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सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की उत्पत्ति और विकास

अनुग्रह के युग में, प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से वादा किया, "और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूँ, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊँगा कि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो" (यूहन्ना 14:3)। उन्होंने यह भविष्यवाणी भी की, "क्योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्‍चिम तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा" (मत्ती 24:27)। अंत के दिनों में, जैसे कि उसने स्वयं प्रतिज्ञा की और पहले से ही कह दिया, परमेश्वर ने वचन का उपयोग कर के, प्रभु यीशु के छुटकारे के कार्य की नींव पर न्याय, ताड़ना, शुद्धिकरण और उद्धार का कार्य करने के लिए पुनः देह धारण किया है और दुनिया के पूर्व में—चीन—में अवतीर्ण हुआ है। इसमें बाइबिल की ये भविष्यवाणियाँ कि "पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए" (1 पतरस 4:17)। "जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है" (प्रकाशितवाक्य 2:7)। भी पूरी हो गयी हैं। अंत के दिनों के परमेश्वर के कार्य ने अनुग्रह का युग समाप्त कर दिया और राज्य का युग आरंभ किया। जैसे—जैसे ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार मुख्यभूमि चीन में तेजी से फैला, तो सभी धर्मों और संप्रदायों के लोग जिन्हें सत्य से प्रेम है और जो परमेश्वर के अवतरण के लिए तरस रहे हैं, उन्होंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़कर उन्हें सत्य के रूप में, परमेश्वर की वाणी के रूप में पहचाना। उन्हें यकीन हो गया कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही लौटकर आया प्रभु यीशु है और उन सभी ने एक-एक करके सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार कर लिया। इस तरह सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का जन्म हुआ। जैसा कि तथ्यों से सिद्ध हुआ है, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पूरी तरह से परमेश्वर के अवतरण और कार्य के परिणामस्वरूप अस्तित्व में आयी। इसे किसी व्यक्ति द्वारा स्थापित नहीं किया गया था। क्योंकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के चुने हुए लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम से प्रार्थना करते हैं, उसके कार्य के अनुसार चलते हैं, और उसके द्वारा व्यक्त सभी सत्यों को स्वीकार करते हैं। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि ये चुने हुए लोग किसी मनुष्य में विश्वास करने के बजाय, मसीह में विश्वास करते हैं जो अंत के दिनों में देहधारी हुआ व्यावहारिक परमेश्वर है जो देह में साकार हुआ आत्मा है। बाह्य रूप से, सर्वशक्तिमान परमेश्वर मनुष्य के एक साधारण पुत्र से अधिक कुछ नहीं है, किंतु सार रूप में वह परमेश्वर के आत्मा का मूर्तरूप है और सत्य, मार्ग और जीवन है। उसका कार्य और वचन परमेश्वर के आत्मा की प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति हैं और परमेश्वर की व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति हैं। इसलिए वह व्यावहारिक परमेश्वर है जो देहधारी हुआ है।

1991 में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अंत के दिनों के मसीह ने, चीन में आधिकारिक रूप से अपनी सेवकाई आरंभ की। फिर उसने लाखों वचन व्यक्त किए और अंत के दिनों में महान श्वेत सिंहासन के न्याय का कार्य आरंभ किया। जैसे कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन कहते हैं, "न्याय का कार्य परमेश्वर का अपना कार्य है, इसलिए स्वाभाविक रूप से इसे परमेश्वर द्वारा ही किया जाना चाहिए; उसकी जगह इसे मनुष्य द्वारा नहीं किया जा सकता। चूँकि न्याय सत्य के माध्यम से मानवजाति को जीतना है, इसलिए परमेश्वर के अभी भी मनुष्यों के बीच इस कार्य को करने के लिए देहधारी छवि के रूप में प्रकट होने का सवाल ही नहीं उठता। अर्थात्, अंत के दिनों में मसीह दुनिया भर के लोगों को सिखाने के लिए और उन्हें सभी सच्चाइयों का ज्ञान कराने के लिए सत्य का उपयोग करेगा। यह परमेश्वर के न्याय का कार्य है" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है')। "अंत के दिनों में परमेश्वर वचनों का कार्य करता है, और ऐसे वचन पवित्र आत्मा के वचन हैं, क्योंकि परमेश्वर पवित्र आत्मा है और वह देहधारी भी हो सकता है; इसलिए, पवित्र आत्मा के वचन, जैसे अतीत में बोले गए थे, आज देहधारी परमेश्वर के वचन हैं। … कार्य करने और वचन बोलने की खातिर परमेश्वर के लिए देहधारण करना ज़रूरी है; अन्यथा उसका कार्य अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकता" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'वो मनुष्य, जिसने परमेश्वर को अपनी ही धारणाओं में सीमित कर दिया है, किस प्रकार उसके प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है?')। अंत के दिनों के मसीह की उपस्थिति और कथनों के कारण, बहुत अधिक लोग जो सत्य के प्यासे और सत्य की खोज करते हैं, जीत लिए गए हैं और सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन से शुद्ध हो चुके हैं। वे परमेश्वर के न्याय और ताड़ना में परमेश्वर के अवतरण और उद्धारक की वापसी को देख चुके हैं।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया सर्वशक्तिमान परमेश्वर—लौटकर आया प्रभु यीशु– अंत के दिनों के मसीह के अवतरण और काम की वजह से और उसके धार्मिक न्याय और ताड़ना के अधीन अस्तित्व में आयी। कलीसिया में उन सभी लोगों का समावेश है जो वास्तव में अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करते हैं और परमेश्वर के वचन द्वारा जीते और बचाये जाते हैं। इसे पूरी तरह से सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से स्थापित किया गया था और व्यक्तिगत रूप से उसके द्वारा मार्गदर्शन और चरवाही की जाती है। इसे किसी व्यक्ति द्वारा स्थापित नहीं किया गया था। यह एक ऐसा तथ्य है जिसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के सभी चुने हुए लोगों द्वारा स्वीकार किया गया है। देहधारी परमेश्वर द्वारा उपयोग किया जाने वाला कोई भी व्यक्ति परमेश्वर द्वारा पूर्वनियत होता है, और उसे परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से नियुक्त और सत्यापित किया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे यीशु ने व्यक्तिगत रूप से बारह शिष्यों को चुना और नियुक्त किया था। जो लोग परमेश्वर द्वारा उपयोग किए जाते हैं, वे केवल उसके काम में ही सहयोग करते हैं, वे कभी परमेश्वर के बदले में उसका कार्य नहीं कर सकते। क्योंकि भ्रष्ट इंसान सत्य से रहित है, वह कभी सत्य व्यक्त नहीं कर सकता, कलीसिया की स्थापना करने की तो बात ही दूर है, कलीसिया उन लोगों द्वारा स्थापित नहीं की गई थी जो परमेश्वर द्वारा उपयोग किए जाते हैं, न ही परमेश्वर के चुने हुए लोग उन पर विश्वास करते हैं या उनका अनुसरण करते हैं। अनुग्रह के युग की कलिसीयाओं की स्थापना पौलुस और अन्य प्रेरितों द्वारा नहीं की गई थी, बल्कि ये प्रभु यीशु के काम के परिणाम थे और इन्हें स्वयं प्रभु यीशु द्वारा स्थापित किया गया था। इसी तरह, अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया उन लोगों द्वारा स्थापित नहीं की गई है जिन्हें परमेश्वर द्वारा उपयोग किया गया था बल्कि यह सर्वशक्तिमान परमेश्वर के काम का परिणाम है। परमेश्वर द्वारा उपयोग किया जाने वाला इंसान, मनुष्य का कर्तव्य करते हुए, केवल कलीसियाओं का सिंचन, पोषण, और उनका मार्गदर्शन करता है। यद्यपि परमेश्वर के द्वारा उपयोग किए जाने वाले इंसान द्वारा परमेश्वर के चुने हुए लोगों का मार्गदर्शन, सिंचन और पोषण किया जाता है, तब भी वे लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अलावा किसी अन्य को नहीं मानते या किसी अन्य का अनुसरण नहीं करते हैं और परमेश्वर के वचनों और काम को स्वीकार करते और उनका पालन करते हैं। यह एक तथ्य है जिसे कोई नकार नहीं सकता। अंत के दिनों में देहधारी परमेश्वर के अवतरण और काम की वजह से, सभी धार्मिक संप्रदायों में प्रभु के कई सच्चे विश्वासियों ने अंततः परमेश्वर की वाणी सुनी है, देखा है कि प्रभु यीशु पहले ही आ और चुका है, परमेश्वर के घर से शुरू करके न्याय का कार्य कर चुका है और उन सभी ने पुष्टि की है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही लौटकर आया प्रभु यीशु है- और परिणामस्वरूप, उन्होंने उसके अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार कर लिया है। जो लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन द्वारा जीते जाते हैं, वे उसके नाम के अधीन हो जाते हैं और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के सभी चुने हुए लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं, उसका अनुसरण, आज्ञा-पालन और उसकी आराधना करते हैं। चीन के चुने हुए लोग ऐसे पहले लोग थे जिन्होंने परमेश्वर के न्याय और ताड़ना के कार्य का अनुभव किया जिन्होंने उसके धार्मिक स्वभाव को समझा, उसका प्रताप और क्रोध देखा। इसलिए वे पूरी तरह से परमेश्वर वचन द्वारा जीते जा चुके हैं और वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सामने दंडवत हो गए हैं। वे परमेश्वर के वचन के न्याय और ताड़ना को मानने और स्वीकार करने के इच्छुक हैं। उन्होंने सचमुच प्रायश्चित किया है और वे बदल चुके हैं। इस प्रकार, उन्होंने परमेश्वर का उद्धार प्राप्त कर लिया है।

क्योंकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त किए गए वचन मानवजाति को बचाने के लिए परमेश्वर की प्रबंधन योजना के रहस्यों का खुलासा करते हैं, परमेश्वर के चुने हुए लोगों को, परमेश्वर के वचनों के खुलासे से समझ में आया कि हर युग में परमेश्वर का नाम नया होता है, और उसका नया नाम इस बात का प्रतीक है कि परमेश्वर नए काम कर रहा है, और इसके अलावा, यह कि परमेश्वर प्राचीन युग को समाप्त कर रहा है और एक नया युग आरंभ कर रहा है। परमेश्वर द्वारा नया नाम रखने का अर्थ बहुत महान और गहन है! इसमें परमेश्वर के काम की महत्ता समाहित है। परमेश्वर युग को बदलने और उस युग के अपने काम का प्रतिनिधित्व करने के लिए अपने नाम का उपयोग करता है, साथ ही वह स्वभाव के लिए करता है जो वह उस युग में व्यक्त करता है। व्यवस्था के युग में, व्यवस्थाएँ और आज्ञाएँ जारी करने और पृथ्वी पर मानवजाति के जीवन का मार्गदर्शन करने के लिए उसने यहोवा के नाम का उपयोग किया। यहोवा नाम ने परमेश्वर के प्रतापी और क्रोधी स्वभाव का प्रतिनिधित्व किया, और यह कि वह इंसान पर दया भी कर सकता है और उसे शाप भी दे सकता है। अनुग्रह के युग में, उसने मानवजाति को छुटकारा दिलाने वाला काम करने और अपने दयालु और प्रेमपूर्ण करुणामय स्वभाव को व्यक्त करने के लिए यीशु के नाम का उपयोग किया। राज्य के युग के आगमन के साथ, उसने परमेश्वर के घर से शुरू करते हुए न्याय का कार्य करने, मनुष्य को शुद्ध करने, उसे बदलने, उसे बचाने और इंसान द्वारा अपमान सहन न करने वाले अपने धार्मिक और प्रतापी स्वभाव को व्यक्त करने के लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम का उपयोग किया है। परमेश्वर का नया नाम ऐसा नहीं है जिसे मानव द्वारा मनमाने ढंग से पुकारा जाता है, बल्कि अपने काम की आवश्यकताओं के कारण परमेश्वर ने स्वयं रखा था। कार्य के प्रत्येक चरण में परमेश्वर द्वारा रखे जाने वाले नाम की जड़ें बाइबिल में है, और उस नाम की भविष्यवाणी बाइबल में प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में बहुत समय पहले ही करदी गई थी जो प्रभु यीशु तब रखेगा जब वह अंत के दिनों में वापस आएगा : "जो जय पाए उसे मैं अपने परमेश्‍वर के मन्दिर में एक खंभा बनाऊँगा, और वह फिर कभी बाहर न निकलेगा; और मैं अपने परमेश्‍वर का नाम और अपने परमेश्‍वर के नगर अर्थात् नये यरूशलेम का नाम, जो मेरे परमेश्‍वर के पास से स्वर्ग पर से उतरनेवाला है, और अपना नया नाम उस पर लिखूँगा" (प्रकाशितवाक्य 3:12)। "प्रभु परमेश्‍वर, जो है और जो था और जो आनेवाला है, जो सर्वशक्‍तिमान है, यह कहता है, 'मैं ही अल्फ़ा और ओमेगा हूँ'" (प्रकाशितवाक्य 1:8)। "फिर मैं ने बड़ी भीड़ का सा और बहुत जल का सा शब्द, और गर्जन का सा बड़ा शब्द सुना: 'हल्‍लिलूय्याह! क्योंकि प्रभु हमारा परमेश्‍वर सर्वशक्‍तिमान राज्य करता है'" (प्रकाशितवाक्य 19:6)। राज्य के युग में सर्वशक्तिमान परमेश्वर का नाम प्रकाशितवाक्य की पुस्तक की भविष्यवाणियों को वास्तव में पूरा करता है। परमेश्वर सर्वशक्तिमान है, उसी ने सब चीजों का सृजन किया, वही उन पर शासन करता है और वही प्रथम और अंतिम है; अंत के दिनों में परमेश्वर सत्य व्यक्त करने और परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को करने के लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर नाम का इस्तेमाल करता है। तभी से, लोगों ने देहधारी परमेश्वर को सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहना शुरू कर दिया और लोग देहधारी मसीह को भी व्यावहारिक परमेश्वर कहने लगे। और इस प्रकार सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का नाम पड़ा।

जब साम्राज्य का सुसमाचार मुख्यभूमि चीन में फैला, तो परमेश्वर ने संपूर्ण सृष्टि में आत्मा के समस्त कार्य को पुनः प्राप्त किया और इसे लोगों के उस समूह पर संकेन्द्रित किया जिसने अंत के दिनों के परमेश्वर के काम को स्वीकार कर लिया था, और उन पर जो पूर्वनियत थे और परमेश्वर द्वारा चुने गए थे और ईमानदारी से सच्चे मार्ग की खोज में थे। क्योंकि पवित्र आत्मा का काम स्थानांतरित कर दिया गया था, इसलिए सभी संप्रदायों ने पवित्र आत्मा के काम को खो दिया और एक बंजर भूमि बन गए, और लोगों के पास सत्य के मार्ग को खोजने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं रहा। इसने बाइबिल में की गई भविष्यवाणी को साकार किया है, "ऐसे दिन आते हैं, जब मैं इस देश में महँगी करूँगा; उस में न तो अन्न की भूख और न पानी की प्यास होगी, परन्तु यहोवा के वचनों के सुनने ही की भूख प्यास होगी" (आमोस 8:11)। पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन में, विभिन्न संप्रदायों के जिन लोगों ने सत्य का अनुसरण किया और वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास किया, वे मसीह विरोधियों और दुष्ट नौकरों के प्रतिबंधों और बाधाओं को तोड़कर बाहर आ गए, और अंततः उन्होंने परमेश्वर की वाणी को पहचाना और अधिकाधिक लोग परमेश्वर के सिंहासन के सामने लौट आए। हर जगह सभी धर्मों के एक होने और सभी राष्ट्रों के इस पर्वत की ओर प्रवाहित होने के दृश्य दिखाई दिदे। जैसे ही सभी संप्रदायों के ऐसे लोग जिन्हें वास्तव में परमेश्वर में विश्वास था बड़ी संख्या में लौट आए, तो अधिकांश संप्रदाय ढह गए और लंबे समय से उनका अस्तित्व नाम-मात्र का ही रह गया है। परमेश्वर के कार्य के कदमों को कौन रोक सकता है? परमेश्वर के चुने हुए लोगों को परमेश्वर की ओर लौटने से कौन बाधित कर सकता है? ऐसा लगता थामानो पूरे धार्मिक समुदाय को सीधा कर दिया गया हो। लौटने की धारा तेजी से हिलोरें लेती हुई लहरों की तरह थी—परमेश्वर के कार्य की राह में कोई भी शक्ति रुकावट नहीं बन सकती! रुकावट बन सके लेकिन जबसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने प्रकट होकरअपना काम शुरू किया, तभी से सीसीपी सरकार सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को अनवरत रूप से उत्पीड़ित करती आ रही है। वह बुरी तरह से अंत के दिनों के मसीह का पीछा कर रही है, परमेश्वर के अनुयायियों और उसकी गवाही देने वालों का पीछा कर रही है, और परमेश्वर के चुने हुए लोगों का निर्दयतापूर्वक उत्पीड़न करके, परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को समाप्त करने का प्रयास कर रही है। उसने इस बात की योजना बनाने के लिए कि कैसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को समाप्त किया जाए, कई आपातकालीन बैठकें बुलाई हैं। इसने कई गुप्त दस्तावेज़ तैयार और जारी किए हैं और विभिन्न उपाय शुरू किए हैं जो नीच और शैतानी हैं जैसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को अपमानित करते हुए हर जगह नोटिस लगाना, सार्वजनिक नोटिस जारी करना, जान-बूझकर अफ़वाहें गढ़ने, लांछन और झूठे आरोप लगाने के लिए टेलीविजन, रेडियो, अख़बारों, इंटरनेट और अन्य मीडिया का उपयोग करना; बलपूर्वक लोगों को बुरी शिक्षाएँ देकर और उन्हें भ्रमित करके उनका मतपरिवर्तन करना, दिमाग घुमाना और उन पर अपने विचार थोपना; पर्यवेक्षण और नियंत्रण के लिए थ्री-सेल्फचर्च का उपयोग करना, खुलेआम जाँच करने और गुप्त रूप से पूछताछ करने के लिए जासूसों को भेजना, जमीनी-स्तर पर नियंत्रण रखना, पड़ोसियों के जरिए निगरानी करवाना, और बड़े पुरस्कार का वादा करके लोगों को शिकायत दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित करना; लोगों के घरों की मनमाना तलाशी लेना, उनके घरों को लूटना और उनकी संपत्ति जब्त करना, जुर्मानों के जरिये धन ऐंठना और अनुचित साधनों से धन संचित करना; परमेश्वर के चुने हुए लोगों की गुपचुप गिरफ्तारी करना, मनमाने ढंग से उन्हें श्रम शिविरों में रोक कर रखना और कैद करना, यातनाएँ देकर उनसे अपराध-स्वीकार करवाना, शरीर और दिमाग को तहस-नहस करना, जीवित लोगों के अंग निकाल लेना और दंडाभाव से लोगों को पीट-पीट कर मार डालना; यहाँ तक कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को दबाने के लिए सशस्त्र पुलिस और सैनिकों की नियुक्त करना; इत्यादि। सीसीपी सरकार ने सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के ईसाइयों—परमेश्वर के चुने हुए लोगों—को अमानवीय रूप से गिरफ्तार किया और सताया है, जिसके कारण उन्हें अपनी संपत्ति की अनैतिक डकैती और भौतिक एवं आध्यात्मिक यातनाएँ और दुःख भुगतने पड़े, यहाँ तक कि कई लोगों की तो मृत्यु भी हो गई। सरकार के कुकृत्य भयावह रहे हैं। जैसा कि लिखित दस्तावेज़ हैं, मई, 2020 तक कम से कम एक सौ चौंसठ ईसाइयों को यातना देकर मार डाला गया है। उदाहरण के लिए शी योंगजियांग (पुरुष, 43 वर्षीय) सुईजी काउंटी, एन्हुई प्रांत के वुगऊ टाउन के एक ईसाई को 30 अप्रैल 1997 को सुबह-सुबह गुपचुप तरीके से स्थानीय पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया और उसे इतना पीटा गया कि उसकी मौत हो गयी। 10 मई को, जब शी के परिवार ने शवदाह में उसका शरीर देखा, तो उसका पूरा शरीर नीला पड़ चुका था और खून में सना हुआ था, और सिर में घातक चोट के निशान थे। ये ऐझोंग (पुरुष, 42 वर्ष), शुयांग काउंटी, जियांग्सू प्रांत के एक मसीही, को 26 मार्च 2012 को कलीसिया के लिए माल खरीदते समय सीसीपी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था। तीसरे दिन, उसे पीट-पीट कर मार डाला गया। जियांग गुइझी (महिल, 46 वर्ष, उस समय सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का एक वरिष्ठ नेता), पिंग्यू काउंटी के क्विंग्हे जिले, हेनान प्रांत के एक मसीही को 4 जनवरी, 2013 को ज़िन्मी शहर, हेनानप्रांत में सीसीपी पुलिस द्वारा गुप्त रूप से गिरफ्तार और कैद कर लिया गया था। पुलिस अधिकारियों ने एक अवैध अदालत स्थापित की और अपराध-स्वीकरण निकालने के लिए यातना का उपयोग किया। पुलिस द्वारा किए गए शारीरिक शोषण के परिणामस्वरूप 12 फरवरी की सुबह-सुबह जियांग की मृत्यु हो गई… इस से परे, सीसीपी पुलिस द्वारा दसियों हजार अन्य मसीहियों को भी गिरफ्तार और कैद किया गया है। कुछ को ड्रग्स के इंजेक्शन दिए गए और उनमें सीजोफ्रेनिया विकसित हो गया; कुछ लोग यातना के द्वारा इतनी बुरी तरह से अपंग हो गए कि वे स्वयं की देखभाल करने में असमर्थ रहे; कुछ को श्रम शिविरों में कैद किया गया, और उनकी रिहाई के बाद सीसीपी सरकार द्वारा उन पर निगरानी रखी जाती थी और उन्हें उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित रखा जाता था। अपरिष्कृत आँकड़ों के अनुसार, 2011 से 2013 तक के दो अल्प वर्षों में, परमेश्वर के चुने हुए 3,80,380 लोगों को मुख्य भूमि चीन में सीसीपी सरकार द्वारा गिरफ्तार किया और हिरासत में लिया गया था। इन लोगों में से, 43,640 ने अवैध रूप से पूछताछ के दौरान सभी प्रकार की यातनाएँ सहीं; 1,11,740 पर विभिन्न आरोप लगवाए गए थे और उनसे बेशर्मी से 243,613,000 RMB से अधिक जुर्माना लिया या जबरदस्ती वसूला गया; 35,330 ने अपने घर लुटवाए, और सार्वजनिक सुरक्षा अंगों और उनके अधीनस्थों के द्वारा कम से कम 1,000,000,000 RMB (कलीसिया को चढ़ावे और व्यक्तिगत संपत्ति सहित) बलात् और आधारहीन ढंग से जब्त कर लिए गए या पुलिस अधिकारियों द्वारा जेब में रख लिए गए थे। जब सीसीपी सरकार की गिरफ्तारी और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के मसीहियों के उत्पीड़न की बात आती है, तो ये मोटे -मोटे आँकड़े हैं, और जब सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के सभी मसीह लोगों की बात आती है, तो वे हिमशैल का सिर्फ एक शीर्ष हैं। वास्तव में, जब से सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने अपना काम शुरू किया, तब से परमेश्वर की कलीसिया के अनगिनत मसीहियों को सीसीपी सरकार द्वारा गिरफ्तार किया, सताया, छिपाया गया, अथवा उन पर निगरानी रखी गई है। इसने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया को रक्त पिपासा से दबाने के लिए मुख्यभूमि चीन को आतंक की दुनिया में बदलते हुए हर क्रूर साधन का उपयोग किया। इसके अलावा, सभी संप्रदायों द्वारा कलीसिया को भी कलंकित, निंदित किया गया और उस पर हमले किए गए। यह तुरंत दूर-दूर तक फैली अफवाहों और हर तरह के कलंक, दुर्व्यवहार और अपशब्दों के तूफान का कारण बना। पूरा समाज और धार्मिक समुदाय सभी प्रकार के प्रतिकूल प्रचार से भर गए। सच्चे परमेश्वर के प्रति भ्रष्ट मानवता का प्रतिरोध और सच्चे मार्ग का उत्पीड़न अपनी चरम पर पहुँच गया था।

चूँकि मानवता शैतान द्वारा भ्रष्ट कर दी गई थी, इसलिए परमेश्वर ने मानवजाति को बचाने की अपनी प्रबंधन योजना कभी नहीं रोकी। मानवजाति, हालाँकि, सत्य को नहीं जानती है, यह परमेश्वर को तो और भी कम जानती है। परिणामस्वरूप, हर बार जब भी परमेश्वर नया काम शुरू करने के लिए देहधारण करता है, उसे सत्ताधारियों और धार्मिक समूहों द्वारा अस्वीकृत कर दिया और सताया जाता है। दो हजार साल पहले, जब यीशु ने देहधारण किया, तो उसे रोमन सरकार और यहूदी विश्वास द्वारा सताया और गिरफ्तार किया गया था, और अंत में उसेसूली पर चढ़ाया गया था। अंतिम दिनों में, जब से परमेश्वर न्याय का कार्य करने के लिए चीन में देहधारण कर लौटे हैं, तब से सीसीपी सरकार द्वारा उन्हें क्रूरता से सताया और उनका पीछा किया गया है, और मसीही धर्म के सभी पंथों और संप्रदायों द्वारा भी अभिशप्त किया गया है, उन पर झूठे आरोप लगाए गए हैं, उन्हें निंदित, और अस्वीकृत किया गया है। यह मनुष्य के भ्रष्टाचार और दुष्टता का स्पष्ट संकेत है। हम कल्पना कर सकते हैं कि परमेश्वर के लिए राक्षसों के इस तरह के किले में अपना काम पूरा करना कितना कठिन है, जहाँ भारी काले बादल छाए रहते हैं और शैतान शक्ति का उपयोग करते हैं। तथापि, परमेश्वर सर्वशक्तिमान है, और उनके पास सर्वोच्च अधिकार और शक्ति है। भले ही शैतान की ताकतें कितनी ही व्याप्त हों, भले ही वे कैसे विरोध और आक्रमण करती हों, यह सब किसी लाभ का नहीं है। बस लगभग 20 वर्षों में, गंभीर दमन के अधीन पूरे चीन में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार फैल चुका है। देशभर में कई लाख कलीसियाएँ उभर आई हैं और लाखों लोगों ने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम की अधीनता स्वीकार कर ली है। लगभग तत्काल ही, सभी संप्रदाय उजाड़ हो गए, क्योंकि परमेश्वर के अनुयायियों ने परमेश्वर की आवाज़ सुन ली है, और वे आवाज़ का पीछा करते हुए पहले ही वापस आ चुकी हैं, परमेश्वर के सामने गिर चुकी हैं, और उन्हें परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से सिंचित किया गया और उनका मार्गदर्शन किया गया है। इसने बाइबिल में भविष्यवाणी को पूरा किया है कि "हर जाति के लोग धारा के समान उसकी ओर चलेंगे" (यशायाह 2:2)। यह अपरिहार्य है कि परमेश्वर में सभी सच्चे विश्वासी अंत में सर्वशक्तिमान परमेश्वर की ओर मुड़ेंगे, क्योंकि यह लंबे समय से परमेश्वर द्वारा नियोजित और पूर्वनियत किया गया है। कोई इसे बदल नहीं सकता है! वे झूठे विश्वासी, जिन्हें परमेश्वर पर विश्वास केवल इतना ही है कि वे अपनी पेट भर रोटियाँ खा सकें, और वे दुष्ट लोग, मसीह-विरोधी और झूठे चरवाहे जो दुष्टता एवं सर्वशक्तिमान परमेश्वर का विरोध और निंदा करते हैं, वे सब परमेश्वर के काम द्वारा उजागर और समाप्त कर दिए गए हैं। परमेश्वर के काम द्वारा समस्त धार्मिक समुदाय पूरी तरह से नष्ट और विघटित कर दिया गया है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर का काम अंत में महिमा में समाप्त हो गया है। इस अवधि के दौरान, सीसीपी सरकार के उन्मत्त प्रतिरोध और रक्तरंजित दमन के बावजूद, परमेश्वर के साम्राज्य का सुसमाचार अभी भी विद्युत गति से फैल गया है। परमेश्वर के काम को हटाने और मिटाने का सीसीपी का षड़यंत्र विफलता के साथ समाप्त हो गया है। परमेश्वर का विरोध करने वाली सभी दुष्ट ताकतों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है और परमेश्वर के तेजस्वी और कुपितन्याय के बीच में पलट दिया गया है। ठीक जैसे कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "वे सभी जिनसे मैं प्रेम करता हूँ, निश्चय ही अनन्त काल तक जीवित रहेंगे, और वे सभी जो मेरे विरुद्ध खड़े हैं, निश्चय ही अनन्त काल तक मेरे द्वारा ताड़ित किए जाएँगे। क्योंकि मैं एक ईर्ष्यालु परमेश्वर हूँ, मनुष्यों ने जो किया है, उस सबके लिए उन्हें हल्के में नहीं छोडूँगा। मैं पूरी पृथ्वी पर निगरानी रखूँगा, और धार्मिकता, प्रताप, कोप और ताड़ना के साथ संसार के पूर्व में प्रकट होते हुए, मानवजाति के असंख्य समुदायों के समक्ष स्वयं को उजागर करूँगा!" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 26')। "मेरा राज्य समस्त ब्रह्माण्ड के ऊपर आकार ग्रहण कर रहा है, और मेरा सिंहासन हज़ारों-लाखों लोगों के हृदय में प्रभुत्व संपन्न होता है। स्वर्गदूतों की सहायता से, मेरी महान उपलब्धि शीघ्र ही फलीभूत होगी। मेरे सभी पुत्र और लोग मेरी वापसी की उत्सुकता से प्रतीक्षा करते हैं, अपने साथ पुनः एक होने, फिर कभी अलग नहीं होने के लिए मेरी लालसा करते हैं। ऐसा कैसे हो सकता है कि मेरे राज्य के असंख्य जनसाधारण, मेरे उनके साथ होने की वजह से, हर्षोल्लास से भरे उत्सव में एक दूसरे की ओर दौड़ न पड़ें? क्या यह ऐसा पुनर्मिलन हो सकता है जिसके लिए कोई क़ीमत चुकाना आवश्यक नहीं हो? मैं सभी मनुष्यों की नज़रों में सम्मानीय हूँ, मैं सभी के वचनों में उद्घोषित होता हूँ। इतना ही नहीं, जब मैं लौटूँगा, मैं सारी शत्रु शक्तियों को जीत लूँगा। समय आ गया है! मैं अपने कार्य को गति दूँगा, मैं मनुष्यों के बीच राजा के रूप में शासन करूँगा! मैं वापसी की कगार पर हूँ! और मैं प्रस्थान करने ही वाला हूँ! यही है वह जिसकी सब आशा कर रहे हैं, यही है वह जो वे चाहते हैं। मैं संपूर्ण मानवजाति को मेरे दिन का आगमन देखने दूँगा और वे सब आनंदोल्लास से मेरे दिन के आगमन का स्वागत करेंगे" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 27')। जैसे -जैसे राज्य का सुसमाचार फैला, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया अधिक बड़ी होती गई, और विश्वासियों की संख्या बिना रुके बढ़ती गई। आज, यह इतना बढ़ रहा है जितना पहले कभी नहीं बढ़ा। सर्वशक्तिमान परमेश्वर-अंतिम दिनों के मसीह—द्वारा व्यक्त किया गया वचन लंबे समय से हजारों परिवारों तक फैल गया है, और अधिकाधिक लोगों द्वारा स्वीकार किया जा रहा है। परमेश्वर के वचन ने अपने सर्वोच्च अधिकार और शक्ति का प्रदर्शन किया है। यह निर्विवाद तथ्य पूरी तरह से सिद्ध करता है कि "परमेश्वर के वचन के द्वारा सब-कुछ प्राप्त हो जाता है!"

"आदि में वचन था, और वचन परमेश्‍वर के साथ था, और वचन परमेश्‍वर था" (यूहन्ना 1:1)। आरम्भ में, परमेश्वर ने वचन से आकाश और पृथ्वी और उन सभी चीजों को बनाया, और इस वचन से मानवता का मार्गदर्शन किया। अंतिम दिनों में, परमेश्वर वचन के साथ हर चीज को पूरा भी करता है। परमेश्वर के चुने हुए लोगों का शुद्धिकरण और पूर्णता और मसीह के राज्य की प्राप्ति दोनों ही परमेश्वर के वचन द्वारा प्राप्त किए जाएँगे। अपने आप में, इस बारे में कुछ भी अपवाद नहीं है कि कैसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया परमेश्वर के वचन के काम से उत्पन्न हुई, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन के मार्गदर्शन में विकसित हुई है, और, इसके अलावा, सीसीपी सरकार के निष्ठुर दमन और उत्पीड़न और धार्मिक समूहों में मसीह विरोधियों की ताकतों की उन्मत्त निंदा और विरोध के बावजूद बढ़ रही है। यह पूरी तरह से परमेश्वर के वचन के अधिकार और शक्ति को दर्शाता है। यह कहा जा सकता है कि, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की उपस्थिति और काम के बिना, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया नहीं होगी, और परमेश्वर द्वारा व्यक्त किए गए वचनों के बिना, ऐसेही सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया भी मौजूद नहीं होगी। आजवह अपने व्यक्त किए हुए वचनों के साथ अपने चुने हुए लोगों को सिंचित कर और भोजन दे रहा है, और वे सभी लोग जिन्होंने उसके काम को स्वीकार कर लिया है, उसके वचनों के मार्गदर्शन का आनंद ले रहे हैं और मनुष्य को बचाने के उसके काम का अनुभव कर रहे हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "मैं पूरे ब्रह्मांड में अपना कार्य कर रहा हूँ, और पूरब से असंख्य गर्जनाएं निरंतर गूँज रही हैं, जो सभी राष्ट्रों और संप्रदायों को झकझोर रही हैं। यह मेरी वाणी है जो सभी मनुष्यों को वर्तमान में लाई है। मैं अपनी वाणी से सभी मनुष्यों को जीत लूँगा, उन्हें इस धारा में बहाऊँगा और अपने सामने समर्पण करवाऊँगा, क्योंकि मैंने बहुत पहले पूरी पृथ्वी से अपनी महिमा को वापस लेकर इसे नये सिरे से पूरब में जारी किया है। भला कौन मेरी महिमा को देखने के लिए लालायित नहीं है? कौन बेसब्री से मेरे लौटने का इंतज़ार नहीं कर रहा है? किसे मेरे पुनः प्रकटन की प्यास नहीं है? कौन मेरी सुंदरता को देखने के लिए तरस नहीं रहा है? कौन प्रकाश में नहीं आना चाहता? कौन कनान की समृद्धि को नहीं देखना चाहता? किसे उद्धारकर्ता के लौटने की लालसा नहीं है? कौन महान सर्वशक्तिमान की आराधना नहीं करता है? मेरी वाणी पूरी पृथ्वी पर फैल जाएगी; मैं चाहता हूँ कि अपने चुने हुए लोगों के समक्ष मैं और अधिक वचन बोलूँ। मैं पूरे ब्रह्मांड के लिए और पूरी मानवजाति के लिए अपने वचन बोलता हूँ, उन शक्तिशाली गर्जनाओं की तरह जो पर्वतों और नदियों को हिला देती हैं। इस प्रकार, मेरे मुँह से निकले वचन मनुष्य का खज़ाना बन गए हैं, और सभी मनुष्य मेरे वचनों को सँजोते हैं। बिजली पूरब से चमकते हुए दूर पश्चिम तक जाती है। मेरे वचन ऐसे हैं कि मनुष्य उन्हें छोड़ना बिलकुल पसंद नहीं करता, पर साथ ही उनकी थाह भी नहीं ले पाता, लेकिन फिर भी उनमें और अधिक आनंदित होता है। सभी मनुष्य खुशी और आनंद से भरे होते हैं और मेरे आने की खुशी मनाते हैं, मानो किसी शिशु का जन्म हुआ हो। अपनी वाणी के माध्यम से मैं सभी मनुष्यों को अपने समक्ष ले आऊँगा। उसके बाद, मैं औपचारिक तौर पर मनुष्य जाति में प्रवेश करूँगा ताकि वे मेरी आराधना करने लगें। मुझमें से झलकती महिमा और मेरे मुँह से निकले वचनों से, मैं ऐसा करूँगा कि सभी मनुष्य मेरे समक्ष आएंगे और देखेंगे कि बिजली पूरब से चमकती है और मैं भी पूरब में 'जैतून के पर्वत' पर अवतरित हो चुका हूँ। वे देखेंगे कि मैं बहुत पहले से पृथ्वी पर मौजूद हूँ, यहूदियों के पुत्र के रूप में नहीं, बल्कि पूरब की बिजली के रूप में। क्योंकि बहुत पहले मेरा पुनरुत्थान हो चुका है, और मैं मनुष्यों के बीच से जा चुका हूँ, और फिर अपनी महिमा के साथ लोगों के बीच पुनः प्रकट हुआ हूँ। मैं वही हूँ जिसकी आराधना असंख्य युगों पहले की गई थी, और मैं वह शिशु भी हूँ जिसे असंख्य युगों पहले इस्राएलियों ने त्याग दिया था। इसके अलावा, मैं वर्तमान युग का संपूर्ण-महिमामय सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ! सभी लोग मेरे सिंहासन के सामने आएँ और मेरे महिमामयी मुखमंडल को देखें, मेरी वाणी सुनें और मेरे कर्मों को देखें। यही मेरी संपूर्ण इच्छा है; यही मेरी योजना का अंत और उसका चरमोत्कर्ष है, यही मेरे प्रबंधन का उद्देश्य भी है। सभी राष्ट्र मेरी आराधना करें, हर ज़बान मुझे स्वीकार करे, हर मनुष्य मुझमें आस्था रखे और सभी लोग मेरी अधीनता स्वीकार करें!" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'सात गर्जनाएँ गूँजती हैं—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्मांड में फैल जाएँगे')। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन के कारण परमेश्वर के चुने हुए लोगों को महान उद्धार प्राप्त हुआ है। मुख्यभूमि चीन में परमेश्वर का काम अंततः महिमा में समाप्त हो गया है। अब परमेश्वर के चुने हुए लोग हर देश और जगह में उसके वचन को फैला रहे हैं और उसके कामों की गवाही दे रहे हैं। परमेश्वर का वचन पूरे विश्व में फैल जाएगा, और शीघ्र ही वह सभी राष्ट्रों और सभी लोगों के सामने सार्वजनिक रूप से प्रकट होगा। परमेश्वर की उपस्थिति की लालसा करने वाले हर देश और जगह के लोगों ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि जिस परमेश्वर के सार्वजनिक रूप से प्रकट होने की वे लालसा करते हैं वह पहले से ही गुप्त रूप से दुनिया के पूर्व—चीन—में अवतरित हो गया है और उसने विजय और उद्धार के काम का एक चरण पूरा कर लिया है।

अंतिम दिनों में, जब युग लगभग समाप्त होने ही वाला है, तो परमेश्वर महान लाल अजगर के निवास स्थान, चीन में, जो तानाशाही शासकों द्वारा शासित है और नास्तिकता का कट्टर गढ़ है, वहाँ देहधारण करता है और गुप्त रूप से अवतरित होता है। अपने बहुविध विवेक और शक्ति से, परमेश्वर शैतान के विरुद्ध लड़ाई करता है और अपनी प्रबंधन योजना का केंद्रीय काम करता है- शैतान की पूरी तरह पराजय और सभी मानव-जाति का उद्धार। फिर भी, चीन की सत्तारूढ़ पार्टी के निराधार आरोपों, निंदा, छलरचना और अपयश की वजह से, तथ्यों से अनजान कई लोग वास्तव में सीसीपी की अफवाहों पर विश्वास करते हैं। धार्मिक समूह, विशेष रूप से, आज के दिन भी परमेश्वर के आगमन की निंदा और ईशनिंदा करते रहते हैं, और वे परमेश्वर के काम का विरोध करने के लिए पूरी तरह से नास्तिक सीसीपी सरकार के पक्ष में खड़े हैं। यह कितना दुःखद है! ये लोग कभी अपेक्षा नहीं करते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर, जिसका वे विरोध करते हैं, वास्तव में वापस आए हुए प्रभु यीशु हैं। परमेश्वर के सार्वजनिक रूप से प्रकट होने पर, वे अपने दाँतों को पीसते और अपनी छाती को पीटते हुए केवल रोएँगे। यह पूरी तरह से प्रकाशितवाक्य की पुस्तक के वचनों को पूरा करता है, "देखो, वह बादलों के साथ आनेवाला है, और हर एक आँख उसे देखेगी, वरन् जिन्होंने उसे बेधा था वे भी उसे देखेंगे, और पृथ्वी के सारे कुल उसके कारण छाती पीटेंगे। हाँ। आमीन" (प्रकाशितवाक्य 1:7)। बहुत पहले ही महान श्वेत सिंहासन का न्याय आरम्भ हो चुका है! आपदाएँ पहले से भी अधिक भयावह होती जा रही हैं, महामारियाँ विश्व को तबाह कर रही हैं, सूखा, बाढ़, कीड़े-मकौड़ों की महामारियाँ और अन्य आपदाएँ निरंतर विकराल रूप ले रही हैं। हम पर बहुत जल्दी भयंकर आपदाएँ टूटेंगी, परमेश्वर औपचारिक रूप से बड़े लाल अजगर को और उसका विरोध करने वाली तमाम दुष्ट ताकतों को ताड़ना देगा। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "राज्य में, सृष्टि की असंख्य चीज़ें पुनर्जीवित होना और अपनी जीवन शक्ति फिर से प्राप्त करना आरम्भ करती हैं। पृथ्वी की अवस्था में परिवर्तनों के कारण, एक तथा दूसरी भूमि के बीच सीमाएँ भी खिसकने लगती हैं। मैं भविष्यवाणी कर चुका हूँ कि जब ज़मीन को ज़मीन से अलग किया जाता है, और जब ज़मीन ज़मीन से जुड़ती है, यही वह समय होगा जब मैं सारे राष्ट्रों के टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा। इस समय, मैं सारी सृष्टि को फिर नया करूँगा और समस्त ब्रह्माण्ड को पुनर्विभाजित करूँगा, इस प्रकार पूरे ब्रह्माण्ड को व्यवस्थित करूँगा, और पुराने को नए में रूपान्तरित कर दूँगा—यह मेरी योजना है और ये मेरे कार्य हैं। जब संसार के सभी राष्ट्र और लोग मेरे सिंहासन के सामने लौटेंगे, तब मैं स्वर्ग का सारी वदान्यता लेकर इसे मानव संसार को सौंप दूँगा, जिससे, मेरी बदौलत, वह संसार बेजोड़ वदान्यता से लबालब भर जाएगा। किन्तु जब तक पुराने संसार का अस्तित्व बना रहता है, मैं अपना प्रचण्ड रोष इसके राष्ट्रों के ऊपर पूरी ज़ोर से बरसाऊंगा, समूचे ब्रह्माण्ड में खुलेआम अपनी प्रशासनिक आज्ञाएँ लागू करूँगा, और जो कोई उनका उल्लंघन करेगा, उनको ताड़ना दूँगा:

जैसे ही मैं बोलने के लिए ब्रह्माण्ड की तरफ अपना चेहरा घुमाता हूँ, सारी मानवजाति मेरी आवाज़ सुनती है, और उसके उपरांत उन सभी कार्यों को देखती है जिन्हें मैंने समूचे ब्रह्माण्ड में गढ़ा है। वे जो मेरी इच्छा के विरूद्ध खड़े होते हैं, अर्थात् जो मनुष्य के कर्मों से मेरा विरोध करते हैं, वे मेरी ताड़ना के अधीन आएँगे। मैं स्वर्ग के असंख्य तारों को लूँगा और उन्हें फिर से नया कर दूँगा, और, मेरी बदौलत, सूर्य और चन्द्रमा नये हो जाएँगे—आकाश अब और वैसा नहीं रहेगा जैसा वह था और पृथ्वी पर बेशुमार चीज़ों को फिर से नया बना दिया जाएगा। मेरे वचनों के माध्यम से सभी पूर्ण हो जाएँगे। ब्रह्माण्ड के भीतर अनेक राष्ट्रों को नए सिरे से बाँटा जाएगा और उनका स्थान मेरा राज्य लेगा, जिससे पृथ्वी पर विद्यमान राष्ट्र हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएँगे और एक राज्य बन जाएँगे जो मेरी आराधना करता है; पृथ्वी के सभी राष्ट्रों को नष्ट कर दिया जाएगा और उनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। ब्रह्माण्ड के भीतर मनुष्यों में से उन सभी का, जो शैतान से संबंध रखते हैं, सर्वनाश कर दिया जाएगा, और वे सभी जो शैतान की आराधना करते हैं उन्हें मेरी जलती हुई आग के द्वारा धराशायी कर दिया जायेगा—अर्थात उनको छोड़कर जो अभी धारा के अन्तर्गत हैं, शेष सभी को राख में बदल दिया जाएगा। जब मैं बहुत-से लोगों को ताड़ना देता हूँ, तो वे जो धार्मिक संसार में हैं, मेरे कार्यों के द्वारा जीते जाने के उपरांत, भिन्न-भिन्न अंशों में, मेरे राज्य में लौट आएँगे, क्योंकि उन्होंने एक श्वेत बादल पर सवार पवित्र जन के आगमन को देख लिया होगा। सभी लोगों को उनकी किस्म के अनुसार अलग-अलग किया जाएगा, और वे अपने-अपने कार्यों के अनुरूप ताड़नाएँ प्राप्त करेंगे। वे सब जो मेरे विरुद्ध खड़े हुए हैं, नष्ट हो जाएँगे; जहाँ तक उनकी बात है, जिन्होंने पृथ्वी पर अपने कर्मों में मुझे शामिल नहीं किया है, उन्होंने जिस तरह अपने आपको दोषमुक्त किया है, उसके कारण वे पृथ्वी पर मेरे पुत्रों और मेरे लोगों के शासन के अधीन निरन्तर अस्तित्व में बने रहेंगे। मैं अपने आपको असंख्य लोगों और असंख्य राष्ट्रों के सामने प्रकट करूँगा, और अपनी वाणी से, पृथ्वी पर ज़ोर-ज़ोर से और ऊंचे तथा स्पष्ट स्वर में, अपने महा कार्य के पूरे होने की उद्घोषणा करूँगा, ताकि समस्त मानवजाति अपनी आँखों से देखे" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 26')। मानवजाति के इतिहास में, हम देखते हैं कि कैसे सभी दुष्ट ताकतें, जो खुले तौर पर परमेश्वर का विरोध और उन्मत्त रूप से परमेश्वर का प्रतिरोध करती हैं, परमेश्वर द्वारा नष्ट कर दी जाती हैं। चार हजार साल पहले, उनके गंभीर पापों के परिणामस्वरूप, सदोम और अमोरा के शहर आग और गंधक से झुलस गए थे जिसे परमेश्वर ने स्वर्ग से भेजा था। ऐसे ही रोमन साम्राज्य भी प्रभु यीशु के प्रति इसके प्रतिरोध एवं निंदा और मसीहियों के इसके उत्पीड़न की वजह से परमेश्वर से भेजी गई विपत्तियों द्वारा नष्ट कर दिया गया था। ऐसे और भी उदाहरण हैं। अंतिम दिनों में, परमेश्वर की निंदा और प्रतिरोध करने वाली कोई भी दुष्ट ताकत परमेश्वर द्वारा अभिशप्त हो जाएगी और निश्चित रूप से उसके द्वारा नष्ट कर दी जाएगी। यह वास्तव में परमेश्वर का धर्मी स्वभाव है!

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "राज्य मनुष्यों के मध्य विस्तार पा रहा है, यह मनुष्यों के मध्य बन रहा है और यह मनुष्यों के मध्य खड़ा हो रहा है; ऐसी कोई भी शक्ति नहीं है जो मेरे राज्य को नष्ट कर सके। … तुम लोग निश्चय ही मेरी रोशनी के नेतृत्व में, अंधकार की शक्तियों के गढ़ को तोड़ोगे। तुम अंधकार के मध्य निश्चय ही मार्गदर्शन करने वाली ज्योति को नहीं खोओगे। तुम सब निश्चय ही सम्पूर्ण सृष्टि के स्वामी होगे। तुम लोग निश्चय ही शैतान के सामने विजेता बनोगे। तुम सब निश्चय ही बड़े लाल अजगर के राज्य के पतन के समय, मेरी विजय की गवाही देने के लिए असंख्य लोगों की भीड़ में खड़े होगे। तुम लोग निश्चय ही सिनिम के देश में दृढ़ और अटूट खड़े रहोगे। तुम लोग जो कष्ट सह रहे हो, उनसे तुम मेरे आशीष प्राप्त करोगे और निश्चय ही सकल ब्रह्माण्ड में मेरी महिमा का विस्तार करोगे" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 19')। "जब कार्य के तीन चरण समाप्ति पर पहुँचेंगे, तो ऐसे लोगों का एक समूह बनाया जाएगा जो परमेश्वर की गवाही देंगे, ऐसे लोगों का समूह जो परमेश्वर को जानते हैं। ये सभी लोग परमेश्वर को जानेंगे और सत्य को व्यवहार में लाने में समर्थ होंगे। उनमें मानवता और समझ होगी और उन्हें परमेश्वर के उद्धार के कार्य के तीनों चरणों का ज्ञान होगा। यही कार्य अंत में निष्पादित होगा, और यही लोग 6,000 साल के प्रबंधन के कार्य का सघनित रूप हैं, और शैतान की अंतिम पराजय की सबसे शक्तिशाली गवाही हैं। जो परमेश्वर की गवाही दे सकते है वे ही परमेश्वर की प्रतिज्ञा और आशीष को प्राप्त करने में समर्थ होंगे, और ऐसा समूह होंगे जो बिल्कुल अंत तक बना रहेगा, वह समूह जो परमेश्वर के अधिकार को धारण करेगा और परमेश्वर की गवाही देगा। शायद तुम लोगों में से सभी, या शायद केवल आधे या केवल थोड़े से ही इस समूह के सदस्य बन सकते हैं—यह तुम लोगों की इच्छा और खोज पर निर्भर करता है" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है')। से परमेश्वर का वचन पूरा हो जाएगा, और जो पूरा हो जाएगा वह हमेशा के लिए रहेगा। साम्राज्य का भविष्य उज्ज्वल और वैभवशाली है! सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने मुख्यभूमि चीन में पराजित करने वालों का एक समूह पहले से ही बना लिया है। परमेश्वर का अंतिम दिनों का काम पहले ही पूरा हो चुका है! अब, चीन में उसके गुप्, आगमन के दौरान परमेश्वर द्वारा किया गया प्रायोगिक काम महिमा में समाप्त हो गया है, और शीघ्र ही वह सभी राष्ट्रों और स्थानों पर सार्वजनिक रूप से दिखाई देगा। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के चुने हुए लोग पराजित करने वालों का एक समूह हैं जिसे परमेश्वर ने चीन में बनाया है। पवित्र मिशन का दायित्व ले कर, वे परमेश्वर के काम की गवाही दे रहे हैं और सभी देशों और स्थानों पर परमेश्वर का पवित्र नाम घोषित कर रहे हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार तेजी से दुनिया भर में फैल रहा है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पाने और खोजने के लिए सभी राष्ट्रों और स्थानों के लिए इंटरनेट पर निःशुल्क उपलब्ध है। कोई भी इनकार करने की हिम्मत नहीं करता है कि वे परमेश्वर के वचन हैं, और कोई भी इनकार करने की हिम्मत नहीं करता है कि वे सत्य हैं। सत्य के लिए प्यासे और प्रकाश के लिए लालायित अधिकाधिक लोगअंतिम दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के काम को तलाश रहे हैं और उसकी जाँच-पड़ताल कर रहे हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया दुनिया भर के दर्जनों प्रमुख देशों और क्षेत्रों में स्थापित की गई है क्योंकि अधिकाधिक लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर की ओर लौटते हैं। मानव-जाति परमेश्वर के वचन के बीच धीरे-धीरे जाग रही है, और उसने सत्य को स्वीकार करना और जानना शुरू कर दिया है। परमेश्वर का वचन समस्त मानव-जाति का मार्गदर्शन करेगा और हर चीज को पूरा करेगा। सभी लोग जो वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करते हैं और सही मार्ग की खोज करते हैं, निश्चित रूप से परमेश्वर की ओर लौट आएँगे और उसके सिंहासन के सामने आज्ञाकारी बनेंगे, और समस्त मानव-जाति जान जाएगी कि परमेश्वर आ गए हैं, और प्रकट हुए हैं, और यह कि उसका नाम समस्त मानव-जाति के बीच निश्चित रूप से महान होगा।

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    चीन, महान लाल अजगर के रहने का स्थान है और सम्पूर्ण इतिहास में, यही वह स्थान है जहां परमेश्वर का सबसे अधिक विरोध हुआ और निंदा की गई है। चीन दानवों के एक किले के समान है और शैतान के द्वारा एक अगम्य एवं अभेद्य जेल का नियंत्रण किया जाता है। इसके अलावा, महान लाल अजगर के प्रशासन के सभी स्तरों पर पहरेदारी है और प्रत्येक घर की मोर्चाबंधी की गयी है। परिणामस्वरूप, परमेश्वर के सुसमाचार को फैलाना और उनके कार्य करना इससे अधिक कठिन कहीं भी नहीं है । जब सन् 1949 में चीनी साम्यवादी पार्टी सत्ता में आई, तो चीन की मुख्यभूमि में धार्मिक विश्वास पर प्रतिबंध लगाकर उसे पूरी तरह से दबा दिया गया। लाखों मसीहियों ने सार्वजनिक अपमान,अत्याचार और क़ैद का सामना किया। सभी कलीसियाओं को पूरी तरह से बंद कर उनका सफाया कर दिया गया। यहां तक कि घर की सभाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। यदि कोई किसी सभा में भाग लेता हुआ पकड़ा जाता तो उसे जेल में डाल दिया जाता और यहां तक कि उसकी गर्दन उड़ा दी जाती । उस समय धार्मिक गतिविधियां बिना सुराग़ के लगभग गायब हो गईं । केवल कुछ ही संख्या में मसीहियों ने निरंतर परमेश्वर पर विश्वास बनाए रखा, परन्तु वे केवल ख़ामोशी से कलीसिया को पुनर्जीवित करने के लिए याचना करते हुए परमेश्वर से प्रार्थना और अपने हृदयों में उसकी आराधना के गीत गा सकते थे। अंततः 1981 में, कलीसिया वास्तव में पुनर्जीवित हुई और चीन में व्यापक पैमाने पर पवित्र आत्मा ने अपना कार्य करना प्रारम्भ कर दिया। कलीसियाएं अब बसंत की बारिश के बाद बांस की शाखाओं के समान फूट कर उभर रही थीं और अधिक से अधिक संख्या में लोगों ने परमेश्वर पर विश्वास करना प्रारम्भ कर दिया । सन् 1983 में, जब कलीसिया का पुनरुद्धार अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंच गया, तो चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी ने क्रूर दमन का एक नया दौर प्रारम्भ किया। लाखों लोगों को गिरफ्तार करके हिरासत में ले लिया गया और उन्हें श्रम के माध्यम से शिक्षित किया गया। महान लाल अजगर के प्रशासन ने परमेश्वर के विश्वासियों को केवल सरकार द्वारा गठित तीन-स्व देशभक्त चर्च में शामिल होने की अनुमति प्रदान की। सीसीपी सरकार ने तीन-स्व देशभक्त चर्च का गठन किया, भूमिगत चर्चों को पूरी तरह से हटाने और दृढ़ता से प्रभु में उन विश्वासियों को सरकार के नियंत्रण में लाने के लिए प्रयास किया। ऐसा माना जाता है सरकार कि विश्वास पर प्रतिबंध लगाने और चीन को बिना परमेश्वर का देश बनाने का लक्ष्य प्राप्त करने का यही एक ही रास्ता था। परन्तु पवित्र आत्मा ने घर की कलीसियाओं तथा परमेश्वर पर वास्तव में विश्वास करने वाले लोगों में अपना अत्याधिक कार्य जारी रखा, जिसे रोकने के लिए सीसीपी सरकार के पास कोई रास्ता नहीं बचा था। उस समय, घर की कलीसियाओं में पवित्र आत्मा के कार्य हो रहे थे, अंतिम दिनों के मसीह ने चुपचाप अपना कार्य प्रकट किया, सत्य को व्यक्त करना शुरू किया और परमेश्वर के घर से प्रारम्भ होने वाले न्याय के कार्य करने लगा।

  • संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन के "अध्याय 12"

    जब पूर्व से बिजली चमकती है—जो कि निश्चित रूप से वही क्षण भी होता है जब मैं बोलना आरम्भ करता हूँ—जिस क्षण बिजली प्रकट होती है, तो संपूर्ण नभमण्डल जगमगा…

  • सम्पुर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों के रहस्य की व्याख्या के "अध्याय 12 (अंश)"

    जब सभी लोग सुनते हैं, जब सब कुछ नवीकृत और पुनर्जीवित हो जाता है, जब हर व्यक्ति बिना आशंका के परमेश्वर को समर्पित हो जाता है, और परमेश्वर के बोझ की भार…