सत्य को खोजने वाले सभी लोगों का हम से सम्पर्क करने का स्वागत करते हैं

क्या धार्मिक दुनिया में सच्चाई और परमेश्वर की सत्ता होती है, या मसीह-शत्रु और शैतान की सत्ता है?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

"हे कपटी शास्त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! तुम मनुष्यों के लिए स्वर्ग के राज्य का द्वार बन्द करते हो, न तो स्वयं ही उसमें प्रवेश करते हो और न उस में प्रवेश करनेवालों को प्रवेश करने देते हो" (मत्ती 23:13)।

"यीशु ने परमेश्‍वर के मन्दिर में जाकर उन सब को, जो मन्दिर में लेन-देन कर रहे थे, निकाल दिया, और सर्राफों के पीढ़े और कबूतर बेचनेवालों की चौकियाँ उलट दीं; और उनसे कहा, लिखा है, 'मेरा घर प्रार्थना का घर कहलाएगा'; परन्तु तुम उसे डाकुओं की खोह बनाते हो" (मत्ती 21:12-13)।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

हर पंथ और संप्रदाय के अगुवाओं को देखो। वे सभी अभिमानी और आत्म-तुष्ट हैं, और वे बाइबल की व्याख्या संदर्भ के बाहर और उनकी अपनी कल्पना के अनुसार करते हैं। वे सभी अपना काम करने के लिए प्रतिभा और पांडित्य पर भरोसा करते हैं। यदि वे कुछ भी उपदेश करने में असमर्थ होते, तो क्या वे लोग उनका अनुसरण करते? कुछ भी हो, उनके पास कुछ ज्ञान तो है ही, और वे सिद्धांत के बारे में थोड़ा-बहुत बोल सकते हैं, या वे जानते हैं कि दूसरों को कैसे जीता जाए, और कुछ चालाकियों का उपयोग कैसे करें, जिनके माध्यम से वे लोगों को अपने सामने ले आए हैं और उन्हें धोखा दे चुके हैं। नाम मात्र के लिए, वे लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, लेकिन वास्तव में वे अपने अगुवाओं का अनुसरण करते हैं। अगर वे उन लोगों का सामना करते हैं जो सच्चे मार्ग का प्रचार करते हैं, तो उनमें से कुछ कहेंगे, "हमें परमेश्वर में अपने विश्वास के बारे में हमारे अगुवा से परामर्श करना है।" देखिये, परमेश्वर में विश्वास करने के लिए कैसे उन्हें किसी की सहमति की आवश्यकता है; क्या यह एक समस्या नहीं है? तो फिर, वे सब अगुवा क्या बन गए हैं? क्या वे फरीसी, झूठे चरवाहे, मसीह-विरोधी, और लोगों के सही मार्ग को स्वीकार करने में अवरोध नहीं बन चुके हैं?

— "मसीह की बातचीतों के अभिलेख" में "केवल सत्य का अनुसरण ही परमेश्वर में सच्चा विश्वास है" से उद्धृत

हमने धार्मिक मंडलियों के भीतर बार-बार कई अगुवाओं को सुसमाचार का उपदेश दिया है, किन्तु हम उनके साथ सत्य पर कैसे भी संगति क्यों न करें, वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे। ऐसा क्यों है? ऐसा इसलिए है क्योंकि उनका घमंड एक मूल प्रवृत्ति बन गया है और परमेश्वर उनके हृदयों में अब और नहीं है! कुछ लोग कह सकते हैं: "धार्मिक दुनिया के कुछ पादरियों की अगुवाई में लोगों के पास वास्तव में बहुत अधिक प्रेरणा होती है। ऐसा लगता है कि परमेश्वर उनके बीच में है!" उन पादरियों के धर्मोपदेश भले ही कितने भी उत्कृष्ट क्यों न हों, क्या वे परमेश्वर को जानते हैं? यदि उन्होंने वास्तव में अपने हृदयों में परमेश्वर पर श्रद्धा रखी होती, तो क्या वे लोगों से अपना अनुसरण करवाते और अपना उत्कर्ष करवाते? क्या वे दूसरों पर एकाधिकार करते? क्या वे सत्य की तलाश करने और सच्चे मार्ग से जाँच करने वाले अन्य लोगों पर प्रतिबंध लगाने की हिम्मत करते? यदि वे मानते हैं कि परमेश्वर की भेड़ें वास्तव में उनकी हैं और परमेश्वर की सभी भेड़ों को उनकी बात सुननी चाहिए और वे जो कहते हैं उसमें सत्य निहित है, तो क्या वे स्वयं परमेश्वर होने का ढोंग नहीं कर रहे हैं? इस प्रकार के व्यक्ति फरीसियों से भी बदतर हैं—क्या वे मसीह-विरोधी नहीं हैं? इसलिए, अपने अभिमान के कारण, उन्होंने ऐसी चीज़ें की हैं जो परमेश्वर के साथ विश्वासघात करती हैं।

— "मसीह की बातचीतों के अभिलेख" में "मनुष्य का अभिमानी स्वभाव परमेश्वर के प्रति उसके विरोध की जड़ है" से उद्धृत

ऐसे लोग जो परमेश्वर के कार्य के उद्देश्य को नहीं समझते हैं वे लोग हैं जो परमेश्वर के विरुद्ध खड़े होते हैं, और इससे भी अधिक वे लोग हैं जो परमेश्वर के कार्य के उद्देश्य से अवगत हैं फिर भी परमेश्वर को संतुष्ट करने का प्रयास नहीं करते हैं। वे जो बड़ी-बड़ी कलीसियाओं में बाइबल पढ़ते हैं, वे हर दिन बाइबल पढ़ते हैं, फिर भी उनमें से एक भी परमेश्वर के कार्य के उद्देश्य को नहीं समझता है। एक भी इंसान परमेश्वर को नहीं जान पाता है; और यही नहीं, उनमें से एक भी परमेश्वर के हृदय के अनुरूप नहीं है। वे सबके सब व्यर्थ, अधम लोग हैं, जिनमें से प्रत्येक परमेश्वर को सिखाने के लिए ऊँचे पर खड़ा हैं। यद्यपि वे परमेश्वर के नाम पर धमकी देते हैं, किंतु वे जानबूझ कर उसका विरोध करते हैं। यद्यपि वे स्वयं को परमेश्वर का विश्वासी दर्शाते हैं, किंतु ये वे लोग हैं जो मनुष्यों का मांस खाते और रक्त पीते हैं। ऐसे सभी मनुष्य शैतान हैं जो मनुष्यों की आत्माओं को निगल जाते हैं, मुख्य राक्षस हैं जो जानबूझकर उन्हें विचलित करते हैं जो सही मार्ग पर कदम बढ़ाना चाहते हैं या सही मार्ग पर चलने का प्रयास करते हैं, और वे बाधाएँ हैं जो परमेश्वर को खोजने वालों के मार्ग में रुकावट उत्पन्न करती हैं। यद्यपि वे "मज़बूत देह" वाले हैं, किंतु उसके अनुयायियों को कैसे पता चलेगा कि वे ईसा-विरोधी हैं जो लोगों को परमेश्वर के विरोध में ले जाते हैं? वे कैसे जानेंगे कि ये जीवित शैतान हैं जो निगलने के लिए विशेष रूप से आत्माओं को खोज रहे हैं?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "जो लोग परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं" से उद्धृत

सम्बंधित मीडिया