सत्य को खोजने वाले सभी लोगों का हम से सम्पर्क करने का स्वागत करते हैं

हम पौलुस के उदाहरण का अनुसरण करते हैं और हम प्रभु के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, सुसमाचार फैलाते हैं और प्रभु के लिए गवाही देते हैं, और पौलुस की तरह प्रभु की कलिसियाओं की चरवाही करते हैं: "मैं अच्छी कुश्ती लड़ चुका हूँ, मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्‍वास की रखवाली की है" (2 तीमुथियुस 4:7)। क्या यह परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना नहीं है? इस तरह से अभ्यास करने का अर्थ यह होना चाहिए कि हम स्वर्गारोहित होने और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के योग्य हैं, तो हमें स्वर्ग के राज्य में लाये जाने से पहले परमेश्वर के अंतिम दिनों के न्याय और शुद्धि के कार्य को क्यों स्वीकार करना चाहिए?
तुम कहते हो कि जो लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, उन्हें परमेश्वर के अंतिम दिनों के न्याय के कार्य को स्वीकार करना चाहिए और उसके बाद ही उनके भ्रष्ट स्वभाव शुद्ध हो सकते हैं और स्वयं वे परमेश्वर द्वारा बचाए जा सकते हैं। परन्तु हम, परमेश्वर की अपेक्षाओं के अनुसार, नम्रता और धैर्य का अभ्यास करते हैं, हमारे दुश्मनों से प्रेम करते हैं, हमारे क्रूसों को उठाते हैं, संसार की चीजों को त्याग देते हैं, और हम परमेश्वर के लिए काम करते हैं और प्रचार करते हैं, इत्यादि। तो क्या ये सभी हमारे बदलाव नहीं हैं? हमने हमेशा इस तरह से चाह की है, तो क्या हम भी शुद्धि तथा स्वर्गारोहण को प्राप्त नहीं कर सकते और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकते?
कलीसिया की सभाओं में पादरी और एल्डर अक्सर कहते हैं कि प्रभु यीशु की सूली पर कही बात "पूरा हुआ" ये साबित करती है कि मानवजाति को बचाने का कार्य पूरा हो चुका है, और यह कि सिर्फ प्रभु यीशु में विश्वास करके और उनके समक्ष अपने पापों को स्वीकार करने से ही हमारे पाप माफ़ कर दिये जाएंगे, और प्रभु आगे से हमें पापियों की तरह नहीं देखेंगे। हम केवल आस्था से ही उचित ठहराये जाते हैं और अनुग्रह से बचाये जाते हैं। प्रभु अपने वापस आने पर हमें स्वर्ग के राज्य में ले लेंगे, और संभवत: वे मानवजाति को बचाने का काम आगे बढ़ाने के लिए नहीं लौटेंगे। मुझे लगता है कि पादरी और एल्डर की यह समझ स्वीकार्य नहीं है। हाँ, आखिर प्रभु यीशु ने जब सूली पर कहा, "पूरा हुआ", तो वे किस बारे में कह रहे थे? अंत के दिनों में सत्य को व्यक्त करने, न्याय का कार्य करने और मनुष्य को शुद्ध करने के लिए परमेश्वर को वापस आने की क्या ज़रूरत है?
आपने गवाही दी कि परमेश्‍वर मनुष्य के पुत्र के रूप में पुनः देहधारी हुए हैं और परमेश्‍वर के आवास से आरंभ करते हुए अपना न्याय कार्य करते हैं। यह बाइबल की भविष्यवाणी से पूरी तरह मेल खाता है। पर मुझे एक बात समझ नहीं आई: क्या परमेश्‍वर के आवास से शुरू होने वाला न्याय वही है जो प्रकाशितवाक्‍य की पुस्तक में महान श्वेत सिंहासन के न्याय के रूप में बताया गया है? हमें यह लगता है कि महान श्वेत सिंहासन का न्याय उन अविश्वासियों पर लक्षित है जो दुष्ट शैतान से संबंध रखते हैं। जब प्रभु आएंगे, तब विश्वासियों को स्वर्ग को ले जाया जायेगा। और तब वे अविश्वासियों को नष्ट करने के लिए आपदाएं भेजेंगे। यही महान श्वेत सिंहासन के समक्ष का न्याय है। आप अंत के दिनों में परमेश्‍वर के न्याय की शुरूआत की गवाही देते हैं, पर हमने परमेश्‍वर को अविश्वासियों को नष्ट करने के लिए आपदाएं भेजते नहीं देखा है। तो यह महान श्वेत सिंहासन का न्याय कैसे हो सकता है? अंत के दिनों में परमेश्‍वर का न्याय आखिर है क्या? कृपया हमें यह बात और साफ़ तरीके से बताएं।
तुमने गवाही दी है कि परमेश्वर वापस आया है और अंतिम दिनों में परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को करता है। यह प्रकाशित वाक्य में लिखित महान श्वेत सिंहासन के न्याय से अलग लगता है। धर्म में ज्यादातर लोग यह सोचते हैंकि महान श्वेत सिंहासन का न्याय उन गैर-विश्वासियों पर लक्षित होता है जो शैतान के लोग होते हैं। जब प्रभु आएगा, तो विश्वासियों को स्वर्ग में उठा लिया जाएगा, और फिर वह गैर-विश्वासियों को नष्ट करने के लिए विपत्ति को भेजेगा। यह महान श्वेत सिंहासन के सामने होने वाला न्याय है। तुम अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय की शुरुआत की गवाही देते हो, लेकिन हमने परमेश्वर को गैर-विश्वासियों को नष्ट करने के लिए विपत्ति लाते हुए नहीं देखा है। तो फिर यह कैसे महान श्वेत सिंहासन का न्याय हो सकता है?
तुम यह गवाही देते हो कि परमेश्वर ने सत्य को व्यक्त करने के लिए और आखिरी दिनों में मनुष्य के न्याय और शुद्धि के कार्य को करने के लिए वापस देहधारण किया है, लेकिन धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का विश्वास है कि परमेश्वर बादलों के साथ वापस लौटेगा, और जो लोग प्रभु में विश्वास करते हैं, वे एक पल में रूपांतरित हो जाएँगे और बादलों में परमेश्वर के साथ मिलने के लिए स्वर्गारोहित होंगे, जैसा कि पौलुस ने कहा था: "पर हमारा स्वदेश स्वर्ग पर है; और हम एक उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के वहाँ से आने की बाट जोह रहे हैं। वह अपनी शक्‍ति के उस प्रभाव के अनुसार जिसके द्वारा वह सब वस्तुओं को अपने वश में कर सकता है, हमारी दीन-हीन देह का रूप बदलकर, अपनी महिमा की देह के अनुकूल बना देगा" (फिलिप्पियों 3:20-21)। परमेश्वर सर्वशक्तिमान है और ऐसा कुछ भी नहीं है जो वह नहीं कर सकता है। परमेश्वर हमें बदल देगा और हमें पवित्र बना देगा, वह सिर्फ एक ही वचन के साथ इसे प्राप्त कर लेगा। तो फिर उसे सत्य व्यक्त करने और मनुष्य के न्याय और शुद्धि के कार्य के एक चरण को पूरा करने के लिए अब भी देह बनने की आवश्यकता क्यों है?