हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!

1 परमेश्‍वर में अपना विश्वास रखते हुए और उनका अनुसरण करते हुए, हम शाश्‍वत जीवन प्राप्त कर सकते हैं। परमेश्‍वर के वचन इस बात का समर्थन करते हैं: प्रभु यीशु ने कहा था: "मैं ही पुनरुज्जीवन, और जीवन हूँ: जो कोई भी मुझमें विश्वास करता है, चाहे उसकी मृत्यु क्यों न हो जाएं, वह जीवित रहेगा: और जो कोई भी मुझमें जीता और विश्वास करता है, वह कभी नहीं मरता है" (यूहन्ना 11:25-26)। "परंतु जो कोई भी मेरे द्वारा दिए गये जल को पीता है, उसे प्यास फिर कभी नहीं सताएगी; परंतु जो पानी मैं उसे दूँगा वह उसमें एक कुएं का निर्माण करेगी जिससे उसे चिरस्थायी जीवन प्राप्त होगा" (यूहन्ना 4:14)। ये अंश प्रभु यीशु के वादे हैं। प्रभु यीशु हमें शाश्‍वत जीवन प्रदान कर सकते हैं, प्रभु यीशु का मार्ग शाश्‍वत जीवन का मार्ग है। बाइबल कहती है, "वह जो पुत्र पर विश्वास करता है, वह शाश्वत जीवन प्राप्त करता है: और जो पुत्र पर विश्वास नहीं करता है, उसे जीवन का प्रकाश नहीं दिखेगा; बल्कि उसे परमेश्वर का क्रोध झेलना पड़ेगा" (यूहन्ना 3:36)। क्‍या प्रभु यीशु मनुष्य का पुत्र नहीं हैं, क्या वह मसीह नहीं है? प्रभु यीशु में विश्वास करके, हमें, इस प्रकार, शाश्‍वत जीवन का मार्ग भी मिलना चाहिए। लेकिन आप लोग इस बात की गवाही देते हैं कि अंतिम दिनों में मसीह के आसन के समक्ष न्‍याय और शुद्धिकरण का अनुभव कर सकें, और अंतिम दिनों में परमेश्‍वर से उद्धार प्राप्‍त कर सकें। हमारे लिये शाश्वत जीवन का मार्ग लाएँगे। मैं यह बिल्कुल नहीं समझ पा रहा हूँ, कि हम सभी प्रभु यीशु मसीह के अनुयायी हैं। यह शाश्‍वत जीवन के मार्ग को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त क्यों नहीं है? तो हमें अंतिम दिनों के मसीह के वचनों और कार्य को क्यों स्वीकार करना है?
2 सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "केवल अंत के दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है," तो मुझे वह याद आया जो प्रभु यीशु ने एक बार कहा था, "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूँगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा; वरन् जो जल मैं उसे दूँगा, वह उसमें एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)। हम पहले से ही जानते हैं कि प्रभु यीशु जीवन के सजीव जल का स्रोत हैं, और अनन्‍त जीवन का मार्ग हैं। क्या ऐसा हो सकता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर और प्रभु यीशु समान स्रोत हों? क्या उनके कार्य और वचन दोनों पवित्र आत्मा के कार्य और वचन हैं? क्या उनका कार्य एक ही परमेश्‍वर करते हैं?
4 आप कहते हैं कि सिर्फ़ परमेश्‍वर की इच्छा का पालन करने वाले अनन्‍त जीवन का मार्ग पाते हैं। जब हमने प्रभु में विश्वास करना शुरू किया था, तो हमने प्रभु का सुसमाचार फैलाने के लिए काफी कष्ट सहा और इसकी कीमत चुकाई। हम प्रभु के झुंड के चरवाहे बने, क्रूस उठाया और प्रभु का अनुसरण किया, हमने नम्रता, धैर्य और सहिष्णुता का पालन किया। क्या आप ये कह रहे हैं कि हम परमेश्‍वर की इच्छा का पालन नहीं कर रहे हैं? हम जानते हैं कि अगर हम इसे जारी रखते हैं, तो हम पवित्र हो जायेंगे और स्वर्ग के राज्य में स्वर्गारोहित किये जायेंगे। क्या आपका मतलब है कि प्रभु के वचनों को इस तरह समझना और उनको अमल में लाना गलत है?
8 प्रभु यीशु ने कहा था, "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूँगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा; वरन् जो जल मैं उसे दूँगा, वह उसमें एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)। बाइबल भी ऐसा ही कहती है: "जो पुत्र पर विश्‍वास करता है, अनन्त जीवन उसका है; परन्तु जो पुत्र की नहीं मानता, वह जीवन को नहीं देखेगा, परन्तु परमेश्‍वर का क्रोध उस पर रहता है" (यूहन्ना 3:36)। हम मानते हैं कि प्रभु यीशु मसीह है, मनुष्य का पुत्र, और यह कि प्रभु यीशु का मार्ग अनंत जीवन का मार्ग है। हम मानते हैं कि जब तक हम प्रभु में विश्वास करते रहें, हम अनन्त जीवन पाने में सक्षम होंगे। परन्तु आप यह गवाही देते हैं कि केवल अंतिम दिनों का मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर, मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग प्रदान कर सकता है। क्या आप यह कह रहे हैं कि यदि हम प्रभु यीशु का अनुसरण करते हैं, तो हम अनंत जीवन का मार्ग प्राप्त करने में सक्षम नहीं होंगे? हमें अंतिम दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर, के वचनों और कार्यों को स्वीकार करने की आवश्यकता क्यों है?