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राज्य के सुसमाचार पर उत्कृष्ट प्रश्न और उत्तर

राज्य के सुसमाचार पर उत्कृष्ट प्रश्न और उत्तर (संकलन)

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की सुसमाचार की फ़िल्मों से सच्चाई से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों और उत्तरों को इस पुस्तक में उद्धृत किया गया है। ये उत्कृष्ट प्रश्न और उत्तर सभी परमेश्वर के चुने हुए लोगों कीपरमेश्वर के वचनों के सत्य के उनके अनुभवों के बारे में समझ हैं,और वे सभी पवित्र आत्मा की रोशनी और प्रबुद्धता से आते हैं। वे सभी सच्चाई के अनुसार हैं,और वे न केवल उन लोगों के प्रश्नों और अवधारणाओं को हल कर सकते हैं जो सच्चाई की खोज करते हैं और सच्चे मार्ग काअन्वेषण करते हैं,बल्कि वे परमेश्वर के चुने हुए लोगों को स्वयं को सत्य के साथ सज्जित करने और परमेश्वर के कार्य के लिए गवाही देने हेतुअद्भुतसंदर्भ सामग्रियाँ भी हैं।

सूचीपत्र

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संकलन I

I. कलीसियाओं की वीरानी पर प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: पिछले कुछ सालों में हमने हमारे कलीसीया में बढ़ती हुई वीरानी को महसूस किया है। हमने अपने शुरुआती विश्वास और प्यार को खो दिया है, हम कमज़ोर और ज्‍़यादा नकारात्मक बन गए हैं। यहां तक कि कभी-कभी हम उपदेशक भी खोया-खोया महसूस करते हैं, और नहीं जानते कि किस बारे में बात करनी है। हमें लगता है कि हमने पवित्र आत्मा का कार्य खो दिया है। हमने पवित्र आत्मा के कार्य वाली किसी कलीसिया के लिए भी हर जगह खोज की। लेकिन जिस भी कलीसिया को हमने देखा, वह हमारी कलीसिया की तरह ही वीरान है। इतनी सारी कलीसियाएं भूखी और वीरान क्यों हैं?
प्रश्न 2: भाई डिंग ने अभी कुछ अराजक कामों के बारे में बात की थी, इसलिए जब आप कहते हैं कि अराजकता बढ़ रही है, तो आपका मतलब ऐसे कौन से ख़ास कामों से होता है?

II. परमेश्वर के आगमन के मार्ग पर प्रश्न और उत्तर (गुप्त और स्पष्ट)

प्रश्न 1: प्रभु का वादा है कि वे फिर से हमें स्वर्ग के राज्य में ले जाने के लिए आएंगे, और फिर भी आप कहते हैं कि प्रभु अंत के दिनों में न्याय का कार्य करने के लिए पहले ही देहधारी हो चुके हैं। बाइबल साफ तौर पर यह भविष्यवाणी करती है कि प्रभु सामर्थ्य और महान महिमा के साथ बादलों पर देहधारी होंगे। यह उस बात से काफ़ी अलग है जिसकी आपने गवाही दी थी, कि प्रभु पहले ही देहधारण कर चुके हैं और गुप्त रूप से लोगों के बीच देहधारी हो चुके हैं।
प्रश्न 2: मैंने अपनी आधी से अधिक जिंदगी में मसीह पर विश्वास किया है। मैंने प्रभु के लिए अथक रूप से काम किया है और मुझे निरंतर उनके दूसरे आगमन की प्रतीक्षा रही है। अगर प्रभु आए हैं, तो मुझे उनका प्रकाशन क्यों नहीं मिला? क्या उन्होंने मुझे किनारे कर दिया है? इस बात ने मुझे बहुत दुविधा में डाल दिया है। आप इसे कैसे समझाएंगे?

III. स्वर्गारोहण पर प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: प्रभु ने काफी पहले हमें वचन दिया है: "क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूँ। और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूँ, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊँगा कि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो" (यूहन्ना 14:2-3)। प्रभु ने पहले ही हमारे लिये स्वर्ग में जगह तैयार कर दी है। जब वे वापस आएंगे, तो हमें स्वर्ग के राज्य में ले जाएँगे। अगर प्रभु वापस आ चुके हैं, तो उनके सारे संत अभी भी धरती पर क्यों हैं? हमें आरोहित क्यों नहीं किया गया है?
प्रश्न 2: हम लोग अभी तक तय नहीं कर पाए हैं कि परमेश्वर का राज्य धरती पर है या स्वर्ग में। प्रभु यीशु ने "स्वर्ग का राज्य पास में हैं" और "स्वर्ग का राज्य आता है" के बारे में बात की थी। अगर यह "स्वर्ग का राज्य," है तो यह स्वर्ग में होना चाहिये। यह धरती पर कैसे हो सकता है?
प्रश्न 3: बाइबल कहती है, "तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे उनके साथ बादलों पर उठा लिये जाएँगे कि हवा में प्रभु से मिलें; और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे" (1 थिस्सलुनीकियों 4:17)। हम इसकी व्याख्या कैसे करें?
प्रश्न 4: आपकी बातों से मुझे एक बात समझ में आई है कि प्रभु की वापसी और आरोहण की हमारी उम्मीदें वाकई इंसानी मान्यताओं और कल्पनाओं की देन हैं। हम पहले ही प्रभु के वचनों को धोखा दे चुके हैं। ख़ैर, अब हम प्रभु की वापसी और आरोहण का इंतज़ार कैसे करें? इस पर थोड़ा और विस्तार से चर्चा कर लें?

IV. परमेश्वर की वाणी को कैसे पहचानें पर प्रश्न और उत्तर

V. स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने की शर्तों पर प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: कि प्रभु यीशु ने हमारे लिए सलीब पर जान दी, उन्होंने हमें पापों से छुड़ाया, और हमारे पापों को क्षमा किया, भले ही हमारा पाप करना जारी है और हमारा अभी शुद्ध होना बाकी है, प्रभु ने हमारे सभी पापों को क्षमा कर हमारी आस्था के ज़रिये हमें न्यायपूर्ण बना दिया है। मुझे लगा कि प्रभु के लिये सबकुछ त्याग करने, यातना सहन करने और कीमत अदा करने की हमारी इच्छा, हमें स्वर्ग के राज्य में प्रवेश दिलाएगी। मुझे लगा, हमारे लिये यही प्रभु की प्रतिज्ञा है। लेकिन कुछ लोगो ने इस पर सवाल उठाया है। उनके अनुसार, चाहे हमने प्रभु के लिए श्रम किया, हम अभी भी पाप करके उन्हें स्वीकार करते हैं, इसलिए हम अभी तक अशुद्ध हैं। उनके अनुसार प्रभु पवित्र हैं, इसलिए अपवित्र लोग उनसे नहीं मिल सकते। मेरा सवाल है: हम लोगों ने प्रभु के लिए अपना सब-कुछ बलिदान कर दिया, क्या हमें स्वर्ग के राज्य में ले जाया जा सकता है? दरअसल हमें इस सवाल का उत्तर नहीं पता, इसलिए हम चाहते हैं कि आप हमें इस बारे में बताएँ।
प्रश्न 2: सर्वशक्तिमान परमेश्वर अंत के दिनों में अपने न्याय का कार्य कैसे करते हैं? वे अपने वचनों से इंसान का न्याय कैसे करते हैं, उसे शुद्ध कैसे करते हैं और उसे पूर्ण कैसे करते हैं? ये जानने के लिए हम बेताब हैं। अगर हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर का कार्य समझते हैं, तो हम लोग सचमुच परमेश्वर की वाणी सुन सकते हैं और हमें परमेश्वर के सिंहासन के सामने उन्नत किया जा सकता है। हमें ज़रा और विस्तार से बताइये!
प्रश्न 4: हम सभी ने कई वर्षों तक प्रभु में विश्वास किया है, और प्रभु के लिए अपने कार्य में हमेशा पौलुस के उदाहरण का पालन किया है। हम प्रभु के नाम और उनके मार्ग के प्रति निष्ठावान रहे हैं, और धार्मिकता का ताज निश्चय ही हमारी प्रतीक्षा कर रहा है। आज, हमें केवल प्रभु के लिए कड़ी मेहनत करने और उनकी वापसी की ओर देखने की आवश्यकता है। केवल इस प्रकार से ही हमें स्वर्ग का राज्य में ले जाया जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बाइबल में ऐसा कहा गया है कि "मेरी बाट जोहनेवाले कभी लज्जित न होंगे" (यशायाह 49:23)। हमें प्रभु के वादे में विश्वास है: वे अपने लौटने पर हमें स्वर्ग का राज्य में ले जाएँगे। क्या इस ढंग से कार्य-अभ्यास करने में वास्तव में कुछ गलत हो सकता है?
प्रश्न 6: हम सब-कुछ त्याग दें, प्रभु के सुसमाचार का प्रचार करें और कलीसिया की देखभाल करें। इस तरह के कामों से हम स्वर्ग के पिता की इच्छा को पूरा कर पाएंगे। इस तरह से अभ्यास करना क्या कोई गलत है?
प्रश्न 7: आज हम प्रभु यीशु में विश्वास करते हैं; उनके नाम को फैलाने के लिये इतना त्याग करते हैं, हर चीज़ छोड़ रहे हैं। हम स्‍वर्गिक पिता की इच्छा का पालन ही तो कर रहे हैं। इसका मतलब है कि हम पवित्र बन चुके हैं। जब प्रभु आएंगे तो वो ज़रूर हमें स्वर्ग के राज्य में स्वर्गारोहित करेंगे।

VI. बचाया जाना और अंततः बचाया जाना पर प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: बाइबल में लिखा है, "क्योंकि धार्मिकता के लिये मन से विश्‍वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुँह से अंगीकार किया जाता है" (रोमियों 10:10)। यीशु में अपने विश्वास के कारण हमें पहले ही बचा लिया गया है। एक बार बचा लिए जाने पर, हम अनंत काल के लिये बच जाते हैं। प्रभु के आने पर हम ज़रूर स्वर्ग के राज्य में प्रवेश पा सकेंगे।
प्रश्न 2: बाइबल में कहा गया है, "परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्‍वर ही है जो उनको धर्मी ठहरानेवाला है। फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा?" (रोमियों 8:33-34)। इससे सिद्ध होता है कि प्रभु यीशु ने सलीब पर चढ़कर हम सबके पापों को क्षमा कर दिया। प्रभु यीशु अब हमें पापी नहीं मानते। अब हम पर इल्ज़ाम कौन लगाएगा?
प्रश्न 3: ऐसा लिखा है, "अत: अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं …" (रोमियों 8:1)। चूँकि हम मसीह यीशु को मानते हैं, तो पहले ही ये गारंटी दे दी गई है कि हम तिरस्कृत नहीं किए जाएंगे और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकेंगे।
प्रश्न 4: लोग पापी होते हैं लेकिन प्रभु यीशु को अपने पाप अर्पित करना हमेशा कारगर सिद्ध होता है। अगर हम प्रभु यीशु के सामने अपने पाप स्वीकार कर लें तो वो हमें क्षमा कर देंगे। हम प्रभु की नज़रों में पापरहित हैं, इसलिये हम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश पा सकते हैं!
प्रश्न 6: तुम्हारा कहना है कि अगर लोग पाप-मुक्त और निर्मल होना चाहते हैं, तो उन्हें सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के न्याय के कार्य को स्वीकार करना होगा। वैसे, परमेश्वर अंत के दिनों में लोगों का न्याय और उन्हें निर्मल कैसे करते हैं? इतने सालों से मैं परमेश्वर में विश्वास करता आ रहा हूं, तो मैं सोच रहा था कि कितना अच्छा हो, अगर कभी ऐसा समय आए जब लोग पाप करना ही छोड़ दें। तब मुझे लगा जीवन परेशानियों से मुक्त होगा!
प्रश्न 8: जो लोग बरसों से प्रभु यीशु में विश्वास करते आए हैं और अपना पूरा जीवन उनके लिये समर्पित कर दिया, अगर वो सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार नहीं करते हैं, तो वे वाकई स्वर्ग के राज्य में आरोहित नहीं किये जाएंगे?
प्रश्न 9: अगर हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार कर लें तो क्या गारंटी है कि हम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश पा जाएंगे?

VIII. बाइबल की अंदरूनी कहानी पर प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: मैंने बीस साल से भी ज़्यादा तक बाइबल का अध्ययन किया है। मैं यकीन से कह सकती हूँ कि बाइबल के बाहर परमेश्वर के कोई वचन नहीं हैं। परमेश्वर के सारे वचन बाइबल में हैं। बाइबल से भटकनेवाली कोई भी चीज़ धर्म के विरुद्ध है और भ्रम फैलानेवाली है!
प्रश्न 2: बाइबल के सत्य पहले ही पूर्ण हैं। परमेश्वर में हमारी आस्था के लिए हमारे पास बाइबल का होना काफी है।हमें और कोई नये वचन नहीं चाहिए!
प्रश्न 3: प्रभु यीशु ने खुद कहा था कि बाइबल उनकी गवाही है। इसीलिए प्रभु में हमारी आस्था की बुनियाद बाइबल ही होनी चाहिए। प्रभु को जानने का हमारा एकमात्र मार्ग बाइबल ही है।
प्रश्न 4: इन्होंने कहा कि किताब परमेश्वर का नया वचन है! प्रकाशित वाक्य में स्पष्ट कहा गया है: "मैं हर एक को, जो इस पुस्तक की भविष्यद्वाणी की बातें सुनता है, गवाही देता हूँ: यदि कोई मनुष्य इन बातों में कुछ बढ़ाए तो परमेश्‍वर उन विपत्तियों को, जो इस पुस्तक में लिखी हैं, उस पर बढ़ाएगा" (प्रकाशितवाक्य 22:18)। इनकी बातें बाइबल के अलावा हैं।
प्रश्न 5: 2 तीमुथियुस 3:16 में पौलुस ने कहा था: "सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्‍वर की प्रेरणा से रचा गया है …" यह दर्शाता है कि बाइबल की हर चीज़ परमेश्वर का वचन है। लेकिन ऐसे लोग भी हैं जो कहते हैं कि बाइबल की हर चीज़ परमेश्वर का वचन नहीं है। क्या यह बाइबल को नकारना और लोगों को धोखा देना नहीं है?
प्रश्न 6: चूंकि पौलुस ने कहा, "सम्पूर्ण पवित्र शास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है," यह गलत नहीं हो सकता। परमेश्वर मानवजाति को पौलुस की मार्फ़त बता रहे थे कि धर्मग्रंथ पूरी तरह से परमेश्वर से प्रेरित थे और पूरी तरह से परमेश्वर के वचन हैं। क्या आप इसे नकारने की हिम्मत करते हैं?
प्रश्न 7: मैंने 20 साल से भी ज़्यादा बाइबल का अध्ययन किया है। मैंने पाया कि बाइबल अलग-अलग वक्त में 40 अलग-अलग लेखकों द्वारा लिखी गयी थी, लेकिन उनकी लिखी विषयवस्तु में एक भी गलती नहीं थी। इससे पता चलता है कि परमेश्वर ही बाइबल के सच्चे लेखक हैं और बाइबल पवित्र आत्मा से उपजी है।
प्रश्न 8: लेकिन हम बाइबल से दूर हो जाने पर भी परमेश्वर में कैसे विश्वास करते रह सकते हैं और जीवन पा सकते हैं?

IX. अंत के दिनों में परमेश्वर का न्याय का-कार्य पर प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: आप कहते हैं कि अंत के दिनों में न्याय के कार्य करने के लिए परमेश्‍वर देहधारी होते हैं। क्या बाइबल में इसका कोई आधार है, या क्या यह बाइबल की किन्हीं भविष्यवाणियों को पूरा करता है? बाइबल से जुड़े आधार के बिना, हमें इस पर विश्वास करने में इतनी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।
प्रश्न 2: मानवजाति को छुटकारा दिलाने के लिए पाप बलि के रूप में प्रभु यीशु को सूली पर चढ़ाया गया था। हमने प्रभु को स्वीकार कर लिया है, और उनके अनुग्रह से उद्धार प्राप्त किया है। फ़िर भी हमें सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के अंत के दिनों के न्याय और शुद्धिकरण के कार्य को क्यों स्वीकार करना है?
प्रश्न 4: तब आपने कहा था कि बाइबल में सबसे ज़्यादा भविष्यवाणी जिस बात की की गई है वह अंत के दिनों में परमेश्‍वर के न्याय कार्य है। बाइबल में कम-से-कम 200 स्थानों पर यह कहा गया है कि परमेश्‍वर न्याय करने आएंगे। यह पूरी तरह सच है। यह 1 पतरस 4:17 में और भी साफ तरीके से कहा गया था: "क्योंकि वह समय आ पहुँचा है कि पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए;" ऐसा लगता है कि अंत के दिनों में परमेश्‍वर के न्याय कार्य एक निश्चितता है। लेकिन आपने जो देखा वह अंत के दिनों के परमेश्‍वर हैं जो अपना न्याय कार्य करने के लिए देहधारी हुए हैं। यह उससे अलग है जिसे हम स्वीकार करते हैं। हम मानते हैं कि अंत के दिनों में प्रभु यीशु पुनरूत्‍थान के बाद के अपने अध्यात्मिक शरीर के रूप में मानवजाति के समक्ष प्रकट होंगे और कार्य करेंगे। धार्मिक मंडलियों में अधिकांश लोगों का भी यही विचार है। लौटकर आए प्रभु के इंसानों के सामने प्रकट होने की अवधारणा और देह रूप में कार्य करने वाली बात हमें पूरी होती हुई नज़र नहीं आ रही है, इसलिए हमें इसके बारे में और बताइये।
प्रश्न 5: आपने गवाही दी कि परमेश्‍वर मनुष्य के पुत्र के रूप में पुनः देहधारी हुए हैं और परमेश्‍वर के आवास से आरंभ करते हुए अपना न्याय कार्य करते हैं। यह बाइबल की भविष्यवाणी से पूरी तरह मेल खाता है। पर मुझे एक बात समझ नहीं आई: क्या परमेश्‍वर के आवास से शुरू होने वाला न्याय वही है जो प्रकाशितवाक्‍य की पुस्तक में महान श्वेत सिंहासन के न्याय के रूप में बताया गया है? हमें यह लगता है कि महान श्वेत सिंहासन का न्याय उन अविश्वासियों पर लक्षित है जो दुष्ट शैतान से संबंध रखते हैं। जब प्रभु आएंगे, तब विश्वासियों को स्वर्ग को ले जाया जायेगा। और तब वे अविश्वासियों को नष्ट करने के लिए आपदाएं भेजेंगे। यही महान श्वेत सिंहासन के समक्ष का न्याय है। आप अंत के दिनों में परमेश्‍वर के न्याय की शुरूआत की गवाही देते हैं, पर हमने परमेश्‍वर को अविश्वासियों को नष्ट करने के लिए आपदाएं भेजते नहीं देखा है। तो यह महान श्वेत सिंहासन का न्याय कैसे हो सकता है? अंत के दिनों में परमेश्‍वर का न्याय आखिर है क्या? कृपया हमें यह बात और साफ़ तरीके से बताएं।
प्रश्न 7: कई भाई-बहनों को यह लगता है कि प्रभु यीशु में हमारे विश्वास के कारण हमारे पापों को पहले ही क्षमा कर दिया गया है, और यह कि हम प्रभु की बहुत अधिक कृपा का आनंद ले चुके हैं और सभी ने प्रभु की करुणा और दया का अनुभव किया है। प्रभु यीशु पहले से ही हमें पापियों के रूप में नहीं देखते, इसलिए हमें सीधे स्वर्ग के राज्य में लाया जाना चाहिए। तो फिर ऐसा क्‍यों कि प्रभु को अभी भी अंत के दिनों के अपना न्याय कार्य करने की आवश्‍यकता है? क्‍यों वे जब आए थे तभी हमें स्वर्ग के राज्य में नहीं ले गए? परमेश्‍वर के अंत के दिनों के न्याय के कार्य मानव जाति को शुद्ध करने और बचाने के लिए हैं या दंडित और नष्ट करने के लिए? बहुत से लोग इसे समझ पाने में असमर्थ हैं। इस विषय पर कृपया खास तौर से हमारे साथ सहभागिता करें।
प्रश्न 8: मानव जाति को बचाने और शुद्ध करने के लिए परमेश्‍वर अंत के दिनों का अपना न्याय कार्य कैसे करते हैं?
प्रश्न 9: हम अंत के दिनों के परमेश्‍वर के कार्य को स्वीकार करते हैं, लेकिन हम किस प्रकार परमेश्‍वर के न्याय और ताड़ना को अनुभव करें जिससे कि हम सत्य और जीवन को प्राप्त कर सकें, हमारी पापी प्रकृति से छुटकारा पा सकें, और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के लिए उद्धार प्राप्त कर सकें?

XI. सच्चे मसीह और झूठे मसीहों के बीच कैसे अंतर करें, इस पर प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: मेरा मानना है कि यदि हम प्रभु यीशु के नाम और प्रभु के मार्ग के प्रति निष्ठावान रहेंगे और झूठे मसीहों और पैगम्बरों के छलावों को स्वीकार नहीं करेंगे, यदि हम प्रतीक्षा करते हुए सावधान रहेंगे, तो अपने आगमन पर प्रभु अवश्य हमें प्रकटीकरण देंगे। स्वर्गारोहण के लिए हमें प्रभु की आवाज सुनने की जरूरत नहीं है। प्रभु यीशु ने कहा है, उस समय यदि कोई तुम से कहे, 'देखो, मसीह यहाँ है!' या 'वहाँ है!' तो विश्‍वास न करना। "क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्‍ता उठ खड़े होंगे, और बड़े चिह्न, और अद्भुत काम दिखाएँगे: कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें" (मत्ती 24:23-24)। क्या आप लोग झूठे मसीहों और झूठे पैगम्बरों के छलावों को नहीं मानते? और इसलिए, हम मानते हैं कि वे सब लोग जो प्रभु के आगमन की गवाही देते हैं निश्चित रूप से झूठे हैं। हमें खोजने या परखने की कोई जरूरत नहीं है। क्योंकि जब प्रभु आएँगे तो वे स्वयं को हम पर प्रकट करेंगे, और निश्चित रूप से वे हमें छोड़ नहीं देंगे। मेरा विश्वास है कि यह सही परिपालन है। आप सब क्या सोचते हैं?
प्रश्न 2: अभी कई देशों के धार्मिक क्षेत्रों में झूठे मसीहों द्वारा लोगों को धोखा दिए जाने के कुछ मामले सामने आए हैं। कोरिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जिनमें विवेक नहीं है, जिससे वे झूठे मसीहों का अनुसरण करके धोखा खा जाते हैं। इससे प्रभु यीशु की ये भविष्यवाणी पूरी होती है: "उस समय यदि कोई तुम से कहे, 'देखो, मसीह यहाँ है!' या 'वहाँ है!' तो विश्‍वास न करना। क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्‍ता उठ खड़े होंगे, और बड़े चिह्न, और अद्भुत काम दिखाएँगे कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें" (मत्ती 24:23-24)। मैं व्यक्तिगत तौर पर ऐसा मानता हूँ कि जहाँ कहीं भी ऐसा उपदेश दिया जाता है कि प्रभु देहधारण करके वापस आ गए हैं, वो बात निश्चित रूप से झूठी है। अगर ऐसा कहकर कोई हमें धोखा देता है तो हमें उस पर विश्वास नहीं करना चाहिए!
प्रश्न 3: आपने यह प्रमाणित किया है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर लौटकर आए प्रभु यीशु हैं और उन्होंने बहुत से वचन व्यक्त किये हैं। परन्तु दक्षिण कोरिया में कुछ लोग ऐसे हैं जो लौटकर आए प्रभु यीशु की नकल करते हैं। उन्होंने कुछ वचन भी कहे हैं और कुछ किताबें भी लिखी हैं। कुछ को अनुयायी भी मिल गए हैं। मैं सुनना चाहता हूँ कि आपका इस बारे में क्या विचार है कि इन झूठे मसीहों के वचनों में भेद कैसे किया जाए।
प्रश्न 4: अभी आपने जो संगति की है कि किस तरह लोगों को धोखा देने के लिए झूठे मसीह बाइबल की गलत व्याख्या करते हैं, संकेतों और चमत्कारों का इस्तेमाल करते हैं, मुझे इसका ये पहलू कुछ-कुछ समझ में आ रहा है। लेकिन मेरा अभी भी एक सवाल है जो मैं आपसे पूछना चाहती हूँ। कुछ झूठे मसीह दावा करते हैं कि परमेश्वर का आत्मा उन पर उतरा है। वे वापस आए प्रभु यीशु का छद्मवेष धारण करके कुछ लोगों को धोखा देते हैं। हम इसे कैसे पहचानें?

XV. फरीसियों के सार का विश्लेषण करना पर प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: धार्मिक पादरी और एल्डर ऐसे लोग हैं जो कलीसिया में परमेश्वर की सेवा करते हैं। यह कहना उचित ही है कि, जब प्रभु के वापस आने की बात आती है, तो उन्हें चौकस रहकर प्रतीक्षा करनी चाहिए, और पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। मगर क्या वजह है कि वे अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य की खोज और जांच-पड़ताल नहीं करते, इसके बजाय उनके बारे में अफवाहें गढ़ने, राय बनाते और निंदा करने में लगे रहते हैं, वे विश्वासियों को धोखा देकर सच्चे मार्ग की खोजबीन करने से रोकते हैं?
प्रश्न 2: पादरी और एल्डर अक्सर धर्मग्रंथों को पढ़ते हैं और लोगों को उपदेश देते हैं, भाई-बहनों के लिए प्रार्थना करते हैं, विश्वासियों से प्यार करते हैं और लोगों से बाइबल से जुड़े रहने का आग्रह करते हैं। अगर हम उन्हें पाखंडी फरीसी कहेंगे, तो ज़्यादातर विश्वासी ये बात समझ नहीं पायेंगे। तो कृपया हमें और विस्तार से बताइए।
प्रश्न 3: जो भी हो, सारे पादरी और एल्डर तो बाइबल के आधार पर ही उपदेश देते हैं। क्या बाइबल की व्याख्या करना और लोगों को उससे जोड़े रखना, प्रभु का गुणगान करना और उनकी गवाही देना नहीं है? क्या पादरियों और एल्डर्स का बाइबल की व्याख्या करना गलत है? आप ऐसा कैसे कह सकती हैं कि वे पाखंडी फरीसी हैं?
प्रश्न 4: धार्मिक पादरी और एल्डर्स प्रभु के वचनों को फैलाने या उनके इरादों की चर्चा करने के बजाय, अक्सर बाइबल में मनुष्य के कथनों और ख़ासकर पौलुस के कथनों को समझाते हैं। यही सच है। मैं एक बात नहीं समझ पायी, क्या पूरा बाइबल परमेश्वर से प्रेरित नहीं है? क्या बाइबल की हर बात परमेश्वर का वचन नहीं है? आप बाइबल में मनुष्य के वचनों और परमेश्वर के वचनों में इतना फ़र्क क्यों करते हैं? क्या बाइबल में मनुष्य का हर कथन परमेश्वर से प्रेरित नहीं है?
प्रश्न 5: मुझे यकीन है कि पूरी बाइबल परमेश्वर की प्रेरणा से रची गयी है! पौलुस के वचन गलत नहीं हो सकते! चूंकि आप बाइबल में परमेश्वर के वचनों और मनुष्य के कथनों में फर्क कर पाते हैं, तो फिर बताइए कोई कैसे समझे कि कौन-से वचन परमेश्वर के हैं और कौन-से मनुष्य के?
प्रश्न 6: मैं आपकी बातों से सहमत नहीं हूँ! परमेश्वर में विश्वास, बाइबल में विश्वास है। बाइबल से दूर जाना परमेश्वर में विश्वास करना नहीं है!
प्रश्न 7: ज़्यादातर विश्वासी इसे अभी भी नहीं समझ पाते हैं। वे सोचते हैं कि धर्म में परमेश्वर में विश्वास करके वे प्रभु यीशु पर विश्वास कर रहे हैं, फरीसियों और एल्डर्स पर नहीं, तो फिर उन्हें कैसे नहीं बचाया जाएगा?
प्रश्न 8: भले ही धार्मिक दुनिया पर पादरियों और एल्डर्स का शासन हो, और वे ऐसे पाखंडी हों जो फरीसियों के रास्ते पर चलते हों, उनके पापों का हमसे क्या सरोकार है? हालांकि हम उनका अनुसरण कर उनकी बात सुनते हैं, परंतु हम जिनमें विश्वास करते हैं वे प्रभु यीशु हैं, पादरी और एल्डर्स नहीं। मुझे लगता है कि हम फरीसियों के रास्ते पर नहीं चल रहे हैं। ऐसे फ़रीसी कैसे बन सकते हैं?
प्रश्न 9: मैं जानना चाहती हूँ कि अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर मानवजाति को शैतान के प्रभाव से बचाने के लिए अपना न्याय कार्य कैसे करते हैं। क्या आप हमें अपने अनुभव और गवाहियों के बारे में बता सकते हैं?
प्रश्न 10: पादरी युआन अक्सर बाइबल की व्याख्या करते हैं और हमें विनम्र, धैर्यवान तथा आज्ञाकारी बनने की शिक्षा देते हैं। वे बहुत विश्वास के साथ बात करते हैं और बाहर से बहुत धार्मिक भी लगते हैं। पादरी युआन ने सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के अंत के दिनों के कार्य की आप लोगों की गवाही भी हमारे साथ सुनी थी। वे ये भी मानते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर का वचन ही सत्य है, परंतु वो इसे स्वीकार क्यों नहीं करते? वे क्यों हर जगह अफवाहें फैला रहे हैं और परमेश्‍वर के अंत के दिनों के कार्य की निंदा और प्रतिरोध कर, लोगों को सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की ओर मुड़ने से रोक रहे हैं?
प्रश्न 11: पादरी युआन पर भी पहले सीसीपी ने उनके विश्वास के लिए अत्याचार किया था। मैंने कभी सोचा भी न था कि वे सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर का विरोध करने के लिए शैतान सीसीपी के साथ हाथ मिलायेंगे। क्या ये नीचता से परमेश्‍वर का विरोध करना नहीं हैं? ये पादरीगण और नेतागण इतने कपटी और दुर्भावनापूर्ण कैसे हो सकते हैं?
प्रश्न 12: हमारे अधिकतर भाई-बहन यह नहीं समझते हैं कि: प्रभु यीशु के आगमन से पहले, फरीसी अक्सर आराधनालयों में दूसरों के सामने बाइबल की व्याख्या करते थे; वे लोगों के सामने खड़े हो कर प्रार्थना करते थे और लोगों की निंदा करने के लिए बाइबल के नियमों का उपयोग करते थे; वे बाहर से बड़े श्रद्धालु दिखाई देते थे उन लोगों की तरह जो बाइबल से कभी विश्वासघात नहीं करेंगे, परंतु, फरीसियों को प्रभु यीशु द्वारा शाप क्यों दिया गया? उन्होंने परमेश्वर का किन तरीकों से विरोध किया? उन्होंने अपना पाखंड किस प्रकार प्रदर्शित किया? उन पर परमेश्वर का कोप क्यों पड़ा?
प्रश्न 13:बाइबल को पढ़ कर, हम सब जानते हैं कि यहूदी फरीसियों ने, प्रभु यीशु की निंदा की और उनका विरोध किया। लेकिन अधिकांश भाई-बहन अभी भी नहीं समझते हैं, कि जब प्रभु यीशु ने अपना कार्य किया, तब फरीसियों को मालूम था कि उनके वचनों में अधिकार और प्रभाव है। फिर भी, उन्होंने कट्टरपन से प्रभु यीशु का विरोध और निंदा की। उन्होंने उनको सूली पर चढ़ा दिया। उन लोगों का स्वभाव और सार-तत्व कैसा था?
प्रश्न 14: कई भाई-बहन पादरियों और एल्डर्स की दिल से आराधना करते हैं। वे यह नहीं समझते कि, भले ही पादरी और एल्डर्स अक्सर बाइबल की व्याख्या करते हैं और बाइबल को गौरवपूर्ण स्थान देते हैं, पर वे अभी भी क्यों सत्य से नफरत करते हैं और देहधारी सर्वशक्तिमान परमेश्वर का विरोध और निंदा करते हैं। बाइबल की व्याख्या करना और उसे गौरवपूर्ण स्थान देना, क्या प्रभु की गवाही देने और प्रभु की को गौरवपूर्ण स्थान देने के ही समान है?

XVII. सच्चा मार्ग उत्पीड़न के अधीन क्यों है इस पर प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: मैं यह नहीं समझ पाया कि अगर चमकती पूर्वी बिजली ही सच्चा मार्ग है, तो सीसीपी सरकार उसका इतना घोर विरोध क्यों करती? धार्मिक अगुआ भी क्यों इस कदर उसकी निंदा करते? ऐसा नहीं है कि सीसीपी की सरकार ने पादरियों और एल्डर्स पर अत्याचार न किये हों। लेकिन जब चमकती पूर्वी बिजली की बात आती है, तो परमेश्वर की सेवा करनेवाले पादरी और एल्डर, सीसीपी सरकार जैसा नज़रिया और रवैया कैसे अपना सकते हैं? भला इसकी वजह क्या है?
प्रश्न 2: अगर चमकती पूर्वी बिजली सच्चा मार्ग है, तो आप किस आधार पर इसको पक्का कर रहे हैं? हम प्रभु यीशु में इसलिए विश्वास करते हैं क्योंकि वे हमें बचा सकते हैं, लेकिन आप किस चीज़ से ये जांच रहे हैं कि चमकती पूर्वी बिजली सच्चा मार्ग है?
प्रश्न 4: सीसीपी सरकार के शासन में, लोग गिरफ़्तार हो सकते हैं, उन पर अत्याचार हो सकते हैं और सच्चे मार्ग को स्वीकार करने के लिए उन्हें मार भी दिया जा सकता है। मुझे समझ नहीं आता कि सीसीपी सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के कार्य से इतनी भयभीत क्यों है?
प्रश्न 5: मैं सोचा करती थी कि सीसीपी के दिन अब सीमित हैं और शीघ्र ही उसका पतन हो जाएगा, अगर विश्वास करने से पूर्व मैं उसके पतन की प्रतीक्षा करूं, तो क्या ढेरों मुश्किलों से मेरा बचाव नहीं हो जाएगा? लेकिन मैं अब देख रही हूं कि हमें प्रताड़ित और गिरफ़्तार करने में सीसीपी का उद्देश्य हमें नरक में भेजना है! अगर हम सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर में विश्वास करने के पूर्व सीसीपी के नष्ट होने की प्रतीक्षा करते हैं, तो भी क्या हम अंत के दिनों में परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश कर परमेश्‍वर का उद्धार पा सकेंगे? क्या हम उद्धार का हमारा अवसर खो देंगे?

XVIII. शाश्वत जीवन का मार्ग पर प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है," तो मुझे वह याद आया जो प्रभु यीशु ने एक बार कहा था, "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूँगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा; वरन् जो जल मैं उसे दूँगा, वह उसमें एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)। हम पहले से ही जानते हैं कि प्रभु यीशु जीवन के सजीव जल का स्रोत हैं, और अनन्‍त जीवन का मार्ग हैं। क्या ऐसा हो सकता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर और प्रभु यीशु समान स्रोत हों? क्या उनके कार्य और वचन दोनों पवित्र आत्मा के कार्य और वचन हैं? क्या उनका कार्य एक ही परमेश्‍वर करते हैं?
प्रश्न 2: प्रभु यीशु और सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर एक ही परमेश्‍वर हैं, लेकिन विभिन्न युगों में अलग-अलग कार्य करते हैं। प्रभु यीशु ने छुटकारे का कार्य किया और पश्चाताप का मार्ग बताया। अंत के दिनों में, सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर मानवजाति के न्याय और शुद्धिकरण का कार्य करते हैं और उन्हें अनन्‍त जीवन का मार्ग देते हैं। मेरे पास अभी भी एक सवाल है, पश्चाताप के मार्ग और अनन्‍त जीवन के मार्ग के बीच क्या अंतर है?
प्रश्न 3: आप कहते हैं कि सिर्फ़ परमेश्‍वर की इच्छा का पालन करने वाले अनन्‍त जीवन का मार्ग पाते हैं। जब हमने प्रभु में विश्वास करना शुरू किया था, तो हमने प्रभु का सुसमाचार फैलाने के लिए काफी कष्ट सहा और इसकी कीमत चुकाई। हम प्रभु के झुंड के चरवाहे बने, क्रूस उठाया और प्रभु का अनुसरण किया, हमने नम्रता, धैर्य और सहिष्णुता का पालन किया। क्या आप ये कह रहे हैं कि हम परमेश्‍वर की इच्छा का पालन नहीं कर रहे हैं? हम जानते हैं कि अगर हम इसे जारी रखते हैं, तो हम पवित्र हो जायेंगे और स्वर्ग के राज्य में स्वर्गारोहित किये जायेंगे। क्या आपका मतलब है कि प्रभु के वचनों को इस तरह समझना और उनको अमल में लाना गलत है?
प्रश्न 4: अगर हम अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के कार्य को स्‍वीकार करते हैं, तो हम कैसे अनन्‍त जीवन का मार्ग पाने की चाहत कर सकते हैं?
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