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हमने प्रभु में इतने वर्षों से विश्वास किया है। हालांकि हम प्रभु के लिए प्रवचन दे सकते हैं, कार्य कर सकते हैं, और कष्ट सह सकते हैं, फिर भी हम सदा झूठ बोल सकते हैं, छल कर सकते हैं और धोखा दे सकते हैं। हर दिन, हम अपने बचाव में बोलते हैं। अक्सर, हम घमंडी, हठी, दिखावटी होते हैं तथा दूसरों को नीचा दिखाते रहते हैं। हम देह के बंधन से छूटने में नाकाम, पाप और पश्चाताप की स्थिति में जीते हैं। प्रभु के वचन का अनुभव करना और पालन करना तो दूर, सदा से हम इसी स्थिति में रहे हैं। हमने प्रभु के वचन की किसी भी वास्तविकता को कभी नहीं जिया। हमारी स्थिति में, क्या हम स्वर्ग के राज्य में लाये भी जा सकेंगे?कुछ लोग कहते हैं, हम पाप जैसे भी करें, देह के बंधन में कैसे भी फंसे रहें, प्रभु हमें पापरहित ही देखते हैं। वे पौलुस के कथन के अनुसार चलते हैं: "और यह क्षण भर में, पलक मारते ही अन्तिम तुरही फूँकते ही होगा। क्योंकि तुरही फूँकी जाएगी और मुर्दे अविनाशी दशा में उठाए जाएँगे, और हम बदल जाएँगे" (1 कुरिन्थियों 15:52)। और मान लेते हैं कि जब प्रभु आएंगे, तो वे उसी क्षण हमारी छवि बदल देंगे और हमें स्वर्ग के राज्य में ले आएंगे। कुछ लोग इस तर्क को स्वीकार नहीं कर सकते। वे मानते हैं कि जो लोग विश्वास के कारण उद्धार प्राप्त करते हैं, लेकिन फिर भी निरंतर पाप करते रहते हैं, वे स्वर्ग के राज्य में प्रवेश पाने के योग्य नहीं हैं। यह मुख्य रूप से प्रभु यीशु के वचन पर आधारित है: "जो मुझ से, 'हे प्रभु! हे प्रभु!' कहता है, उनमें से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है" (मत्ती 7:21)। "…इसलिये तुम पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ" (लैव्यव्यवस्था 11:45)। ये दो परस्पर विरोधी विचार हैं, जो कोई भी स्पष्ट रूप से नहीं कह सकता, कृपया हमारे लिए चर्चा करें।
इतने वर्षों से प्रभु में विश्वास कर के, हमने सदा यह अनुभव किया है कि, जब तक कोई विनम्रता और सहनशीलता अपना कर भाइयों और बहनों से प्रेम करता है, और प्रभु के लिए व्यय और मेहनत करके पौलुस के उदाहरण का अनुसरण कर सकता है, वह प्रभु के मार्ग का अनुसरण कर रहा है, और प्रभु के लौटने पर वह स्वर्ग के राज्य में आरोहित होगा। जैसा पौलुस ने कहा था, "मैं अच्छी कुश्ती लड़ चुका हूँ, मैंने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैंने विश्वास की रखवाली की है। भविष्य में मेरे लिए धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है…" (2 तीमुथियुस 4:7-8)। लेकिन आप सबने गवाही दी है कि जब हम प्रभु में विश्वास करते हैं, तो हमें सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के न्याय कार्य को ग्रहण करना होगा। जब हम शुद्धिकरण प्राप्त करेंगे, तब परमेश्वर हमें प्रशस्‍त करेंगे और हम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश पायेंगे। मेरा एक प्रश्न है: हम इतने वर्षों से प्रभु में विश्वास करते रहे हैं, और हम प्रभु के लिए व्यय और मेहनत करते रहे हैं; क्या हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के न्याय कार्य को ग्रहण किये बिना स्वर्ग के राज्य में प्रवेश पा सकते हैं?
हमने इतने वर्षों तक प्रभु पर विश्वास किया है, और हमने उनका नाम बनाए रखा है। हम अक्सर बाइबल पढ़ते हैं, प्रार्थना करते हैं और अपने पापों को प्रभु के सामने स्वीकार करते हैं; हम दूसरों के प्रति विनीत, धैर्यवान और अनुरागशील हैं। हम अक्सर प्रभु के लिए कार्य करने के लिए परोपकार करते हैं, दान करते हैं और सब कुछ बलिदान कर देते हैं और उनकी गवाही देने के लिए सुसमाचार फैलाते हैं। क्या हम प्रभु के वचनों का अभ्यास नहीं कर रहे हैं और उनके मार्ग का अनुसरण नहीं कर रहे हैं? आप कैसे कह सकती हैं कि हमें कभी प्रभु में विश्वास नहीं था या हम अविश्वासी हैं? बाइबल में, पौलुस ने कहा है, "मैं अच्छी कुश्ती लड़ चुका हूँ, मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्‍वास की रखवाली की है। भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है…" (2 तीमुथियुस 4:7-8)। इसलिए, मुझे लगता है कि प्रभु में हमारा विश्वास उनकी प्रशंसा प्राप्त करेगा। जब प्रभु आएंगे, तो वे निश्चित रूप से हमारा स्वर्ग के राज्य में आरोहण करेंगे।
कि प्रभु यीशु ने हमारे लिए सलीब पर जान दी, उन्होंने हमें पापों से छुड़ाया, और हमारे पापों को क्षमा किया, भले ही हमारा पाप करना जारी है और हमारा अभी शुद्ध होना बाकी है, प्रभु ने हमारे सभी पापों को क्षमा कर हमारी आस्था के ज़रिये हमें न्यायपूर्ण बना दिया है। मुझे लगा कि प्रभु के लिये सबकुछ त्याग करने, यातना सहन करने और कीमत अदा करने की हमारी इच्छा, हमें स्वर्ग के राज्य में प्रवेश दिलाएगी। मुझे लगा, हमारे लिये यही प्रभु की प्रतिज्ञा है। लेकिन कुछ लोगो ने इस पर सवाल उठाया है। उनके अनुसार, चाहे हमने प्रभु के लिए श्रम किया, हम अभी भी पाप करके उन्हें स्वीकार करते हैं, इसलिए हम अभी तक अशुद्ध हैं। उनके अनुसार प्रभु पवित्र हैं, इसलिए अपवित्र लोग उनसे नहीं मिल सकते। मेरा सवाल है: हम लोगों ने प्रभु के लिए अपना सब-कुछ बलिदान कर दिया, क्या हमें स्वर्ग के राज्य में ले जाया जा सकता है? दरअसल हमें इस सवाल का उत्तर नहीं पता, इसलिए हम चाहते हैं कि आप हमें इस बारे में बताएँ।
हम सभी ने कई वर्षों तक प्रभु में विश्वास किया है, और प्रभु के लिए अपने कार्य में हमेशा पौलुस के उदाहरण का पालन किया है। हम प्रभु के नाम और उनके मार्ग के प्रति निष्ठावान रहे हैं, और धार्मिकता का ताज निश्चय ही हमारी प्रतीक्षा कर रहा है। आज, हमें केवल प्रभु के लिए कड़ी मेहनत करने और उनकी वापसी की ओर देखने की आवश्यकता है। केवल इस प्रकार से ही हमें स्वर्ग का राज्य में ले जाया जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बाइबल में ऐसा कहा गया है कि "मेरी बाट जोहनेवाले कभी लज्जित न होंगे" (यशायाह 49:23)। हमें प्रभु के वादे में विश्वास है: वे अपने लौटने पर हमें स्वर्ग का राज्य में ले जाएँगे। क्या इस ढंग से कार्य-अभ्यास करने में वास्तव में कुछ गलत हो सकता है?