सत्य को खोजने वाले सभी लोगों का हम से सम्पर्क करने का स्वागत करते हैं

प्रश्न 41: हमने चीनी कम्युनिस्ट सरकार और धार्मिक दुनिया के कई भाषण ऑनलाइन देखे हैं जो सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की बदनामी और झूठी निंदा करते हैं, उन पर आक्षेप और कलंक लगाते हैं (जैसे कि झाओयुआन, शेडोंग प्रांत की "28 मई" वाली घटना)। हम यह भी जानते हैं कि सीसीपी लोगों से झूठ और गलत बातें कहने में, और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर लोगों को धोखा देने में माहिर है, साथ ही साथ उन देशों का जिनके यह विरोध में है, उनका अपमान करने, उन पर हमला करने और उन की आलोचना करने में भी माहिर है, इसलिए सीसीपी के कहे गए किसी भी शब्द पर बिल्कुल विश्वास नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों के द्वारा कही गई कई बातें सीसीपी के शब्दों से मेल खाती हैं, तो फिर हमें सीसीपी और धार्मिक दुनिया से आने वाले निन्दापूर्ण, अपमानजनक शब्दों को कैसे परखना चाहिए?

2018-03-20 83

उत्तर:

शैतान की बुरी ताकतें परमेश्वर के कार्य की आलोचना करते हुए इस बुरी तरह से परमेश्वर के कार्य पर हमला क्यों करती हैं? क्यों बड़े लाल अजगर की बुरी ताकतें उन्मत्त होकर परमेश्वर पर हमला और उसकी निंदा कर रही हैं, और परमेश्वर की कलीसिया को उत्पीड़ित कर रही हैं? क्यों शैतान की सभी बुरी ताकतें, धार्मिक मंडलियों के अंदर मसीह-विरोधी बिरादरी सहित, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की निंदा करती हैं? ऐसा इसलिए है क्योंकि शैतान जानता है कि इसका अंत निकट है, कि परमेश्वर पहले से ही अपने राज्य को सुरक्षित कर चुका है और वह पृथ्वी पर आ गया है, और यह कि अगर शैतान परमेश्वर के साथ एक निर्णायक लड़ाई में नहीं जुटता है तो वह तुरंत नष्ट हो जाएगा। क्या तुमने इस तथ्य को समझा है? चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार से सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य की उन्मादी निंदा को सुनते ही, कई भ्रमित लोग सोचते हैं कि शायद यह सही रास्ता नहीं है; एक बार जब उन्होंने धार्मिक मंडलियों के पादरियों और एल्डरों से व्यापक निंदा देख ली है, तो वे सोचते हैं कि यकीनन यह सही रास्ता नहीं है। ये लोग किस तरह से भ्रमित हैं? क्या वे दुनिया के अंधेरे और बुरे सार को देख सकते हैं? बाइबल कहती है, "ज्योति अन्धकार में चमकती है, और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया" (यूहन्ना 1:5)। क्या वे वास्तव में इन शब्दों को समझते हैं? "सारा संसार उस दुष्‍ट के वश में पड़ा है" (1 यूहन्ना 5:19)। क्या वे इन शब्दों का सही अर्थ जान सकते हैं? वे कुछ भी साफ़-साफ़ समझने में असमर्थ हैं। वे सोचते हैं कि यदि यह सही रास्ता हो, अगर परमेश्वर आ गया है, तो चीनी सरकार को इसका स्वागत करना चाहिए, धार्मिक मंडली को इसका स्वागत करना चाहिए, और तभी यह सही मार्ग होगा। यह किस तरह का तर्क है? क्या यह शैतान का तर्क नहीं है? जब कुछ लोग परमेश्वर के कार्य की जाँच-पड़ताल करते हैं, तो वे पहले देखते हैं कि क्या विश्व सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया, चमकती पूर्वी बिजली का स्वागत करता है और क्या वह उससे सहमत है या नहीं, क्या धार्मिक मंडली इसका स्वागत करती है और इसके साथ सहमत है या नहीं। "अगर विश्व इसका स्वागत करता है, और विशेषकर, अगर चीनी कम्युनिस्ट सरकार यह घोषित करती है कि यही सही मार्ग है, तभी हम इसमें विश्वास कर सकते हैं। यदि धार्मिक मंडली के सभी पादरी और एल्डर कहते हैं कि यही सच्चा मार्ग है, यह प्रभु यीशु की वापसी है, तभी हम इसे स्वीकार कर सकते हैं।" इस तरह के कई भ्रमित लोग हैं। कुछ लोग, जैसे ही परमेश्वर के लिए खुद को खपाना चाहते हैं, बड़ा लाल अजगर और शैतान यह कहते हुए उनकी परीक्षा लेने आ जाते हैं: "सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया लोगों का अपहरण करती है। यदि तुम सर्वशक्तिमान परमेश्वर पर विश्वास करते हो, तो तुम छोड़ कर जा नहीं पाओगे, अन्यथा वे तुम्हारी आँखें निकाल लेंगे, तुम्हारे कान काट लेंगे, और तुम्हारी टाँगें तोड़ देंगे।" मुझे बताओ, अगर वास्तव में यह बात है, तो इस दुनिया में कितने लोगों की पहले से ही आँखें निकाल दी गई होंगी और उनके कान कट चुके होंगे? क्या तुमने ऐसा एक मामला भी देखा है? मुझे बताओ, परमेश्वर के लिए जिन लोगों ने खुद को खपाया है, क्या तुमने उनमें से किसी एक व्यक्ति को भी देखा है जिसका अपहरण कर लिया गया हो, जिसे परमेश्वर के लिए काम आने के लिए मजबूर किया गया था क्योंकि अन्यथा वे नहीं लौट पाएंगे? यदि उनका वास्तव में अपहरण हुआ था, तो क्या उनका काम और उनका प्रचार प्रभावी होगा? एक बार जब कोई सुलझे दिमाग वाला व्यक्ति इस मामले पर विचार करता है, तो वह इस निष्कर्ष पर आ जाएगा कि: "मामला यही है, यह सीसीपी द्वारा गढ़ी गई अफवाह है, यह सीसीपी द्वारा कहा गया एक झूठ है। दुष्ट शैतान वास्तव में अफवाहों को फैलाने में निपुण है, मैं सच्चाई को कैसे नहीं देख पाया?" कुछ लोग बड़े लाल अजगर की इन बातों पर विश्वास नहीं करते हैं, जबकि अन्य लोग भयभीत होते हैं। एक बार जब वे यह सुनते हैं, तो वे परमेश्वर के लिए खुद को खपाने की और हिम्मत नहीं करते। "मैं खुद को समर्पित नहीं कर सकता। यह खतरनाक है, मैं अपना जीवन खो सकता हूँ!" और वे छोड़ जाते हैं। क्या इन लोगों में समझने की क्षमता है? उनमें ऐसी क्षमता नहीं है; उनमें समझ की कमी है। कुछ लोग यह भी कहते हैं: "मैं देखता हूँ कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन परमेश्वर के वचन हैं, परमेश्वर की वाणी हैं। मैंने मूल रूप से यह निर्धारित किया है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन सच्चे हैं, लेकिन यह संगठन, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया, क्या है? मैंने अभी तक इसकी अच्छी तरह से जाँच नहीं की है। मुझे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की कोई समझ नहीं है। क्या वे वास्तव में लोगों का अपहरण करने में सक्षम हैं? अगर वे मेरा अपहरण करें, तो क्या वे मेरी आँखों को निकाल लेने और मेरे कानों को काट लेने में सक्षम हैं?" यहीं आकर वे भ्रमित हो जाते हैं। वे कहते हैं: "मैं उनके साथ नहीं जा सकता। अगर उन्होंने मेरी आँखों को निकाल लिया और मेरे कान काट लिये, तो मैं अपने बाकी जीवन के लिए अपाहिज हो जाऊँगा। मेरे लिए अभी भी सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पर एक प्रश्न-चिह्न लगा हुआ है, मैं इसे नहीं समझ पाता। हालांकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों के बारे में, मैंने मूल रूप से उन्हें सच मान लिया है। वे परमेश्वर की ही वाणी हैं, उनमें सच्चाई है।" वे अपनी परीक्षा में बहुत सावधान हैं: सबसे पहले, वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों की जांच करते हैं और देखते हैं कि क्या वे परमेश्वर के वचन हैं। अगर उन्होंने स्वीकार कर लिया कि ये वास्तव में परमेश्वर के वचन हैं, तो वे आगे इसकी जाँच करते हैं कि क्या सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया एक वास्तविक कलीसिया है। वे सोचते हैं: अगर सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया एक आपराधिक संगठन हो, जबकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन वास्तविक हैं, तो क्या वह फिर भी उनके लिए एक समस्या खड़ी नहीं करता है? क्या यह संभव है? यदि यह बात सही हो, तो सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया एक वास्तविक कलीसिया नहीं है। अगर चीजें ऐसी हों जैसी कि उन्होंने कल्पना की है, अर्थात सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया जो परमेश्वर के वचनों का प्रचार कर रही है और सर्वशक्तिमान परमेश्वर के लिए गवाही दे रही है, ऐसे लोगों का एक संगठन है, जो परमेश्वर के नहीं हैं, तो क्या सर्वशक्तिमान परमेश्वर का कार्य सिर्फ एक ढकोसला नहीं है? तो फिर वे लोग कौन हैं जो परमेश्वर के वचनों का प्रचार कर रहे हैं और उनकी गवाही दे रहे हैं? वे कौन हैं जो सर्वशक्तिमान परमेश्वर के लिए गवाही दे रहे हैं? परमेश्वर कैसे एक आपराधिक संगठन के लोगों को, मनुष्यों के एक संगठन के लोगों को, उसकी स्तुति करने और उसके लिए गवाही देने की इजाजत दे सकता है? क्या यह परमेश्वर का अपमान नहीं है? क्या परमेश्वर खुद को अपमानित कर सकता है? कुछ लोग इस मामले के आर-पार देखने में असमर्थ हैं। उन्होंने परमेश्वर के वचनों को स्वीकार किया है, फिर भी वे यह स्पष्ट रूप से नहीं देख पा रहे हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया वास्तव में किस प्रकार की कलीसिया है, और वे इसमें विश्वास करने की हिम्मत नहीं करते। वे सोच रहे हैं: "मैं तुम लोगों के संपर्क में आना नहीं चाहता हूँ। अगर तुम्हारी कलीसिया के लोग मेरा अपहरण कर लेते हैं, तो मैं क्या करूँगा?" ये लोग उन संतों के साथ तुलना के करीब नहीं आ सकते हैं, जिन्होंने सदियों से प्रभु के लिए खुद को शहीद किया है। जब प्रभु यीशु ने उन्हें प्रचार करने के लिए भेजा था, तो ऐसा लगता था कि भेड़ियों के बीच मेमनों को फेंक दिया गया था, फिर भी उन लोगों ने परमेश्वर के लिए खुद को शहीद करने की हिम्मत की। अब ये लोग साफ तौर पर जानते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन सत्य हैं और परमेश्वर की वाणी हैं, लेकिन वे डरपोक और भयभीत हो गए हैं। वे अफवाहों की वजह से सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के संपर्क में नहीं आना चाहते। क्या परमेश्वर इससे निराश नहीं है? लोगों में विश्वास की कमी है और वे शैतान की बात सुनते हैं और उसी पर विश्वास करते हैं, यह मनुष्य की एक त्रासदी है।

आदम और हव्वा अदन की वाटिका में बहुत खुश थे, परमेश्वर के प्रति आज्ञापालन करते हुए और परमेश्वर की वाणी सुनते हुए, लेकिन आखिर में उनके पाप करने का कारण क्या बना? परमेश्वर द्वारा उनसे बात करने के बाद, शैतान ने उनको प्रलोभित करने के लिए कुछ शब्द कहे, और वे धोखा खा गए, वे पाप कर गए। वे तुरंत परमेश्वर से कट गए, परमेश्वर ने उनसे और बात नहीं की, परमेश्वर ने अपने चेहरे को उनसे छिपा लिया। क्या यह मनुष्य के लिए त्रासदी नहीं है? सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को सुनने के बाद, कई लोगों ने कहा, "ओह, यह वास्तव में परमेश्वर की वाणी है, यह वास्तव में सत्य है। ये वचन इतने व्यावहारिक हैं, प्रभु यीशु के कार्य के चरण के दौरान इतने सारे वचन नहीं कहे गए थे।" एकाएक, ऐसा लगता था जैसे वे एक बार फिर परमेश्वर के आलिंगन में वापस आ गए हों, उन्होंने आनंदित और संतुष्ट महसूस किया। किसने सोचा होगा कि इसी क्षण में शैतान का प्रलोभन आ जाएगा: "क्या तुमने चमकती पूर्वी बिजली के बारे में सुना है? यह एक आपराधिक संगठन है। यदि तुम उनके द्वारा प्रचारित सुसमाचार पर विश्वास नहीं करते हो, तो वे तुम्हारी आँखें निकाल लेंगे और तुम्हारे कान काट लेंगे। वे भयावह हैं! इसलिए, अगर तुम उनके संपर्क में आते हो, तो तुमको सावधान रहना चाहिए, और तुमको कभी भी उनकी धोखाधड़ी का शिकार नहीं होना चाहिए।" शैतान के इस प्रलोभन से, ये लोग फँस गए और उसके काबू में आ गए। वे अब परमेश्वर के लिए खुद को खपाने की हिम्मत नहीं करते। इसे कहते हैं "अपने संपूर्ण जीवन में चतुर रहना, लेकिन मूर्खता के एक क्षण में बर्बाद हो जाना।" वे यह नहीं सोचते कि क्या पूरी मुख्यभूमि चीन में एक भी व्यक्ति ऐसा है जिसकी आँखें निकाल ली गयी हैं और जिसके कान काट दिए गए हैं? पूरे ताइवान में ऐसा एक भी मामला नहीं है। अगर ऐसा एक भी मामला हो, तो क्या सीसीपी इसे ऐसे ही जाने देती? उसने समस्त मीडिया को पूरी दुनिया में इसकी घोषणा करने के लिए नियुक्त कर दिया होता, यहाँ तक कि इस तरह की घटनाओं का प्रचार करने के लिए अपना हर हथकंडा अपना लिया होता। लेकिन ऐसा एक भी मामला नहीं मिल सकता है, यह सब कोरी बकवास है। सीसीपी इस तरह के काम करने का कोई भी मौक़ा नहीं गंवाती है, फिर भी शैतान द्वारा प्रलोभित लोगों को सीसीपी की असली पहचान का पता नहीं है कि असल में सच्चाई क्या है। वे इतने वर्षों में सीसीपी द्वारा किए गए सभी पापों, उसके किये सभी बुरे कर्मों के आर-पार नहीं देख पा रहे हैं। सीसीपी मीडिया ने जितना भी कहा है, उसमें लेशमात्र भी सच्चाई नहीं है, फिर भी ये लोग इसकी असलियत को नहीं समझ पा रहे हैं।

— जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति से उद्धृत

सीसीपी की सरकार चमकती पूर्वी बिजली को एक दुष्ट कुपंथ घोषित कर चुकी है।

सीसीपी एक नास्तिक पार्टी है। यह परमेश्वर का विरोध करती है और किसी भी दूसरे से कहीं ज़्यादा सत्य से नफ़रत करती है। उसने सच्चे परमेश्वर में विश्वास करनेवाली सभी कलीसियाओं और मंडलियों को दुष्ट पंथ मान लिया है और खुले आम ऐलान किया है कि बाइबल एक बुरी कुपंथी पुस्तक है। ये एक मानी हुई सच्चाई है। क्या तुम्हें नहीं पता? इसके अलावा, इतने बरसों से प्रभु यीशु में विश्वास करके क्या हमने जबरदस्त अत्याचार नहीं सहे हैं क्या उन लोगों ने बहुत-से प्रचारकों और ईसाइयों को जेल की सजा देकर और अत्याचार करके मौत के घाट नहीं उतार दिया है? तुम अभी भी सीसीपी सरकार की अफवाहों को कैसे सुन सकती हो? जब कुपंथों और अच्छे धर्मों के बीच फर्क करने की बात उठती है, तो किसी एक इंसान या राजनीतिक पार्टी की इच्छा के अनुसार यह फर्क नहीं किया जा सकता, और इतना ही नहीं, यह किसी एक देश या उसके राष्ट्रीय संविधान द्वारा भी तय नहीं किया जा सकता। एक अच्छे धर्म को मानवजाति के लाभ की एक सकारात्मक चीज़ के रूप में समझा जाता है। कुपंथों को नकारात्मक माना जाता है, जो मानवजाति को भ्रष्ट कर देते हैं। अगर किसी को यह तय करना हो कि कोई कलीसिया एक अच्छे धर्म से जुड़ी है या कुपंथ से, तो इस आधार पर करना होगा कि यह सकारात्मक है या नकारात्मक। परमेश्वर से उपजी और उनके कार्य से गठित हुई कलीसियाएं अच्छे धर्म से जुड़ी होती हैं। शैतान और दुष्ट शक्तियों से उपजे तमाम लोगों को कुपंथ से जुड़ा माना जाता है। सीसीपी की सरकार को एक शैतानी शासन माना जाता है, जो परमेश्वर का सबसे ज़्यादा विरोध करती है और सत्य से नफ़रत करती है। असल में सीसीपी सही मायनों में दुष्ट कुपंथ है। उन्हें परमेश्वर में आस्था के बारे में कुछ कहने का कोई हक़ नहीं है, और यही नहीं, वे धार्मिक आस्थाओंवाली किसी भी कलीसिया या मंडली की निंदा करने के काबिल नहीं हैं।

चमकती पूर्वी बिजली पर सीसीपी के शैतानी शासन की सख्त कार्रवाई बहुत भयंकर है, हद से ज़्यादा बेरहम। ये बात यह दिखने के लिए काफी है कि सीसीपी सत्य से सबसे ज़्यादा डरती है और परमेश्वर से सबसे अधिक घृणा करती है। इन बरसों में सीसीपी के शासन ने चीन की गृह कलीसियाओं और भूमिगत कलीसियाओं की लगातार निंदा की है, उन पर अत्याचार किया है और उनको खदेड़ा है। क्या हम इस वजह से इस बात को नकार सकते हैं कि प्रभु यीशु सच्चे परमेश्वर और सच्चे मार्ग हैं? तुमने परमेश्वर में कई बरसों से विश्वास किया है। क्या तुम ये सब नहीं समझ सकती? सीसीपी ने हमेशा सत्य को तोड़ा-मरोड़ा है और सही-गलत को उलट-पुलट दिया है। यह राक्षसी शैतान का सार है। क्या अभी भी तुम अच्छे धर्म और दुष्ट कुपंथ में फर्क नहीं कर सकती? सच्चे परमेश्वर में विश्वास करनेवाली सभी कलीसियाएं अच्छे धर्म से जुड़ी हैं। झूठे परमेश्वरों, दुष्ट आत्माओं या राक्षसी शैतान में विश्वास करनेवाले सभी लोग दुष्ट कुपंथों से जुड़े हुए हैं। परमेश्वर को नकारनेवाली और परमेश्वर का विरोध करनेवाली नास्तिकता और विकास जैसी धर्मद्रोही ताकतों की पैरवी करनेवाले, सभी लोग दुष्ट कुपंथों से जुड़े हैं। आजकल अगर सबसे भयंकर निंदा और सबसे कड़ी कार्रवाई किसी के खिलाफ हो रही है तो वो है चमकती पूर्वी बिजली। पूरी दुनिया इस बात को साफ़-साफ़ समझ सकती है। अगर लोग वाकई फर्क कर पाते, तो वे समझ लेते कि यह शैतानी शासन किस चीज़ का सबसे ज़्यादा विरोध और किससे सबसे ज़्यादा घृणा करता है, और पक्के तौर पर उन्हें पता चल सकता है कि सच्चा मार्ग कौन-सा है। सीसीपी सत्य से सबसे ज़्यादा घृणा करती है और लोगों के सत्य को स्वीकार करने से सबसे ज़्यादा डरती है। यही वजह है कि वह परमेश्वर का इतना भयंकर विरोध कर रही है। अंत के दिनों में, सिर्फ सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही मानवजाति को बचाने के लिए सत्य व्यक्त कर रहे हैं, सिर्फ सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही मानवजाति को शुद्ध करने और बचाने का कार्य कर रहे हैं। क्या ये सच नहीं है? इस तरह से हम समझ सकते हैं कि सीसीपी किस वजह से सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया से सबसे ज़्यादा नफ़रत करती है और परमेश्वर का सबसे ज़्यादा विरोध करती है। प्रभु के प्रकटन का इंतज़ार कर रहे सभी लोगों को अपनी आँखें खोल कर देखना चाहिए कि भला वे कौन हैं जो अंत के दिनों में न्याय का कार्य कर रहे हैं।

— "राज्य के सुसमाचार पर विशिष्ट प्रश्न और उत्तर संकलन" से उद्धृत

क्या मनुष्य के लिए सत्य को प्राप्त करना सरल है? यदि तुम देखते हो कि कोई व्यक्ति अपने साथ घटित किसी घटना को नहीं समझ पाता है, तो यह इसलिए होता है क्योंकि उसके पास सत्य नहीं है। यदि कोई व्यक्ति अपने साथ जो कुछ भी होता है उसे समझने में सक्षम है, यदि उसका परमेश्वर का अनुसरण और उपासना करना किसी भी बात से प्रभावित नहीं होता है, तो उसके पास सत्य है। तुम्हारे साथ कोई छोटी-सी बात हो जाने पर यदि तुम निष्क्रिय हो जाते हो, अवधारणाएँ रखते हो, परमेश्वर पर संदेह करते हो, या परमेश्वर के साथ विश्वासघात करते हो, तो तुम्हारे पास सत्य नहीं है। तुम्हारे साथ घटित होने वाली किसी भी चीज़ को समझने में तुम सक्षम नहीं होगे, क्योंकि तुम अंधे हो और परमेश्वर के बारे में कुछ नहीं जानते हो। जो लोग परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे बहुत अधिक परेशानियों में होते हैं, है ना? जो लोग परमेश्वर को नहीं जानते हैं, उनसे निपटना मुश्किल है, है ना? क्या ऐसे लोग जिन्हें परमेश्वर का कोई ज्ञान नहीं है, अंत तक परमेश्वर का अनुसरण करने में सक्षम हैं? यह आसान नहीं होगा! जिन लोगों को परमेश्वर का ज्ञान नहीं है, वे किसी भी समय परमेश्वर का विरोध कर सकते हैं, परमेश्वर से इनकार कर सकते हैं या परमेश्वर के साथ विश्वासघात कर सकते हैं। वे सौ प्रतिशत परमेश्वर के साथ विश्वासघात करने के खतरे में हैं! क्या तुम अभी परमेश्वर के साथ विश्वासघात करने के किसी खतरे में हो? तुम सभी इस खतरे में हो। तुम्हें हर चीज़ के साथ एक नीतिपूर्ण तरीके से व्यवहार करना चाहिए, परमेश्वर को समझना और उसका ज्ञान होना कोई आसान बात नहीं है। यदि परमेश्वर तुम्हारी समझ में नहीं आता है, यदि तुम्हें परमेश्वर का ज्ञान नहीं है, तो तुम्हारे लिए शैतान के झूठों पर विश्वास करना आसान होगा। हम उन लोगों को क्या कहते हैं जो बड़े लाल अजगर की हर बात का या धार्मिक समुदाय द्वारा कही गई हर बात का विश्वास करते हैं? मूर्ख! ये वचन कहाँ से आते हैं? ये वचन शैतान के मुँह से आते हैं, और फिर भी तुम उन पर विश्वास करते हो। क्या तुम मूर्ख नहीं हो? तुम शैतान के जाल में गिर गए हो; शैतान ने तुम्हें सफलतापूर्वक धोखा दे दिया है। तुम परमेश्वर के वचन में विश्वास नहीं करते हो, परमेश्वर की पवित्रता और धार्मिकता पर विश्वास नहीं करते हो, यह विश्वास नहीं करते हो कि परमेश्वर ही सत्य है, लेकिन तुम शैतान के वचनों में विश्वास करते हो; हम इसे ही अंधा होना कहते हैं! क्या यह परमेश्वर नहीं है जिसमें तुम विश्वास करते हो? यदि तुम मानते हो कि शैतान के वचन सत्य हैं, संभव हैं, और विश्वसनीय हैं, तो फिर वह कौन है जिस में तुम वास्तव में विश्वास करते हो, परमेश्वर या शैतान? तुम निश्चित रूप से नहीं कह सकते हो, क्या तुम कह सकते हो? क्या यह कहना ठीक है कि तुम नाममात्र के लिए ही परमेश्वर में विश्वास करते हो, लेकिन वास्तविकता में तुम अपने हृदय में जिस पर सबसे अधिक विश्वास करते हो, वह अभी भी शैतान ही है? (हाँ, ऐसा है।) क्या तुम सभी विश्वास करते हो कि शैतान के मुँह से सत्य के वचन बोले जा सकते हैं? (नहीं, हम विश्वास नहीं करते।) तो, इस तथ्य को स्पष्ट करने के लिए हम किन शब्दों का प्रयोग कर सकते हैं? ("एक गंदा मुँह शिष्ट भाषा नहीं बोल सकता है"।) हाँ! यह कहावत काम करेगी। जब तुम वास्तव में समझते हो कि इस कहावत का क्या अर्थ है, तो तुम यह जान लोगे कि शैतान के मुख से सत्य के वचन कभी भी नहीं बोले जा सकेंगे। ऐसे कुछ लोग हैं जो केवल सिद्धांतों को समझते हैं, लेकिन सिद्धांत का यहाँ कोई उपयोग नहीं है, क्योंकि जैसे ही शैतान कुछ कहता है, वे अभी भी उस पर विश्वास करेंगे: "अरे! यह सत्य हो सकता है!" फिर वे बर्बाद हो जाएँगे! "एक गंदा मुँह शिष्ट भाषा नहीं बोल सकता है।" तुम्हें इन वचनों पर विश्वास करना पड़ेगा। शैतान के मुख से सत्य के वचन कभी नहीं बोले जा सकेंगे। शैतान जो कुछ भी कहता है वह सब हमेशा झूठ औरअफवाहें, होती हैं; वह हमेशा सकारात्मक चीज़ों पर आरोप लगाएगा, उन्हें तोड़ेगा-मरोड़ेगा, बदनाम करेगा, और उन पर लांछन लगाएगा! क्या तुम मानते हो कि यह सत्य है? (हाँ।) यदि कई लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पर लांछन लगाते हैं, इसके बारे में अफवाह फैलाते हैं, और इस पर झूठा आरोप लगाते हैं, तो तुम इसके बारे में क्या करोगे? क्या तुम देख सकते हो कि ये पूरी तरह से झूठ हैं, क्या उस हर चीज़ को जो वे कहते हैं अनदेखा कर सकते हो और अपने हृदयों से उसे त्याग सकते हो? तुम्हें इन चीज़ों को त्याग देना चाहिए। चाहे जो भी कहा जाता है, तुम्हें इस बारे में स्पष्ट होना चाहिए कि इसे कौन कहता है। यदि वे परमेश्वर के मुख से बोले गए वचन हैं, तो वे सत्य हैं। यदि वे पवित्र आत्मा द्वारा उपयोग किये गए किसी व्यक्ति के द्वारा बोले गए वचन हैं, तो वे विश्वसनीय हैं। यदि वचन किसी अविश्वासी द्वारा या धार्मिक लोगों द्वारा, या बड़े लाल अजगर द्वारा कहे गए हैं, तो वे विश्वसनीय नहीं हैं। तुम्हें उन्हें पूरी तरह से अस्वीकार कर देना चाहिए, उन्हें नहीं मानो। भले ही वे सत्य प्रतीत होते हों, तब भी वे ऐसे वचन हैं जो तथ्यों को तोड़ते-मरोड़ते हैं, और बदनामी और झूठे आरोपों के वचन हैं। तुम सब "झाओयुआन घटना" के बारे में कैसा महसूस करते हो? (यह एक षड्यंत्र था।) यह बड़ा लाल अजगर था, जो सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पर झूठे आरोप गढ़ने, उसकी बदनामी करने और उसे फँसाने की कोशिश कर रहा था। उन लोगों को सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पर विश्वास ही नहीं था। उनमें से कुछ झूठे मसीह के साथ भागीदारी कर रहे थे, वे झूठे मसीह पर विश्वास करते थे और उन्होंने जानबूझ कर परमेश्वर के घर का विरोध किया था। वे लोग परमेश्वर के घर के विरोध में खड़े हुए थे। वे विश्वासियों के लिए परमेश्वर के साथ संघर्ष करते थे और दुष्ट आत्माओं से संबंधित थे। उन्हें सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के सदस्य कैसे माना जा सकता है? वे तो सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के सदस्य थे ही नहीं, परमेश्वर के घर में कोई भी उन्हें स्वीकार नहीं करेगा। क्या तुम समझते हो कि आज मैं इस बारे में यहाँ संगति क्यों कर रहा हूँ? किसी को वास्तव में परमेश्वर का सच्चा ज्ञान और उसकी समझ है या नहीं, इसी से सब कुछ निर्धारित होता है। यदि तुम बस कुछ बुनियादी सिद्धांतों को ही समझते हो, तो यह किसी उपयोग का नहीं होगा, यह इस बात को नहीं दर्शाता है कि तुम्हें परमेश्वर का सच्चा ज्ञान है। यदि तुम्हें परमेश्वर का सच्चा ज्ञान और उसकी समझ है, केवल तभी तुम शैतान की चालों में नहीं फँसोगे। केवल तभी तुम उन सभी झूठों का त्याग कर सकोगे जो शैतान कहता है। केवल तभी तुम शैतान के प्रलोभनों पर विजय पा सकोगे। मुख्य रूप से यही मेरे कहने का तात्पर्य है। क्या तुम समझे? (हम समझते हैं।)

— जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति से उद्धृत

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