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सम्पुर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों के रहस्य की व्याख्या के "अध्याय 12 (अंश)"

जब सभी लोग सुनते हैं, जब सब कुछ नवीकृत और पुनर्जीवित हो जाता है, जब हर व्यक्ति बिना आशंका के परमेश्वर को समर्पित हो जाता है, और परमेश्वर के बोझ की भारी ज़िम्मेदारी को अपने कंधे पर उठाने के लिए तैयार होता है—तभी ऐसा होता है कि पूर्वी बिजली आगे बढ़ती है, पूर्व से पश्चिम तक सभी को रोशन करते हुए, इस प्रकाश के आगमन के साथ पृथ्वी पर सभी को भयभीत करते हुए; और इस समय, परमेश्वर एक बार फिर अपना नया जीवन शुरू करता है। कहने का अर्थ है इस समय परमेश्वर पृथ्वी पर अपना नया काम शुरू करता है, पूरे विश्व के लोगों के प्रति यह घोषणा करते हुए कि "जब पूर्व से बिजली चमकती है—जो कि निश्चित रूप से वही क्षण भी होता है जब मैं बोलना आरम्भ करता हूँ—जिस क्षण बिजली प्रकट होती है, तो संपूर्ण नभमण्डल जगमगा उठता है, और सभी तारे रूपान्तरित होना शुरू कर देते हैं।" तो, कब वह समय होता है जब बिजली पूर्व दिशा से निकल कर आगे बढ़ती है? जब स्वर्ग पर अंधेरा छाने लगता है और पृथ्वी धुंधली हो जाती है, और ऐसा तब होता है जब परमेश्वर दुनिया से अपना चेहरा छिपा लेता है, और उस क्षण जब आकाश के नीचे सब कुछ एक शक्तिशाली तूफान से घिरने वाला होता है। इस समय, सभी लोग आतंक से ग्रसित हो जाते हैं, गड़गड़ाहट से भयभीत, बिजली की चमक से डरते हुए, और प्रलय के आक्रमण से और भी ज्यादा भयाकुल, इस तरह कि उनमें से ज्यादातर अपनी आँखें मूँद लेते हैं और परमेश्वर के क्रोधित होकर उन्हें मार देने की प्रतीक्षा करते हैं। जैसे ही विभिन्न स्थितियाँ गुजरती हैं, पूर्वी बिजली तत्काल आगे बढती है। जिसका अर्थ है कि दुनिया के पूर्व में, उस समय से लेकर जब खुद परमेश्वर के प्रति गवाही शुरू होती है, और उस समय तक जब वह कार्य करना शुरू करता है, अर्थात् उस समय तक जब देवत्व समग्र पृथ्वी पर अपनी सार्वभौमिक सत्ता का संचालन करने लगता है—यह पूर्वी बिजली की चमचमाती किरणें ही हैं, जो पूरे ब्रह्मांड के लिए सदैव जगमगाती रही हैं। जब धरती के सारे देश मसीह का राज्य बन जाते हैं, तभी पूरा ब्रह्मांड प्रकाशित होता है। अब वह समय है जब पूर्वी बिजली आगे बढ़ती है: देहधारी परमेश्वर कार्य करना शुरू कर देता है, और साथ ही साथ, सीधे दिव्यता में बात करता है। यह कहा जा सकता है कि जब परमेश्वर पृथ्वी पर बात करना शुरू करता है, तभी पूर्वी बिजली प्रकट होती है। अधिक सटीकता से कहें तो, जब सिंहासन से जीवन का जल बहता है—जब सिंहासन से आने वाले कथन शुरू होते हैं—ठीक वही समय होता है जब सातगुना आत्मा के कथन औपचारिक रूप से शुरू होते हैं। इस समय, पूर्वी बिजली आगे बढ़ना शुरू करती है, और समय में अंतर के कारण, रोशनी की मात्रा भी बदलती है, और इसमें, तेजस्विता की एक सीमा भी है। लेकिन जैसे ही परमेश्वर का कार्य चल पड़ता है, और जैसे ही उसकी योजना बदलती है— चूँकि परमेश्वर के पुत्रों और प्रजा पर कार्य अलग-अलग होता है, बिजली अधिकाधिक अपना निहित कार्य करती है, इस तरह कि पूरे ब्रह्मांड में सभी प्रकाशित हो जाते हैं, और कोई तलछट या अशुद्धता नहीं रह जाती है। यह परमेश्वर की 6,000 साल की प्रबंधन योजना का रवाकरण है, और यही वह फल है जिसका परमेश्वर आनंद लेता है। "सितारों" का अर्थ आकाश के सितारे नहीं, बल्कि परमेश्वर के सभी पुत्र और प्रजा हैं जो परमेश्वर के लिए काम करते हैं। चूँकि वे परमेश्वर के राज्य में परमेश्वर की गवाही देते हैं, और परमेश्वर के राज्य में परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करते हैं, और क्योंकि वे जीव हैं, उन्हें "सितारे" कहा जाता है। जो परिवर्तन होते हैं, वे लोगों की पहचान और उनके कद में हुए परिवर्तन हैं: वे पृथ्वी के लोगों से राज्य की प्रजा में बदल जाते हैं, और, इसके अलावा, परमेश्वर उनके साथ होता है, और परमेश्वर की महिमा उनमें होती है। नतीजतन, वे परमेश्वर की जगह पर सार्वभौमिक शक्ति का संचालन करते हैं, और उनके जहर और अशुद्धियों को परमेश्वर के कार्य के कारण शुद्ध कर दिया जाता है, अंततः उन्हें परमेश्वर के द्वारा उपयोग के योग्य और परमेश्वर के हृदय के अनुकूल बनाते हुए—जो इन शब्दों के अर्थ का एक पहलू है। जब परमेश्वर की रोशनी की किरणें समस्त भूमि को प्रकाशित करती हैं, तो स्वर्ग और पृथ्वी की सभी चीजें कम-ज्यादा बदल जाएंगी, और आकाश में तारे भी बदलेंगे, सूरज और चंद्रमा का नवीकरण किया जाएगा, और बाद में पृथ्वी पर लोग भी नवीकृत होंगे–जो स्वर्ग और पृथ्वी के बीच परमेश्वर द्वारा किया गया समूचा कार्य है, और इसमें कोई आश्चर्य नहीं है।

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