार्ग से मुंह मोड़ लूं और सर्वशक्तिमान परमेश्वर को धोखा दे दूं। यह शैतान की चाल थी! मैंने करीब दस सालों से परमेश्वर में विश्वास किया था और अंततः प्रभु की वापसी का स्वागत किया था। मैं अब शैतान की चाल में नहीं फंस सकता था, अन्यथा मुझे अपने जीवन भर पछताना पड़ेगा। तब मुझे यह एहसास हुआ कि परमेश्वर मेरी अगुवाई कर रहे हैं, मेरा मार्गदर्शन कर रहे हैं, ताकि मैं उनकी शातिर योजना को पहचान सकूं। यह सोचते हुए मैंने कड़ाई से कहा, "क्या मैंने इन बीते सालों में प्रभु की वापसी का स्वागत करने की उम्मीद से उन पर विश्वास नहीं किया है? अब जबकि वे वापस आ गए हैं, मेरा एकमात्र विकल्प परमेश्वर के साथ जाना हो सकता है। अब और मुझे मनाने की कोशिश न करें। मैं फिर से धर्म में वापस नहीं लौटूंगा।"

इस क्षण मेरी बेटी ने आँखों में आँसू भरकर कहा, "डैड, कृपा करके हमारी बात सुनें! मॉम हाल ही में गुज़र गईं और हम पहले ही काफ़ी पीड़ा झेल रहे हैं। अगर आप चमकती पूर्वी बिजली में विश्वास करना जारी रखते हैं, तो हम भविष्य में अपनी कलीसिया के भाई-बहनों का सामना कैसे कर पाएंगे? हमारे भाई-बहन हमें त्याग देंगे!" अपने बच्चों की आँखों में आँसू देखकर मुझे बहुत पीड़ा महसूस हुई और मेरा दिल तड़प उठा। मैंने सोचा कि हाल ही में अपनी माँ को खो देने के कारण ये कितने उदास हो गये हैं, और अब सर्वशक्तिमान परमेश्वर में मेरे विश्वास की वजह से किस तरह लोग इनकी हँसी उड़ाएंगे और इन्हें त्याग देंगे। मेरे अंदर वाकई उतनी हिम्मत नहीं थी कि मैं उन्हें और अधिक पीड़ा से गुज़रने दूं। मैंने अपने हृदय में काफ़ी अंतर्द्वंद्व महसूस किया: अगर मैं धर्म में वापस लौटने के लिये ली यांग और वांग जुन की शर्तें मान लेता हूँ, तो मेरा परिवार सौहार्दपूर्ण ढंग से जी सकेगा; अगर मैंने परमेश्वर के आख़िरी देहधारण का अनुसरण नहीं किया, जो मनुष्यजाति को बचाने के लिये इंसानों के बीच आया है, तो यह परमेश्वर को धोखा देना होगा, और मैं उद्धार का अपना अवसर गँवा दूंगा। मुझे कौन-सा रास्ता चुनना चाहिए, इसको लेकर मैं काफ़ी उलझन में था। इस पीड़ा के बीच मैं बस चुपचाप परमेश्वर के सामने रो ही सकता था: "हे परमेश्वर, मैं दो पाटों के बीच पिस रहा हूँ और मेरा दिल कमज़ोर है। मैं आपसे विनती करता हूँ कि आप मुझे विश्वास और शक्ति प्रदान करें, ताकि मैं उनकी बाधाओं से मुक्त हो सकूं और आपका अनुसरण करने के लिए अपने विश्वास में दृढ़ हो सकूं।" प्रार्थना करने के बाद मैंने परमेश्वर के कुछ वचनों के बारे में सोचा, जिन्हें मैंने कुछ दिन पहले ही पढ़ा था: "तुम लोगों को जागते रहना चाहिए और हर पल प्रतीक्षा करनी चाहिए, और तुम्हें मेरे सामने अधिक प्रार्थना करनी चाहिए। तुम लोगों को शैतान की विभिन्न साजिशों और चालाक योजनाओं को पहचानना चाहिए, आत्मा को जानना चाहिए, लोगों को जानना चाहिए और सभी प्रकार के लोगों, मामलों और चीजों को समझने में सक्षम होना चाहिए...। शैतान के विभिन्न वीभत्स लक्षण तुम सभी के सामने रखे जाते हैं; क्या तुम रुकते और पीछे हट जाते हो, या तुम मुझ पर भरोसा रखकर खड़े हो जाते हो और आगे बढ़ते हो? शैतान के भ्रष्ट और घिनौने लक्षणों को पूरी तरह से उजागर कर दो, कोई भावुकता न रखो और कोई दया मत दिखाओ! मौत तक शैतान से लड़ते रहो!" ("वचन देह में प्रकट होता है" में आरम्भ में मसीह के कथन के "अध्याय 17")। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों ने मुझे शक्ति दी और मुझे याद दिलाया कि मुझे अपने विवेक से निर्णय लेना सीखना होगा। उस दिन मैंने पूरी तरह से शैतान के धोखे और चाल का सामना किया था। मुझे परमेश्वर से धोखा करने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से उन्होंने मुझे प्रलोभन देने और मुझ पर हमला करने के लिए रुतबे, धन और मेरी अपनी भावनाओं का इस्तेमाल किया था, जिसके कारण मेरे दिल में उलझन पैदा हो गई थी। मैं शैतान के जाल में बिलकुल भी नहीं फंसा, न उसकी चालों का शिकार बना! इसलिये मैंने अपने बच्चों से कहा, "शाओयान, दायोंग, मैंने इसका पता लगाया है और मुझे सब-कुछ स्पष्ट है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर सच्चे परमेश्वर हैं, उनके वचन और कार्य सत्य हैं और सही मार्ग हैं। इतने सालों से हम प्रभु की वापसी के लिए तरसे हैं, और आज हमें परमेश्वर के पदचिह्न और सच्चा मार्ग मिल गये हैं। यह किसी भी अन्य चीज़ से अधिक कीमती है। हम सच्चे मार्ग को सिर्फ़ इस कारण से नहीं छोड़ सकते, क्योंकि हमें दूसरों के द्वारा त्याग दिए जाने का डर है। अगर वे हमें त्याग देते हैं, अगर वे अब हमें नहीं चाहते, तो इसमें डरने वाली कोई बात नहीं है। दूसरों के द्वारा मुँह फेर लेने के बाद भी लोग हमेशा अपनी जिंदगी जीते रह सकते हैं, लेकिन अगर हम परमेश्वर में विश्वास करते हैं, और सच्चे मार्ग की खोज या जांच-पड़ताल नहीं करते, अगर हम प्रभु द्वारा स्वर्गारोहित किये जाने का अवसर गँवा देते हैं और अंत के दिनों के परमेश्वर के कार्य के द्वारा हटाये और ख़त्म कर दिए जाते हैं, तो हम बरबाद हो जाएंगे। हमें निश्चित रूप से आपदा का सामना करना होगा और हम दंड के भागी बनेंगे! तब हमारी जिंदगियों का क्या अर्थ होगा? शाओयान, दायोंग, तुम लोग नहीं समझते। अगर तुम ईमानदारी से सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य की जांच-पड़ताल कर सको, तो तुम्हें समझ आ जायेगा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर लौटकर आये प्रभु यीशु हैं।" जब ली यांग और वांग जुन ने देखा कि मैं अपने विश्वास में कितना दृढ़ हूँ, तो उनके पास असहाय और निराश होकर वहां से चले जाने के अलावा कोई चारा नहीं रहा।

कुछ दिनों के बाद ली यांग और वांग जुन फिर से मेरे घर आये। इस बार उन्होंने मुझसे कलीसिया में लौटने के लिये नहीं कहा, लेकिन इसके बजाय उन्होंने मुझे प्रलोभन देने के लिये शादी के पैंतरे का इस्तेमाल किया। ली यांग ने कहा, "भाई झांग! आपकी पत्नी गुज़र गई है, आपकी बेटी की शादी हो गई है, और आपका बेटा घर में नहीं है। आप बिलकुल अकेले हैं। आपके यहाँ वाकई आपके लिये खाना पकाने वाली कोई ज़रूर होनी चाहिए। हमारी कलीसिया की बहन वांग भी अब अकेली है, और वह काफ़ी संपन्न भी है। हमारी कलीसिया आप दोनों को जीवनसाथी बनाने में मदद कर सकती है, और तब आप दोनों साथ मिलकर प्रभु की सेवा कर सकते हैं। आप क्या सोचते हैं? आपको इसके बारे में कुछ और विचार करना चाहिए। कलीसिया में हमारे भाई-बहन इस उम्मीद में आपके लिए प्रार्थना कर रहे हैं कि आप जल्दी ही वापस आ जाएंगे। आपको उस अँधेरे रास्ते पर नहीं चलना चाहिए!" उस दिन शाम को बहन वांग ने मुझे फ़ोन किया, और फ़ोन के दौरान वे लगातार मुझे कलीसिया में वापस लौटने के लिए कहती रहीं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मेरे पास मेरे बेटे की शादी के लिए पैसों की कमी हो, तो 100,000 या 200,000 युआन के लिए मुझे बस कहने भर की देर है...। उन्हें यह कहते हुए सुनकर, और यह सोचकर कि बहन वांग मेरे परिवार के प्रति हमेशा कितनी उदार रही हैं और उन्होंने अक्सर मेरी बेटी की देखरेख की है, मेरे मन में उनके प्रति बहुत आभार महसूस हुआ। मेरे मन में इस वजह से अंतर्विरोध पैदा हो गया, क्योंकि मैं जानता था कि बहन वांग अपनी दया की भावना से मुझे सलाह दे रही थीं और मैं वाकई ऐसा कुछ नहीं कहना चाहता था जिससे उनको तकलीफ़ हो, इसलिये मैंने भारी मन से कहा, "बहन वांग, मैं जानता हूँ कि आपने हमेशा मेरे परिवार की देखरेख की है और मैं उसके लिए आपका धन्यवाद करता हूँ।" फ़ोन पर हमारी बात ख़त्म होने के बाद मैंने महसूस किया कि मेरे हृदय में एक लड़ाई छिड़ गई थी। मैंने हमेशा से बहन वांग का सम्मान किया था, लेकिन आज मैंने उनकी भावनाओं को चोट पहुंचाई थी और मुझे इसके लिए बहुत बुरा लग रहा था! हालांकि, यह परमेश्वर का संरक्षण ही था, जिसने मुझे उनकी बातों के प्रलोभन में आने और सर्वशक्तिमान परमेश्वर को धोखा देने से बचाया।

एक दिन मैं खेतों में काम कर रहा था, कि पादरी ली ने मुझे देखा और कहा: "भाई झांग, आप भले ही अपने बारे में नहीं सोचते हों, लेकिन आपको अपने बच्चों के बारे में सोचना होगा। दायोंग की हाल ही में सगाई हुई है, और उसकी मंगेतर का पूरा परिवार प्रभु में विश्वास करता है। अगर उन्हें पता लग गया कि आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करते हैं, तो क्या वे फिर भी उसकी शादी आपके परिवार में करेंगे? क्या यह दायोंग की शादी की योजनाओं के लिये अनर्थकारी नहीं होगा? आपको इसके बारे में थोड़ा और सोचना चाहिये।" जब मैंने पादरी ली की बातों को सुना, तो मैंने मन ही मन सोचा: "मुझे कलीसिया में वापस लाने के लिए ये अब मेरे बेटे की शादी के मामले को लेकर मुझे डराने की कोशिश कर रहे हैं। मेरे द्वारा अंत के दिनों के परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करने का मेरे बच्चे की शादी से क्या लेना-देना है? यही नहीं, मेरा बेटा और उसकी मंगेतर आपस में प्रेम करते हैं, तो फिर क्यों वे सिर्फ़ इस कारण से शादी नहीं करेंगे कि मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करता हूँ?" इसलिए, मैंने उन्हें बड़े धीरज से कहा: "मेरे बेटे की शादी होती है या नहीं, यह परमेश्वर के हाथों में है, और इसका सर्वशक्तिमान परमेश्वर में मेरे विश्वास से कोई लेना-देना नहीं है। चूंकि मुझे यह निश्चय हो गया है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही वापस लौटे प्रभु यीशु हैं, इसलिए मैं अंत तक उनका अनुसरण करूंगा। मेरे बच्चों को भले ही इसके बारे में स्पष्ट जानकारी न हो और हमारी अपनी गलतफ़हमियाँ हों, लेकिन एक दिन वे मुझे ज़रूर समझेंगे।"

एक दिन मैं अपने बेटे की इलेक्ट्रिक वेल्डिंग की दुकान पर गया और देखा कि वह पूरे दिन बिस्तर पर पड़ा हुआ था और काम नहीं कर रहा था। यह देखकर मैं हैरान रह गया और उससे पूछा कि यह क्या चल रहा है। वह उदास लग रहा था और उसने धीमी आवाज़ में कहा, "डैड, मेरी मंगेतर ने मुझे फ़ोन करके कहा कि अगर आपने चमकती पूर्वी बिजली में विश्वास करने का अपना मन बना लिया है, तो वह मुझसे शादी नहीं करेगी।" यह सुनकर मुझे वाकई झटका लगा और मुझे गुस्सा भी आया, मैंने सोचा: "ली यांग और दूसरे लोग इस बात से नफरत करते हैं कि मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करता हूँ और इतना काफ़ी है कि वे मुझ अकेले पर हमला करते हैं। वे मुझे डराने के लिए मेरे बेटे की शादी जैसे महत्वपूर्ण मामले का गलत इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं?" अपने बेटे को इस कदर निराश देखकर मुझे बहुत बुरा लगा। मेरी आँखों से आँसू छलक पड़े। मेरे बेटे ने आगे कहा, "उसने यह भी कहा है कि अगर आप कलीसिया में वापस नहीं लौटते, और अगर मैं फिर भी उससे शादी करना चाहूँ, तो मुझे उससे तीन वादे करने होंगे। पहला, मुझे हमारे पिता-पुत्र के संबंध को ख़त्म करना होगा। दूसरा, मैं आपके बुढ़ापे में आपकी देखरेख नहीं कर पाऊँगा। तीसरा, मुझे आपके साथ सभी पारिवारिक संबंध तोड़ लेने होंगे। डैड, कृपा करके हमारे परिवार के लिए कलीसिया में वापस लौट आइये।" मेरे बेटे के शब्द नश्तर की तरह मेरे हृदय में चुभ गये। मैंने मन ही मन सोचा: "सिर्फ़ इस कारण से कि मैं सच्चे मार्ग में विश्वास करता हूँ, उन्होंने मेरे बेटे को मेरे साथ सभी संबंध तोड़ लेने के लिए मजबूर किया है। सच्चे मार्ग में विश्वास करना इतना मुश्किल क्यों है?" मैंने अपने आँसुओं को रोकते हुए अपने बेटे से कहा, "बेटा, मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करूंगा और मैं तुम्हारी मंगेतर की मांगों से सहमत हूँ। मैं तुम्हें इस मामले में और नहीं पिसने दूंगा। जाओ, दोनों मिलकर एक खुशहाल जिंदगी जियो।" फिर मैं मुड़कर दुकान से बाहर निकल गया, लेकिन जैसे ही मैं सड़क पर आया, अपने आँसुओं को छलकने से नहीं रोक पाया। घर पहुँचते ही मैं फ़र्श पर घुटनों के बल बैठ गया और जोर-जोर से रोने लगा: "हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर! मैं बहुत पीड़ा में हूँ! हे परमेश्वर, मैं जानता हूँ कि यह सच्चा मार्ग है और आप आ चुके हैं, और मैं आपका अनुसरण नहीं कर सकता हूँ। लेकिन जबसे मैंने अंत के दिनों के आपके कार्य को स्वीकार किया है, लोगों ने मुझे काफ़ी परेशान किया है, और अब मेरा बेटा भी हमारे पिता-पुत्र के संबंध को ख़त्म करना चाहता है। हे परमेश्वर! मेरा आध्यात्मिक कद बहुत छोटा है, और मैं स्वयं इस उलझन से बाहर नहीं निकल सकता। मैं चाहता हूँ कि आप मेरा मार्गदर्शन करें और मुझे विश्वास दें, ताकि मैं अपने फैसले पर अटल रह सकूं...।" प्रार्थना करने के बाद मैंने अपनी भजनों की किताब खोली और परमेश्वर के वचनों के इस भजन को पढ़ा: "जब तुम कष्टों का सामना करते हो तो तुम्हें देह पर विचार नहीं करने में समर्थ अवश्य होना चाहिए और परमेश्वर के विरुद्ध शिकायत नहीं करनी चाहिए। जब परमेश्वर अपने आप को तुमसे छिपाता है, तो तुम्हें उसका अनुसरण करने के लिए, अपने पिछले प्यार को बिना लड़खड़ाने या मिटने देते हुए बनाए रखने के लिए, तुम्हें विश्वास रखने में समर्थ अवश्य होना चाहिए। इस बात की परवाह किए बिना कि परमेश्वर क्या करता है, तुम्हें उसके मनसूबे के प्रति समर्पण अवश्य करना चाहिए, और उसके विरूद्ध शिकायत करने की अपेक्षा अपनी स्वयं की देह को धिक्कारने के लिए तैयार रहना चाहिए। जब तुम्हारा परीक्षणों से सामना होता है तो तुम्हें अपनी किसी प्यारी चीज़ से अलग होने की अनिच्छा, या बुरी तरह रोने के बावजूद तुम्हें अवश्य परमेश्वर को संतुष्ट करना चाहिए। केवल इसी को सच्चा प्यार और विश्वास कहा जा सकता है" ("मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" में "पूर्ण कैसे किए जाएँ")। परमेश्वर के वचनों को पढ़कर मुझे महसूस हुआ कि परमेश्वर मुझे सांत्वना दे रहे हैं और मुझे प्रोत्साहित कर रहे हैं, मुझे विश्वास दे रहे हैं और मुझे अपनी इच्छा को समझने का अवसर दे रहे हैं: परमेश्वर मुझसे यह अपेक्षा करते हैं कि मैं उन पर भरोसा करूं, उन पर विश्वास बनाए रखूँ और चाहे कितनी भी प्रतिकूल परिस्थितियाँ क्यों न हों या मुझे कितनी भी परीक्षाओं का सामना क्यों न करना पड़े, मैं उनको धोखा न दूं। मैंने अपनी पुरानी कलीसिया के सहकर्मियों के बारे में सोचा, जो मुझे बार-बार परेशान करने और मुझ पर ज़्यादा से ज्यादा दबाव डालने के लिए आये थे, और फिर भी हर बार जब मैं गहरी पीड़ा से गुज़र रहा था, तो जब मैंने परमेश्वर से प्रार्थना की और ईमानदारी से परमेश्वर पर भरोसा किया, परमेश्वर के वचनों ने मुझे शक्ति प्रदान करते हुए और अभ्यास का मार्ग दिखाते हुए हमेशा मुझे प्रबुद्ध किया और मेरा मार्गदर्शन किया। मैं बिलकुल भी अकेला नहीं था, क्योंकि परमेश्वर हमेशा मेरे साथ थे। उस क्षण मेरे हृदय में शक्ति लौट आयी और मैं उस पीड़ा को सहन करने के लिए तैयार हो गया। परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए मैं उन चीज़ों से अलग होने के लिए तैयार हो गया, जिन्हें मैंने सबसे ज़्यादा संजोकर रखा था—मैं बिलकुल भी परमेश्वर को धोखा नहीं दूंगा और पीछे नहीं लौटूंगा।

अगले दिन सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की बहन गाओ और बहन झाओ मेरे घर आयीं, और मैंने उन्हें वे सारी बातें बताईं जो पिछले कुछ दिनों में मेरे साथ हुई थीं। बहन गाओ ने पूछा, "भाई, अपने ऊपर आई इन मुसीबतों के बारे में आप कैसा महसूस करते हैं?" मैंने एक पल के लिए सोचा और कहा, "पहले मैंने सोचा कि पादरी ली और दूसरे लोग मेरे सर्वोत्तम हितों में काम कर रहे हैं, हालांकि उन्होंने अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य की जांच-पड़ताल नहीं की थी और वे इसे नहीं समझते थे। लेकिन यह मैंने कभी भी नहीं सोचा था कि वे मुझे डराने के लिए मेरे बेटे की शादी जैसे महत्वपूर्ण मामले को पैंतरे के रूप में इस्तेमाल करेंगे। इसे समझ पाना मेरे लिये वाकई बहुत मुश्किल है।" तब बहन झाओ ने कहा, "भाई, क्यों न हम परमेश्वर के वचनों का एक अंश पढ़ें? सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने कहा, 'मनुष्य के भीतर परमेश्वर के द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक कार्य के चरण में, बाहर से यह लोगों के मध्य अंतःक्रिया प्रतीत होता है, मानो कि यह मानव व्यवस्थाओं के द्वारा, या मानवीय हस्तक्षेप से उत्पन्न हुआ हो। किन्तु पर्दे के पीछे, कार्य का प्रत्येक चरण, और घटित होने वाला सब कुछ, शैतान के द्वारा परमेश्वर के सामने चली गई बाज़ी है, और लोगों से अपेक्षा करता है कि परमेश्वर के लिए अपनी गवाही में वे अडिग बने रहें। उदाहरण के लिए, जब अय्यूब को आजमाया गया था: पर्दे के पीछे, शैतान परमेश्वर के साथ दाँव लगा रहा था, और अय्यूब के साथ जो हुआ वह मनुष्यों के कर्म थे, और मनुष्यों का हस्तक्षेप था। परमेश्वर द्वारा तुम लोगों में किए गए हर कदम के पीछे शैतान की परमेश्वर के साथ बाज़ी होती है—इस सब के पीछे एक संघर्ष होता है। ... हर चीज़ जो लोग करते हैं उन्हें उनके प्रयासों के लिए एक निश्चित क़ीमत चुकाने की आवश्यकता होती है। बिना वास्तविक कठिनाई के, वे परमेश्वर को संतुष्ट नहीं कर सकते हैं, वे परमेश्वर को संतुष्ट करने के करीब तक भी नहीं पहुँचते हैं, और वे केवल खोखले नारे लगा रहे होते हैं!' ("वचन देह में प्रकट होता है" में "केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है")। परमेश्वर के वचन आध्यात्मिक जगत में चल रही लड़ाई की असली प्रकृति का खुलासा करते हैं। जब हम ऐसी चीज़ों का सामना करते हैं, तो बाहर से देखने पर ऐसा लगता है कि धार्मिक अगुवा हमें परेशान कर रहे हैं, लेकिन वास्तव में, आध्यात्मिक जगत में एक लड़ाई चल रही है और शैतान मनुष्य पर नियंत्रण पाने में परमेश्वर के साथ होड़ कर रहा है। वास्तव में, धार्मिक संप्रदायों के कई अगुवा अपने दिलों में यह स्वीकार करते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त वचन सत्य हैं, लेकिन चूँकि अंत के दिनों में परमेश्वर द्वारा वचनों के माध्यम से किया जा रहा न्याय का कार्य अब तक उनकी अपनी अवधारणाओं और कल्पनाओं के बाहर है और यह उनके सीधे तौर पर आशीष पाने और स्वर्ग में आरोहित किए जाने के सपने को चकनाचूर कर देता है, अत: वे हठपूर्वक परमेश्वर के नए कार्य का विरोध करते हैं और उसे स्वीकारने से इनकार कर देते हैं। इतना ही नहीं, उन्हें भय है कि अगर ज़्यादा लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार कर लेंगे, तो वे अपना रुतबा और आजीविका गँवा देंगे। इसलिए वे लोगों को मजबूर करने और उन्हें सर्वशक्तिमान परमेश्वर की ओर मुड़ने से रोकने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं, ताकि वे सच्चे मार्ग को छोड़ दें और परमेश्वर को धोखा दे दें। दरअसल, वे आध्यात्मिक जगत में शैतान के प्रतिरूप हैं और वास्तव में उनका लोगों को परमेश्वर की ओर मुड़ने से रोकना शैतान द्वारा लोगों को निगल जाने की कोशिश है। जब हम उनके कर्मों और व्यवहार के पीछे की प्रेरणा और इरादे को जान लेंगे, तो हम उनके सार को पूरी तरह से समझ पाएंगे। जब याकूब परीक्षणों के दौर से गुज़र रहा था, तो लोगों की भौतिक आँखों ने उन्हें दिखाया कि चोर याकूब की संपत्ति चुराकर ले जा रहे हैं, लेकिन आध्यात्मिक जगत में शैतान और परमेश्वर के बीच दांव चल रहा था। उस समय हालांकि याकूब इस बात से अनजान था कि आध्यात्मिक जगत में एक लड़ाई चल रही है, उसने वह सारी पीड़ा झेलने का विकल्प चुना और परमेश्वर को दोषी ठहराने के बजाय अपने जन्म के दिन को ही अभिशाप दिया। फिर भी उसने यहोवा के नाम की प्रशंसा की और परमेश्वर के लिए गवाह बनकर खड़ा हुआ, इस तरह उसने शैतान को शर्मिंदा किया और परमेश्वर की प्रशंसा पाई। अब शैतान के कब्जे में होने के कारण हालांकि हमने दबाव और परित्याग की पीड़ा का सामना किया है और देह के क्षणिक सुख गँवा दिए हैं, पर हमने सच्चे मार्ग को कायम रखा है, परमेश्वर के लिए गवाह बनकर खड़े हुए हैं और परमेश्वर की प्रशंसा प्राप्त की है। हमने जिस पीड़ा का सामना किया है, वह बहुत ही सार्थक है!" सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों और बहन की सहभागिता को सुनकर मेरा दिल रोशन हो गया और मैंने कहा, "हाँ, पहले मैं अनजान था और मैंने अपनी पुरानी कलीसिया के सहकर्मियों के सार को पूरी तरह से नहीं समझा था। मैंने सोचा था कि वे मेरे सर्वोत्तम हितों के लिए काम कर रहे हैं। पर आज मैं यह समझ गया हूँ कि वे असली जीवन के शैतान हैं। केवल इस सहभागिता के माध्यम से अब मुझे आध्यात्मिक जगत की लड़ाई की सही स्थिति के बारे में कुछ अंतर्दृष्टि मिली है। हालांकि मैं अब भी सत्य को नहीं समझता और, और भी कुछ ऐसी चीज़ें हैं जिनके बारे में पूरी तरह नहीं जानता, फिर भी इस प्रक्रिया के माध्यम से मैंने निजी तौर पर यह अनुभव किया है कि परमेश्वर मेरा मार्गदर्शन और संरक्षण कर रहा है, और यह सब मेरे ऊपर परमेश्वर का आशीष है।" तब दोनों बहनों ने खुशी से कहा, "वाकई, परमेश्वर का धन्यवाद! अगर वे फिर से आपको परेशान करने आएं, तो और अधिक प्रार्थना करना, परमेश्वर पर भरोसा करके आप शैतान को परास्त कर सकते हैं!" विश्वास से भरकर मैंने सहमति में सिर हिला दिया।

एक दिन सबेरे मेरी पुरानी कलीसिया के कुछ सहकर्मी फिर मुझसे बात करने आये, और मैंने जल्दी से अपने दिल में परमेश्वर से यह प्रार्थना की कि वे मुझे विश्वास, बुद्धि और साहस प्रदान करें। पादरी ली ने फ़ौरन मुझे यह कहते हुए धमकाया, "भाई झांग, अगर आप चमकती पूर्वी बिजली को नहीं छोड़ेंगे, तो हमारी कलीसिया आपका परित्याग कर देगी और हमारे भाई-बहनों के साथ आपको कोई भी संपर्क करने की अनुमति नहीं देगी।" मैंने उनसे कहा, "अगर आप चाहें तो मुझे त्याग सकते हैं, लेकिन मुझे उम्मीद है कि आप कलीसिया में मौजूद एक हज़ार से ज़्यादा भाई-बहनों के जीवन की जिम्मेदारी ज़रूर लेंगे। आप खुद भले ही इस बात को स्वीकार न करें कि प्रभु लौट आये हैं, लेकिन भाई-बहनों को जांच-पड़ताल करने और सच्चे मार्ग को स्वीकार करने से रोकने की कोशिश न करें। कलीसिया की मौजूदा स्थिति को देखिये—भाई-बहन कमजोर और मायूस महसूस करते हैं। कुछ लोग तो काम ढूँढ़ने दूसरी जगह चले गए हैं और कुछ लोगों ने कलीसिया को छोड़ दिया है और अब वे प्रभु में विश्वास नहीं करते। लोगों पर शैतान द्वारा कब्जा कर लिए जाने के कई उदाहरण मौजूद हैं। कलीसिया ने साफ़ तौर पर प्रभु की देखरेख और संरक्षण को गँवा दिया है। फिर हम प्रचारकों की स्थिति को देखिये—हमारे उपदेशों में रोशनी की एक भी किरण नहीं है, हम हमेशा पुरानी उबाऊ चीज़ों का प्रचार करते हैं, जिससे भाई-बहनों को कोई पोषण नहीं मिलता। क्या इस बात पर विचार करना और इसके बारे में गहराई से सोचना ज़रूरी नहीं है? क्या इस मामले की सच्चाई को ढूँढने की कोशिश करना हमारे लिए सार्थक नहीं है?" यह कहने के बाद मुझे अपने दिल में काफी उथल-पुथल महसूस हुई और मैंने पूरी ईमानदारी से उनसे कहा, "हम सब यहाँ कलीसिया के मुख्य सहकर्मी हैं, और हमें एक पल के लिए इस पर विचार करना चाहिए: हम दिन भर प्रभु की भेड़ों की चरवाही की बात करते हैं, लेकिन प्रभु नया कार्य करने और नए वचन बोलने के लिए लौट आये हैं, और फिर भी हम इसकी ज़रा-सी भी खोज या जांच-पड़ताल नहीं करते। हम परमेश्वर के वचनों के सिंचन और पोषण को स्वीकार करने के लिए अपने भाई-बहनों की अगुवाई नहीं करते। इसके बजाय हम हर संभव तरीके से भाई-बहनों को सच्चे मार्ग की जांच-पड़ताल करने से रोकते हैं—ऐसा करके क्या हम भाई-बहनों को धर्म से बँधे रहकर प्यास और थकान से मरने के लिए नहीं छोड़ रहे? ऐसा करने में सक्षम लोग अच्छे सेवक हैं या दुष्ट सेवक? क्या आपने कभी सोचा है कि इन कर्मों का परिणाम क्या होगा?" तभी पादरी ली ने झुंझलाते हुए कहा, "आज हम लोग आपके घर आपको यह कहने के लिए इसलिए आये हैं, क्योंकि हम आपका भला चाहते हैं, और आप हैं कि बदले में भाषण झाड़ रहे हैं!" न्याय की ताकत के साथ बोलते हुए मैंने कहा, "आप बार-बार मुझे परेशान करने के लिए आये हैं, इस बात को अच्छी तरह जानते हुए कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया में सत्य है, और फिर भी आप मुझे इसे स्वीकार करने की अनुमति नहीं देते और मुझे जीवन प्राप्त नहीं करने देते। क्या यही 'मेरा भला चाहने' का अंदाज़ है? आपने मेरे बारे में अफवाहें फैलायी हैं, मेरे और मेरे बच्चों के बीच कलह के बीज बोये हैं और आपकी वजह से मेरा बेटा हमारे पिता-पुत्र के संबंध को तोड़ने के लिए मजबूर हुआ है। क्या यही वह प्रेम है, जिसकी आप बात करते हैं? आप इन साजिशों को रचकर वाकई मेरा भला चाहते हैं या आपके इरादे कुछ और हैं?" मुझे इस तरह बोलते हुए सुनकर ली यांग के चेहरे के भाव एकदम से बदल गए और उन्होंने गुस्से से चिल्लाते हुए मुझसे कहा, "आपको नहीं पता कि आपकी भलाई किसमें है!" मैंने भी वापस उन पर चिल्लाते हुए कहा, "आइये, अब से हम अपने अलग रास्तों पर चलें। परमेश्वर मेरे जीवन की जिम्मेदारी लेगा, और आपको इसकी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है!" मुझे यह कहते हुए सुनकर ली यांग और अन्य लोगों के चेहरे मुरझा गए। उस दिन के बाद से, फिर मुझे कोई परेशान करने नहीं आया।

इस आध्यात्मिक लड़ाई का अनुभव करने के बाद मुझे शैतान की चाल की कुछ समझ आई और मैंने धार्मिक जगत के अगुवाओं के परमेश्वर का अपमान करने वाले सार को अच्छी तरह समझ लिया। मैं फिर कभी धर्म की दुष्ट ताकतों द्वारा नियंत्रित नहीं हुआ, और अंततः सर्वशक्तिमान परमेश्वर का अनुसरण करने के लिए स्वतंत्र और मुक्त हो गया!

मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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23. एक लड़ाई

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23. एक लड़ाई