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छली गयी आत्‍मा का जागृत होना

युआन्‍झ़ी, ब्राज़ील

मेरा जन्‍म उत्‍तरी चीन में हुआ था जहाँ से 2010 में मैं अपने रिश्‍तेदारों के साथ ब्राज़ील आ गया था। ब्राज़ील में मेरा परिचय एक ईसाई दोस्‍त से हुआ जो मुझे कुछ धर्मोपदेश सुनने कलीसिया ले गया। वहाँ तीन बार जाने के बाद भी मेरे पल्‍ले कुछ नहीं पड़ा। उसके बाद मैं अपने काम में बहुत व्‍यस्‍त हो गया, जिससे मुझे दोबारा कलीसिया में जाने मौक़ा नहीं मिला। फिर, जून 2015 में एक दिन मेरा वह दोस्‍त मुझे एकबार फिर कलीसिया ले गया। इस बार वहाँ के भाइयों और बहनों ने जो बातें कहीं उससे अन्‍तत: मुझे उद्धारकर्ता के रूप में प्रभु यीशु की कुछ समझ हासिल हुई। ख़ासतौर से, जब मैंने पहली बार उत्पत्ति ग्रंथ पढ़ा, तब मुझे समझ में आया कि मनुष्‍य की रचना दरअसल परमेश्‍वर द्वारा की गयी थी, परमेश्‍वर ने ही समस्‍त वस्‍तुओं की रचना की थी, मैंने अनुभव किया कि सृजनकर्ता सचमुच अद्भुत है। जब मैं स्‍कूल में था, तब तमाम पाठ्य पुस्‍तकों ने मुझे यह सिखाया था कि आदमी आद्य वानरों से विकसित होकर बना है, और दुनिया की सारी चीज़ें कुदरती ढंग से निर्मित हुई हैं–लेकिन अब पता चला कि मैं दो दशकों से धोखे में जी रहा था। बाइबल पढ़ने के बाद ही मैं पूरी तरह से जागा, और उस क्षण से मैं प्रभु यीशु में विश्‍वास करने लगा।

पाँच महीने चीन में बिताने के बाद 2015 के अंत में मैं वापस ब्राज़ील गया। इस बार मैंने कोई टिकाऊ रोज़गार खोजकर ठीक से बस जाने का फ़ैसला किया। लेकिन जैसा आपने सोचा होता है वैसा हमेशा होता नहीं है। मेरे काम और मेरी निजी जि़न्‍दगी में काफी मुश्किलें थीं, जिसके चलते मैं बहुत क्षुब्‍ध और बेचैन रहता था। एक शाम, मैंने अपने उस ईसाई दोस्‍त को फ़ोन कर अपना दुखड़ा रोया, और उसने मुझसे कहा, "अपना मन शान्‍त करो और प्रभु से प्रार्थना करो और देखो कि किस तरह प्रभु तुम्‍हारे लिए सब कुछ ठीक कर देता है।" मैंने अपने हृदय को शान्‍त किया और प्रभु यीशु से प्रार्थना की, "प्रभु यीशु! मुझे अपने काम के सिलसिले में कुछ समस्‍याओं का सामना करना पड़ा है जिनसे निपटने का कोई तरीक़ा मुझे नहीं सूझता। प्रभु, मैं तुझसे सहायता की उम्‍मीद करता हूँ।" मुझे आश्‍चर्य हुआ कि चार दिन बाद मेरे बॉस ने मुझे बुलाकर काम पर वापस लौटने को कहा। मैं खुशी से नाच उठा, मैं आभारी था कि प्रभु यीशु ने मेरी प्रार्थना सुन ली। इसके बाद मुझे प्रभु के और भी अनुग्रह प्राप्‍त हुए, इसलिए मैं उसके प्रेम का प्रतिदान करने हर हफ़्ते कलीसिया की सभाओं में शामिल होने लगा, भले ही इसके लिए मुझे कुछ देर के लिए काम ही क्‍यों न छोड़ना पड़ता।

जून 2016 के बाद से मैं न सिर्फ़ कलीसिया की सभाओं में शामिल होने लगा था, बल्कि मैं फ़ेसबुक पर अपने दोस्‍तों के साथ बाइबल के पदों को भी साझा करने लगा। इसी के साथ मैं फ़ेसबुक पर ऐसी सामग्री की तलाश भी करता रहता जिससे मैं प्रभु के बारे में और अधिक समझ हासिल कर पाता। मैंने ऐसे बहुत सारे दोस्‍त भी शामिल कर लिये जो वक्‍़त मिलने पर बाइबल के पदों को मेरे साथ साझा किया करते थे। यह चीज़ मेरे लिए बेहद लाभदायक साबित हुई। एक दिन जब मैं फ़ेसबुक देखरहा था, तो मुझे "परमेश्वर न्याय संग उतरता है" नामक एक वीडियो दिखायी दिया। इसने तुरन्‍त मेरा ध्‍यान आकर्षित किया। जिज्ञासा से भर कर मैंने उसे क्लिक किया। मुझे यह देखकर सुखद आश्‍चर्य हुआ कि उसे बहुत उम्‍दा ढंग से बनाया गया था। साफ़-साफ़ कहें तो, वह भव्‍य था! मैं उसकी मधुर, ज़बरदस्‍त गायकी, उसके मर्मस्‍पर्शी गीत के बोलों, और उसको प्रस्‍तुत कर रहे हर व्‍यक्ति के उत्‍साह से उसकी ओर खिंचता चला गया। ग़ौर से देखने पर मैंने पाया कि वह सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया का वीडियो था। मैंने सोचा: "सारे संगीतकारों ने इसमें खुद को इस तरह झोंक दिया है, मानो वे परमेश्‍वर को सुनाने के लिए गा रहे हों। सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसियाकाफी अच्छी नज़र आ रही है! यह पहली बार है जब मुझे उनके बारे में पता चला है; अगर मुझे मौक़ा मिलता है तो मुझे इनके साथ सम्‍पर्क करना चाहिए।"

एक दिन मैंने उस वीडियो का लिंक फ़ेसबुक की अपनी एक दोस्‍त, बहन याँगको भेजा, जिसके साथ मैं अक्‍सर बाइबल पर चर्चा किया करता था। उसको भी वह बहुत पसन्‍द आया, और उसने कहा कि वह सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के बारे में और अधिक जानना चाहती है। उसे लगा कि यह कलीसिया सचमुच ही बहुत ख़ास है और वह पवित्रात्‍मा के कार्य से भरी हुई है। इसके बाद मैंने उस वीडियो को अपने फ़ेसबुक पेज पर शेयर किया, लेकिन उस वक्‍़त मुझे बहुत आश्‍चर्य हुआ जब मेरे एक दोस्‍त ने उसको देखने के बाद मुझसे कहा कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की यह कलीसिया बेकार है, साथ ही उसने मुझे उसके बारे में तरह-तरह की नकारात्‍मक सामग्री भेज दी। सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की निन्‍दा और सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया का तिरस्‍कार करने वाली इस सारी सामग्री ने मुझे डरा दिया और मैं सोचने लगा: "यह कलीसिया बहुत अच्‍छी प्रतीत होती है—किसी को उससे क्‍या समस्‍या हो सकती है?" जब मैं इस वीडियो पर एक और नज़र डालने ही वाला था कि सहसा मुझे अपने पादरी की कही एक बात याद आयी कि अन्तिम दिनों में झूठेमसीहा प्रकट होंगे। अगर मैं प्रभु यीशु के मार्ग से भटक जाता हूँ, तो क्‍या मेरे लिए सारी सम्‍भावनाएँ समाप्‍त नहीं हो जाएँगीं? मैं जानता था कि यह एक ऐसी चीज़ थी जिसकी मैं यूँ ही उपेक्षा नहीं कर सकता था, इसलिए मैंने उसे न देखने का फ़ैसला किया। मैंने तत्‍काल बहन याँग से सम्‍पर्क किया और उनको स्थिति स्‍पष्‍ट की। उनका जवाब था, "कि़स्‍से के सही या ग़लत होने का निश्‍चय करने के लिए हम उसके महज़ एक पहलू पर निर्भर नहीं कर सकते। यह प्रभु की शिक्षाओं के अनुरूप नहीं है। प्रभु में विश्‍वास करने वाले हम सारे लोग उसकी वापसी की प्रतीक्षा कर रहे हैं, और इसवक्‍़त कुछ लोग हैं जो कह रहे हैं कि वह आ चुका है। हमें इसकी पड़ताल करनी है। हम महज़ भेड़-चाल चलते हुए, आँखों पर पट्टी बाँध कर इसकीआलोचना और भर्त्‍सना नहीं कर सकते। बेहतर होगा कि हम सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के किसी व्‍यक्ति की तलाश करें और इसकी जाँच करें। हम उनकी वास्‍तविक फितरत को पहचाने लेंगे—किसी असली चीज़ को नक़ली नहीं बनाया जा सकता, और किसी नक़ली चीज़ को असली नहीं बनाया जा सकता।" मैंने सोचा: "बहन याँग का कहना सही है। यह वाक़ई पहली बार है जब मैंने किसी को इस सुसमाचार का उपदेश देते सुना है कि प्रभु वापस लौट आया है, साथ ही मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया की भर्त्‍सना करने वाली इंटरनेट की वह सामग्री सच्‍ची है या झूठी। मैं देख सकता हूँ कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया द्वारा तैयार किये गये वीडियो और फि़ल्‍में काफी अच्छी हैं। मुझे उनके बारे में जानना चाहिए। प्रभु की वापसी तक पहुँच बनाने का यही एकमात्र तर्कसंगत ढंग है।" और इसलिए, मैं बहन याँग के साथ सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के अन्तिम दिनों के कार्य की पड़ताल करने को राजी हो गया।

सिस्‍टर यांग ने वीडियो के अन्‍त में दी गयी जानकारी के माध्‍यम से सम्‍पर्क किया और इस तरह उत्‍तरी अमेरिका में सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के भाई झाँग के साथ उनका सम्‍पर्क हुआ। उनके साथ ऑनलाइन होते ही बहन याँग और मैंने एक ही सवाल रखा: "हम दोनों जानते हैं कि अन्तिम दिनों में प्रभु की वापसी होगी, लेकिन प्रभु यीशु ने कहा था: 'उस समय यदि कोई तुम से कहे, "देखो, मसीह यहाँ है!" या "वहाँ है!" तो विश्‍वास न करना। क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्‍ता उठ खड़े होंगे, और बड़े चिह्न, और अद्भुत काम दिखाएँगे कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें' (मत्ती 24:23-24)। भाई झाँग, लोगों को धोखा देने के लिए अन्तिम दिनों में झूठे मसीहाओं के प्रकट होने के इस मुद्दे के बारे में आप क्‍या सोचते हैं?"

भाई झाँग ने कहा: "प्रभु यीशु ने हमें चेतावनी देने के लिए ये बातें कही थीं: जब वो अन्तिम दिनों के दौरान वापस लौटेगा, तब झूठे मसीहा भी प्रकट होंगे। प्रभु चाहते हैं कि हम अपने भीतर सही-ग़लत का विवेक विकसित करें ताकि हम झूठे मसीहाओं द्वारा न छले जाएँ। लेकिन, उसने यह बात इसलिए नहीं कही थी कि हम किसी भी ऐसे व्‍यक्ति को पूरी तरह खारिज कर दें जो यह कहता है कि प्रभु वापस लौट आया है, या इस हद तक चले जाएँ कि ऐसे लोगों की आलोचना और भर्त्‍सना करने लगें। यह प्रभु यीशु के वचनों को लेकर हमारी ग़लतफ़हमी है। झूठे मसीहा क्‍या हैं, इस बारे में प्रभु यीशु स्‍पष्‍ट थे: 'क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्‍ता उठ खड़े होंगे, और बड़े चिह्न, और अद्भुत काम दिखाएँगे कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें' (मत्ती 24:24)। झूठे मसीहाओं के ज़ाहिर लक्षण ये हैं कि वे प्रभु यीशु जैसा होने के संकेत देते हुए, चमत्‍कार दिखाते हुए, बीमारियाँ ठीक करते हुए और दुष्टात्माओं को खदेड़ बाहर करते हुए प्रभु यीशु के कार्य की नक़ल करते हैं। ये ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ वे सबसे ज्‍़यादा चलाक और दुराचारी होते हैं, और ये उनकी पहचान के मुख्‍य लक्षण हैं। छद्म मसीहाओं के प्रकाशन और लक्षणों के बारे में सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के वचन तो और भी सुस्‍पष्‍ट और तीक्ष्ण हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर ने कहा है: 'यदि, वर्तमान समय में, कोई व्यक्ति उभर कर आता है जो चिह्नों और चमत्कारों को प्रदर्शित करने, पिशाचों को निकालने, चंगाई करने में और कई चमत्कारों को करने में समर्थ है, और यदि यह व्यक्ति दावा करता है कि वो यीशु की वापसी है, तो यह दुष्टात्माओं की जालसाजी और उसका यीशु की नकल करना होगा। इस बात को स्मरण रखें! परमेश्वर एक ही कार्य को दोहराता नहीं है। यीशु के कार्य का चरण पहले ही पूर्ण हो चुका है, और परमेश्वर फिर से उस चरण के कार्य को पुनः नहीं दोहराएगा। … यदि अंत के दिनों के दौरान, परमेश्वर अभी भी चिह्नों और चमत्कारों को प्रदर्शित करता है और अभी भी दुष्टात्माओं को निकालता और बीमारों को चंगा करता है—यदि वह यीशु के ही समान करता है—तो परमेश्वर एक ही कार्य को दोहरा रहा होगा, और यीशु के कार्य का कोई महत्व या मूल्य नहीं होगा। इस प्रकार, प्रत्येक युग में परमेश्वर कार्य के एक ही चरण को करता है। एक बार जब उसके कार्य का प्रत्येक चरण पूरा हो जाता है, तो शीघ्र ही इसकी दुष्टात्माओं के द्वारा नकल की जाती है, और शैतान द्वारा परमेश्वर का करीब से पीछा करने के बाद, परमेश्वर एक दूसरा तरीका बदल देता है। एक बार परमेश्वर अपने कार्य का एक चरण पूर्ण कर लेता है, तो इसकी दुष्टात्माओं द्वारा नकल कर ली जाती है। तुम लोगों को इस बारे में अवश्य स्पष्ट हो जाना चाहिए' ("वचन देह में प्रकट होता है" में "आज परमेश्वर के कार्य को जानना")। हम सब जानते हैं कि जो कुछ भी झूठा है वह सब सिर्फ़ उसकी कामयाबी का लाभ उठा सकता है और उसकी नक़ल कर सकता है जो असली है। झूठे मसीहा भी इसके अपवाद नहीं हैं। वे दुरात्‍माएँ हैं और उनमें मसीहा के सार का अभाव है। वे मसीहा का कार्य नहीं कर सकते, वे सत्‍य को व्‍यक्‍त करने में अक्षम हैं, और वे परमेश्‍वर के स्‍वभाव को या परमेश्‍वर के पास जो कुछ है और परमेश्‍वर स्‍वयं जो कुछ है उसको व्‍यक्‍त करने में अक्षम हैं। वे मनुष्‍य को सत्‍य, मार्ग और जीवन उपलब्‍ध नहीं करा सकते। इसलिए, झूठेमसीहा केवल उस कार्य की नक़ल ही कर सकते हैं जो प्रभु यीशु पहले ही कर चुका है; वे सिर्फ़ मूर्ख और अज्ञानी लोगों को धोखा देने के लिए कुछ संकेतों और करामातों का प्रदर्शन भर कर सकते हैं। कुछ लोग हैं जो दुरात्‍माओं के वशीभूत हैं, जो ढिठाईपूर्वक यह घोषणा करते हैं कि वे ही वापस लौटा प्रभु यीशु हैं, और जो बीमारियाँ ठीक करनेतथा दुष्टात्माओं को खदेड़ बाहर करने, चमत्‍कारों का प्रदर्शन करने, और पश्‍चाताप तथा क्षमादान के मार्ग का उपदेश देने जैसे कृत्‍यों के माध्‍यम से प्रभु यीशु की नक़ल करते हैं। इसमें रत्‍ती भर सन्‍देह नहीं है कि वे झूठे मसीहा हैं जो लोगों को धोखा देते हैं। परमेश्‍वर का कार्य हमेशा नया होता है और कभी पुराना नहीं पड़ता, वह हमेशा आगे की दिशा में बढ़ता है। वह जो कर चुका है उस पुराने कार्य को कभी नहीं दोहराएगा। यह ठीक वैसा ही है जैसा तब हुआ था जब प्रभु यीशु कार्य करने आया था। उसने व्‍यवस्‍था के युग का समापन किया था और अनुग्रह के युग का मार्ग प्रशस्त किया था। यहोवा परमेश्‍वर नेलोगों को उनके जीवन में मार्गदर्शन देने के लिए व्यवस्था प्रदान करने का जोकार्य किया था, यीशु नेउसे नहीं दोहरायाबल्कि इसकी बजाय, उसने व्‍यवस्‍था के युग के कार्य की बुनियाद पर उद्धार के अपने कार्य को किया था।प्रभु यीशु ने ही मानव-जाति को पश्‍चाताप और क्षमादान का मार्ग दिखाया था; जब तक हम उनके समक्ष प्रस्तुत होते रहेंगे, पाप स्‍वीकार करते रहेंगे, और पश्‍चाताप करते रहेंगे, तब तक प्रभु हमारे पापों के लिए हमें क्षमा करता रहेगा और हमारे अपराधों को भुला देगा, और इस तरह हमें उस भरपूर अनुग्रह और आशीष का लाभ उठाने के योग्‍य बनाये रखेगा जिससे प्रभु मानव-जाति को नवाज़ता है। वह सारा-का-सारा कार्य नया था, और वह किन्‍हीं दुरात्‍माओं या शैतान द्वारा किया गया कार्य नहीं हो सकता था। यही बात बात अन्तिम दिनों में लौटे प्रभु यीशु पर लागू होती है—सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर ने अनुग्रह के युग का समापन किया था और राज्‍य के युग की शुरुआत की थी। सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर ने प्रभु यीशु के उद्धार के कार्य को नहीं दोहराया—वह दुष्टात्माओं को निकाल बाहर नहीं करता, बीमारों को चंगा नहीं करता, लोगों के समक्ष चमत्‍कार नहीं दिखाता। इसकी बजाय वह सत्‍य को व्‍यक्‍त करता है और उद्धार के कार्य की बुनियाद पर मनुष्‍य के न्‍याय और शुद्धिकरण के कार्य के चरण को करता है। वह शैतान के अधिकार-क्षेत्र से मानव-जाति की पूरी तरह से रक्षा कर हमें परमेश्‍वर के राज्‍य में लाता है। यह सब परमेश्‍वर का वह नया कार्य है जो उसने पहले कभी नहीं किया था और जो किसी भी झूठे मसीहा के द्वारा नहीं किया जा सकता था। जब तक हम यह जानते हैं कि परमेश्‍वर का कार्य हमेशा नया होता है और कभी पुराना नहीं होता, और हम सच्‍चे मसीहा और झूठे मसीहा में भेद करने के सिद्धांत को समझते हैं, तो हम स्‍वाभाविक तौर से परमेश्‍वर के प्रकटन तथा कार्य और झूठे मसीहाओं के छल के बीच भेद करेंगे।"

भाई झाँग के इस सम्‍पर्क से मैंने बहुत कुछ हासिल किया; उनकी संगति बहुत स्‍पष्‍ट थी। झूठे मसीहा केवल उस कार्य को दोहरा सकते हैं और उसकी नक़ल भर कर सकते हैं जो परमेश्‍वर ने पहले किया है, लेकिन वे कोई नया कार्य नहीं कर सकते, न ही वे मानव-जाति को कोई नया रास्‍ता दिखा सकते हैं। इस पर मुझे प्रभु यीशु के इन वचनों में निहित सच्‍चा अर्थ समझ में आया: "क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्‍ता उठ खड़े होंगे, और बड़े चिह्न, और अद्भुत काम दिखाएँगे कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें" (मत्ती 24:24)। बहन याँग ने भी कहा कि वे भी इससे बहुत लाभान्वित हुईं, इसलिए हमने भाई झाँग से अगली शाम का वक्‍़त तय किया ताकि हम उनकी संगति सुनना जारी रख सकें।

मैंने महसूस किया कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के भाई झाँग ने जो कहा था वह मेरे लिए अद्भुत और वाक़ई शिक्षाप्रद था। लेकिन, जब मैंने उन तमाम ऑनलाइन अफ़वाहों के बारे में सोचा तो मैंने पाया कि मेरे मन अभी-भी थोड़ी आशंका थी। जब मैं वापस अपनी कलीसिया में गया, तो मैंने वहाँ के एक बुज़ुर्गभाई से पूछा कि क्‍या आपको सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया की कोई जानकारी है। उन्‍होंने मुझे बताया कि पादरी का कहना है कि हमें उनसे कोई ताल्‍लुक नहीं रखना चाहिए; उन्‍होंने मुझे उन बातों के बारे में भी बताया जो कई पादरियों द्वारा सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की आलोचना करते हुए, उस पर हमला करते हुए, उसकी भर्त्‍सना करते हुए कही गयी थीं। जब मैंने यह सुना, तो मैं थोड़ी दुविधा में पड़ गया। मैंने ज़रा-भी देर किये बिना बहन याँग को इस नकारात्‍मक सूचना की जानकारी दी और उनको सुझाव दिया कि वे सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया से अपना नाता तोड़ दें। लेकिन बहन याँग ने सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के अन्तिम दिनों के कार्य की पड़ताल का दृढ़ निश्‍चय कर रखा था। उन्‍होंने मुझसे कहा, "मुझे तो मेमने के पैर के निशान जहाँ कहीं भी ले जाएँगे, मैं उनका अनुसरण करूँगी। हाल ही में मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के वचनों को ऑनलाइन पढ़ते हुए और सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के तमाम तरह के वीडियो तथा सुसमाचार-सम्‍बन्‍धी फि़ल्‍में देखते हुए बहुत-से सत्‍यों को समझा है। जिन बहुत-सी भ्रान्तियों और मुश्किलों ने मुझे पहले उलझन में डाल रखा था, उनका समाधान हो गया है। मुझे लगता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के वचन ही सत्‍य हैं। दूसरे लोग सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया की कैसी भी भर्त्‍सना क्‍यों न करते रहें, मैं तब तक इसकी जाँच में लगी रहूँगी जब तक कि स्थिति मेरे लिए पूरी तरह स्‍पष्‍टनहीं हो जाती।" मैं बहन याँग को राज़ी नहीं कर पाया, इसलिए मैंने उनको और भाई झांग को फ़ेसबुक पर ब्‍लॉक कर दिया और फिर उनसे दोबारा सम्‍पर्क करने की हिम्‍मत नहीं की।

लेकिन, अभी दो दिन भी नहीं हुए थे कि मेरा काम-काज मंदा पड़ गया। हर दिन, घर में खाना बनाने के अलावा मेरे पास और कोई काम नहीं रह गया। चूँकि मेरे पास कोई काम नहीं था, इसलिए मैं कोई फि़ल्‍मदेखने के इरादे से अक्सर यूट्यूब खोलता था, लेकिन विचित्र बात थी कि हर बार सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया की फि़ल्‍में, संगीत के वीडियो और समवेत भजन के कार्यक्रम ही उस पर दिखायी देते थे। मैं सोचने लगा: "सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के वीडियो और फि़ल्‍में कितनी फुर्ती से प्रसारित किये जाते हैं। यह आश्‍चर्यजनक है!परमेश्‍वर की हर चीज़ का फलना-फूलना निश्‍चित है, इसलिए क्‍या यह मुमकिन नहीं कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया सचमुच परमेश्‍वर के यहाँ से ही आयी हो?पिछली बार भाई झाँग ने जो भी कहा था वह सब सत्‍य के अनुरूप था। शायद मुझे एक बार और सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया की समझ हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए। महज़ दूसरे लोगों की टीका-टिप्‍पणियों की वजह से मैं सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के अन्तिम दिनों के कार्य की पड़ताल करने से रूखाई से इन्‍कार नहीं कर सकता।" लेकिन, जैसे ही मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की भर्त्‍सना में ऑनलाइन लिखी बातों के बारे में और इसी के साथ सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के साथ सम्‍पर्क न रखने की अपने पादरी की चेतावनी के बारे में सोचा, तो मेरे मन में आया कि मुझे शायद अब और आगे क़दम नहीं बढ़ाना चाहिए।इसलिए मैं यूट्यूब पर दूसरे वीडियो खोजने लगा। लेकिन हर कहीं मुझे सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के वीडियो ही दिखायी दिये और मुझे बेबसी का अहसास होने लगा। अन्‍त में, मेरी उत्‍सुकता हावी हो गयी और मैं सोचने लगा: "इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया अच्‍छी है या नहीं। मैं उनके वीडियो पर एक सरसरी निगाह डालूँगा, और अगर वे वाक़ई किसी काम के नहीं हुए, तो यह अच्‍छे-बुरे का विवेक हासिल करने की सीख होगी।" इसके बाद मैंने "सुसमाचार का समूहगान – 9 वीं प्रस्‍तुति" नामक वीडियो पर क्लिक किया। इस वीडियो ने मेरा ध्‍यान आकर्षित किया क्‍योंकि यह उस समकालीन समाज का वास्‍तविक चित्रण था जिसके साथ मैं खुद को जोड़कर देखता था। इसमें मानव जीवन का अत्‍यन्‍त सजीव, वास्तविक, और सच्‍चा चित्रण किया गया था। उसको देखते हुए मैं रोया और हँसा; मेरा हृदय बहुत द्रवित हुआ और ऊर्जा से भर गया था। मेरे मन में सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया द्वारा तैयार एक-एक वीडियो तत्‍काल देखने की इच्‍छा जाग गयी। इसके बाद मैं रोज़ सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के वीडियो देखने लगा, और हफ़्ते भर के भीतर मैंने चीनी कोरल वीडियो के सारे-के-सारे सत्रह वीडियो देख डाले। मैं जितना ही उनको देखता गया, उतना ही उनके प्रति मेरा लगाव बढ़ता गया। लगता था जैसे मेरे हृदय में कोई ऐसी शक्ति मौजूद थी जो मुझसे बिना एक पल गँवाए उनको देखने और उनकी पड़ताल करने का प्रबल आग्रह कर रही थी। मैंने सोचा: "मैं सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के बहुत-से वीडियोदेख चुका हूँ; इनमें से प्रत्‍येक वीडियोमेरे लिए हितकारी साबित हुआ है, साथ ही उनमें से किसी में भी नकारात्‍मक शब्‍द नहीं है: यह सब कुछ सकारात्‍मक है। इनमें से कुछ दुनिया के अन्‍धकार को उजागर करते हैं, कुछ परमेश्‍वर की गवाही देते हैं, और कुछ परमेश्‍वर के समक्ष वापस लौटने के लिए मनुष्‍य का मार्गदर्शन करते हैं। उनमें किसी तरह की कोई दैहिक या सांसारिक मिलावटनहीं है। सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया पवित्र आत्‍मा के कार्य से परिपूर्ण है। यह क़तई वैसी नहीं है जैसा कि अफ़वाहें बताती हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के अन्तिम दिनों का कार्य सचमुच पड़ताल के योग्‍य है!"

एक दिन फ़ेसबुक देखते हुए, "अंत के दिनों के उद्धार को मैंने फेसबुक पर पाया" शीर्षक से किसी का अनुभव और गवाही मैंने पढ़ा। उसे पढ़कर मैंने जाना कि उस बहन के अनुभव मेरे ही समान थे। जब वह पहली बार सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के सम्‍पर्क में आयी, तो उसके कुछ ऑनलाइन दोस्‍तों ने उसको इस कलीसिया के बारे में कुछ ऐसी अफ़वाहें भेजीं जो वाक़ई जो उसकी राह में रोड़े डालती थीं। मैंने उसे बेताबी के साथ पढ़ा, मैं यह जानने को उत्‍सुक था कि अन्‍त में क्‍या हुआ। मैंने पाया कि जब इस बहन ने प्रभु से प्रार्थना कर उससे मार्गदर्शन की याचना की, तो उसने महसूस किया कि वह इस बात का चुनाव नहीं कर सकती थी कि वह क्‍या सुनती और किस बात पर विश्‍वास करती है, बल्कि उसके लिए व्‍यावहारिक ढंग से सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया की पड़ताल करना ज़रूरी था ताकि वह इस बात को समझ सके कि वह कलीसिया सच्‍ची थी या झूठी थी। आँखें मूंदकर अफ़वाहों पर कान देना और प्रभु के द्वितीय आगमन की पड़ताल करने से इन्‍कार करना तर्कसंगत आचरण नहीं होगा, इसलिए उसने महसूस किया कि उसे प्रभु की वापसी के सत्य के बारे में पता लगाना होगा। ये शब्‍द वाक़ई मुझे अच्छे से समझ आए। प्रभु की वापसी एक महत्‍वपूर्ण चीज़ है और हमें इसके साथ बुद्धिमानी से पेश आना चाहिए। हम महज़ भेड़-चाल नहीं चल सकते; हम महज़ उसे आँख मूँदकर ख़ारिज़ नहीं कर सकते और उसका प्रतिरोध नहीं कर सकते। मैंने उस लेख को पढ़ना ज़ारी रखा और देखा कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के बारे में इस बहन ने जो कुछ समझा है वह उससे पूरी तरह अलग है जो उसके ऑनलाइन दोस्‍त उससे कह रहे थे। उसने सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया की कुछ अतिथि बहनों को भी निजी तौर पर आमन्त्रित किया जिन्‍होंने सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के वचनों पर उसके साथ संगति की, उनका रवैया उसके प्रति सहयोग और स्‍नेहपूर्ण था। इस बहन के वास्‍तविक जीवन के अनुभवों ने मुझे बताया कि मैं अब न तो इन अफ़वाहों द्वारा छलाजाना जारी रख सकता हूँ, न ही मैं बकवाद के झाँसे में आकर सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के अन्तिम दिनों के कार्य की पड़ताल सेइन्‍कार कर सकता हूँ। अन्‍यथा इस बात की पूरी सम्‍भावना है कि मैं परमेश्‍वर के अन्तिम दिनों के उद्धार के कार्य से हाथ धो बैठूँगा। मैं जानता था कि मुझे और अधिक पड़ताल के लिए सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया से फिर से सम्‍पर्क क़ायम करना ज़रूरी है!

उस रात बिस्‍तर पर बेचैनी से करवटें बदलते हुए मैंने सोचा: "मैंने बहन याँग को ब्‍लॉक कर दिया था लेकिन मुझे उन्हें फिर से खोजना होगा। अगर मैं उनको खोज लेता हूँ तो निश्‍चय ही मैं सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के भाई झाँग को भी खोज लूँगा। बहन याँग एक सच्‍ची विश्‍वासी हैं और वे इस सारे समय सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के अन्तिम दिनों के कार्य की पड़ताल करती रही हैं। वे अब तक सम्‍भवत: ढेर सारी समझ हासिल कर चुकी होंगी। मुझे वाक़ई उनसे यह पूछना ज़रूरी है कि उनकी पड़ताल कैसी चल रही है।" यह आसान काम नहीं था, लेकिन कुछ दोस्‍तों की मदद से, मुझे कुछ ही दिनों बाद बहन याँग का फ़ेसबुक अकाउण्‍ट मिल गया। मुझे यह जानकर सचमुच ख़ुशी हुई कि ब्‍लॉक किये जाने के कारण वे मुझसे नाराज़ नहीं थीं। जब मैंने उनसे सम्‍पर्क किया, तो उन्‍होंने मुझे बताया कि वे अपनी पड़ताल के माध्‍यम से पहले ही स्‍पष्‍टता हासिल कर चुकी हैं, और सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर ही वापस लौटा प्रभु यीशु है। उन्‍होंने बहुत प्रसन्‍नतापूर्वक भाई झाँग के साथ मेरा सम्‍पर्क भी करा दिया। जब हम तीनों ऑनलाइन जुड़े, तो मैंने उनसे कहा, "अपने हाल के अनुभव के माध्‍यम से यह देख सकता हूँ कि प्रभु मुझे राह दिखा रहा है। मैं भी सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के अन्तिम दिनों के कार्य के अनुसरण और पड़ताल का इच्‍छुक हूँ, लेकिन, आप दोनों के लिए मेरे पास बहुत-सारे सवाल हैं जिन पर मैं आपकी संगति चाहूँगा। एक बात जो वाक़ई मेरी समझ से परे है वह यह है कि यीशु ने अपना कार्य करने के लिए एक पुरुष के रूप में देहधारणकिया था, तब फिर वह अपना कार्य करने के लिए अब एक स्‍त्री के रूप में देह कैसे धारण करेगा?यह एक रहस्‍य है। भाई झाँग क्‍या आप मुझे यह बात समझा सकेंगे?

मेरे सवाल के जवाब में भाई झाँग ने कहा, "हाँ। परमेश्‍वर के देहधारण में रहस्‍य समाहित हैं—इनका अभिप्राय अपरिमित और गहरा है, साथ उसमें कुछ ऐसा है जिसकी हम थाह नहीं ले सकते। इसलिए हमें प्रभु की वापसी के सम्‍बन्‍ध में अपने हृदय में श्रद्धा को बनाये रखना चाहिए। अगर परमेश्‍वर का कार्य दूर-दूर तक हमारी धारणाओं के अनुरूप न भी हो, तब भी हमें अपनी ज़ुबान को लगाम देना चाहिए। हमें गहराई से मनन किये बिना इस पर निर्णय नहीं देना चाहिए। सच पूछा जाए तो, परमेश्‍वर के कार्य की आलोचना करना परमेश्‍वर की निन्‍दा करना है, और ईश-निन्‍दा के पाप को इस या अगले जीवन में क्षमा नहीं किया जा सकता। अन्तिम दिनों का सर्वशक्मिान परमेश्‍वर आ चुका है और उसने सारे रहस्‍यों को खोल दिया है। यह बात यीशु की इस भविष्‍यवाणी को पूरी तरह से सच साबित कर देती है: 'मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा परन्तु जो कुछ सुनेगा वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा' (यूहन्ना 16:12-13)। सत्‍य के इस पहलू को समझने के लिए हम सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के वचनों को साथ मिलकर पढ़ते हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर ने कहा है: 'जब यीशु का आगमन हुआ, वह पुरुष था, लेकिन इस बार के आगमन में परमेश्वर स्त्री है। इससे, तुम देख सकते हो कि परमेश्वर ने अपने कार्य के लिए पुरुष और स्त्री दोनों का सृजन किया और वह लिंग के बारे में कोई भी भेदभाव नहीं करता है। जब उसका आत्मा आगमन करता है, तो वह इच्छानुसार किसी भी देह को धारण कर सकता है और वह देह उसका ही प्रतिनिधित्व करता है। चाहे यह पुरुष हो या स्त्री, दोनों ही परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करते हैं क्योंकि यह उसका देहधारी शरीर है। यदि यीशु एक स्त्री के रूप में आ जाता और प्रकट हो जाता, दूसरे शब्दों में, यदि पवित्र आत्मा के द्वारा एक शिशु कन्या का, न कि एक लड़के का, गर्भधारण किया गया होता, तब भी कार्य का वह चरण उसी तरह से पूरा किया गया होता। यदि ऐसी बात होती तो, कार्य का यह स्तर एक पुरुष के द्वारा पूरा किया जाता और तब भी वह कार्य उसी तरह से पूरा किया जाता। दोनों ही चरणों में किया गया कार्य महत्वपूर्ण है; कोई भी कार्य दोहराया नहीं जाता है या एक-दूसरे का विरोध नहीं करता है। अपने कार्य के समय में, यीशु को इकलौता पुत्र कहा गया, "पुत्र" पुरुष लिंग का संकेत करता है। तो फिर इस चरण में इकलौते पुत्र का उल्लेख क्यों नहीं किया जाता है? ऐसा इसलिए है क्योंकि कार्य की आवश्यकताओं ने लिंग में बदलाव को आवश्यक बना दिया जो कि यीशु के लिंग से भिन्न हो। परमेश्वर लिंग के बारे में कोई भी भेदभाव नहीं करता है। उसका कार्य वैसे ही होता है जैसी वह इच्छा करता है और किसी प्रतिबंध के अधीन नहीं है, विशेषकर यह स्वतंत्र है, परन्तु प्रत्येक चरण का एक व्यवहारिक महत्व होता है। परमेश्वर ने दो बार देहधारण किया, और कहने की आवश्यकता नहीं कि अंत के दिनों में उसका देहधारण अंतिम बार है। वह अपने सभी कर्मों को प्रकट करने के लिए आया है। यदि इस चरण में वह स्वयं कार्य करने के लिए देह धारण नहीं करता जिसे मनुष्य देखे, तो मनुष्य हमेशा के लिए यही अवधारणा बनाए रखता कि परमेश्वर सिर्फ पुरुष है, स्त्री नहीं। … आरंभ में, जब यहोवा ने मानव जाति का सृजन किया, तो उसने पुरुष और स्त्री दोनों को बनाया; इसलिए, उसका देहधारी शरीर का भी पुरुष या स्त्री में भेद किया गया। उसने अपना कार्य आदम और हव्वा को बोले गए वचनों के आधार पर तय नहीं किया। दोनों बार जब उसने देहधारण किया तो यह पूरी तरह से उसकी तब की सोच के अनुसार था जब उसने सबसे पहले मानवजाति की रचना की थी। अर्थात्, उसने अपने दो देहधारणों के कार्य को उन पुरुष और स्त्री के आधार पर पूरा किया जिन्हें तब तक भ्रष्ट नहीं किया गया था' ("वचन देह में प्रकट होता है" में "देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं")। 'लिंग रूप में, एक पुरुष और दूसरा महिला होता है; इसमें परमेश्वर के देहधारण का अर्थ पूर्ण हो गया है। यह परमेश्वर के बारे में मनुष्य की मिथ्या-धारणा को दूर करता हैः परमेश्वर पुरुष और महिला दोनों बन सकता है और देहधारी परमेश्वर सार में लिंगहीन है। उसने पुरुष और महिला दोनों को बनाया, और वह लिंगों के बीच भेद नहीं करता है' ("वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार")।

परमेश्‍वर के वचनों को पढ़ने के बाद भाई झाँग ने यह संगति साझा की, "परमेश्‍वर जो कुछ भी करता है अर्थपूर्ण होता है। परमेश्‍वर ऐसा कुछ भी नहीं करेगा जिसमें अर्थ या मूल्‍य न हो। बाइबल कहती है: 'तब परमेश्‍वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्‍वर ने उसको उत्पन्न किया; नर और नारी करके उसने मनुष्यों की सृष्‍टि की' (उत्पत्ति 1:27)। इससे हम यह समझ सकते हैं कि शुरुआत में परमेश्‍वर ने पुरुष और स्‍त्री को अपनी छवि में गढ़ा था। परमेश्‍वर पुरुष के रूप में देहधारी हो सकता है, और वह स्‍त्री के रूप में भी देहधारी हो सकता है। परमेश्‍वर में कोई लिंगभेद नहीं है; वह चाहे पुरुष बने या स्‍त्री, वह परमेश्‍वर का सार धारण किये होता है और स्वयं परमेश्‍वर के कार्य को करने में सक्षम होता है। दो बार देहधारी होते समय परमेश्‍वर का दो अलग-अलग लिंगों का अपनाना अपनी देहधारण की महत्‍ता को पूर्ण करने और मनुष्‍य के इस भ्रामक विश्‍वास को दूर करने के लिए है कि परमेश्‍वर केवल पुरुष के रूप में ही देहधारी हो सकता है, स्‍त्री के रूप में नहीं। इससे मानव-जाति को यह समझ पाती है कि परमेश्‍वर का देहधारण न सिर्फ़ पुरुष की पहचान को मूर्त रूप दे सकता है, बल्कि वह स्‍त्री की पहचान को भी मूर्त रूप दे सकता है। वह मानव-जाति को यह समझने की गुंजाइश देता है कि परमेश्‍वर वास्‍तव में सर्वशक्तिमान है, हम उसकी थाह लेने में अक्षम हैं, और हमें परमेश्‍वर पर मनमाने ढंग से निर्णय नहीं देना चाहिए या उसेसीमा में नहीं बांधना चाहिए। इसके अतिरिक्‍त, परमेश्‍वर का सार आत्‍मा है, और आत्‍माओं में लिंग का कोई भेद नहीं होता। लिंग सिर्फ़ रचित मानव-जाति पर लागू होता है। परमेश्‍वर मानव-जाति की रक्षा और उद्धार करने दो बार देहधारी हुआ है, इसलिए परमेश्‍वर का देहधारण सिर्फ़ उन काल-खण्‍डों पर निर्भर होता है जिनमें वह देहधारी होकर अपना कार्य करता है। जब पृथ्‍वी पर देहधारी परमेश्‍वर का कार्य पूरा हो जाता है, तो वह आध्‍यात्मिक जगत में वापस लौट जाता है और तब, कोई लैंगिक भेद नहीं रह जाता। इसलिए अगर हम किसी एक लिंग में परमेश्‍वर को सीमित करते हैं, तो यह बहुत बड़ी ईश-निन्‍दा है!"

परमेश्‍वर के वचनों को सुनने और भाई झाँग की संगति से सहसा मुझे एक आन्‍तरिक बोध मिला। मुझे अन्‍तत: यह बात समझ में आ गयी कि परमेश्‍वर ने अपने प्रत्‍येक देहधारण के दौरान अलग लिंगक्यों अपनाया। मुझे समझ में आ गया था कि इसमें परमेश्‍वर कीतब की इच्‍छा और उसके कृपापूर्ण प्रयोजन निहित हैं जब उसने पहली बार मानव-जाति की रचना की थी। अगर परमेश्‍वर अपने दोनों देहधारणों के दौरानअपना कार्य करने एक पुरुष के रूप में आया होता, तो हम अनन्‍त काल तक यह विश्‍वास करते रहते कि परमेश्‍वर एक पुरुष है और हमारे मन में यह ग़लत विश्‍वास बैठ जाता कि पुरुष स्‍त्री के मुक़ाबले महान है और उच्‍च हैसियत रखता है। स्‍त्री के रूप में कार्यरत अन्तिम दिनों का देहधारी परमेश्‍वर, परमेश्‍वर की निष्‍पक्षता और धार्मिकता का मूर्त रूप है, और इसने मुझे इस बार एक स्‍त्री के रूप में परमेश्‍वर के देहधारी होने तथा कार्य करने के असाधारण महत्‍व को समझने की गुंजाइश दी!अगर ऐसा न होता, तो हम परमेश्‍वर को समझ ही न पाते, और हमारी धारणाओं का और परमेश्‍वर के परिसीमन का कभी विनाश न हुआ होता और इसके अतिरिक्‍त, इससे परमेश्‍वर के स्‍वभाव को ठेस पहुँचती। जब पहली बार परमेश्‍वर देहधारी हुआ था, तो वह एक पुरुष के रूप में प्रकट हुआ था, और अन्तिम दिनों में एक स्‍त्री के रूप में प्रकट हुआ है। परमेश्‍वर के ये दो देहधारण सच्‍चे अर्थों में परमेश्‍वर के देहधारण के सम्‍पूर्ण महत्‍व को दर्शाते हैं; इन्‍होंने मुझे परमेश्‍वर की एक अधिक खरी और प्रामाणिक समझ प्रदान की है। परमेश्‍वर को धन्‍यवाद! परमेश्‍वर का कार्य सचमुच विवेकपूर्ण है!

जब बहन याँग और भाई झाँग ने परमेश्‍वर की मेरी समझ और ज्ञान के बारे में सुना, तो उनको इस बात से खुशी महसूस हुई कि मैं परमेश्‍वर की मरजी को समझ सका और अपनी धारणाओं तथा परमेश्‍वर को लेकर अपनी ग़लतफ़हमी को दूर कर सका। परमेश्‍वर द्वारा किये गये मेरे उद्धार के कार्य से वे इतने द्रवित हुए कि उनकी आँखें छलछला आयीं। हम संगति के लिए तीन बार और एकत्र हुए। परमेश्‍वर के मार्गदर्शन के लिए मैं उसकाशुक्रगुज़ार हूँ। मैं सत्‍य को अधिक-से-अधिक समझती गया, मैंने परमेश्‍वर के देहधारण के रहस्‍य को जाना, और मैंने परमेश्‍वर के कार्य के तीन स्‍तरों को जाना। मैंने परमेश्‍वर के कार्य और मनुष्‍य के कार्य के बीच के फ़र्क को, पवित्र आत्‍मा और शैतान के कार्य के बीच के फ़र्क को, और सत्‍य के अन्‍य पहलुओं को जाना। मैं सचमुच महसूस कर सका कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर ही प्रभु यीशु के रूप में वापस लौटा है और वही सत्‍य है, जीवन का मार्ग है। उस शनिवार की शाम बहन याँग ने मुझे "तहे-दिल से करें प्यार उस व्यावहारिक परमेश्वर को," नामक एक नयासंगीत वीडियो भेजा, "परमेश्वर की इच्छा हुई प्रकट, अपने सच्चे प्रेमियों को करना है सिद्ध। ख़ुश और मासूम सभी करते परमेश्वर की जय, करते हैं मिलकर सच्चे परमेश्वर के चारों ओर सुंदर नृत्य। परमेश्वर की आवाज़ बुलाती है, दुनियाभर के लोगों को वापस। जीवन के शब्द सुनाए जाते हैं हम लोगों को। परमेश्वर के शब्दों का न्याय शुद्ध करता हम लोगों को।" यह गीत मेरे लिए इस क़दर प्रोत्‍साहित करने वाला था कि उससे द्रवित होकर मेरी आँखें छलझला आयीं। मैंने बहन याँग को फ़ोन लगाया लेकिन मैं इस क़दर भावनाओं से ओतप्रोत था कि मैं बोल नहीं सका। मैं बारबार सिर्फ़ इतना ही बोल पाया, "शुक्र है परमेश्‍वर का!शुक्रगुज़ार हूँ आपका…"

जब मेरी भावनाओं उफान शान्‍त हो गया, तो उसी रात मैंने अपने भाइयों और बहनों के साथ मर्मस्‍पर्शी बातचीत की। मैं कृतज्ञ था कि उस पूरे दौरान परमेश्‍वर ने मेरे उद्धार की उम्‍मीद नहीं छोड़ी थी और उसने मेरे प्रति मेरे विद्रोह और प्रतिरोध के अनुरूप व्‍यवहार नहीं किया था। इसकी बजाय, वह हमेशा मेरे साथ बना रहा। उसने धीरे-धीरे मेरा मार्गदर्शन करनेऔर मुझे प्रेरित करने के लिए, अपने घर वापस लाने, अपने सम्‍मुख लाने के लिए, सुसमाचार सम्‍बन्‍धी फि़ल्‍मों, वीडियो, और कलीसिया के भाइयों और बहनों के अनुभवों पर आधारित लेखों का इस्‍तेमाल किया था। मैंने सच्‍चे दिल से अपने भाइयों और बहनों से कहा: "मैंने परमेश्‍वर के प्रेम को अनुभव कर लिया है और मैंने परमेश्‍वर के देहधारी होने के सत्‍य को भी समझ लिया है। मैं अब कभी भी सुनी हुई बातों या अफ़वाहों में विश्‍वास नहीं करूँगा। मैं सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर को पूरी तरह से अपने उद्धारकर्ता और अपने परमेश्‍वर के रूप में स्‍वीकार करता हूँ। क्‍योंकि मैं पक्‍के तौर पर निश्चित कर चुका हूँ कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर ही वापस लौटा प्रभु यीशु है—वही वह परमेश्‍वर है जिसने मुझपर अत्यंत अनुग्रह किया है, और वह मानव-जाति का उद्धारकर्ता है।"

जब मैं याद करता हूँ कि किस तरह पहले मैंने अफ़वाहों पर ध्‍यान दिया दिया था, किस तरह मैं परमेश्‍वर के अन्तिम दिनों के कार्य के प्रति द्वन्‍द्व से भरा हुआ था और यहाँ तक कि मैंने परमेश्‍वर के विरुद्ध फ़ैसला देते हुए कुछ शब्‍दों का प्रयोग तक कर डाला था, किस तरह मैं विद्रोही था, तो मैं परमेश्‍वर के प्रति अत्यंत ऋणी अनुभव करता हूँ—मैं व्‍यथित हूँ और पश्‍चाताप से भरा हुआ हूँ। लेकिन, बहन याँग ने मुझसे कहा: "जब हम परमेश्‍वर को नहीं जानते, तब मनुष्‍यों के रूप में हम झूठद्वारा छले जाने की आशंका होती है। जब तक हम सच्‍चे मन से पश्‍चाताप करते रहेंगे, परमेश्‍वर इसे ध्यान में नहीं रखेगा। परमेश्‍वर का वचन है, "इस बार परमेश्वर लोगों को समाप्त करने नहीं, बल्कि यथासम्भव उनकी रक्षा करने आये हैं। गलतियां किससे नहीं होतीं? यदि सभी को समाप्त कर दिया जायेगा तो फिर इसे उद्धार कैसे कहेंगे? कुछ आज्ञालंघन जान-बूझकर किये जाते हैं और कुछ अनजाने में हो जाते हैं। अनजाने में हुये मामलों में, पहचानने के बाद आप उन्हें बदल सकते हैं, तो क्या परमेश्वर बदलने से पहले ही आपको समाप्त कर देंगे? क्या ऐसे ही परमेश्वर लोगों की रक्षा करते हैं? नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है! इससे कोई अंतर नहीं पडता कि आज्ञा का उल्लंघन अनजाने में हुआ है कि विद्रोही स्वभाव के कारण, केवल इतना याद रखें: शीघ्रता करें और वास्तविकता को पहचानें! आगे बढने का प्रयास करें; हालात कुछ भी हों, आप आगे बढने का प्रयास करें। परमेश्वर लोगों की रक्षा करने के कार्य में लगे हैं और वह जिनकी रक्षा करना चाहते हैं उन्हें अंधाधुंध तरीके से कैसे मार देंगे?" ("मसीह की बातचीतों के अभिलेख" में "परमेश्वर की इच्छा है कि यथासंभव लोगों की रक्षा की जाये")। परमेश्‍वर के वचनों ने मुझे बहुत सान्‍त्‍वना दी है और उन्होंने मुझे यह समझने की गुंजाइश दी है कि परमेश्‍वर दया और क्षमा से परिपूर्ण है। परमेश्‍वर का प्रेम बहुत महान है!मैं परमेश्‍वर के प्रति अपने हृदय मेंजो कृतज्ञता अनुभव कर रहा हूँ उसे व्‍यक्‍त करने से मैं खुद को रोक नहीं सकता। बाद के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के भाइयों और बहनों के साथ जारी रहे वार्तालाप के माध्‍यम से मैं समझ सका कि यह कलीसिया वैसी क़तई नहीं है जैसा अफ़वाहें उसके बारे में दावा करती हैं। वास्‍तव में, वह इन दावों के सर्वथा विपरीत है। यह हमारे लिए सत्‍य की खोज करने और परमेश्‍वर को जानने की जगह है। जब हम सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया में एकत्र होते हैं, तब कोई भी व्‍यक्ति खाने-पीने या मौज करने की बात नहीं करता; कोई भी व्‍यक्ति कारों, पैसों या मकानों के बारे में बात नहीं करता; कोई भी व्‍यक्ति दुनिया की गन्‍दी, घिनौनी, और बुरी चीज़ों के बारे में बात नहीं करता। हम सब मिलजुल कर परमेश्‍वर के वचनों को पढ़ते हैं और परमेश्‍वर के वचनों के बारे में अपने अनुभवों और ज्ञान पर आपस में संगति करते हैं। हम परमेश्‍वर के वचनों का अभ्यास करते हैं, उनका अनुसरण करते हैं। मैं देख सकता हूँ कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के भीतर परमेश्‍वर के वचनों का वर्चस्‍व है, सत्‍य का वर्चस्‍व है, मसीह का वर्चस्‍व है। यह निष्‍पक्षता और धार्मिकता से परिपूर्ण स्‍थल है। मुझे महसूस होता है जैसे मैं एक नये स्‍वर्ग और पृथ्‍वी में सुन्‍दर जीवन का आस्‍वाद ले रहा हूँ! अब जब मैं उन अफ़वाहों को याद करता हूँ, तो मुझे अहसास होता है कि वे लोगों को फँसाने और नुकसान पहुँचाने के अलावा कुछ नहीं करतीं, और इन्‍हीं अफ़वाहों की वजह से मैंने परमेश्‍वर के अन्तिम दिनों के उद्धार को क़रीब-क़रीब खो दिया था। शुक्र है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने मुझे बचा लिया और परमेश्वर के कार्य कि कुछ समझ हासिल करने दी। इससे मेरी आत्‍मा जाग्रत हो गयी, मैं शैतान की अफ़वाहों के उलझे हुए जाल को तोड़कर उससे बाहर आ गया, और मैं परमेश्‍वर के सिंहासन के समक्ष आ गया। मैं परमेश्‍वर का शुक्रगुज़ार हूँ कि उसने मुझे बचा लिया!

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