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3. न्याय का रहस्य उजागर करना

3. न्याय का रहस्य उजागर करना

एनहुई, मलेशिया

मेरा नाम एनहुई है; मैं 46 साल की हूँ। मैं मलेशिया में रहती हूँ और 27 साल से प्रभु में विश्वास करती हूँ। अक्तूबर 2015 में मैं नौकरी करने के लिए दूसरे शहर चली गई। मेरे नए सहकर्मी वास्तव में फेसबुक पर थे, जिसका इस्तेमाल वे चैटिंग करने, नए दोस्त ढूँढ़ने और पोस्ट लिखने के लिए करते थे। यह देखकर कि मेरा फेसबुक खाता नहीं है, उन्होंने मेरा खाता बना दिया, और मैंने धीरे-धीरे सीख लिया कि किस तरह ऑनलाइन जाकर उसका इस्तेमाल करना है। जब मेरे पास समय होता, मैं प्रभु के विश्वासी कुछ भाई-बहनों की पोस्टों पर नज़र डाल लेती और उन्हें शेयर और लाइक करती। कभी-कभी मैं प्रभु की प्रशंसा के बारे में कुछ पोस्ट करती या अपने दोस्तों के समूह में लोगों के साथ प्रभु की कृपा साझा किया करती। हर दिन मेरे लिए सचमुच संतोषप्रद था।

फरवरी 2016 में एक दिन जब मैं अपने एक फेसबुक-मित्र का प्रोफाइल ब्राउज़ कर रही थी, मैंने यह पोस्ट देखी: "आज हमने अपने समूह में न्याय के मुद्दे पर चर्चा की। हम सबने अलग-अलग बातें कहीं, पर मुख्य बिंदुओं पर सहमत हुए। किसी ने कहा: 'अगर मुझे कुछ समझ में नहीं आता, तो मैं कुछ पुरानी बकवास झाड़ने की हिम्मत नहीं करता—यह ऐसा कुछ है, जो परमेश्वर भविष्य में करेगा और हमें बेबुनियाद अंदाजे लगाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।' किसी और ने कहा: 'भजन संहिता 75:2 में कहा गया है: "जब ठीक समय आएगा तब मैं आप ही ठीक ठीक न्याय करूँगा।" परमेश्वर हरेक आदमी के हर काम पर ध्यान देता है, इसलिए जब प्रभु यीशु सभी मनुष्यों का न्याय करने के लिए वापस आएँगे, तो वे हमारे काम सब पर ठीक उसी तरह जाहिर कर देंगे, जैसे कोई फिल्म चला दी जाए। इसलिए हमें अपने व्यवहार में हमेशा ईमानदार रहना चाहिए और कभी भी बुरा काम नहीं करना चाहिए, ताकि परमेश्वर हमारा न्याय करके हमें नरक में न डाल दें।' किसी और ने कहा: 'बाइबल में कहा गया है: "फिर मैं ने एक बड़ा श्‍वेत सिंहासन और उसको, जो उस पर बैठा हुआ है, देखा; उसके सामने से पृथ्वी और आकाश भाग गए, और उनके लिये जगह न मिली। फिर मैं ने छोटे बड़े सब मरे हुओं को सिंहासन के सामने खड़े हुए देखा, और पुस्तकें खोली गईं; और फिर एक और पुस्तक खोली गई, अर्थात् जीवन की पुस्तक; और जैसा उन पुस्तकों में लिखा हुआ था, वैसे ही उनके कामों के अनुसार मरे हुओं का न्याय किया गया" (प्रकाशितवाक्य 20:11-12)। धर्मग्रंथों से हम देख सकते हैं कि जब परमेश्वर यीशु अंत के दिनों में लौटेंगे, तो वे आकाश में एक विशाल मेज़ स्थापित करेंगे, उसके पीछे एक कुर्सी पर बैठेंगे और पुस्तकें खोलेंगे। फिर घुटनों पर झुकी संपूर्ण मानव-जाति के सामने वे हर व्यक्ति का नाम पुकारेंगे और एक-एक करके उनमें से प्रत्येक का उनके कामों के अनुसार न्याय करेंगे। अच्छे लोगों को प्रभु के द्वारा स्वर्ग के राज्य में ले जाया जाएगा, जबकि दुष्टों को नरक में डाला जाएगा।'"

इस पोस्ट को पढ़ने के बाद मैंने अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे अपने मन में मानव-जाति का न्याय करते हुए प्रभु यीशु की छवि चित्रित की: प्रभु एक सिंहासन पर बैठे हैं, सभी लोग उनकी मेज़ के सामने घुटने टेके हुए हैं और परमेश्वर के न्याय के लिए अपने सभी पाप स्वीकार कर रहे हैं, और प्रभु उनमें से प्रत्येक को उनके कर्मों के अनुसार स्वर्ग या नरक में भेज रहे हैं। मैंने विचार किया कि 20 वर्षों से मैं प्रभु की कितनी वफादार अनुयायी हूँ और मैंने उनकी शिक्षाओं को व्यवहार में लाने की पूरी कोशिश की है। मुझे विश्वास था कि प्रभु मेरी धर्मपरायणता देखेंगे और मुझे स्वर्ग के राज्य में ले जाएँगे। पर जब मैंने इस पर अधिकाधिक सोचा, तो मुझे अचानक एक ख़्याल आया: अब जबकि मुझे पता है कि इंटरनेट का इस्तेमाल कैसे किया जाता है, तो क्यों न उस पर "न्याय" की खोज कर लूँ और देखूँ कि क्या लिखा मिलता है? मैंने एक ब्राउज़र खोला और उसमें यह शब्द टाइप किया; यह तो मुझे याद नहीं कि मैंने किस लिंक पर क्लिक किया, पर मुझे हैरानी हुई जब अचानक यह वाक्य नज़र आया: "परमेश्वर की ताड़ना और न्याय है मनुष्य की मुक्ति का प्रकाश।" इसने मेरी रुचि तुरंत बढ़ा दी, इसलिए मैं और अधिक पढ़ने के लिए वेबसाइट पर गई। वेबपेज लोड होने पर मैंने "परमेश्वर की ताड़ना और न्याय है मनुष्य की मुक्ति का प्रकाश।" नामक वह स्तुति-गीत सुना, जो आनंददायक भी था और विचारोत्तेजक भी। स्तुति-गीत के बोल थे: "अपने जीवन में, यदि मनुष्य शुद्ध होना चाहता है और अपने स्वभाव में परिवर्तन हासिल करना चाहता है, यदि वह एक सार्थक जीवन बिताना चाहता है, और एक जीवधारी के रूप में अपने कर्तव्य को निभाना चाहता है, तो उसे परमेश्वर की ताड़ना और न्याय को स्वीकार करना चाहिए, और उसे परमेश्वर के अनुशासन और परमेश्वर के प्रहार को अपने आप से दूर नहीं होने देना चाहिए, इस प्रकार वह अपने आपको शैतान के छल प्रपंच और प्रभाव से मुक्त कर सकता है और परमेश्वर के प्रकाश में जीवन बिता सकता है। यह जानो कि परमेश्वर की ताड़ना और न्याय ज्योति है, और वह मनुष्य के उद्धार की ज्योति है, और मनुष्य के लिए उससे बेहतर कोई आशीष, अनुग्रह या सुरक्षा नहीं है" (मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना)।

स्तुति-गीत समाप्त होने पर मैंने उसके बोलों पर चिंतन-मनन किया; मुझे वह बहुत मर्मस्पर्शी लगा। मैं सोचने लगी: "क्या परमेश्वर की ताड़ना और न्याय मनुष्य की मुक्ति का प्रकाश है? क्या यह मानव-जाति की सबसे बड़ी सुरक्षा और अनुग्रह है? हम इसे कैसे समझें? अगर लोग शुद्ध होना और सार्थक जीवन जीना चाहते हैं, तो क्या इसका मतलब यह है कि उन्हें परमेश्वर की ताड़ना और न्याय स्वीकार करना होगा?" जब मैंने इन बोलों पर गहराई से विचार किया, तो कई सवाल मेरे दिमाग़ में घूम गए। मैंने यह भी सोचा: "यदि परमेश्वर मनुष्य का न्याय करता, तो क्या मनुष्य को अपराधी न ठहराया जाता? और कैसे न्याय मुक्ति का प्रकाश बन जाता है?" मैं उत्सुक और उत्साहित दोनों थी, क्योंकि मैंने ऐसा पहले कभी नहीं सुना था। भले ही स्तुति-गीत में जिस न्याय के बारे में बताया जा रहा था, वह वो न्याय नहीं था जो मैं समझती थी, फिर भी मुझे यह धुँधला-सा एहसास था कि न्याय वास्तव में अत्यधिक महत्व रखता है और व्यक्ति के भविष्य और भाग्य के लिए प्रासंगिक है। जब मैंने स्तुति-गीत के स्रोत की जाँच की, तो मैंने देखा कि वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का था, इसलिए मैं उनकी वेबसाइट पर गई। मैंने देखा कि न केवल उसका मुखपृष्ठ ही अनूठा और सौंदर्यपरकता की दृष्टि से मनभावन है, बल्कि उसकी सामग्री भी समृद्ध और वैविध्यपूर्ण है। उसमें सुनने के लिए चीजें थीं, पढ़ने के लिए चीजें थीं, गाने थे, चर्चा थी और बहुत सारी अन्य सामग्री थी। मैंने मन में सोचा: "इस वेबसाइट के बारे में मुझे किसी ने क्यों नहीं बताया? यह इतनी अच्छी है, फिर भी किसी ने इसे साझा नहीं किया, तो क्या इसलिए कि उन्हें यह अभी तक मिली नहीं?" मैंने उसके "पुस्तकें" वाले लिंक पर क्लिक किया और सूची पलटते हुए यह शीर्षक देखा: जीवन में प्रवेश के अनुभवों की गवाहियाँ। इस पर क्लिक करने पर मैंने देखा कि वे ज्यादातर परमेश्वर के न्याय की गवाहियाँ थीं, उदाहरण के लिए: "परमेश्वर के न्याय और ताड़ना ने मुझे बचाया", "परमेश्वर का न्याय और ताड़ना मेरे लिए एक महान उद्धार थे", "मैंने परमेश्वर के न्याय और ताड़ना में उनका प्यार देखा", "परमेश्वर के न्याय और ताड़ना ने मेरे पापपूर्ण हृदय को जागृत कर दिया", "परमेश्वर का न्याय और ताड़ना मुझे सही मार्ग पर ले आया।" मेरे काम पर जाने का समय हो गया था, इसलिए मेरे पास केवल इनमें से कुछ गवाहियों पर तेजी से नज़र डालने भर का समय था। वे सब विश्वासियों द्वारा लिखी गई थीं, जिनमें वर्णन किया गया था कि किस तरह उनके भ्रष्ट स्वभाव शुद्ध किए गए, और उनमें उनकी कमियों, भ्रष्टाचार, विश्वास में गलत विचारों आदि के बारे में भी बताया गया था, और यह भी कि किस तरह वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के न्याय के वचनों द्वारा कुछ हद तक बदल गए थे। इसने मुझे "परमेश्वर की ताड़ना और न्याय है मनुष्य की मुक्ति का प्रकाश" के बारे में और ज्यादा उत्सुक कर दिया। क्या यह हो सकता है कि न्याय का संबंध अपराधी ठहराए जाने से न हो? वह प्रत्येक व्यक्ति के अंत का निर्धारण करने से संबंध न रखता हो? मैं वास्तव में बेचैन महसूस करने लगी, और मैं जान गई कि मुझे "परमेश्वर की ताड़ना और न्याय है मनुष्य की मुक्ति का प्रकाश" में कही गई बात की तह में जाना है। मैं इस नतीजे पर पहुँची कि जीवन में प्रवेश के अनुभवों की गवाहियाँ संभवत: लोगों के विश्वास में उनके लिए एक बहुत ही उपयोगी पुस्तक है और मुझे इस पर अच्छे से विचार करना चाहिए। लेकिन समय कम रह गया था, इसलिए मैंने अपना कंप्यूटर बंद कर दिया और काम पर चली गई।

उस रात नींद न आने के कारण मैं बिस्तर पर करवटें बदल रही थी; सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की वेबसाइट की तस्वीरें मेरे मस्तिष्क में घूमती रहीं। मैं विशेष रूप से "परमेश्वर की ताड़ना और न्याय है मनुष्य की मुक्ति का प्रकाश" वाक्य को नहीं समझ पा रही थी और वास्तव में जानना चाहती थी कि "न्याय" का क्या अर्थ है।

मैं अगली सुबह जल्दी उठी, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की वेबसाइट खोली और "न्याय" शब्द की खोज शुरू कर दी। मैंने "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है," शीर्षक से एक लेख देखा, उसे खोला और ये वचन पढ़े: "पहले कहे गये वचनों में 'न्याय' परमेश्वर के घर से आरम्भ होगा, उस न्याय को संदर्भित करता है जो परमेश्वर आज उन लोगों पर करता है जो अंत के दिनों में उसके सिंहासन के सामने आते हैं। शायद यही लोग हैं जो ऐसी अलौकिक कल्पनाओं पर विश्वास करते हैं जैसे कि, जब अंतिम दिन आ चुके होंगे, तो परमेश्वर स्वर्ग में ऐसी बड़ी मेज़ स्थापित करेगा, जिस पर सफेद मेजपोश बिछा होगा, फिर परमेश्वर एक बड़े सिंहासन पर बैठेगा और सभी मनुष्य ज़मीन पर घुटने टेकेंगे। वह प्रत्येक मनुष्य के पापों को प्रकट करेगा और फलस्वरूप यह निर्धारित करेगा कि उन्हें स्वर्ग में आरोहण करना है या आग और गंधक की झील में डाला जाना है। इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि मनुष्य किस प्रकार की कल्पना करता है, परमेश्वर के कार्य का सार नहीं बदला जा सकता है। मनुष्य की कल्पनाएँ मनुष्य के विचारों की रचना से अधिक कुछ नहीं हैं, मनुष्य की देखी और सुनी हुई बातें जुड़कर और एकत्रित होकर उसके दिमाग से निकलती हैं। इसलिए मैं कहता हूँ कि छवियों की कितनी ही उत्कृष्ट कल्पना की जाए, वे तब भी एक आरेख से अधिक कुछ नहीं हैं और परमेश्वर के कार्य की योजना की विकल्प नहीं हैं। आख़िरकार, मनुष्य शैतान के द्वारा भ्रष्ट किए जा चुके हैं, तो वह कैसे परमेश्वर के विचारों की थाह पा सकते हैं? मनुष्य परमेश्वर के न्याय के कार्य को अत्यधिक विलक्षण होने की कल्पना करता है। वह विश्वास करता है कि चूँकि परमेश्वर स्वयं ही न्याय का कार्य कर रहा है, तो यह अवश्य ही बहुत ज़बर्दस्त पैमाने का और इंसानों के लिए समझ से बाहर होना चाहिए, इसे स्वर्ग भर में गूँजना और पृथ्वी को हिलाना अवश्य चाहिए; अन्यथा यह परमेश्वर द्वारा न्याय का कार्य कैसे हो सकता है? वह विश्वास करता है, क्योंकि यह न्याय का कार्य है, तो जब परमेश्वर कार्य करता है तो वह विशेष रूप से प्रभाव डालने वाला और प्रतापी अवश्य होना चाहिए, और जिनका न्याय किया जा रहा है उन्हें अवश्य आँसू बहाते हुए गिड़गिड़ाना और घुटनों पर टिक कर दया की भीख माँगनी चाहिए। इस तरह का दृश्य एक भव्य नज़ारा और अत्यंत उत्साहवर्धक अवश्य होना चाहिए...। हर कोई परमेश्वर के न्याय के कार्य के अलौकिक रूप से अद्भुत होने की कल्पना करता है। हालाँकि, क्या तुम जानते हो कि परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच न्याय के कार्य को काफी समय पहले आरम्भ किया और यह सब तब किया जबकि तुम शांतिपूर्ण विस्मृति में आश्रय लिए हुए हो? जिस समय तुम सोचते हो कि परमेश्वर के न्याय का कार्य अधिकृत तौर पर आरम्भ हो रहा है, तब तक तो परमेश्वर के लिए स्वर्ग और पृथ्वी को नए सिरे से बनाने का समय हो जाता है। उस समय, शायद तुमने केवल जीवन के अर्थ को ही समझा होगा, परन्तु परमेश्वर के न्याय का निष्ठुर कार्य तुम्हें, तब भी गहरी नींद और नरक में ले जाएगा। केवल तभी तुम अचानक महसूस करोगे कि परमेश्वर के न्याय का कार्य पहले से ही सम्पन्न हो चुका है।" मैं वास्तव में इन वचनों से चकित थी। वे अंत के दिनों के परमेश्वर के न्याय के कार्य के संबंध में लोगों के गहनतम विचार और मत बड़े सटीक ढंग से प्रकट करते थे—वे बहुत वास्तविक और व्यावहारिक भी थे। मुझे आश्चर्य हुआ, "क्या यह संभव है कि आकाश में न्याय का मेरे द्वारा किया गया विचार सिर्फ मेरी कल्पना हो? यह अंश दर्शाता है कि लोग परमेश्वर के न्याय के कार्य के रहस्यमय और अलौकिक होने की कल्पना करते हैं। यह अंश यह भी संकेत करता है कि न्याय का काम बहुत पहले शुरू हो गया था और जल्द ही समाप्त हो जाएगा, और यह लोगों को परमेश्वर की अभिव्यक्ति की कामना करने में समय बर्बाद न करने के लिए प्रेरित करता है। क्या यह परमेश्वर की आवाज़ हो सकती है?" उस विचार ने मुझे बेचैन कर दिया और मुझे वास्तव में तत्काल स्पष्टीकरण चाहिए था कि परमेश्वर के न्याय का वास्तव में क्या अर्थ है। किंतु सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की वेबसाइट पर बहुत अधिक सामग्री थी और उस समय मुझे नहीं पता था कि कहाँ से देखना शुरू करूँ, इसलिए मैंने खुद कलीसिया के सदस्यों की तलाश करके यह देखने का निर्णय किया कि क्या वे मुझे चीजों को समझने में मदद कर सकते हैं।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की वेबसाइट पर ऑनलाइन चैट फ़ंक्शन का इस्तेमाल करते हुए मैंने उन्हें एक संदेश भेजकर कहा कि मुझे न्याय के बारे में और अधिक जानने में रुचि है। किसी ने मुझे बहुत जल्दी जवाब दे दिया और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की दो बहनों लियू हुई और ली मेई से परिचय कराया, जो मुझसे जुड़ गईं। उनसे बातचीत करके मैंने पाया कि उन दोनों बहनों का दृष्टिकोण खुला और ईमानदार था और वे बहुत सीधी-सच्ची थीं; मैं उनके साथ खुले दिल से बात करना चाहती थी। मैंने उनसे कहा: "मुझे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की वेबसाइट वास्तव में पसंद है। यहाँ सभी प्रकार की आध्यात्मिक पुस्तकें, प्रशंसा के स्तुति-गीत, संगीत-वीडियो, सुसमाचार-फ़िल्में, परमेश्वर के वचनों का पाठ तथा और भी बहुत-कुछ है। यहाँ वास्तव में बहुत सारी सामग्री है, पर बस मैं यह नहीं समझ रही कि परमेश्वर के न्याय का क्या मतलब है। मैंने अभी 'मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है' पढ़ा, जिससे लगता है कि परमेश्वर के न्याय का काम शुरू हो चुका है और स्वर्ग में न्याय का विचार केवल मनुष्य की धारणाओं और कल्पना की उपज है। यह न्याय की मेरी सामान्य समझ से काफी अलग है। क्या आप इसके बारे में अपनी समझ मुझसे साझा कर सकती हैं?"

बहन लियू हुई ने उत्तर दिया: "परमेश्वर की स्तुति करो! आओ, हम तलाश और संगति एक-साथ करें! मैं भी इस बारे में इस तरह से सोचा करती थी और विश्वास करती थी कि अंत के दिनों में परमेश्वर के न्याय का कार्य ऊपर स्वर्ग में किया जाएगा। लेकिन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन पढ़कर और भाई-बहनों के साथ संगति करने के बाद मुझे पता चला कि यह वास्तव में मेरी अपनी धारणा थी, मेरी अपनी कल्पना। परमेश्वर के न्याय का कार्य स्वर्ग में किया जाएगा या धरती पर, इस बारे में बाइबल की कुछ भविष्यवाणियों में बहुत स्पष्ट रूप से कहा गया है। उदाहरण के लिए, प्रकाशितवाक्य 14:6–7 में कहा गया है: 'फिर मैं ने एक और स्वर्गदूत को आकाश के बीच में उड़ते हुए देखा, जिसके पास पृथ्वी पर के रहनेवालों की हर एक जाति, और कुल, और भाषा, और लोगों को सुनाने के लिये सनातन सुसमाचार था। उसने बड़े शब्द से कहा, "परमेश्‍वर से डरो, और उसकी महिमा करो, क्योंकि उसके न्याय करने का समय आ पहुँचा है; और उसका भजन करो, जिसने स्वर्ग और पृथ्वी और समुद्र और जल के सोते बनाए।"' स्तुति-गीत 96:13 में कहा गया है: 'क्योंकि वह आनेवाला है। वह पृथ्वी का न्याय करने को आनेवाला है, वह धर्म से जगत का, और सच्‍चाई से देश देश के लोगों का न्याय करेगा।' यूहन्ना 9:39 में यह कहा गया है: 'मैं इस जगत में न्याय के लिये आया हूँ, ताकि जो नहीं देखते वे देखें।' बाइबिल के इन पदों में उल्लेख है 'जिसके पास पृथ्वी पर के रहनेवालों की हर एक जाति,' 'वह पृथ्वी का न्याय करने को आनेवाला है' और 'मैं इस जगत में न्याय के लिये आया हूँ।' इससे हम देख सकते हैं कि अंत के दिनों में परमेश्वर को व्यक्तिगत रूप से दुनिया में आना चाहिए, और वह पृथ्वी पर न्याय का कार्य करने, सभी लोगों और सभी राष्ट्रों का न्याय करने के लिए आएगा। इसके अलावा, बाइबल पढ़ने से हमें पता चलता है कि परमेश्वर ने मानव-जाति का सृजन करने से पहले हमारे रहने का उपयुक्त वातावरण तैयार करने के लिए स्वर्ग, पृथ्वी और अन्य सभी चीजों का निर्माण किया। परमेश्वर ने तब मानव-जाति का निर्माण किया और हमारे लिए पृथ्वी पर रहने की व्यवस्था की, न कि स्वर्ग में। तो हमारे स्वर्ग में आरोहण करने की संभावना कैसे हो सकती है? भ्रष्ट मानव-जाति के पास यहाँ धरती पर ही परमेश्वर का न्याय स्वीकार करने के अलावा कोई चारा नहीं है। साथ ही, प्रकाशित वाक्यों की पुस्तक में यह दर्ज है कि यूहन्ना ने पेटमोस द्वीप पर आकाश में एक विशाल सफेद सिंहासन देखा। वास्तव में, यह यूहन्ना के ख़्यालों में से एक था, पर कुछ लोगों ने इसका शाब्दिक अर्थ यह बताया है कि जब परमेश्वर अंत के दिनों में लौटेंगे, तो वे आकाश में लोगों का न्याय करेंगे। यह हमारी अपनी धारणाओं और कल्पनाओं के सिवाय कुछ नहीं है, और यह भविष्यवाणियों की गलत व्याख्या है—यह परमेश्वर के काम की वास्तविकता नहीं है।"

मैंने जो सुना, उससे मैं दंग रह गई: मैंने बहन द्वारा साझा किए गए बाइबल के सभी पद पढ़े थे, तो फिर मैंने क्यों कभी उन वचनों के वास्तविक अर्थ पर ग़ौर नहीं किया? हाँ! परमेश्वर ने मानव-जाति को धरती पर रहने के लिए बनाया था, इसलिए हमारे लिए स्वर्ग तक जाना कैसे संभव हो सकता है? मेरा विश्वास वास्तव में अस्पष्टता और अज्ञानता से भरा था!

सिस्टर ली मेई ने इसके बाद मुझसे यह संगति की: "अंत के दिनों में परमेश्वर ने न केवल पृथ्वी पर न्याय का काम करने के लिए देहधारण किया है, बल्कि उनका काम बहुत समय पहले शुरू हो गया है और जल्द ही समाप्त हो जाएगा। परमेश्वर के न्याय का काम स्वर्ग में नहीं किया जाता, जैसा कि लोग कल्पना करते हैं, और यह लोगों को सीधे अपराधी ठहराना नहीं है, जैसा कि वे मानते हैं। वास्तव में, परमेश्वर के न्याय का कार्य समाप्त होने से पहले, वे सभी लोग जो परमेश्वर के सिंहासन के सामने आते हैं, उनका ही परमेश्वर के वचनों द्वारा न्याय, परीक्षण और और सफ़ाई की जा सकती है। वे सभी लोग, जो परमेश्वर का न्याय स्वीकार करते हैं और शुद्ध किए जाते हैं, परमेश्वर द्वारा अपने राज्य में ले जाए जाते हैं। पर जो लोग परमेश्वर के वचन स्वीकार करने से इंकार करते हैं, चूँकि उनके पापपूर्ण स्वभाव का न्याय और सफ़ाई परमेश्वर द्वारा नहीं की गई है, वे निरंतर पाप में जीते रहेंगे और पाप करते रहेंगे। वे झूठ बोलेंगे, धोखा देंगे, परमेश्वर के ख़िलाफ़ विद्रोह करेंगे और उसका विरोध करेंगे। वे अपने पापों के लिए नरक में मिटाए जाएँगे—यह परमेश्वर के धर्मी स्वभाव की सच्ची अभिव्यक्ति है। हममें से जिन लोगों ने कई वर्षों तक प्रभु का अनुसरण किया है, उन्होंने गहराई से अनुभव किया है कि यद्यपि हमारे विश्वास के कारण हमें हमारे पापों से छुटकारा मिल गया है, फिर भी हमारे पापपूर्ण स्वभाव की समस्या हल नहीं हुई है। हम प्रभु का अनुसरण करते हुए भी अक्सर उसकी शिक्षाओं के ख़िलाफ़ जाते हैं और उन पर चलने के बजाय अपनी दैहिक इच्छाओं को पाप करने की खुली छूट दे देते हैं, जैसे कि झूठ बोलना, धोखा देना, साज़िशों में शामिल होना और प्रसिद्धि तथा ऐश्वर्य के लिए संघर्ष करना। हम झूठे ग़रूर के लिए लालायित रहते हैं और भौतिक दुनिया की बुरी प्रवृत्तियों के पीछे भागते हैं, आदि-आदि। विशेष रूप से जब हमें परीक्षणों, दुर्घटनाओं और आपदाओं का सामना करना पड़ता है, तो हम परमेश्वर को ग़लत समझते हैं, उसे दोष देते हैं, यहाँ तक कि उसे धोखा दे देते हैं। हम कह सकते हैं कि हम निरंतर पाप करने की स्थिति में रह रहे हैं और हम अपने पाप तो स्वीकार करते हैं, पर कभी अपने पापपूर्ण स्वभाव के बंधनों से मुक्त नहीं होते। बाइबिल में कहा गया है: 'उस पवित्रता के खोजी हो जिसके बिना कोई प्रभु को कदापि न देखेगा' (इब्रानियों 12:14)। जो लोग परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर रहे हैं, वे भ्रष्ट कैसे हो सकते हैं? सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने कहा है: 'तुम लोगों जैसा पापी, जिसे परमेश्वर के द्वारा अभी-अभी छुड़ाया गया है, और जो परिवर्तित नहीं किया गया है, या सिद्ध नहीं बनाया गया है, क्या तुम परमेश्वर के हृदय के अनुसार हो सकते हो? तुम्हारे लिए, तुम जो कि अभी भी पुराने अहम् वाले हो, यह सत्य है कि तुम्हें यीशु के द्वारा बचाया गया था, और कि परमेश्वर द्वारा उद्धार की वजह से तुम्हें एक पापी के रूप में नहीं गिना जाता है, परन्तु इससे यह साबित नहीं होता है कि तुम पापपूर्ण नहीं हो, और अशुद्ध नहीं हो। यदि तुम्हें बदला नहीं गया तो तुम संत जैसे कैसे हो सकते हो? भीतर से, तुम अशुद्धता से घिरे हुए हो, स्वार्थी और कुटिल हो, मगर तब भी तुम यीशु के साथ आरोहण चाहते हो—तुम्हें बहुत भाग्यशाली होना चाहिए! तुम परमेश्वर पर अपने विश्वास में एक कदम चूक गए हो: तुम्हें मात्र छुटकारा दिया गया है, परन्तु परिवर्तित नहीं किया गया है। तुम्हें परमेश्वर के हृदय के अनुसार होने के लिए, परमेश्वर को व्यक्तिगत रूप से तुम्हें परिवर्तित करने और शुद्ध करने के कार्य को करना होगा; यदि तुम्हें सिर्फ छुटकारा दिया जाता है, तो तुम पवित्रता को प्राप्त करने में असमर्थ होगे। इस तरह से तुम परमेश्वर के अच्छे आशीषों को साझा करने के लिए अयोग्य होगे, क्योंकि तुमने मनुष्य का प्रबंधन करने के परमेश्वर के कार्य के एक कदम का सुअवसर खो दिया है, जो कि परिवर्तित करने और सिद्ध बनाने का मुख्य कदम है। और इसलिए तुम, एक पापी जिसे अभी-अभी छुटकारा दिया गया है, परमेश्वर की विरासत को सीधे तौर पर उत्तराधिकार के रूप में पाने में असमर्थ हो' ("वचन देह में प्रकट होता है" में "उपाधियों और पहचान के सम्बन्ध में")। इसलिए, अंत के दिनों के दौरान, परमेश्वर अपने प्रबंधन की योजना लागू कर रहा है और भ्रष्ट मानव-जाति की ज़रूरतों के अनुसार लोगों के न्याय, ताड़ना और सफ़ाई के काम का चरण पूरा कर रहा है। इसका उद्देश्य हमें शैतान के प्रभुत्व से पूरी तरह से बचाना और हमारे पापपूर्ण स्वभाव की बेड़ियाँ दूर करना है, ताकि हमें शुद्ध किया और बचाया जा सके। इससे हम देख सकते हैं कि अंत के दिनों के न्याय का परमेश्वर का कार्य सफ़ाई और उद्धार से संबंध रखता है। इसका संबंध हमें अपराधी ठहराने से नहीं है, जैसा कि लोग कल्पना करते हैं।"

बहन लियू हुई मेरे साथ संगति करती गई: "यह सही है, बहन एनहुई। आओ, इसके बारे में सोचें, यदि परमेश्वर के न्याय का कार्य हमें अपराधी ठहराना और दंडित करना होता, तो क्या शैतान द्वारा गहराई तक भ्रष्ट किए जा चुके हम लोगों में से एक भी व्यक्ति कभी बचाया जा सकता या परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने में सक्षम हो पाता? अगर ऐसा होता, तो परमेश्वर के न्याय के कार्य का अर्थ ही क्या है? सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों में स्पष्ट बताया गया है कि क्यों परमेश्वर अंत के दिनों में न्याय का कार्य करता है, और इसका क्या महत्व है। आओ, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों के ये दो अंश पढ़ें: 'मनुष्य का सारा जीवन शैतान के प्रभुत्व के अधीन बीतता है, और ऐसा एक भी इंसान नहीं है जो अपने बलबूते पर अपने आपको शैतान के प्रभाव से आज़ाद कर सकता है। सभी लोग भ्रष्टता और खालीपन में, बिना किसी अर्थ या मूल्य के, एक गन्दे संसार में रहते हैं; वे शरीर के लिए, वासना के लिए और शैतान के लिए ऐसी लापरवाह ज़िन्दगियाँ बिताते हैं। उनके अस्तित्व का जरा सा भी मूल्य नहीं है। मनुष्य उस सत्य को खोज पाने में असमर्थ है जो उसे शैतान के प्रभाव से मुक्त कर देगा। यद्यपि मनुष्य परमेश्वर पर विश्वास करता है और बाइबल पढ़ता है, फिर भी वह यह नहीं जानता है कि वह अपने आपको शैतान के नियन्त्रण से आज़ाद कैसे करे। विभिन्न युगों के दौरान, बहुत ही कम लोगों ने इस रहस्य को जाना है, और बहुत ही कम लोगों ने इसे स्पर्श किया है। ... यदि मनुष्य को स्वच्छ नहीं किया जाता है, तो वह गंदगी से सम्बन्धित है; यदि परमेश्वर के द्वारा उसकी सुरक्षा और देखभाल नहीं की जाती है, तो वह अभी भी शैतान का बन्धुआ है; यदि उसका न्याय और उसकी ताड़ना नहीं की जाती है, तो उसके पास शैतान के बुरे प्रभाव के दमन से बचने का कोई उपाय नहीं होगा। वह भ्रष्ट स्वभाव जो तू दिखाता है और वह अनाज्ञाकारी व्यवहार जो तू करता है, वे इस बात को साबित करने के लिए काफी हैं कि तू अभी भी शैतान के शासन के अधीन जी रहा है। यदि तेरे मस्तिष्क और विचारों को शुद्ध नहीं किया गया है, और तेरे स्वभाव का न्याय और उसकी ताड़ना नहीं की गई है, तो तेरी पूरी हस्ती को अभी भी शैतान के प्रभुत्व के द्वारा नियन्त्रित किया जाता है, तेरा मस्तिष्क शैतान के द्वारा नियन्त्रित किया जाता है, तेरे विचार शैतान के द्वारा कुशलता से इस्तेमाल किए जाते हैं, और तेरी पूरी हस्ती शैतान के हाथों नियन्त्रित होती है' ("वचन देह में प्रकट होता है" में "पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान")। 'न्याय और ताड़ना के इस कार्य के माध्यम से, मनुष्य अपने भीतर के गन्दे और भ्रष्ट सार को पूरी तरह से जान जाएगा, और वह पूरी तरह से बदलने और स्वच्छ होने में समर्थ हो जाएगा। केवल इसी तरीके से मनुष्य परमेश्वर के सिंहासन के सामने वापस लौटने के योग्य हो सकता है। वह सब कार्य जिसे आज किया गया है वह इसलिए है ताकि मनुष्य को स्वच्छ और परिवर्तित किया जा सके; न्याय और ताड़ना के वचन के द्वारा और साथ ही शुद्धिकरण के माध्यम से, मनुष्य अपनी भ्रष्टता को दूर फेंक सकता है और उसे शुद्ध किया जा सकता है' ("वचन देह में प्रकट होता है" में "देहधारण का रहस्य (4)")। तो परमेश्वर के वचनों से हम क्या अनुभव कर सकते हैं? उन्हें एक कोण से देखने पर हम देख सकते हैं कि परमेश्वर के वचन अत्यंत व्यावहारिक हैं और हमारे जीवन की वास्तविक स्थिति बहुत अच्छी तरह से दर्शाते हैं। दूसरे कोण से हम देख सकते हैं कि हमें पहले परमेश्वर के न्याय का अनुभव करना है, ताकि खुद को गंदगी और भ्रष्टाचार से छुटकारा दिला सकें और शैतान के अँधेरे प्रभाव से बच सकें। तभी हम परमेश्वर द्वारा उसके राज्य में ले जाए जाने के योग्य होंगे। अंत के दिनों के परमेश्वर के न्याय के बिना हम उतने स्वच्छ नहीं हो सकते कि वैसे व्यक्ति बन जाएँ जो परमेश्वर के हृदय के अनुसार हैं, और हम निश्चित रूप से परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने में सक्षम नहीं होंगे। हम कभी भी पाप करना और परमेश्वर का विरोध करना बंद नहीं करेंगे, और अंतत: परमेश्वर द्वारा हमें नरक में मिटा दिया जाएगा। वास्तव में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के भाई-बहनों की वास्तविक जीवन की गवाहियों से हम देख सकते हैं कि परमेश्वर का न्याय और ताड़ना मानव-जाति के लिए मुक्ति का प्रकाश है। शैतान ने हम सभी को भ्रष्ट कर दिया है, पर चूँकि हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सामने आ सकते हैं और परमेश्वर के वचनों का न्याय और ताड़ना प्राप्त कर सकते हैं, इसलिए हमारे जीवन का स्वभाव धीरे-धीरे बदल जाता है। हम विद्रोह और प्रतिरोध से स्वीकृति और अधीनता तक जाते हैं; हम अहंकार, दंभ और किसी के आगे न झुकने से अपने अहंकार का त्यागने के लिए तैयार होने और सही व सत्य के आगे झुकने की स्थिति तक जाते हैं। इसके अलावा, परमेश्वर के न्याय और ताड़ना में जो कुछ भी व्यक्त किया गया है, वह सब सच है, और वह परमेश्वर के धर्मी और पवित्र स्वभाव की अभिव्यक्ति भी है, इसलिए जितना अधिक हम परमेश्वर के न्याय और ताड़ना का अनुभव करते हैं, उतना अधिक हम परमेश्वर को जानते हैं। और जितना अधिक हम परमेश्वर को जानते हैं, उतना अधिक स्पष्ट हम दुनिया में लोगों, चीजों और घटनाओं को देख सकते हैं। तदनुसार, हमारे दृष्टिकोण और मूल्य अलग-अलग मात्रा में बदलते हैं। हम परमेश्वर के प्रति अधिक श्रद्धा और समर्पण प्राप्त करते हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के न्याय और ताड़ना से हमें यह उपलब्धि हासिल होती है। परमेश्वर के वचनों में सत्य के प्रकाश के न्याय के बिना हम सभी अँधेरे में रहेंगे, पाप करेंगे और फिर उन्हें बार-बार स्वीकार करेंगे और फिर पाप के बंधनों से कभी मुक्त न होकर हर दिन फिर से पाप करेंगे। तो फिर हम परमेश्वर द्वारा कभी भी उसके राज्य में कैसे ले जाए जा सकते हैं?"

ली और लियू बहनों के साथ संगति करने के बाद ऐसा महसूस हुआ, जैसे मेरे दिल में एक तेज रोशनी हो गई हो। उन्होंने जो कहा, वह सच था: मेरे कलीसिया के पादरी, बुजुर्ग और भाई-बहन सभी ख़ुद को पाप के बंधन से छुड़ा पाने में असमर्थ थे। मैं ख़ुद भी अक्सर ख़ुद के बावजूद पाप करती थी और प्रभु के वचनों को अमल में लाने में असमर्थ थी। हम सभी पाप करने और फिर उन्हें स्वीकार करने की स्थिति में जी रहे हैं—हमें सही मायने में परमेश्वर के लौटने और उसके द्वारा न्याय और स्वच्छता के काम का चरण पूरा किए जाने की आवश्यकता है। अगर मैंने अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के काम पर ध्यान न दिया होता, तो ये सच्चाइयाँ मेरी समझ में कभी न आतीं। मैंने परमेश्वर के मार्गदर्शन के लिए बहुत आभार महसूस किया। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन पढ़ने और बहनों की संगति सुनने के साथ-साथ सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के भाई-बहनों की लिखित गवाहियाँ पढ़कर, जिनमें बताया गया था कि किस तरह परमेश्वर के वचनों के न्याय के जरिये उनके भ्रष्ट स्वभाव शुद्ध किए गए, मैंने अंत के दिनों के परमेश्वर के न्याय के कार्य की थोड़ी समझ हासिल कर ली थी। मेरी अपनी धारणाएँ नष्ट हो गई थीं और अब मुझे पता चल गया था कि पाप से बचने और शुद्धिकरण प्राप्त करने के लिए परमेश्वर का न्याय और ताड़ना हमारे लिए अनिवार्य है।

तब लियू हुई ने कहा: "आओ, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों के दो अंश और पढ़ें। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने कहा: 'अपने न्याय का कार्य करने में, परमेश्वर केवल कुछ वचनों के माध्यम से मनुष्य की प्रकृति को स्पष्ट नहीं करता है; बल्कि वह लम्बे समय तक इसे उजागर करता है, इससे निपटता है, और इसकी काट-छाँट करता है। उजागर करने की इन विधियों, निपटने, और काट-छाँट को साधारण वचनों से नहीं, बल्कि सत्य से प्रतिस्थापित किया जा सकता है, जिसे मनुष्य बिल्कुल भी धारण नहीं करता है। केवल इस तरीके की विधियाँ ही न्याय समझी जाती हैं; केवल इसी तरह के न्याय के माध्यम से ही मनुष्य को वश में किया जा सकता है और परमेश्वर के प्रति समर्पण में पूरी तरह से आश्वस्त किया जा सकता है, और इसके अलावा मनुष्य परमेश्वर का सच्चा ज्ञान प्राप्त कर सकता है। न्याय का कार्य जिस चीज़ को उत्पन्न करता है वह है परमेश्वर के असली चेहरे और उसकी स्वयं की विद्रोहशीलता के सत्य के बारे में मनुष्य में समझ। न्याय का कार्य मनुष्य को परमेश्वर की इच्छा की, परमेश्वर के कार्य के उद्देश्य की, और उन रहस्यों की अधिक समझ प्राप्त करने देता है जो उसके लिए समझ से परे हैं। यह मनुष्य को उसके भ्रष्ट सार तथा उसकी भ्रष्टता के मूल को पहचानने और जानने, साथ ही मनुष्य की कुरूपता को खोजने देता है। ये सभी प्रभाव न्याय के कार्य के द्वारा पूरे होते हैं, क्योंकि इस कार्य का सार वास्तव में उन सभी के लिए परमेश्वर के सत्य, मार्ग और जीवन का मार्ग प्रशस्त करने का कार्य है जिनका उस पर विश्वास है। यह कार्य परमेश्वर के द्वारा किया गया न्याय का कार्य है' ("वचन देह में प्रकट होता है" में "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है")। 'जो मसीह के द्वारा कहे गए सत्य पर भरोसा किए बिना जीवन प्राप्त करने की अभिलाषा करते हैं, वे पृथ्वी पर सबसे हास्यास्पद मनुष्य हैं और जो मसीह के द्वारा लाए गए जीवन के मार्ग को स्वीकार नहीं करते हैं वे कल्पना में ही खोए हुए हैं। इसलिए मैं यह कहता हूँ कि लोग जो अंत के दिनों में मसीह को स्वीकार नहीं करते हैं वे हमेशा के लिए परमेश्वर के द्वारा तुच्छ समझे जाएंगे। अंत के दिनों में मसीह मनुष्यों के लिए परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने का माध्यम है, जिसकी अवहेलना कोई भी नहीं कर सकता। मसीह के माध्यम बिना कोई भी परमेश्वर के द्वारा पूर्णता को प्राप्त नहीं कर सकता। परमेश्वर में तुम्हारा विश्वास है, और इसलिए तुम उसके वचनों को स्वीकार करो और उसके मार्ग का पालन करो। बिना सत्य को प्राप्त किए या बिना जीवन के प्रावधान को स्वीकार किए तुमको सिर्फ़ अनुग्रह प्राप्त करने के बारे में सोचना नहीं है। मसीह अंत के दिनों में आता है ताकि वे सभी जो सच्चाई से उस पर विश्वास करते हैं उन्हें जीवन प्रदान किया जाए। उसका कार्य पुराने युग को समाप्त करने और नए युग में प्रवेश करने के लिए है और यही वह मार्ग है जिसे नए युग में प्रवेश करने वालों को अपनाना चाहिए। यदि तुम उसे पहचानने में असमर्थ हो, और उसकी भर्त्सना करते हो, निंदा करते हो और यहां तक कि उसे पीड़ा पहुंचाते हो, तो तुम अनन्त समय तक जलाए जाते रहने के लिए निर्धारित कर दिये गए हो और तुम कभी भी परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर पाओगे' ("वचन देह में प्रकट होता है" में "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है")। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों से यह देखा जा सकता है कि मानव-जाति की जरूरतों के अनुसार मानवता को स्वच्छ करने और बचाने हेतु सभी सच्चाइयाँ जाहिर करने के लिए परमेश्वर ने अंत के दिनों में देहधारण किया है। वह परमेश्वर के धर्मी स्वभाव को प्रकट करता है, जो मानव-जाति के प्रति कोई अपराध सहन नहीं करेगा। अपने वचनों के माध्यम से परमेश्वर लोगों की प्रकृति और सार तथा उनके भ्रष्टाचार की वास्तविक स्थिति उजागर करता है। केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त किए गए न्याय के वचन स्वीकार करके ही हम अपना अहंकार, चालाकी, स्वार्थ, बुराई आदि जान सकते हैं, जो सब हमारी शैतानी प्रकृति और भ्रष्ट स्वभाव का हिस्सा हैं। केवल परमेश्वर का न्याय और ताड़ना स्वीकार करके ही हम परमेश्वर के धर्मी स्वभाव को जान सकते हैं और परमेश्वर के प्रति श्रद्धा और सच्चे पश्चात्ताप के हृदय विकसित कर सकते हैं। इस तरह हम अपने भ्रष्ट स्वभाव का परिवर्तन और सफ़ाई हासिल कर सकते हैं। यह परमेश्वर के न्याय का महत्व है, और यह हमारे उद्धार का एकमात्र मार्ग भी है। बहन एनहुई, जब हम ईमानदारी से सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का अधिक से अधिक पाठ करेंगे, तब हमें परमेश्वर के अंत के दिनों के न्याय के काम का महत्व स्पष्ट हो जाएगा, यहाँ तक कि हम देखेंगे कि केवल अंत के दिनों के मसीह ही लोगों के लिए अनंत जीवन का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।"

प्रभु की स्तुति करो! मुझे बहनों के साथ संवाद करने से बहुत बड़ी राशि मिली। भले ही अभी मैं परमेश्वर के न्याय और ताड़ना का अनुभव न कर पाई हूँ, पर उनके साथ संगति करके और जीवन में प्रवेश के अनुभवों की गवाहियाँ पढ़कर मैंने महसूस किया है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर का न्याय और ताड़ना वास्तव में लोगों को बदल सकते हैं। मुझे यह भी लगता है कि मुझे खुद को परिवर्तित और शुद्ध करने के लिए वास्तव में परमेश्वर द्वारा अपने न्याय और ताड़ना का चरण पूरा किए जाने की आवश्यकता है, ताकि मैं स्वर्ग के राज्य में ले जाने के योग्य हो जाऊँ। बाद में एक दिन, संगति के कुछ और दिनों के बाद, मुझे परमेश्वर के न्याय के काम का महत्व और परमेश्वर के नामों की सच्चाई और अधिक समझ में आई। मैंने सच्चे मसीह को झूठे मसीह से और सच्ची कलीसियों को झूठी कलीसियों से अलग पहचानने की सच्चाइयाँ भी सीखीं। मैंने परमेश्वर के देहधारण की सच्चाइयाँ, परमेश्वर और मनुष्य के कार्यों के बीच का अंतर भी जाना और यह भी कि शैतान मानव-जाति को किस तरह भ्रष्ट करता है, परमेश्वर हमें किस तरह बचाता है, आदि। मैं इस दृढ़ निष्कर्ष पर पहुँची कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही वास्तव में लौटे हुए प्रभु यीशु हैं, और प्रसन्न मन से मैंने अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार किया। परमेश्वर की स्तुति करो! तब से मुझमें परमेश्वर के वचन पढ़ने की एक अमिट प्यास जाग गई। एक कलीसियाई जीवन जीकर, भाई-बहनों के साथ सच्चाइयों की संगति करके और परमेश्वर के वचनों की सिंचाई और पोषण स्वीकार करके मुझे लगता है कि मेरी आत्मा जीविका का एक बड़ा लाभ प्राप्त कर रही है। इसने मुझे बाइबल में प्रकाशित वाक्यों की पुस्तक की इस भविष्यवाणी के पूरी तरह पूर्ण होने की गवाही देने की अनुमति दी है: "देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ" (प्रकाशितवाक्य 3:20)। मैंने इसे व्यक्तिगत रूप से अपने भीतर पूरी होते हुए भी महसूस किया। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों ने मेरे दिल का दरवाज़ा खटखटाकर खोल दिया है और मुझे परमेश्वर की आवाज़ सुनने, परमेश्वर के न्याय के कार्य को जानने और उसके सामने लौटने की अनुमति दी है। परमेश्वर की स्तुति हो!

मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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