सत्य को खोजने वाले सभी लोगों का हम से सम्पर्क करने का स्वागत करते हैं

प्रश्न 5: मैं सोचा करती थी कि सीसीपी के दिन अब सीमित हैं और शीघ्र ही उसका पतन हो जाएगा, अगर विश्वास करने से पूर्व मैं उसके पतन की प्रतीक्षा करूं, तो क्या ढेरों मुश्किलों से मेरा बचाव नहीं हो जाएगा? लेकिन मैं अब देख रही हूं कि हमें प्रताड़ित और गिरफ़्तार करने में सीसीपी का उद्देश्य हमें नरक में भेजना है! अगर हम सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर में विश्वास करने के पूर्व सीसीपी के नष्ट होने की प्रतीक्षा करते हैं, तो भी क्या हम अंत के दिनों में परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश कर परमेश्‍वर का उद्धार पा सकेंगे? क्या हम उद्धार का हमारा अवसर खो देंगे?

2018-12-05 22

उत्तर: आज, क्योंकि हम परमेश्‍वर में विश्वास करते हैं, सत्य की खोज करते हैं और जीवन में सच्‍चे मार्ग पर चलते हैं, हम सीसीपी के उग्र अत्याचार और उत्पीड़न का सामना करते हैं। ये बहुत अर्थपूर्ण बात है! ऐसा इसलिये कि परमेश्‍वर सीसीपी की शैतानी सत्ता का उपयोग विजेताओं के एक समूह को पूर्ण करने में कर रहे हैं, और साथ ही उन लोगों का खुलासा और विनाश कर रहे हैं, जो परमेश्‍वर में ईमानदारी से विश्वास और सत्य से प्रेम नहीं करते हैं। सच्चे विजेता वे हैं जो सीसीपी की दमनकारी सत्ता के अंदर रहते हुए, परमेश्‍वर के वचनों को सच्चे विश्वास के साथ अनुभव कर सकते हैं, सीसीपी के उग्र दबाव और क्रूर उत्पीड़न को अनुभव करते हुए, दुष्ट शैतान के असली रंगों को पूरी तरह देख पाते हैं, और फिर शैतान से घृणा कर, उसका परित्याग कर, ईमानदारी से परमेश्‍वर की ओर मुड़ कर, उद्धार प्राप्त कर सकते हैं और पूर्ण किये जा सकते हैं! विजेता सीसीपी की शैतानी सत्ता द्वारा परमेश्‍वर के विरोध और परमेश्‍वर के चुने हुए लोगों के उत्पीड़न के विशेष वातावरण में बनाए जाते हैं। सीसीपी के शैतानों के अत्याचार और उत्पीड़न से बने हुए कठोर वातावरण के बिना, सच्चे विजेता नहीं बनाए जा सकते। जो लोग सच्चाई से परमेश्‍वर को पाना चाहते हैं, उन पर सीसीपी चाहे कितना भी अत्याचार करे, चाहे कितना ही कड़ा वातावरण क्यों न हो जाए, वे फिर भी परमेश्‍वर का अनुसरण करेंगे, अपना कर्तव्य निभाएंगे, सत्य की खोज में अपना सब कुछ दांव पर लगा देंगे, और परमेश्‍वर में अधिक से अधिक विश्वास करेंगे! वे सीसीपी के न्याय के दमन और दुष्टता के समर्थन, उसके न्यायहीन, विकृत एवं दुष्ट, प्रतिक्रियावादी सार को समझ पाएंगे। वे साफ़ तौर पर देख पाएंगे कि सीसीपी वो शैतान है जो मानवजाति को भ्रष्ट और पीड़ित करती है और उसे निगल जाती है, इसलिए वे उससे और अधिक घृणा करेंगे, उसके विरूद्ध बगावत करेंगे और सच्चाई के साथ परमेश्‍वर की ओर मुड़ जाएंगे। हालांकि सीसीपी की शैतानी सत्ता द्वारा लाई गई विषमता के माध्यम से, वे परमेश्‍वर की धार्मिकता, पवित्रता, सुंदरता और अच्छाई को भी जान गए हैं। मानवजाति को परमेश्‍वर सिर्फ प्रेम और उद्धार प्रदान करते हैं! परमेश्‍वर के प्रति उनका जो प्रेम और विश्वास है वो बढ़ गया है, और उनके हृदय परमेश्‍वर के ज्यादा करीब आ गए हैं। ये लोग सीसीपी की शैतानी सत्ता के अंधकारमय प्रभाव से पूरी तरह टूट चुके हैं और विजेता की गवाही देते हैं। ये परमेश्‍वर द्वारा दारूण दुःख के बीच विजेता बनाए गए लोग हैं, ये ऐसे लोगों का समूह भी हैं जो मसीह के "दुःख, राज्य और धैर्य" का हिस्सा हैं। वे मसीह के सच्चे गवाह हैं, वे 144,000 विजेता जिनका प्रकाशितवाक्य में उल्लेख है, वे जो परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश करेंगे और शाश्वत जीवन प्राप्त करेंगे! इसीलिए विश्वास और सत्य की खोज के लिए हमारा सीसीपी के अत्याचार का अनुभव करना कितना अर्थपूर्ण है! जैसा कि प्रभु यीशु ने कहा थाः "धन्य हैं वे, जो धार्मिकता के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है। धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें, और सताएँ और झूठ बोल बोलकर तुम्हारे विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें" (मत्ती 5:10-11)। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "संभवतः तुम सबको ये वचन स्मरण होंगे: 'क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्लेश हमारे लिये बहुत ही महत्वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है।' अतीत में तुम सबने यह बात सुनी है तो भी किसी ने इन वचनों का सही अर्थ नहीं समझा। आज, तुम सभी अच्छे से जानते हो कि उनका वास्तविक महत्व क्या है। ये वह वचन है जिन्हें परमेश्वर अंतिम दिनों में पूरा करेगा। और ये वचन उन में पूरे होंगे जो विशाल लाल अजगर द्वारा निर्दयतापूर्वक पीड़ित किये गए हैं, उस देश में जहां वह रहता है। यह बड़ा लाल अजगर परमेश्वर को सताता है और परमेश्वर का शत्रु है, इसलिए इस देश में, जो परमेश्वर पर विश्वास करते हैं उन्हें अपमानित किया जाता और सताया जाता है। इस कारण ये शब्द तुम्हारे समूह के लोगों में वास्तविकता बन जाएंगे" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है?")। अब परमेश्‍वर द्वारा विजेताओं को पूर्ण किये जाने का स्वर्णिम समय है। जब सीसीपी का पतन होगा, तो ये विजेता परमेश्‍वर के विजय की गवाही देने के लिए जनसाधारण के बीच खड़े होंगे! जब परमेश्‍वर की उनकी गवाही चरम पर पंहुच जाएगी, परमेश्‍वर का राज्य आधिकारिक रूप से पृथ्वी पर कायम हो जाएगा! मानवजाति को बचाने का परमेश्‍वर का कार्य तब पूरा हो जाएगा। जो लोग बचाए जा चुके होंगे और परिशुद्ध हो चुके होंगे वे तब तक व्यवस्थित हो चुके होंगे। अगर हम तब तक विश्वास करने की प्रतीक्षा करते हैं, तो हम परमेश्‍वर द्वारा विजेता बनाए जाने के अवसर को चूक जाएंगे। ऐसे लोग विजेता की गवाही न दे पाएंगे और न ही परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश कर पाएंगे। अगर वे बच भी जाते हैं, तो वे सिर्फ "सेवा करने" वालों के रूप में गिने जाएंगे और परमेश्‍वर के राज्य के सदस्य न होंगे।

परमेश्‍वर सर्वशक्तिमान हैं। परमेश्‍वर की बुद्धिमत्ता सदैव शैतान की योजना पर काम करती है। सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के अंत के दिनों के कार्य को किसी भी शत्रुतापूर्ण ताकत के द्वारा रोका नहीं जा सकता है। जबसे सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर ने अपने अंत के दिनों के कार्य प्रारंभ किए, उन्होंने निरंतर शैतानी सीसीपी के उग्र विरोध और धार्मिक मंडलियों की निंदा का सामना किया है। परंतु परमेश्‍वर के राज्य का सुसमाचार फिर भी चीन की मुख्य भूमि पर फैल कर, एक अभूतपूर्व सीमा तक पंहुच गया है, पूरे देश में हज़ारों की संख्या में कलीसिया स्थापित हो गए हैं लाखों लोग सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के नाम को स्वीकार कर चुके हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर ने लोगों का एक समूह बनाया है जो उनके समान मन वाले हैं। अब, सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के सुसमाचार की वेबसाइट को दुनिया भर के कई देशों और स्थानों में खोला जा चुका है। सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के वचन स्वीकार किए जा रहे हैं और अधिक से अधिक लोगों द्वारा प्रसारित किए जा रहे हैं। राज्य के विस्तार का सुसमाचार पूर्ण रूप से परमेश्‍वर की सर्वशक्तिमत्ता और बुद्धिमत्ता को उजागर करता है!

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "आज, परमेश्वर अपना कार्य करने के लिए संसार में वापस आ गया है। उसका पहला ठहराव, नास्तिकता का कट्टर गढ़, तानाशाही शासकों का विशाल जमावड़ाः चीन, है। परमेश्वर ने अपनी बुद्धि और सामर्थ्य से लोगों का एक समूह प्राप्त कर लिया है। इस अवधि के दौरान, चीन की सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा उसका हर तरह से शिकार किया जाता है और उसे अत्याधिक पीड़ा के अधीन किया जाता है, उसके पास अपना सिर टिकाने के लिए कोई जगह नहीं है और वह किसी भी शरणस्थल को पाने में असमर्थ है। इसके बावजूद, परमेश्वर तब भी उस कार्य को जारी रखता है जिसे करने का उसका इरादा हैः वह अपनी वाणी बोलता है और सुसमाचार का प्रसार करता है। कोई भी परमेश्वर की सर्वशक्तिमत्ता की थाह नहीं ले सकता है। चीन में, जो कि एक ऐसा देश है जो परमेश्वर को एक शत्रु मानता है, परमेश्वर ने कभी भी अपना कार्य बंद नहीं किया है। इसके बजाय, और अधिक लोगों ने उसके कार्य और वचन को स्वीकार कर लिया है, क्योंकि परमेश्वर मानवजाति के हर एक सदस्य को बचाने के लिए वह सब कुछ करता है जो वह कर सकता है। हमें विश्वास है कि परमेश्वर जो कुछ प्राप्त करना चाहता है उस मार्ग में कोई भी देश या शक्ति ठहर नहीं सकता है। वे जो परमेश्वर के कार्य में बाधा उत्पन्न करते हैं, परमेश्वर के वचन का विरोध करते हैं, परमेश्वर की योजना में विघ्न डालते हैं और उसे बिगाड़ते हैं, अंततः परमेश्वर के द्वारा दण्डित किए जाएँगे" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है")।

"परमेश्वर का राज्य मानवता के मध्य विस्तार पा रहा है, यह मानवता के मध्य बन रहा है, यह मानवता के मध्य खड़ा हो रहा है; ऐसी कोई भी शक्ति नहीं है जो मेरे राज्य को नष्ट कर सके। अब मैं निर्बाध अपने लोगों के मध्य चल रहा हूं, मेरे लोगों के मध्य में रहता हूं। आज, जो मेरे लिए वास्तविक प्रेम रखते हैं, ऐसे लोग ही धन्य हैं; जो मुझे समर्पित रहते हैं वे धन्य हैं, वे निश्चय ही मेरे राज्य में रहेंगे; जो मुझे जानते हैं वे धन्य हैं, वे निश्चय ही मेरे राज्य में शक्ति प्राप्त करेंगे; जो मेरा अनुसरण करते हैं वे धन्य हैं, वे निश्चय ही शैतान के बंधनों से स्वतंत्र होंगे और मेरी आशीषों का आनन्द लेंगे; वे लोग धन्य हैं जो अपने आप को मेरे लिए त्यागते हैं, वे निश्चय ही मेरे राज्य को प्राप्त करेंगे और मेरे राज्य का उपहार पाएंगे। जो लोग मेरे खातिर मेरे चारों ओर दौड़ते हैं उनके लिए मैं उत्सव मनाऊंगा, जो लोग मेरे लिए अपने आप को समर्पित करते हैं मैं उन्हें आनन्द से गले लगाऊंगा, जो लोग मुझे भेंट देते हैं मैं उन्हें आनन्द दूंगा। जो लोग मेरे शब्दों में आनन्द प्राप्त करते हैं उन्हें मैं आशीष दूंगा; वे निश्चय ही ऐसे खम्भे होंगे जो मेरे राज्य में शहतीर को थामने वाले होंगे, वे निश्चय ही अनेकों उपहारों को मेरे घर में प्राप्त करेंगे और उनके साथ कोई तुलना नहीं कर पाएगा। क्या तुम सबने मिलने वाली आशीषों को स्वीकार किया है? क्या कभी तुम सबने मिलने वाले वायदों को पाया है? तुम लोग निश्चय ही, मेरी रोशनी के नेतृत्व में, अंधकार की शक्तियों के गढ़ को तोड़ोगे। तुम अंधकार के मध्य निश्चय ही मार्गदर्शन करने वाली ज्योति से वंचित नहीं रहोगे। तुम सब निश्चय ही सम्पूर्ण सृष्टि पर स्वामी होगे। तुम लोग शैतान पर निश्चय ही विजयी बनोगे। तुम सब निश्चय ही महान लाल ड्रैगन के राज्य के पतन को देखोगे और मेरी विजय की गवाही के लिए असंख्य लोगों की भीड़ में खड़े होगे। तुम लोग निश्चय ही पाप के देश में दृढ़ और अटूट खड़े रहोगे। तुम सब जो कष्ट सह रहे हो, उनके मध्य तुम मेरे द्वारा आने वाली आशीषों को प्राप्त करोगे और मेरी महिमा के भीतर के ब्रह्माण्ड में निश्चय ही जगमगाओगे" (सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के लिये परमेश्वर के कथन "वचन देह में प्रकट होता है" के "उन्नीसवाँ कथन" से लिया गया)।

"विजय गान" फ़िल्म की स्क्रिप्ट से लिया गया अंश

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