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19. एक "संदेशवाहक कबूतर" लाया महत्वपूर्ण समाचार

19. एक "संदेशवाहक कबूतर" लाया महत्वपूर्ण समाचार

सू जी, चीन

1999 में एक दिन एक सभा समाप्त होने के बाद पादरी ने मुझसे संपर्क किया और कहा, "सू जी, आपके लिए एक पत्र है।" पत्र देखते ही मुझे पता चल गया कि वह उस कलीसिया से आया है, जिसे मैंने शानदोंग में स्थापित किया था। मैंने पत्र ले लिया और घर जाने लगी। रास्ते में मुझे ख़याल आया, "यह पत्र इतना मोटा है, कहीं उन्हें कुछ कठिनाइयों का सामना तो नहीं करना पड़ गया?"

घर पहुँचने के बाद मैं पत्र खोलने का इंतजार नहीं कर सकी और उसमें मैंने पढ़ा: "बहन सू, आपको प्रभु की शांति मिले! यह पत्र मैं आपको एक असाधारण समाचार देने के लिए लिख रहा हूँ: हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु, जिनके लिए हम रात-दिन तरसते रहे हैं, लौट आए हैं। वे पहले ही देहधारण करके लौट चुके हैं और चीन में अपने वचनों के माध्यम से लोगों का न्याय करने और उन्हें निर्मल बनाने के चरण का काम कर रहे हैं; उन्होंने अनुग्रह के युग अंत कर दिया है और राज्य के युग की शुरुआत की है। ... मुझे आशा है कि आप परमेश्वर के नए कार्य को स्वीकार करेंगी और परमेश्वर के नक्शेकदम पर चलेंगी। जो कुछ भी आप करें, अंतिम दिनों के परमेश्वर के उद्धार के इस अवसर को न चूकें।" एक बार जब मैंने उस बिंदु तक पढ़ा, तो मुझे एक झटका लगा: उन्हें वास्तव में कोई कठिनाई नहीं हुई है, बल्कि उन्होंने चमकती पूर्वी बिजली में विश्वास करना शुरू कर दिया है! मैं यह जानने के लिए उत्सुक हुई कि यह पत्र किसने लिखा है, इसलिए मैं जल्दी से अंतिम पृष्ठ पर गई। पता चला कि भाई मेंग ने उसे लिखा था और उसके अंत में कलीसिया के अन्य सभी भाई-बहनों के हस्ताक्षर भी थे। पूरा पत्र पढ़ने के बाद मैं अवाक् रह गई। मैंने कुछ क्षण उसे शून्य दृष्टि से घूरा और फिर सँभलकर अपने मन में सोचा: "चमकती पूर्वी बिजली इस बात की गवाही देती है कि प्रभु लौट आए हैं, और उन्होंने कई संप्रदायों से कई अच्छी और प्रमुख भेड़ें चुरा ली हैं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि शानदोंग कलीसिया के भाई मेंग भी चमकती पूर्वी बिजली में विश्वास करेंगे। इस कलीसिया के सभी भाई-बहनों को चमकती पूर्वी बिजली ने चुरा लिया है—क्या किया जा सकता है?" इस विचार के आने पर मुझे तात्कालिकता का और भी बड़ा एहसास हुआ, लेकिन शानदोंग की यात्रा बहुत लंबी थी और मैं यहाँ अपने काम में फँसी थी। मैं तुरंत वहाँ नहीं जा सकती थी। इस बेबसी की हालत में मैं केवल रो ही सकती थी और प्रभु से प्रार्थना ही कर सकती थी: "प्रभु! इन भाई-बहनों को आप पर विश्वास हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है और और उनकी नींव अभी पुख्ता नहीं हुई है। कृपया उन पर नज़र बनाए रखें...।"

उसके बाद मैंने बाइबिल में गहरी खोजबीन की और काग़ज़-क़लम लेकर उन्हें पहला पत्र लिखने लगी। पत्र में मैंने लिखा: "भाइयो और बहनो, यीशु मसीह के संबंध में मैं आदरपूर्वक आपको सावधान रहने की सलाह देती हूँ। पॉल ने कहा था: 'मुझे आश्‍चर्य होता है कि जिसने तुम्हें मसीह के अनुग्रह में बुलाया उससे तुम इतनी जल्दी फिर कर और ही प्रकार के सुसमाचार की ओर झुकने लगे। परन्तु वह दूसरा सुसमाचार है ही नहीं: पर बात यह है कि कितने ऐसे हैं जो तुम्हें घबरा देते, और मसीह के सुसमाचार को बिगाड़ना चाहते हैं। परन्तु यदि हम, या स्वर्ग से कोई दूत भी उस सुसमाचार को छोड़ जो हम ने तुम को सुनाया है, कोई और सुसमाचार तुम्हें सुनाए, तो शापित हो। जैसा हम पहले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूँ कि उस सुसमाचार को छोड़ जिसे तुम ने ग्रहण किया है, यदि कोई और सुसमाचार सुनाता है, तो शापित हो' (गलातियों 1:6-9)। भाइयो और बहनो, आपको प्रभु के सामने लाना कोई आसान काम नहीं था; आप इतनी जल्दी प्रभु को धोखा कैसे दे सकते हैं? आपका आध्यात्मिक कद बहुत छोटा है—लापरवाह होकर अन्य मार्गों के बारे में मत सुनें! आपको मेरी बात जरूर सुननी चाहिए, क्योंकि मैंने जो कुछ आपके साथ साझा किया है, वह सच्चा मार्ग है। केवल प्रभु यीशु मसीह ही हमारे उद्धारकर्ता हैं। आपको हमेशा इसका समर्थन करना चाहिए...।" पत्र पूरा लिखने और आठ पृष्ठों के उस पत्र को अच्छी तरह से देखने के बाद ही मैंने अपने आपको सहज महसूस किया। मैंने मन में सोचा: मैंने वह सब लिख दिया जो मुझे लिखना चाहिए, उन सभी धर्मशास्त्रों पर विचार किया, जिन पर मुझे विचार करना चाहिए, और सलाह और प्रोत्साहन के वे सभी शब्द लिखे, जो मुझे लिखने चाहिए। मुझे विश्वास है कि इसे पढ़ने के बाद वे निश्चित रूप से जवाब देंगे और अपनी गलती स्वीकार करेंगे।

दो हफ्ते बाद मुझे यह उत्तर मिला: "बहन सू, हम वह सब नहीं बोल सकते, जो हमने देखा और सुना है, क्योंकि जिस सर्वशक्तिमान परमेश्वर में हम विश्वास करते हैं, वे लौटे हुए प्रभु यीशु हैं। हम सही रास्ते पर चल रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं; हमने प्रभु के साथ जरा भी विश्वासघात नहीं किया है, बल्कि हम प्रभु के पदचिह्नों पर चल रहे हैं। आपने पॉल के इन वचनों का उल्लेख किया है: 'मुझे आश्‍चर्य होता है कि जिसने तुम्हें मसीह के अनुग्रह में बुलाया उससे तुम इतनी जल्दी फिर कर और ही प्रकार के सुसमाचार की ओर झुकने लगे। परन्तु वह दूसरा सुसमाचार है ही नहीं: पर बात यह है कि कितने ऐसे हैं जो तुम्हें घबरा देते, और मसीह के सुसमाचार को बिगाड़ना चाहते हैं' (गलातियों 1:6-7)। पॉल ने जो कहा, उसकी एक अलग पृष्ठभूमि है। हमें सिर्फ यह जानने के लिए बाइबिल का अध्ययन करने की आवश्यकता है कि पॉल ने तब जिस 'दूसरे सुसमाचार' के बारे में कहा था, वह फरीसियों द्वारा लोगों से यहोवा के नियम का पालन करने के लिए कहा गया था; वह अंतिम दिनों के लोगों द्वारा राज्य के सुसमाचार का प्रसार करने और इस बात की गवाही देने के संबंध में नहीं था कि प्रभु देह में लौट आया है और परमेश्वर के घर से शुरू करके न्याय का अपना कार्य कर रहा है। जब पॉल ने यह पत्र गैलेशियन कलीसियाओं को लिखा, तो कोई भी परमेश्वर के राज्य के सुसमाचार का प्रचार नहीं कर रहा था। इसलिए पॉल ने जिस 'दूसरे सुसमाचार' की बात कही थी, वह प्रभु के लौटने और परमेश्वर के घर से शुरू करके अंतिम दिनों का अपना न्याय का कार्य करने के बारे में नहीं थी। न्याय के कार्य का यह चरण, जिसे करने के लिए अब प्रभु लौटकर आए हैं, प्रकाशित वाक्य की पुस्तक की इस भविष्यवाणी को पूरा करता है: 'फिर मैं ने एक और स्वर्गदूत को आकाश के बीच में उड़ते हुए देखा, जिसके पास पृथ्वी पर के रहनेवालों की हर एक जाति, और कुल, और भाषा, और लोगों को सुनाने के लिये सनातन सुसमाचार था। उसने बड़े शब्द से कहा, "परमेश्‍वर से डरो, और उसकी महिमा करो, क्योंकि उसके न्याय करने का समय आ पहुँचा है; और उसका भजन करो, जिसने स्वर्ग और पृथ्वी और समुद्र और जल के सोते बनाए"' (प्रकाशितवाक्य 14:6-7)। यहाँ 'सनातन सुसमाचार' से तात्पर्य राज्य के सुसमाचार से है। इतना ही नहीं, इस अंतिम उद्धार को बहुत पहले पवित्र आत्मा द्वारा प्रभु यीशु के शिष्यों के सामने प्रकट किया गया था। जैसा कि पीटर ने कहा: 'क्योंकि वह समय आ पहुँचा है कि पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए' (1 पतरस 4:17)। 'जिनकी रक्षा परमेश्‍वर की सामर्थ्य से विश्‍वास के द्वारा उस उद्धार के लिये, जो आनेवाले समय में प्रगट होनेवाली है, की जाती है' (1 पतरस 1:5)। बहन सू, क्या हम विश्वासी प्रभु की वापसी के लिए ही नहीं तरस रहे हैं? अब प्रभु वास्तव में लौट आए हैं; हमें विनम्र खोजी होना चाहिए। हम फरीसियों की तरह वैसा व्यवहार बिलकुल नहीं कर सकते, जैसा उन्होंने परमेश्वर के पहले देहधारण में प्रभु यीशु के साथ किया था। फरीसियों ने प्रभु के कार्य की हदबंदी करने, प्रभु यीशु के नियम का पालन न करने के कारण उनकी निंदा और विरोध करने, और फिर उन्हें सूली पर चढ़ाने के लिए बाइबिल के ज्ञान और अपनी धारणाओं तथा कल्पनाओं का आँख बंद करके इस्तेमाल किया था। फरीसी केवल यहोवा परमेश्वर को मानते थे, लेकिन उन्होंने परमेश्वर के देहधारण—प्रभु यीशु के कार्य—को बिलकुल स्वीकार नहीं किया और अंततः वे प्रभु द्वारा निंदित और शापित हुए। क्या यह खूनी सबक हमारे लिए विचारणीय नहीं है? इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि प्रभु यीशु हमारे उद्धारकर्ता हैं। लेकिन अगर हम केवल प्रभु यीशु को स्वीकार करते हैं और उनकी वापसी को स्वीकार नहीं करते, तो क्या हम फरीसियों के समान नहीं हैं? तब क्या हम परमेश्वर को मानने के बावजूद उनका विरोध करने वाले नहीं बन जाते? इसके अलावा, बहन सू, हम जैसा आप कहती हैं, वैसा केवल इसलिए नहीं कर सकते, क्योंकि आपने हमें प्रभु का सुसमाचार सुनाया था। हम परमेश्वर में विश्वास करते हैं। पतरस और दूसरे प्रेरितों ने एक बार कहा था, 'मनुष्यों की आज्ञा से बढ़कर परमेश्‍वर की आज्ञा का पालन करना ही हमारा कर्तव्य है' (प्रेरितों 5:29)। और प्रभु के आने से संबंधित मामलों में हम विशेष रूप से केवल दूसरे लोगों की बात नहीं सुन सकते। हम पहले ही निश्चित कर चुके हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर का वचन परमेश्वर की वाणी है। हमें उम्मीद है कि आप भी इस पर ग़ौर करेंगी।"

पत्र पढ़ते हुए मैं क्रुद्ध हो गई और जरा भी आश्वस्त नहीं हुई। आवेश में आकर मैंने अपनी बाइबिल की संदर्भ-पुस्तक उठाई और गैलेशियंस की पुस्तक के परिचय वाला पृष्ठ खोला। मैंने उसे ध्यान से पढ़ा, तो हैरान रह गई: यह वास्तव में सच था! पॉल ने जिस "दूसरे सुसमाचार" के बारे में कहा था, वह वास्तव में फरीसियों द्वारा लोगों को यहोवा के नियम का पालन करने के लिए प्रेरित करने के संदर्भ में था; निश्चित रूप से वह प्रभु द्वारा लौटने पर परमेश्वर के घर से शुरू करके न्याय करने के कार्य के संदर्भ में नहीं था। बीते तमाम वर्षों में मेरे ध्यान में यह क्यों नहीं आया कि उस पद का यह संदर्भ है? कोई आश्चर्य नहीं कि वे लोग आश्वस्त नहीं हुए। लेकिन फिर मेरा विचार एक दूसरी दिशा में गया: भले ही मैंने जो कहा वह गलत था, लेकिन फिर भी यह साबित नहीं हो सकता कि प्रभु लौट आए हैं, जैसा कि वे प्रचार करते हैं। मैंने पत्र शुरू से अंत तक दोबारा पढ़ा और जितना मैं उसे पढ़ती गई, उतना ज्यादा गुस्सा होती गई। मैंने सोचा, "मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि इतने कम समय में ही ये लोग मेरे साथ इतने ऊँचे लहजे में बोलने की धृष्टता करेंगे, यहाँ तक कि मुझे ... मुझे फरीसी कहने की हिम्मत करेंगे। मुझे फरीसियों से सबसे ज्यादा नफ़रत है। भला मैं फरीसियों की तरह प्रभु का विरोध कैसे कर सकती हूँ? मैंने विश्वासियों के लिए इतने सालों तक दिन-रात कड़ी मेहनत की है। वे यह क्यों नहीं समझते?" जितना अधिक मैंने इसके बारे में सोचा, उतना अधिक परेशान मैंने महसूस किया और सोचा: "नहीं, मैं उन मुट्ठी भर विश्वासियों से बहस में कैसे मात खा सकती हूँ, जो अभी इतने अनुभवहीन हैं? मैंने बाइबिल कई बार पढ़ी है—इस बहस में मेरे न जीतने का कोई कारण नहीं है।"

इसलिए मैंने एक बार फिर से अपनी क़लम चलाई और उन्हें एक दूसरा पत्र लिखा, जिसमें मैंने कहा, "भाइयो और बहनो, आपको प्रभु की शांति मिले! आपका पत्र पढ़ना मेरे लिए बहुत परेशान करने वाला था। मैं आपको ऐसा करने के लिए इसलिए नहीं कह रही हूँ, क्योंकि ऐसा मैं कहती हूँ—आपने असल में मेरी मंशा को गलत समझा है। मुझे आपके प्रभु यीशु के मार्ग से हटने का डर है, क्योंकि प्रभु यीशु ने कहा था: 'उस समय यदि कोई तुम से कहे, 'देखो, मसीह यहाँ है!' या 'वहाँ है!' तो विश्‍वास न करना। क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्‍ता उठ खड़े होंगे, और बड़े चिह्न, और अद्भुत काम दिखाएँगे कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें' (मत्ती 24:23-24)। पॉल ने भी कहा था: 'हे भाइयो, अब हम अपने प्रभु यीशु मसीह के आने, और उसके पास अपने इकट्ठे होने के विषय में तुम से विनती करते हैं कि किसी आत्मा, या वचन, या पत्री के द्वारा, जो कि मानो हमारी ओर से हो, यह समझकर कि प्रभु का दिन आ पहुँचा है, तुम्हारा मन अचानक अस्थिर न हो जाए और न तुम घबराओ। किसी रीति से किसी के धोखे में न आना' (2 थिस्सलुनीकियों 2:1-3)। प्रिय भाइयो और बहनो, मैं आपको प्रभु यीशु के नाम पर सलाह देती हूँ कि अंतिम दिनों में आने वाले दिन खतरनाक होंगे, और आपको किसी ऐसे व्यक्ति पर विश्वास नहीं करना चाहिए, जो प्रभु के आने का प्रचार करता हो। हमें अत्यंत सावधान रहना होगा और प्रभु के वचनों को ध्यान में रखना होगा, वरना कहीं ऐसा न हो कि हम गलत रास्ता अपना लें और प्रभु को नाराज़ कर दें!"

दो हफ्ते बाद मुझे उनसे एक और पत्र मिला, जिसमें लिखा था: "बहन सू, आपने हमारे लिए धर्मशास्त्र का जो उद्धरण ढूँढ़ा है, वह गलत नहीं है, लेकिन हमें प्रभु यीशु के इन वचनों के सही अर्थ के बारे में स्पष्ट होना चाहिए और प्रभु की इच्छा को गलत नहीं समझना चाहिए। प्रभु यीशु ने हमें स्पष्ट रूप से कहा था कि जब अंतिम दिनों में प्रभु आएँगे, तो झूठे मसीह प्रकट होंगे, और वे झूठे मसीह प्रभु के नाम का इस्तेमाल करके सच्चे मसीह होने का दावा करेंगे और लोगों को धोखा देने के लिए चमत्कार दिखाएँगे। ऐसा कहकर प्रभु हमें विवेक का इस्तेमाल करने के लिए कह रहे हैं; वे यह नहीं कह रहे कि प्रभु के आने का प्रचार करने वाले सभी झूठे हैं। यदि, जैसा कि आप कहती हैं, प्रभु के आने का प्रचार करने वाले सभी झूठे हैं और हमें उनसे सावधान रहना चाहिए और उन्हें अस्वीकार कर देना चाहिए, तो क्या इस बात की बहुत संभावना नहीं हो जाएगी कि हम देह में लौटे प्रभु यीशु के लिए दरवाज़ा ही बंद कर दें? हम ऐसा इसलिए कहते हैं, क्योंकि प्रभु ने कहा था कि वे फिर से आएँगे। जाहिर है, इस तरह का परिप्रेक्ष्य प्रभु की इच्छा के अनुरूप नहीं है। रही बात यह कि सच्चे मसीह और झूठे मसीहों के बीच अंतर कैसे करें, तो हमने आपके लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों के एक अंश का लिप्यंतरण किया है और आशा करते हैं कि आप इस पर अच्छी तरह नज़र डालेंगी। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने कहा था: 'यदि, वर्तमान समय में, कोई व्यक्ति उभर कर आता है जो चिह्नों और चमत्कारों को प्रदर्शित करने, पिशाचों को निकालने, चंगाई करने में और कई चमत्कारों को करने में समर्थ है, और यदि यह व्यक्ति दावा करता है कि वो यीशु की वापसी है, तो यह दुष्टात्माओं की जालसाजी और उसका यीशु की नकल करना होगा। इस बात को स्मरण रखें! परमेश्वर एक ही कार्य को दोहराता नहीं है। यीशु के कार्य का चरण पहले ही पूर्ण हो चुका है, और परमेश्वर फिर से उस चरण के कार्य को पुनः नहीं दोहराएगा' ("वचन देह में प्रकट होता है" में "आज परमेश्वर के कार्य को जानना")। परमेश्वर का काम संभवतः हमेशा अपरिवर्तनशील नहीं हो सकता। परमेश्वर का काम हमेशा नया होता है, कभी पुराना नहीं होता और कभी दोहराया नहीं जाता। जिस तरह व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग में परमेश्वर का काम दो अलग-अलग चरणों का काम था। अंतिम दिनों में परमेश्वर ने पहले ही मानवजाति की जरूरतों के अनुसार अपने वचनों के माध्यम से लोगों का न्याय करने और उन्हें निर्मल बनाने के काम का एक चरण पूरा कर दिया है। यह लोगों को पूरी तरह से शुद्ध करने और बचाने का एक चरण है। यह पिछले काम की तुलना में नया, ऊँचा और अधिक व्यावहारिक है। परमेश्वर के कार्य के प्रत्येक चरण से हम उनके द्वारा व्यक्त सत्यों के साथ-साथ उनके कार्य की बुद्धिमत्ता, अधिकार और शक्ति देख सकते हैं। लेकिन झूठे मसीह दुष्ट आत्माओं के अधीन होते हैं और उनमें परमेश्वर का सार नहीं होता। उनमें सत्य का नितांत अभाव होता है, इसलिए वे सत्य को व्यक्त करने में असमर्थ होते हैं और परमेश्वर की सर्वशक्तिमत्ता, बुद्धिमत्ता और स्वभाव को व्यक्त नहीं कर पाते। यह स्पष्ट है कि झूठे मसीह परमेश्वर का काम बिलकुल नहीं कर सकते। झूठे मसीह केवल उस काम की नकल कर सकते हैं, जो प्रभु यीशु पहले ही कर चुके हैं, जैसे कि बीमार लोगों को ठीक करना, राक्षसों को बाहर निकालना और लोगों को धोखा देने के प्रयास में खुद को असली मसीह बताने के लिए कुछ सामान्य चमत्कार दिखाना। बहन, हमें प्रभु के वचनों की शुद्ध समझ होनी ज़रूरी है; हम प्रभु की इच्छा का गलत अर्थ नहीं लगा सकते, अपने चेहरे से नापसंदगी जताने के लिए बिना सोचे-समझे सिर्फ इसलिए अपनी नाक नहीं काट सकते, क्योंकि अंतिम दिनों में झूठे मसीह दिखाई देते हैं। हम प्रभु के लौटने के कार्य का अध्ययन भी नहीं कर सकते...।"

हालाँकि पत्र में भाइयों और बहनों की सहभागिता बहुत पुख़्ता थी, फिर भी मेरा उसे स्वीकार करने या उस पर विचार करने का बिलकुल भी इरादा नहीं हुआ। मुझे केवल इस बात की चिंता थी कि मैंने जो धर्मशास्त्रों के उद्धरण उनके लिए ढूँढ़े थे, उन्हें स्वीकार कर वे वापस प्रभु की ओर मुड़े या नहीं। मैंने वापस अपने पत्र-व्यवहार की इन दो बहसों के बारे में सोचा और पाया कि वे जरा भी आश्वस्त नहीं थे। दूसरी तरफ, मैंने उन्हें इस सीमा तक बहस करने की अनुमति दी, जिससे मैं चेहरा दिखाने लायक नहीं रही। मैंने जल्दी से जाकर प्रभु से प्रार्थना की और फिर बाइबिल और अपनी सभी आध्यात्मिक पुस्तकें उठाकर अपने बिस्तर पर रख दीं। उन लोगों का खंडन करने के लिए एक आधार खोजने हेतु मैं वे पुस्तकें पलटती रही। कमरा पूरी तरह से खामोश था, सिवाय एक सरसराहट के, जो मेरे पन्ने पलटने से हो रही थी। मुझे पता भी नहीं चला कि कब रात हो गई और मुझे अभी भी कुछ नहीं मिला था। मैं इतनी थक गई थी कि मैंने एक गहरी आह भरी और सोचा: "इस पत्र का उत्तर दे पाना वाकई मुश्किल है।" मैं बस यही कर सकती थी कि अपनी क़लम उठाई और लिखने लगी: "भाइयो और बहनो, आपके पत्र को पढ़कर मुझे यह एहसास हुआ कि अब आप वे प्यारे नन्हे मेमने नहीं रहे, जो कभी हुआ करते थे। आपने मेरी बात तक नहीं सुनी, आप प्रभु के मार्ग से हटने पर जोर देते हैं, और आप मेरे इतने विरुद्ध हैं। मुझे लगता है कि आपका व्यवहार परमेश्वर को दुःख देता है, और मैं भी बहुत दुखी भी हूँ। प्रभु यीशु आपको प्रेरित करें और यह पत्र आपको जल्दी ही वापस लौटने में सक्षम बनाए। आमीन!"

कुछ हफ़्ते बाद मुझे उनसे एक और उत्तर मिला, लेकिन यह देखकर मुझे निराशा हुई कि वे मेरे प्यार और प्रोत्साहन के कारण पीछे नहीं हटे थे। इसके विपरीत, उन्होंने कठोरतापूर्वक और स्पष्ट रूप से कहा: "बहन सू, आपने हमें रूपांतरित किया, यह सच है, पर इसके लिए हमें वास्तव में परमेश्वर को धन्यवाद देना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर ने ही आपकी मदद से हम खोई और भटकती हुई भेड़ों को एक झुंड में इकट्ठा किया था। आप सिर्फ झुंड की देखभाल करने वाली एक सेविका थीं, हमारे सच्चे चरवाहे केवल प्रभु यीशु ही हैं। जैसा कि प्रभु यीशु ने कहा था: 'अच्छा चरवाहा मैं हूँ; मैं अपनी भेड़ों को जानता हूँ, और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं' (यूहन्ना 10:14)। प्रभु हर उस व्यक्ति को भेड़ें सौंपता है, जो उसके लिए काम करता है। उस व्यक्ति की जिम्मेदारी केवल उनकी देखभाल करना और प्रभु के वापस लौटने पर झुंड उन्हें वापस लौटा देना है। सिस्टर सू, हम सभी 'दुष्ट किरायेदारों' के दृष्टांत को जानते हैं, जिसे प्रभु यीशु ने बाइबिल में बताया था। संपत्ति पर जबरन कब्जा करने के लिए किरायेदारों ने फल एकत्र करने आए नौकरों को पीटा, और जब मकान-मालिक ने अपने बेटे को भेजा, तो उन्होंने संपत्ति पर कब्जा करने के लिए बेटे को मार डाला। जब मकान-मालिक लौटेगा, तो वह इन दुष्ट किरायेदारों से किस तरह निपटेगा? हमें उनके जैसा बिलकुल नहीं होना चाहिए। प्रभु अब लौट आए हैं, और हमें प्रभु की भेड़ें प्रभु को सौंप देनी चाहिए। यही विवेक हमारे पास होना चाहिए।"

इस चिट्ठी ने वाकई मुझे अचंभित कर दिया। मैंने मन सोचा: "वे पलक झपकते ही इतनी समझ कैसे हासिल कर सकते हैं? शानदोंग जाकर उस कलीसिया की स्थापना किए मुझे सिर्फ दो साल ही हुए हैं। जब मैं वहाँ से आई, तो वे अभी भी अपने विश्वास में 'शिशुओं' जैसे थे। मैंने कभी नहीं सोचा था कि चमकती पूर्वी बिजली को स्वीकार करने के कुछ ही महीनों बाद उनके वचनों में इतनी ताकत होगी, या कि वे मुझे बहस में नीचा दिखाने के लिए बाइबिल का ऐसा पुख़्ता अंश खोजने में सक्षम होंगे, कि उनका मुकाबला करने के लिए मेरे पास एक शब्द भी नहीं बचेगा।" उस क्षण मुझे बहुत निराशा हुई और मुझे लगा कि ये भाई-बहन चमकती पूर्वी बिजली का अनुसरण करने के अपने संकल्प में अडिग हो गए हैं और उनकी वापस लौटने की कोई योजना नहीं है। मैं जान गई कि मैं उन्हें वापस लौटने के लिए राज़ी नहीं कर पाऊँगी। पूरी तरह से कमज़ोर और शक्तिहीन महसूस करते हुए मैंने अनिच्छा से उन्हें एक चौथा पत्र भेजा, जिसमें मैंने लिखा: "अपने आपको ठीक करें। जैसा कि बाइबिल में लिखा है, प्राचीन काल से, जो परमेश्वर से उपजा है वह फले-फूलेगा होगा और जो मनुष्य से उपजा है वह हारेगा। मुझे फिर से मत लिखना। मुझे उम्मीद है कि आप लोग यीशु मसीह के प्रति अपने विश्वास और प्रेम को बनाए रखने में सक्षम हैं।"

शानदोंग के भाई-बहनों द्वारा साझा किए गए अंत के दिनों के परमेश्वर के काम को अस्वीकार करने के बाद मेरा उत्साह ठंडा और कमज़ोर पड़ गया था और मेरी सामान्य स्थिति बिगड़ गई थी। हालाँकि मैंने अकसर उपवास और प्रार्थना की और इस बात पर विचार किया कि कहीं मैंने प्रभु के खिलाफ पाप तो नहीं किया, पर मैं कभी भी प्रभु की इच्छा को नहीं समझ नहीं पाई, और न प्रभु की उपस्थिति महसूस कर सकी। इसी दौरान पादरियों और एल्डरों ने चढ़ावे के पैसे हड़पने की होड़ में मेरे खिलाफ झूठे आरोप लगाए, और सफलतापूर्वक मुझे कलीसिया से बाहर निकाल दिया। मैं बेहद दु:खी थी और नहीं जानती थी कि कहाँ जाऊँ। मैं अकसर नदी-किनारे जाती और रोते हुए "प्रभु, तुम पक्के दोस्त हो मेरे" नामक भजन गाती। मैंने परमेश्वर के जल्दी लौट आने की कामना की, ताकि वह मुझे मेरे संकटों से बचा सके।

छह महीने बाद एक दिन दोपहर का भोजन करते समय मैंने अपनी सास को सामने के दरवाजे के बाहर से अपना नाम पुकारते सुना। दरवाज़ा खोलने पर मैंने कोमल मुखाकृति वाली एक छरहरी युवा महिला को अपनी सास के पीछे खड़ा पाया। मेरी सास ने कहा, "यह युवा बहन तुमसे मिलने आई है। इसके पास तुम्हारा पता है, पर यह तुम्हें ढूँढ़ नहीं पाई, इसलिए कलीसिया चली गई। इसने कहा कि इसे तुमसे तुरंत मिलना है, इसलिए मैं जल्दी से इसे लेकर तुम्हारे पास आ गई।" मैंने उस बहन को ध्यान से देखा और सोचा: "मैं इसे क्यों नहीं जानती?" मुझे देखकर वह सीधे मेरे पास आ गई और मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर उत्साहपूर्वक बोली: "तो आप हैं बहन सू। आखिरकार मैंने आपको ढूँढ़ ही लिया!" उसकी हरकतों से हतप्रभ होकर मैंने उसकी ओर आश्चर्य से देखा और पूछा: "तुम कौन हो? मुझे नहीं लगता कि हम पहले मिल चुके हैं?" उसकी उत्साही प्रतिक्रिया थी: "बहन, मेरा कुलनाम वांग है। मैं यहाँ शानदोंग के भाई मेंग और बहन झाओ की वजह से हूँ। भाई मेंग और अन्य लोगों ने यहाँ सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को पत्र लिखकर हमसे तुम्हें खोजने का कोई तरीका ढूँढ़ने के लिए कहा, चाहे जो हो जाए। उन्होंने हमें आपके साथ परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार साझा करने का काम सौंपा है, क्योंकि वे बहुत व्यस्त हैं और उनके पास व्यक्तिगत रूप से आने का वाकई समय नहीं है। मुझे नहीं पता कि यह पत्र कितने लोगों के हाथों से गुज़रा है, लेकिन यह हमारे पास पहुँचने से पहले काफी घूमा है। मैं आपके बारे में पूछते हुए कई बार यहाँ आई हूँ। आपको ढूँढ़ना आसान नहीं था।" इतना कहकर उस युवा बहन का गला अवरुद्ध हो गया और उसने पत्र मेरे हाथों में दे दिया। मैंने उसे लिया और पढ़ने लगी: "बहन सू एक सच्ची विश्वासी हैं। कृपया, आपको उन्हें ढूँढ़ना होगा और परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार उनके साथ साझा करना होगा।" ये शब्द पढ़कर मेरे दिल में गर्माहट आ गई और मेरे आँसू बहने से नहीं रुक पाए। मेरी सास द्रवित हो गई और बोली: "यह वास्तव में परमेश्वर के लिए धन्यवाद है! यह वास्तव में प्रभु का प्रेम है!" इस दयालु और निष्कपट बहन को देखते हुए मैंने उस पत्र के दिल को छू लेने वाले, हार्दिक शब्दों पर विचार किया और मैं भाई-बहनों द्वारा प्रभु के लौटने का सुसमाचार मुझसे साझा करने की तात्कालिकता की भावना महसूस कर पाई। मेरी आत्मा के भीतर से मेरे अंतर्ज्ञान ने मुझे बताया कि यह प्यार परमेश्वर से आया है। केवल परमेश्वर ही इस तरह से हर एक आत्मा को पोषित करते हैं और हर उस व्यक्ति की गहराई से परवाह करते हैं, जो वास्तव में परमेश्वर में विश्वास करते हैं। और इसलिए, मैंने तय किया कि इस बार मैं अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के काम की खोज और अध्ययन करूँगी। मै अब और मना नहीं कर सकती। मैंने उत्साह से उससे कहा: "बहन, अंदर आकर बैठो।" उसने खुशी से सिर हिलाया, उसकी आँखें अभी भी आँसुओं से चमक रही थीं।

हमने अल्पाहार लिया और फिर मैंने अपनी सहकर्मी बहन झांग को भी बुला लिया। मेरे पति ने सुना कि हम सहभागिता करने जा रहे हैं, तो उन्होंने भी एक दिन की छुट्टी ले ली। युवा बहन ने गर्मजोशी से पूछा: "बहन, भाई मेंग ने अपने पत्र में लिखा था कि उन्होंने अंत के दिनों के परमेश्वर के काम के बारे में आपको कई पत्र लिखे थे, लेकिन आपने उसे स्वीकार नहीं किया। मैं सोचती हूँ कि इस बारे में आपके क्या विचार हैं? बहन, अगर आपको कोई कठिनाई है, तो कृपया हमसे साझा करें; हम सहभागिता कर सकते हैं और मिलकर खोज सकते हैं।" मैंने कहा: "चूँकि तुम पूछ रही हो, तो मैं खुलकर अपने विचार तुमसे साझा करती हूँ। मैं अंत के दिनों में प्रकट होने वाले झूठे मसीहों से धोखा खाने से डरती रही हूँ और इसलिए 'प्रभु के लौटने का प्रचार करने वाले सभी लोगों को झूठा' समझती हूँ, इसीलिए मैंने कभी अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के काम की जाँच-पड़ताल नहीं की। बाद में मैंने भाई मेंग और अन्य लोगों द्वारा अपने पत्रों में कही गई बातों के बारे में सोचा, और विचार किया कि कि उनका क्या आशय है। अंत के दिनों में झूठे मसीहों के प्रकट होने के कारण प्रभु के लौटने के किसी भी सुसमाचार को आँख बंद करके अस्वीकार कर देना वाकई अपने चेहरे से नापसंदगी जताने के लिए अपनी नाक काट लेने जैसा है। हालाँकि, यदि हम प्रभु के लौटने का स्वागत करना चाहते हैं, तो हम सच्चे मसीह और झूठे मसीहों के बीच अंतर करने में असमर्थ नहीं हो सकते। चूँकि आप यहाँ हैं, अत: कृपया इस पर हमारे साथ सहभागिता करें।" बहन झांग, मेरे पति और मेरी सास ने भी सहमति में अपना सिर हिलाया।

बहन ने तब हमें परमेश्वर के वचनों का एक अंश पढ़कर सुनाया, जिसमें सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने कहा है: "ऐसी बात का अध्ययन करना कठिन नहीं है, परंतु इसके लिए हममें से प्रत्येक को इस सत्य को जानने की ज़रूरत है: जो देहधारी परमेश्वर है, वह परमेश्वर का सार धारण करेगा, और जो देहधारी परमेश्वर है, वह परमेश्वर की अभिव्यक्ति धारण करेगा। चूँकि परमेश्वर देहधारी हुआ, वह उस कार्य को प्रकट करेगा जो उसे अवश्य करना चाहिए, और चूँकि परमेश्वर ने देह धारण किया, तो वह उसे अभिव्यक्त करेगा जो वह है, और मनुष्यों के लिए सत्य को लाने में समर्थ होगा, मनुष्यों को जीवन प्रदान करने, और मनुष्य को मार्ग दिखाने में सक्षम होगा। जिस शरीर में परमेश्वर का सार नहीं है, निश्चित रूप से वह देहधारी परमेश्वर नहीं है; इस बारे में कोई संदेह नहीं है। यह पता लगाने के लिए कि क्या यह देहधारी परमेश्वर है, मनुष्य को इसका निर्धारण उसके द्वारा अभिव्यक्त स्वभाव से और उसके द्वारा बोले वचनों से अवश्य करना चाहिए। कहने का अभिप्राय है कि वह परमेश्वर का देहधारी शरीर है या नहीं, और यह सही मार्ग है या नहीं, इसे परमेश्वर के सार से तय करना चाहिए। और इसलिए, यह निर्धारित करने[क] में कि यह देहधारी परमेश्वर का शरीर है या नहीं, बाहरी रूप-रंग के बजाय, उसके सार (उसका कार्य, उसके वचन, उसका स्वभाव और बहुत सी अन्य बातें) पर ध्यान देना ही कुंजी है। यदि मनुष्य केवल उसके बाहरी रूप-रंग को ही देखता है, उसके तत्व की अनदेखी करता है, तो यह मनुष्य की अज्ञानता और उसके अनाड़ीपन को दर्शाता है" ("वचन देह में प्रकट होता है" के लिए प्रस्तावना)। परमेश्वर के वचनों को पढ़ने के बाद इस युवा बहन ने सहभागिता में कहा: "सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों से हम देख सकते हैं कि सच्चे मसीह और झूठे मसीहों के बीच अंतर की कुंजी उनके सार को देखना है। यह उनके काम, वचनों और स्वभाव से पहचाना जा सकता है। प्रभु यीशु ने एक बार कहा था: 'मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ' (यूहन्ना 14:6)। स्पष्ट रूप से, चूँकि वे देह में परमेश्वर थे, इसलिए वे सत्य को व्यक्त कर सकते थे और परमेश्वर का स्वयं का काम कर सकते थे; वे परमेश्वर के अपने स्वभाव और उनके पास क्या है और वे क्या हैं, को भी व्यक्त कर सकते थे। जिस तरह अनुग्रह के युग में प्रभु यीशु ने अनेक सत्य व्यक्त किए, मुख्य रूप से दया और प्रेम का स्वभाव व्यक्त किया, और पूरी मानवजाति के छुटकारे का काम पूरा किया। प्रभु यीशु के कार्य और वचनों से, और उनके द्वारा व्यक्त किए गए स्वभाव से, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि यीशु मसीह सत्य, मार्ग और जीवन थे, और वे स्वयं देहधारी परमेश्वर थे। अब सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने आकर मानवजाति को शुद्ध करने और बचाने के लिए सभी सत्य व्यक्त किए हैं; उन्होंने लोगों का न्याय और उनकी ताड़ना करने का अंत के दिनों का काम किया है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन शैतान द्वारा मनुष्य को भ्रष्ट करने का सत्य और मनुष्य की प्रकृति और सार प्रकट करते हैं। वे हमें सत्य के सभी पहलू बताते हैं, जैसे कि उद्धार प्राप्त करना क्या है, स्वभावगत बदलाव क्या है और उसे प्राप्त करने का कौन-सा मार्ग है, साथ ही साथ मानवजाति का भावी गंतव्य क्या है और सभी प्रकार के लोगों का क्या अंत होगा। उनके वचन परमेश्वर की छह हजार साल की प्रबंधन-योजना और देहधारणों के रहस्यों को भी प्रकट करते हैं, साथ ही वे परमेश्वर के निहित स्वभाव, सार और जो उनके पास है और जो वे हैं, को भी व्यक्त करते हैं। अगर हम परमेश्वर के वचनों को कर्मठता से पढ़ें, तो हम देख पाएँगे कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा कहे गए वचन सत्य की आत्मा की आवाज़ हैं, अंत के दिनों के न्याय का मार्ग हैं। अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य ने बाइबिल की भविष्यवाणियाँ पूरी की हैं, जैसे, 'पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए' (1 पतरस 4:17)। 'जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा' (यूहन्ना 16:13)। और 'जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा' (यूहन्ना 12:48)। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने जो सत्य व्यक्त किए हैं, लोगों का न्याय करने, उनकी ताड़ना करने और उन्हें शुद्ध करने का जो काम उन्होंने किया है, और उनके द्वारा व्यक्त धार्मिकता से चिह्नित स्वभाव, सब पूरी तरह पुष्टि करते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर अंत के दिनों के मसीह की अभिव्यक्ति है। लेकिन इसके विपरीत, झूठे मसीहों में परमेश्वर का सार नहीं है। उनमें से ज्यादातर बुरी आत्माओं के अधीन हैं या बेहद घमंडी दानव और पूर्णत: विवेकरहित बुरी आत्माएँ हैं। वे न तो लोगों को पोषण प्रदान करने के लिए सत्य व्यक्त कर सकते हैं, और न ही वे लोगों को शुद्ध करने के लिए न्याय का कार्य कर सकते हैं। वे साधारण चिह्न और चमत्कार दिखाकर केवल उन मूर्ख, अज्ञानी, भ्रमित लोगों को धोखा दे सकते हैं, जो भूख मिटाने के लिए रोटी से अपना पेट भर लेना चाहते हैं। इसलिए, हमारे लिए इस एक सिद्धांत द्वारा सच्चे मसीह और झूठे मसीहों के बीच अंतर करना बहुत आसान है: मसीह सत्य, मार्ग और जीवन हैं। यह पूरी तरह से परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप है।"

जब मैंने बहन की सहभागिता सुनी, तो मेरे मन में बार-बार यह विचार आया: "मैंने इन तमाम वर्षों में प्रभु पर विश्वास किया है, पर मैंने इस तरह की सहभागिता कभी नहीं सुनी। अब सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन सच्चे मसीह और झूठे मसीहों के बीच अंतर करने की बात इतनी गहराई से करते हैं; ऐसा लगता है, जैसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन वास्तव में पवित्र आत्मा की आवाज़ हो सकते हैं। हे परमेश्वर! मैंने हमेशा आपकी वापसी की उत्सुकता से प्रतीक्षा की है, लेकिन इन पिछले कुछ वर्षों में मैंने केवल झूठे मसीहों से बचने पर ही ध्यान केंद्रित किया है और मेरा दिल खोज करने का शायद ही हुआ हो। मैंने अंत के दिनों में न्याय का कार्य करने के लिए आपके लौटने की जाँच-पड़ताल कभी नहीं की, बल्कि आँख बंद करके बस उसका विरोध और निंदा की। परमेश्वर, क्या मैंने वाकई आपके लिए वाकई दरवाज़ा बंद कर दिया है?" इस विचार से मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा। मुझे घबराहट महसूस हुई और मैं और बैठी नहीं रह सकी, इसलिए मैं उठी और पानी लेने के बहाने रसोई में चली गई और थोड़ा शांत होने की कोशिश करने लगी। पानी उँड़ेलते हुए मैंने सोचा: "यह बहन बहुत छोटी है, लेकिन सत्य पर इसकी सहभागिता इतनी व्यावहारिक है। शानदोंग के भाई-बहनों ने भी सर्वशक्तिमान परमेश्वर के काम को स्वीकार करने के बाद इतनी तेजी से प्रगति कर ली। बाइबिल के बारे में उनकी समझ और परमेश्वर के काम के बारे में जानकारी मेरी तुलना में बहुत अधिक है। इस तरीके से लोग सत्य को समझ सकते हैं और परमेश्वर के कार्य का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। क्या यह परमेश्वर का काम नहीं है?" यह सब सोचते हुए मैंने उत्साह और पश्चात्ताप दोनों महसूस किए। मैंने वापस उस बारे में सोचा, जब मैं शानदोंग के भाई-बहनों को वे पत्र लिख रही थी। मैं अपनी क़लम तलवार की तरह भाँज रही थी, उन्हें एक अभिमानी स्वर में डाँट रही थी। और प्रभु के लौटने के अपने दृष्टिकोण में मैं न केवल सत्य की खोज करने में असफल हो गई, बल्कि इसके बजाय मैंने लगातार उसका खंडन किया और उसे अस्वीकार किया। मैंने खुद को सत्य की स्वामिनी समझा और चाहा कि सभी भाई-बहन मेरी बात सुनें, साथ ही मैंने सोचा कि मैं सच्चे मार्ग की रक्षा करने की भरसक कोशिश कर रही हूँ। मुझे यह कभी नहीं लगा कि मैं परमेश्वर का विरोध कर रही हूँ। तो क्या यह मुझे एक आधुनिक युग की फरीसी नहीं बनाता? उस पल मुझे ऐसा लगा, जैसे मैं सिर से पैर तक ठंडे पानी से भीग गई हूँ; मैंने खुद को पूरी तरह से अशक्त और कमज़ोर महसूस किया। मेरे दोनों हाथ अनियंत्रित रूप से काँप रहे थे और मैं अपने मन में बार-बार स्वयं द्वारा परमेश्वर का विरोध करने के दृश्य दोहरा रही थी।… मैं अब और नहीं रुक पाई—मेरी आँखों से आँसू बहने लगे। इतनी दंभी और विवेकहीन होने के लिए मुझे खुद से नफ़रत हो गई। काफी समय बाद, मैंने अपने आँसू पोंछे और ट्रे में पानी के गिलास लेकर वापस कमरे में चली गई। बहन ने मेरी ओर देखा और चिंता के साथ पूछा: "बहन, क्या आप इस सहभागिता को स्वीकार करती हैं?" मैंने एक आह भरी और खेदपूर्वक बोली: "अभी-अभी सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों और आपकी सहभागिता को सुनने के बाद, मुझे लगता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर लौटे प्रभु यीशु हैं। मैंने हर दिन परमेश्वर के लौटने का इंतज़ार किया, लेकिन कभी कल्पना नहीं की थी कि अब परमेश्वर लौट आए हैं, मैंने वास्तव में एक फरीसी की भूमिका निभाई है। मैंने वाकई बहुत बड़ी बुराई की है! मैंने परमेश्वर का विरोध किया है।" फिर मैं इतना रोने लगी कि बोल नहीं पाई।

बाद में, कुछ समय तक सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन पढ़ने के बाद बहन झांग, मेरी सास, मेरे पति और मैं पूरी तरह से निश्चित हो गए कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर लौटे हुए प्रभु यीशु हैं। मुझे इतनी ज्यादा ख़ुशी हुई कि मैंने उत्साहपूर्वक शानदोंग के भाई-बहनों को एक पाँचवाँ पत्र भेजा: "प्रिय भाइयो और बहनो! परमेश्वर का धन्यवाद हो कि आपके द्वारा मेरे साथ कई बार परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार साझा किए जाने से मैंने अब अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार कर लिया है और मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की सदस्या बन गई हूँ। हालाँकि मैंने इसे आपके बाद स्वीकार किया है, फिर भी मैं पीछे नहीं रहना चाहती। मैं आपकी बराबरी में आने के लिए जी-जान लगा दूँगी।" उस पल मुझे ऐसा महसूस हुआ, जैसे पत्र के साथ ही मेरा मेरा दिल भी अपने भाई-बहनों के साथ घनिष्ठता से इकट्ठा होने के लिए शानदोंग की उड़ान भर रहा हो। परमेश्वर के प्यार के लिए उसका धन्यवाद हो!

फुटनोट:

क. मूल पाठ में "के लिए" पढा जाता है।

मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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