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41. बुरे कर्म क्या हैं? बुरे कर्मों की अभिव्यक्तियाँ क्या हैं?

2018-03-22 74

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

वह मानक क्या है जिसके द्वारा किसी व्यक्ति के कर्मों का मूल्यांकन अच्छे या बुरे के रूप में किया जाता है? यह इस बात पर निर्भर करता है कि अपने विचारों, अभिव्यक्तियों और कार्यों में तू सत्य को व्यवहार में लाने और सत्य की वास्तविकता को जीने की गवाही धारण करता है या नहीं। यदि तेरे पास यह वास्तविकता नहीं है या तू इसे नहीं जीता है, तो तू बिना किसी शक के एक कुकर्मी है।

— "मसीह की बातचीतों के अभिलेख" में "तू अपने सच्चे हृदय को परमेश्वर की ओर मोड़ने के बाद सच्चाई को प्राप्त कर सकता है" से उद्धृत

यदि तू हमेशा देह के अनुसार जीता है, हमेशा अपनी स्वार्थी इच्छाओं को संतुष्ट करता है, तो ऐसे व्यक्ति के पास सच्चाई की वास्तविकता नहीं होती है। यह किसी ऐसे व्यक्ति की निशानी है जो परमेश्वर को लज्जित करता है। तू कहता है, "मैंने कुछ नहीं किया; मैंने परमेश्वर को कैसे लज्जित किया है?" तेरे विचारों और मतों में, इरादों, लक्ष्यों और मंशाओं में, तेरे कार्यों के पीछे, और तूने जो किया है उनके परिणामों में—हर तरीके से तू शैतान को संतुष्ट कर रहा है, उसके उपहास का पात्र बन रहा है, और उसे तेरे विनाश की जानकारी लेने दे रहा है। तेरे पास दूर तक भी वह गवाही नहीं है जो एक ईसाई के रूप में तेरे पास होनी चाहिए। तू सभी चीज़ों में परमेश्वर का नाम बदनाम करता है और तेरे पास सच्ची गवाही नहीं है। क्या परमेश्वर तेरे द्वारा किए गए कृत्यों को याद रखेगा? अंत में, परमेश्वर तेरे कृत्यों और तेरे द्वारा किए गए कर्तव्य के बारे में क्या निष्कर्ष निकालेगा? क्या उससे कोई नतीजा, किसी प्रकार का वक्तव्य नहीं मिलना चाहिए? बाइबल में, प्रभु यीशु कहता है, "उस दिन बहुत से लोग मुझ से कहेंगे, 'हे प्रभु, हे प्रभु, क्या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्‍टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत से आश्‍चर्यकर्म नहीं किए?' तब मैं उनसे खुलकर कह दूँगा, मैं ने तुम को कभी नहीं जाना। हे कुकर्म करनेवालो, मेरे पास से चले जाओ।" प्रभु यीशु ने ऐसा क्यों कहा? जो लोग बीमारों को चंगा करते हैं और परमेश्वर के नाम पर दुष्‍टात्माओं को निकालते हैं, जो परमेश्वर के नाम पर उपदेश देने के लिए यात्रा करते हैं, वे कुकर्मी क्यों हो जाते हैं? ये कुकर्मी कौन हैं? क्या ये वे लोग हैं जो परमेश्वर में विश्वास नहीं करते है? वे सभी परमेश्वर में विश्वास करते हैं और परमेश्वर का अनुसरण करते हैं। वे परमेश्वर के लिए चीजों का त्याग भी करते हैं, स्वयं को परमेश्वर के लिए व्यय करते है, और अपना कर्तव्य निभाते हैं। हालाँकि, अपने कर्तव्य को निभाने में उनके पास भक्ति और गवाही का अभाव होता है, इसलिए यह दुष्टता करना बन गया है। यही कारण है कि प्रभु यीशु ने कहा, "हे कुकर्म करनेवालो, मेरे पास से चले जाओ।"

— "मसीह की बातचीतों के अभिलेख" में "तू अपने सच्चे हृदय को परमेश्वर की ओर मोड़ने के बाद सच्चाई को प्राप्त कर सकता है" से उद्धृत

आज तुम परमेश्वर के इन सभी क्रिया-कलापों को देखते हो, मगर तब भी तुम प्रतिरोध करते हो और विद्रोही हो, और समर्पण नहीं करते हो; तुम अपने भीतर बहुत सी चीज़ों को आश्रय देते हो, और वही करते हो जो तुम चाहते हो; तुम अपनी वासनाओं और अपनी पसंद का अनुसरण करते हो—यह विद्रोहशीलता है; और यह प्रतिरोध है। परमेश्वर पर विश्वास जो देह के लिए, किसी की वासनाओं के लिए, और किसी की पसंद के लिए, संसार के लिए, और शैतान के लिए किया जाता है, वह गंदा है; वह प्रतिरोधी व विद्रोहशील है। आज सभी विभिन्न प्रकारों के विश्वास हैं: कुछ आपदा से बचने के लिए आश्रय खोजते हैं, अन्य आशीषें प्राप्त करने की खोज करते हैं, जबकि कुछ रहस्यों को समझना चाहते हैं और कुछ अन्य कुछ धन पाने का प्रयास करते हैं; ये सभी प्रतिरोध के रूप हैं; ये सब ईशनिंदा हैं! यह कहना कि कोई व्यक्ति प्रतिरोध या विद्रोह करता है—क्या यह इन चीज़ों के संदर्भ में नहीं है? बहुत से लोग अब बड़बड़ाते हैं, शिकायतें करते हैं या आलोचनाएँ करते हैं। ये सभी चीज़ें दुष्टों के द्वारा की जाती हैं; वे मानव प्रतिरोध और विद्रोहशीलता हैं; ऐसे व्यक्ति शैतान के अधिकार और नियंत्रण में हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई" से उद्धृत

भाइयों और बहनों के बीच जो लोग हमेशा अपनी नकारात्मकता का गुबार निकालते रहते हैं, वे शैतान के अनुचर हैं और वे कलीसिया को परेशान करते हैं। ऐसे लोगों को अवश्य ही एक दिन निकाल और हटा दिया जाना चाहिए। परमेश्वर में अपने विश्वास में, अगर लोगों के अंदर परमेश्वर के प्रति श्रद्धा-भाव से भरा दिल नहीं है, अगर ऐसा दिल नहीं है जो परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी है, तो ऐसे लोग न सिर्फ परमेश्वर के लिये कोई कार्य कर पाने में असमर्थ होंगे, बल्कि इसके विपरीत वे ऐसे लोग बन जाएँगे जो परमेश्वर के कार्य में बाधा उपस्थित करते हैं और उसकी उपेक्षा करते हैं। परमेश्वर में विश्वास करना किन्तु उसकी आज्ञा का पालन नहीं करना या उसका आदर नहीं करना, और उसके बजाय उसका प्रतिरोध करना, किसी भी विश्वासी के लिए सबसे बड़ा कलंक है यदि विश्वासी वाणी और आचरण में हमेशा ठीक उसी तरह लापरवाह और असंयमित हों जैसे अविश्वासी होते हैं, तो ऐसे लोग अविश्वासी से भी अधिक दुष्ट होते हैं; ये मूल रूप से राक्षस हैं। जो कलीसिया के भीतर विषैली, दुर्भावनापूर्ण बातों का गुबार निकालते हैं, और साथ ही ऐसे लोग भाईयों और बहनों के बीच अफवाहें फैलाते हैं, असामंजस्यता को भड़काते हैं और गुटबाजी करते हैं, उन सभी को कलीसिया से निकाल दिया जाना चाहिए था। हालाँक, क्योंकि यह अब परमेश्वर के कार्य का एक भिन्न युग है, इसलिए ऐसे लोगों को प्रतिबंधित कर दिया गया है, क्योंकि ये निश्चित रूप से हटाए जाने की वस्तुएँ हैं। शैतान के द्वारा भ्रष्ट कर दिए गए सभी लोगों के भ्रष्ट स्वभाव हैं। हालाँकि, कुछ लोग बस भ्रष्ट स्वभावों वाले ही हैं जबकि अन्य ऐसे हैं जो इन बातों में भिन्न हैं कि न केवल उनके शैतानी स्वभाव हैं, बल्कि उनकी प्रकृति चरम रूप से विद्वेषपूर्ण है। ऐसे लोग जो कुछ भी करते और कहते हैं, उससे न केवल दूषित शैतानी स्वभाव प्रकट होता है, बल्कि यह भी प्रकट होता है वे असली इब्लीस शैतान हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "जो सत्य का अभ्यास में नहीं करते हैं उनके लिए एक चेतावनी" से उद्धृत

सभी कलीसियाओं में समागम में विध्वंसकारी सदस्य होते हैं; उन सभी में ऐसे सदस्य होते हैं जो परमेश्वर के कार्य में व्यवधान डालते हैं। ये लोग शैतान का छ्द्म वेष हैं जो परमेश्वर के परिवार में घुस गए हैं। ऐसे लोग छ्द्म वेष धारण करने में विशेष रूप से अच्छे होते हैं; मेरे समक्ष विनीत भाव से आकर, नमन करते हुए, नत-मस्तक होते हैं, बेशर्म कुत्ते की तरह व्यवहार करते हैं, अपने उद्देश्य को पाने के लिये अपना "सर्वस्व" न्योछावर करते हैं, लेकिन जब भाइयों और बहनों से सामना होता है, तो वे अपना कुरूप पक्ष को प्रकट कर देते हैं। जब वे ऐसे लोगों को देखते हैं जो सत्य का अभ्यास करते हैं तो वे उन पर आक्रमण कर देते हैं, उन्हें एक ओर कर देते हैं; और जब वे ऐसे लोगों को देखते हैं जो उनसे भी अधिक भयंकर हैं, तो फिर उसकी चाटुकारिता करने लगते हैं, उनगे आगे गिड़गिड़ाने लगते हैं। कलीसिया के भीतर वे आततायियों की तरह व्यवहार करते हैं। ऐसा कहा जा सकता है कि ऐसे "स्थानीय गुण्डे", और ऐसे "पालतू कुत्ते" अधिसंख्य कलीसियाओं में मौजूद हैं। ऐसे लोग मिलकर आस-पास मुखबिरी करते हैं, आँखे झपका कर और गुप्त संकेतों से एक-दूसरे को इशारे करते हैं, और इनमें से कोई भी सत्य का अभ्यास नहीं करता है। जिस किसी में भी सबसे अधिक विष होता है वह "प्रमुख राक्षस" होता है, और जिसकी भी सबसे अधिक प्रतिष्ठा होती है, वह इनकी अगुवाई करता है और इनका परचम बुलंद रखता है। ऐसे लोग कलीसिया में उपद्रव मचाते हैं, नकारात्मकता फैलाते हुए, मौत का तांडव करते हैं, मनमर्जी करते हैं, जो चाहे बकते हैं; किसी की भी इन्हें रोकने की हिम्मत नहीं होती है, ये शैतानी स्वभावों से भरे होते हैं। जैसे ही ये लोग व्यवधान पैदा करते हैं वैसे ही कलीसिया में मौत की घुटन छा जाती है। ...यदि कोई कलीसिया कई स्थानीय गुण्डों, और साथ ही कुछ छोटी-छोटी "मक्खियों" से युक्त जिनमें विवेक का पूर्णतः अभाव है जो उनके आसपास अनुसरण करती हैं, और यदि समागम के सदस्य, सत्य देख लेने के बाद भी, इन गुण्डों की जकड़न और हेरफेर से मुक्त नहीं हो पा रहे हैं, तो उन सभी मूर्खों का अंत में सफाया कर दिया जायेगा। यद्यपि इन छोटी-छोटी मक्खियों ने कुछ खौफ़नाक न किया हो, लेकिन ये और ज़्यादा धूर्त, और ज़्यादा मक्कार और कपटी होती हैं, और इस तरह के हर एक को हटा दिया जाएगा। एक भी नहीं बचेगा!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "जो सत्य का अभ्यास में नहीं करते हैं उनके लिए एक चेतावनी" से उद्धृत

तुम लोगों का छल, तुम लोगों का घमण्ड, तुम लोगों का लालच, तुम लोगों की ज़रूरत से अधिक अभिलाषाएं, तुम लोगों का धोखा, तुम लोगों का आज्ञा-उल्लंघन—इनमें से कौन सी चीज़ मेरी नज़र से बच सकती है? तुम लोग मेरे साथ चाल चलते हो, मुझे मूर्ख बनाते हो, मेरा अपमान करते हो, मुझे धोखा देते हो, मुझ से ज़बरदस्ती वसूल करते हो, बलिदानों के लिए मुझ पर बल प्रयोग करते हो—ऐसे दुष्कर्म मेरी सज़ा से कैसे बच निकल सकते हैं? तुम लोगों की बुराई मेरे साथ तुम्हारी शत्रुता का प्रमाण है, और मेरी अनुकूलता में न होने का प्रमाण है। तुम सब में से प्रत्येक अपने आप में यह विश्वास करता है कि वह मेरे अनुकूल है, परन्तु यदि ऐसा है, तो फिर यह अखंडनीय प्रमाण किस पर लागू होता है? तुम लोगों को लगता है कि तुम्हारे अंदर मेरे प्रति बहुत निष्कपटता और ईमानदारी है। तुम सब सोचते हो कि तुम लोग बहुत ही रहमदिल, बहुत ही करुणामय हो, और तुम सबने मुझे बहुत कुछ समर्पित किया है। तुम सब सोचते हो कि तुम लोगों ने मेरे लिए पर्याप्त काम कर दिया है। फिर भी, क्या तुम लोगों ने कभी इन धारणाओं की अपने ख़ुद के स्वभाव से तुलना की है? मैं कहता हूं कि तुम लोग बहुत ही घमण्डी, बहुत ही लालची, बहुत ही यन्त्रवत् हो; और तुम सब मुझे बहुत ही गहरी चालबाज़ियों से मूर्ख बनाते हो, और तुम्हारे इरादे घृणित हैं और तुम्हारी विधियाँ घृणित हैं। तुम लोगों की ईमानदारी बहुत ही थोड़ी है, तुम्हारी गम्भीरता बहुत ही थोड़ी है, और तुम्हारी अंतरात्मा तो और अधिक क्षुद्र है। तुम लोगों के हृदय में बहुत ही अधिक द्वेष है, और इससे कोई भी नहीं बचा है, यहाँ तक कि मैं भी नहीं। तुम सब मुझे अपने बच्चों, या अपने पति, या आत्म-संरक्षण के लिए बाहर निकाल देते हो। मेरी चिंता करने की बजाय—तुम सब अपने परिवार, अपने बच्चों, अपने सामाजिक स्तर, अपने भविष्य, और अपनी ख़ुद की संतुष्टि की चिंता करते हो। तुमने कभी बातचीत करते समय या कार्य करते समय मेरे बारे में सोचा है? जब मौसम ठंडा होता है, तो तुम लोगों की सोच अपने बच्चों, अपने पति, अपनी पत्नी, या अपने माता-पिता के लिए ही होती है। जब मौसम गरम होता है, तब भी, तुम सबके हृदय में मेरे लिए कोई स्थान नहीं होता है। जब तुम अपना कर्तव्य निभाते हो, तुम अपने ख़ुद के फायदों, अपनी ख़ुद की व्यक्तिगत सुरक्षा, अपने परिवार के सदस्यों के बारे में ही सोच रहे होते हो। तुमने कभी भी ऐसा क्या काम किया है जो सिर्फ मेरे लिए ही हो? तुमने कब सिर्फ मेरे बारे में ही सोचा है? कब तुमने अपने आप को, हर कीमत पर, केवल मेरे लिए और मेरे कार्य के लिए ही समर्पित किया है? मेरे साथ तुम्हारी अनुकूलता का प्रमाण कहाँ है? मेरे साथ तुम्हारी ईमानदारी की वास्तविकता कहाँ है? मेरे साथ तुम्हारी आज्ञाकारिता की वास्तविकता कहाँ है? कब तुम्हारे इरादे केवल मेरी आशीषों का लाभ पाने के लिए ही नहीं रहे हैं? तुम सब मुझे मूर्ख बनाते और धोखा देते हो, तुम सब सत्य के साथ खेलते हो, और सत्य के अस्तित्व को छुपाते हो, और सत्य के सार-तत्व को धोखा देते हो, और तुम लोग इस प्रकार अपने आप को मेरा शत्रु बनाते हो, अतः भविष्य में क्या तुम लोगों की प्रतीक्षा कर रहा है? तुम लोग केवल एक अज्ञात परमेश्वर से अनुकूलता की ही खोज करते हो, और मात्र एक अज्ञात विश्वास की खोज करते हो, फिर भी तुम सब मसीह की अनुकूलता में नहीं हो। क्या तुम्हारी दुष्टता को भी वही कठोर दण्ड नहीं मिलेगा जो पापी को मिलता है?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए" से उद्धृत

ऐसा हो सकता है कि परमेश्वर में तुम्हारे इतने वर्षों के विश्वास में, तुमने कभी किसी को कोसा न हो और न ही कोई बुरा कार्य किया हो, फिर भी मसीह के साथ अपनी संगति में, तुम सच नहीं बोल सकते हो, सच्चाई से कार्य नहीं कर सकते, या मसीह के वचन का पालन नहीं कर सकते हो; तो मैं कहूँगा कि तुम संसार में सबसे अधिक कुटिल और कपटी हो। हो सकता है तुम अपने रिश्तेदारों, मित्रों, पत्नी (या पति), बेटों और बेटियों, और माता पिता के प्रति स्नेहपूर्ण और निष्ठावान हो, और कभी दूसरों का फायदा नहीं उठाया हो, लेकिन अगर तुम मसीह के अनुरूप नहीं हो और उसके साथ तुम्हारा सामंजस्य नहीं है, तो भले ही तुम अपने पड़ोसियों की सहायता के लिए अपना सब कुछ खपा दो या अपने पिता, माता और घरवालों की अच्छी देखभाल की हो, तब मैं कहूँगा कि तुम धूर्त हो, और साथ में चालाक भी हो। बस इसलिए कि तुम दूसरों के साथ अच्छा तालमेल बिठा लेते हो या कुछ अच्छे काम करते हो तो यह न सोचो कि तुम मसीह के अनुरूप हो। क्या तुम यह विश्वास करते हो कि तुम्हारी उदारता स्वर्ग की आशीषों को चुरा सकती है? क्या तुम सोचते हो कि थोड़े-से अच्छे काम कर लेना तुम्हारी आज्ञाकारिता का स्थान ले सकते हैं?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं" से उद्धृत

मैं उन लोगों पर और अधिक दया नहीं करूँगा जिन्होंने गहरी पीड़ा के दिनों में मुझ पर रत्ती भर भी निष्ठा नहीं दिखाई है, क्योंकि मेरी दया का विस्तार केवल इतनी ही दूर तक है। साथ ही साथ, मुझे ऐसा कोई इंसान पसंद नहीं है जिसने कभी मेरे साथ विश्वासघात किया हो, ऐसे लोगों के साथ संबद्ध होना तो मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है जो अपने मित्रों के हितों को बेच देते हैं। यही मेरा स्वभाव है, इस बात की परवाह किए बिना कि व्यक्ति कौन हो सकता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो" से उद्धृत

तुम लोगों में से हर एक जनसाधारण के शिखर तक उठ चुका है; तुम लोग जनसाधारण के पूर्वज होने के लिए आरोहण कर चुके हो। तुम लोग अत्यंत स्वेच्छाचारी हो, और आराम के स्थान की तलाश करते हुए, और अपने से छोटे भुनगों को निगलने का प्रयास करते हुए, उन सभी भुनगों के बीच तुम्हारे सिर पर खून सवार हो जाता है। अपने हृदयों में तुम लोग द्वेषपूर्ण और कुटिल हो, उन भूतों से भी आगे हो जो समुद्र के तले में डूबे हुए हैं। तुम लोग, भुनगों को ऊपर से नीचे तक परेशान करते हुए, गोबर के तले में रहते हो, जब तक कि ऐसा न हो जाए कि उनके पास कोई शांति न रहे, थोड़ी देर के लिए एक दूसरे से लड़ते हो और फिर शांत हो जाते हो। तुम लोगों को अपनी जगह तक का पता नहीं है, मगर तब भी तुम लोग गोबर में एक-दूसरे के साथ लड़ाई करते हो। ऐसे संघर्ष से तुम लोग क्या हासिल कर सकते हो? यदि तुम लोगों के हृदय में वास्तव में मेरे लिए आदर होता, तो तुम लोग मेरी पीठ पीछे एक दूसरे के साथ कैसे लड़ सकते थे? तेरी हैसियत कितनी भी ऊँची क्यों न हो, क्या तू अभी भी गोबर में एक बदबूदार छोटा सा कीड़ा नहीं है? क्या तू पंख विकसित करने में सक्षम होगा और आकाश में कबूतर बन पाएगा? तुम लोग, छोटे से बदबूदार कीड़ो, मुझ, यहोवा की, वेदी के चढ़ावों को चुराते हो; ऐसा करने में, क्या तुम लोग अपनी बर्बाद, असफल प्रतिष्ठा को बचा सकते हो और इस्राएल के चुने हुए लोग बन सकते हो? तुम लोग बेशर्म नीच आदमी हो!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "जब झड़ती हुई पत्तियाँ अपनी जड़ों की ओर लौटेंगी, तो तुझे उन सभी बुराइयों पर पछतावा होगा जो तूने की हैं" से उद्धृत

संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण:

सभी प्रकार के बुरे कर्म करने की क्या अभिव्यक्तियाँ हैं? पहली अभिव्यक्ति परमेश्वर के घर में होती है, जब कोई परमेश्वर को आँकता है और परमेश्वर के कार्य को आँकता है। इसमें अक्सर परमेश्वर और पवित्र आत्मा द्वारा उपयोग किए जाने वाले मनुष्य के बारे में धारणाएँ शामिल होती हैं। कुछ लोग यहाँ तक कि शत्रुता भी रखते हैं, हर जगह परमेश्वर के बारे में नकारात्मकता और गलत धारणाएँ फैलाते हैं, परमेश्वर के चुने हुए लोगों को धोखा देने और परमेश्वर के घर के कार्य में विघ्न डालने के लिए परमेश्वर और पवित्र आत्मा द्वारा उपयोग किए गए मनुष्य के बारे में अफ़वाहें फैलाते हैं। ये सबसे बड़ी बुराइयाँ हैं। ये ही वे चीजें हैं जो परमेश्वर के चुने हुए लोगों के जीवन प्रवेश में और परमेश्वर के घर के कार्य में सबसे अधिक विघ्न डालती हैं और क्षति पहुँचाती हैं। यही कारण है कि ये सबसे बड़ी बुराइयां हैं। वे सभी लोग जो इस प्रकार के बुरे कर्मों को करने में सक्षम हैं, वे सभी प्रकार के बुरे कर्म करने वाले कुकर्मी हैं। दूसरी अभिव्यक्ति यह है कि परमेश्वर के घर के कुछ अगुवा परमेश्वर के इरादों के प्रति विचारशील नहीं हैं और उस महत्वपूर्ण काम को नहीं करते हैं जो परमेश्वर ने उन्हें सौंपा है। इसके बजाय, वे स्वयं के लिए गवाही देते हैं और अपनी हैसियत को बनाए रखने के लिए कार्य करते हैं। परमेश्वर के घर में सभी तरह की अगुवाई वाले पदों को वे अपने भरोसेमंद सहयोगियों और बंधुओं के लिए निश्चित करते हैं। इस तरह का व्यक्ति भी सभी प्रकार के बुरे कर्म करने वाला एक कुकर्मी है। वे अगुवाई वाले पद उन लोगों के लिए निश्चित नहीं करते हैं जो सत्य का अनुसरण करते हैं और जिनमें पवित्र आत्मा का कार्य है; इसके बजाय, वे अपने सह-अपराधियों, भरोसेमंद सहयोगियों, और चाटुकारों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करते हैं। क्या यह परमेश्वर के चुने हुए लोगों के जीवन प्रवेश में बाधाएँ और कठिनाइयाँ पैदा करना नहीं है? इसलिए, ऐसे लोग भी सभी प्रकार के बुरे कर्म करने वाले कुकर्मी हैं। परमेश्वर का घर उन्हें ऊँचा उठाता है और उन्हें अगुवा बनने देता है, फिर भी वे स्वयं की ही गवाही देते हैं, स्वयं का ही दिखावा करते हैं और परमेश्वर या परमेश्वर के स्वरूप की गवाही नहीं देते हैं। वे परमेश्वर के वचन के सत्य का संवाद नहीं करते हैं और वे सत्य में प्रवेश करने में लोगों का मार्गदर्शन नहीं करते हैं। वे हमेशा अपने कार्य में अपनी हैसियत की रक्षा करने का प्रयास करते हैं। वे हमेशा अपनी हैसियत और अपनी प्रतिष्ठा के लिए बोलते हैं। वे परमेश्वर के चुने हुए लोगों के बीच अपनी स्वयं की हैसियत की रक्षा करते हैं और वे ऊपर के लोगों के हृदयों में अपनी हैसियत का बचाव करते हैं। इस तरह का व्यक्ति मसीह का शत्रु है। जो लोग मसीह के शत्रु हैं, वे सब सभी प्रकार के बुरे कर्म करने वाला कुकर्मी हैं। एक और अभिव्यक्ति है। कुछ लोग अपने कर्तव्यों को तो पूरा करते हैं लेकिन परमेश्वर के लिए उनमें कोई श्रद्धा नहीं होती है। वे सिर्फ बिना रुचि के ऐसा करते हैं। जब वे कार्य करते हैं तो वे अपनी देह की इच्छाओं और अपनी निजी पसंदों का अनुसरण करते हैं। परिणाम यह होता है कि वे परमेश्वर के घर के लिए बहुत सी परेशानियाँ लाते हैं और वे परमेश्वर के घर के लिए एक बड़ी वित्तीय हानि का कारण बनते हैं। इस तरह का व्यक्ति सभी प्रकार के बुरे कर्म करने वाला एक कुकर्मी है। इसके अलावा, वे सभी लोग जो सत्य का अनुसरण नहीं करते हैं, मगर जब दूसरे सत्य का अनुसरण करते हैं तो उन्हें परेशान करते हैं, जो हमेशा नकारात्मकता फैलाते हैं, जो हमेशा अविश्वासियों या धार्मिक लोगों के भ्रामक दृष्टिकोणों को फैलाकर परमेश्वर के चुने हुए लोगों को परेशान करते हैं, वे भी सभी प्रकार के बुरे कर्म करने वाले कुकर्मियों की श्रेणी में आते हैं।

— जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति से उद्धृत

परमेश्वर के कार्य में बाधा डालने, उसे उलट-पुलट करने और सीधे परमेश्वर के खिलाफ जाने के तीस बुरे कर्म:

1. ईमानदारी से कलीसिया में अपने कर्तव्य को पूरा नहीं करना और ईर्ष्यापूर्ण विवादों में, ओहदे के संघर्षों में, शामिल होना जिसके परिणामस्वरूप कलीसियाई जीवन में अव्यवस्था होती है, यह एक बुरा कर्म है।

2. विवाद के बीज बोना, गुटबंदी करना और गड़बड़ी पैदा करना जिसके परिणामस्वरूप कलीसिया में मतभेद और कलीसिया के काम में गंभीर गड़बड़ी हो, एक बुरा कर्म है।

3. सत्य से प्रेम नहीं करना, दुष्टता करना और टकराव पैदा करना, लोगों के बीच संघर्ष को भड़काना और कलीसियाई जीवन को अस्त-व्यस्त करना, एक बुरा कर्म है।

4. झूठ बोलना, लोगों को धोखा और झांसा देना, तथ्यों को अक्सर विकृत करना और अव्यवस्था पैदा करने के लिए सत्य-असत्य का मिश्रण करना, एक बुरा कर्म है।

5. लोगों को भ्रमित करने के लिए भ्रांतियाँ और विधर्म फैलाना ताकि लोग सत्य का अनुसरण करने में नाकाम रहें, उनके पास कोई भी मार्ग शेष न रहे और वे शैतान और राक्षसों से खुद को जोड़ लें, यह एक बुरा कर्म है।

6. नकारात्मकता और मृत्यु के संदेश को फैलाना, लोगों को धोखा देने के लिए धारणाएँ फैलाना, कलीसिया के जीवन को उलट-पुलट करना, लोगों को सुस्त बनाना और परमेश्वर से दूर करना एक बुरा कर्म है।

7. यदि तुम स्पष्ट रूप से जानते हो कि तुम्हारे अंदर सत्य की वास्तविकता नहीं है और तुम्हारे अंदर एक बुरी मानवता है और फिर भी अगुवा के ओहदे के लिए तुम लगातार प्रतिस्पर्धा करते हो, जिसके परिणामस्वरूप अव्यवस्था फैलती है, तो यह एक बुरा कर्म है।

8. लोगों के सामने एक प्रकार का और उनके पीछे दूसरे प्रकार का आचरण करना, पक्ष में होने का दिखावा करते हुए विपक्ष में काम करना, अपने वरिष्ठ अधिकारियों को धोखा देना और अपने अधीनस्थों को भ्रमित करना, और इस तरह के दोगलेपन से लोगों से छल करना, एक बुरा कर्म है।

9. समस्याओं को हल करने के लिए सत्य के बारे में सहभागिता करने में असमर्थ होने के कारण, हमेशा लोगों को दबोचने और उनसे प्रतिशोध लेने का मौका देखते रहना और लोगों को झिड़कने के लिए अपनी बात पर अड़े रहना, एक बुरा कर्म है।

10. अगुवाओं और कर्मचारियों की गलतियों को मुद्दा बनाना, उनसे उचित तरीके से पेश न आना और उनके सामान्य कामकाज पर असर डालना, एक बुरा कर्म है।

11. झूठे अगुवाओं और कर्मचारियों के खिलाफ़ कार्यवाही करते समय प्रतिशोध लेना और लोगों को ठिकाने लगाना, लोगों को बरबाद करना और उन्हें पश्चाताप करने का मौका न देना, आतंक पैदा करना, एक बुरा कर्म है।

12. ग़ैर-ज़िम्मेदार अगुवा या कर्मचारी बनना और दुष्ट लोग जब कलीसिया को परेशान करें तो आलसी बनकर बैठे रहना और कलीसिया के काम को कायम नहीं रखना, एक बुरा कर्म है।

13. कार्य-व्यवस्था के अनुसार व्यावहारिक समस्याओं को हल करने में अपने कर्तव्य का पालन नहीं करना और दुष्टों को कलीसिया को परेशान करने देना, एक बुरा कर्म है।

14. कार्य-व्यवस्था को गंभीरता से तोड़-मरोड़ देना और अपने ही तरीके से काम करना, सत्य के विरुद्ध जाना और अंत तक इसमें बने रहना, परमेश्वर के चुने हुए लोगों को नुकसान पहुंचाना, एक बुरा कर्म है।

15. यदि अगुवा और कर्मचारी सत्य का अभ्यास नहीं करते हैं, अंधाधुंध काम करते हैं और परमेश्वर के चुने हुए लोगों के पर्यवेक्षण और उनकी आलोचना को स्वीकार नहीं करते हैं, तो यह एक बुरा कर्म है।

16. यदि अगुवा और कर्मचारी मनमानी करते हैं और उन लोगों को चुनते और उनका इस्तेमाल करते हैं जिनमें सत्य की वास्तविकता नहीं है और जो व्यावहारिक कार्य नहीं कर पाते हैं, जिसका एक बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है, तो यह एक बुरा कर्म है।

17. किसी कर्तव्य को शुरुआत से अंत तक लापरवाही से, थोड़े-से भी प्रभाव के बिना करना जिससे लाभ से अधिक नुकसान हो रहा हो, और कलीसिया का काम गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा हो, एक बुरा कर्म है।

18. खुद तो सत्य का अभ्यास न करना और दूसरों को भी अपने कर्तव्य को करने से और अच्छे कर्मों को तैयार करने से रोकना, एक बुरा कर्म है।

19. निपटने और काट-छाँट से इनकार करना, थोड़ा-सा भी आज्ञाकारी न होना, उग्रता से दबंग होकर मनमानी करते हुए कलीसिया को परेशान करना और निरंकुश होकर अपनी इच्छा से चलना, एक बुरा कर्म है।

20. लगातार अपनी ही गवाही देना और खुद को ऊँचा उठाना, झूठे बयान देना, दूसरों की प्रशंसा पाने के लिए आत्म-प्रदर्शन करना, इन्हें लोगों को धोखा देने के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और यह एक बुरा कर्म है।

21. हमेशा बुरे और दुष्ट लोगों के साथ संपर्क करना और उनके साथ हिलना-मिलना, हमेशा बुरे और दुष्ट लोगों के हितों की बात करना और कलीसिया के काम में रुकावट डालना, एक बुरा कर्म है।

22. दुष्ट लोगों का अनुसरण करते हुए मुसीबतें खड़ी करना, कलीसिया के काम में रुकावट डालना और कलीसिया के जीवन को प्रभावित करना, अंत तक पश्चाताप न करना, यह एक बुरा कर्म है।

23. हमेशा महत्वाकांक्षी होना और ओहदे की तलाश करना, अक्सर दूसरों को धोखा देने के लिए धारणाओं को फैलाना और सत्ता के लिए प्रतिस्पर्धा करने में विभिन्न साधनों का उपयोग करना, यह एक बुरा कर्म है।

24. सुसमाचार का प्रचार करने के लिए गंदी चालें चलना, परमेश्वर के नाम का अपमान करना, लोगों पर सबसे खराब प्रभाव डालना और उनमें उकताहट पैदा करना, यह एक बुरा कर्म है।

25. उन लोगों की देखभाल नहीं करना जो धर्मान्तरित हो चुके हैं, लगभग पूरी तरह से ग़ैर-ज़िम्मेदार होना और सुसमाचार के काम को गंभीर रूप से प्रभावित करना, एक बुरा कर्म है।

26. चढ़ावे की चोरी करना, भोग-विलास में लिप्त रहना, व्यावहारिक काम को नहीं करना और कलीसिया के काम में बहुत अधिक विलम्ब पैदा करना, एक बुरा कर्म है।

27. कलीसिया की दान और राहत निधियों का गबन करना, परमेश्वर के घर के धन का दुरुपयोग करना, भ्रष्ट और पतित होकर सर्वाधिक बुरा प्रभाव डालना, एक बुरा कर्म है।

28. परमेश्वर के घर के चढ़ावे को सुरक्षित रखने में ग़ैर-ज़िम्मेदार होना, झूठे अगुवाओं, मसीह-विरोधियों और बड़े लाल अजगर को चढ़ावा देना, यह एक बुरा कर्म है।

29. कलीसिया तथा भाइयों और बहनों को धोखा देना, यहाँ तक कि शैतान की सेवा करना, अगुवाओं और कर्मचारियों पर नज़र रखना और उनका पीछा करना, यह एक बुरा कर्म है।

30. लगातार कामी और दुष्ट होना, विषमलैंगिक यौन-स्वच्छंदता या समलैंगिकता में शामिल होना, कलीसिया के जीवन को अस्त-व्यस्त करना और बहुत बुरा प्रभाव डालना, एक बुरा कर्म है।

— कार्य व्यवस्था से उद्धृत

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