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शुद्धिकरण का मार्ग

क्रिस्टफर, फिलीपींस

मेरा नाम क्रिस्टफर है और मैं फिलीपींस की एक पारिवारिक कलीसिया का पादरी हूँ। 1987 में, मैंने बपतिस्मा लिया और प्रभु यीशु के पास लौट आया। प्रभु की कृपा से, 1996 में, मैं स्थानीय कलीसिया का पादरी बन गया। उस समय, फिलीपींस के आस-पास कई जगहों पर प्रचार करने के अलावा, मैंने हांगकांग और मलेशिया जैसे स्थानों में भी प्रचार किया। पवित्र आत्मा के कार्य और मार्गदर्शन से, मुझे लगा कि मेरे पास प्रभु के लिए किये गए मेरे काम में अखूट ऊर्जा थी और मेरे उपदेशों में शब्दों का एक अटूट प्रवाह था। मैं अक्सर भाइयों और बहनों को, जब भी वे नकारात्मक और कमज़ोर होते थे, सहारा देने जाया करता था। कभी-कभी उनके परिवार के वो सदस्य जो प्रभु पर विश्वास नहीं करते थे, मेरे प्रति रूखे होते थे, फिर भी मैं सहनशील और धैर्यवान बना रहता था, प्रभु पर विश्वास नहीं खोता था और मेरा मानना था कि प्रभु उन्हें बदल सकता था। इससे मुझे लगा कि जैसे प्रभु में विश्वास करने के बाद से, मैं काफ़ी बदल गया था। बहरहाल, 2011 से, मुझे पवित्र आत्मा का कार्य पहले जैसी दृढ़ता से महसूस नहीं हुआ है। धीरे-धीरे, मेरे उपदेशों के लिए मेरे पास कोई नया प्रबोधन नहीं रहा और न ही पाप में जीते रहने से मुक्त होने की शक्ति रही। जब भी मेरी पत्नी और बेटी मेरी इच्छा के अनुसार नहीं चलती थीं, मैं अपने आप को नाराज होने से, और उन्हें अपने गुस्से के द्वारा सबक सिखाने से, रोक नहीं पाता था। मुझे पता था कि यह प्रभु की इच्छा के अनुसार नहीं था, लेकिन मैं अक्सर खुद पर नियंत्रण नहीं रख सकता था। मैं इस बारे में विशेष रूप से परेशान महसूस किया करता था। पाप और पश्चाताप के जीवन से खुद को मुक्त करने के लिए, मैंने बाइबल पढ़ने, उपवास रखने और प्रार्थना करने की दिशा में अधिक प्रयास किया और हर जगह आध्यात्मिक पादरियों को ढूँढा ताकि इस बारे में मिलकर खोज की जाए और पता लगाया जाए। लेकिन मेरे सभी प्रयास बेकार रहे थे और पाप में जीते रहने में और मेरी आत्मा के अंधेरे में, कोई भी फर्क नहीं पड़ा।

फिर वसंत 2016 में एक शाम, मेरी पत्नी ने मुझसे पूछा, "क्रिस्टफर, मैंने देखा है कि तुम हाल में बहुत परेशान रहा करते हो। तुम्हारे मन में क्या बात है?" मेरी पत्नी के यह पूछने पर, मैंने उसे बताया कि मुझे कौन-सी बात परेशान कर रही थी, "मैं पिछले कुछ सालों से सोच रहा हूँ कि क्यों मैं पादरी होने और प्रभु में कई सालों से विश्वास करने के बावजूद पाप में रहने से खुद को मुक्त नहीं कर सकता हूँ। मैं अब प्रभु को छू नहीं सकता हूँ। ऐसा लगता है जैसे प्रभु ने मुझे त्याग दिया है। हालाँकि मैं हर जगह प्रचार करता हूँ, फिर भी जैसे ही मेरे पास खाली समय होता है, खासकर देर रात में, मैं हमेशा एक तरह का खालीपन और दुश्चिन्ता महसूस करता हूँ और यह भावना और भी मजबूत होते जाती है। मैं सोचता हूँ कि कैसे मैंने कई वर्षों से प्रभु में विश्वास किया है, मैंने बाइबल को कितना पढ़ा है और अक्सर अपने क्रूस को उठाने का और खुद को जीतने का संकल्प किया है, लेकिन फिर भी मैं हमेशा पापों से बंधा रहता हूँ, झूठ बोलने में सक्षम हूँ और अपने हितों और चेहरे को बचाने के लिए 'और उन के मुंह से कभी झूठ न निकला था, वे निर्दोष हैं' (प्रकाशितवाक्य 14:5) का पालन नहीं करता हूँ। परीक्षण और शुद्धिकरण का सामना करते समय, हालांकि मुझे पता है कि मेरे पास प्रभु की सहमति है, मैं फिर भी खुद को प्रभु से शिकायत करने और उसे गलत समझने से रोक नहीं सकता और मैं खुद से इनकार करने में पूरी तरह से असमर्थ हूँ। मुझ डर है कि जब प्रभु आएगा, तो मैं इस तरह पाप में रहने के कारण स्वर्ग के राज्य में प्रवेश नहीं कर पाऊँगा!"

यह सुनकर, मेरी पत्नी ने कहा, "क्रिस्टफर, तुम इस तरह कैसे सोच सकते हो? तुम्हें विश्वास करना चाहिए; तुम पादरी हो! हालांकि हम पाप में रहते हैं और पाप के बंधन से मुक्त नहीं हुए हैं, बाइबल कहती है, 'कि यदि तू अपने मुंह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे और अपने मन से विश्वास करे, कि प्रभु ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा' (रोमियों 10:9), 'क्योंकि जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा' (रोमियों 10:13)। जब तक हम बाइबल पढ़ने, सहभागिता करने और प्रभु से प्रार्थना करने में बने रहते हैं, और अपने क्रूस को उठाते हैं और हमेशा प्रभु के दूसरे आगमन तक अनुसरण करते हैं, हम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने और प्रभु के आशीर्वाद को प्राप्त करने में सक्षम होंगे।"

तब मैंने अपनी पत्नी से कहा, "मैंने पहले ऐसा ही सोचा था, लेकिन पतरस 1:16 में यह कहा गया है: 'क्योंकि लिखा है, कि पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ।' मैंने तीस वर्षों से प्रभु में विश्वास किया है, फिर भी मैं प्रभु के मार्ग पर नहीं रह पाता हूँ, और पाप में रहते हुए, मैं अब भी अक्सर प्रभु का विरोध करने में सक्षम हूँ; यह ज़रा भी पवित्र नहीं है। ओह! मैंने प्रभु की शिक्षाओं का पालन करने के लिए कितनी बार संकल्प किया, फिर भी मैं प्रभु के वचन का अभ्यास नहीं कर सका। ऐसी परिस्थितियों में, मैं स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के योग्य कैसे हो सकता हूँ? प्रभु यीशु ने कहा: 'जो मुझ से, हे प्रभु, हे प्रभु कहता है, उन में से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है' (मत्ती 7:21)। प्रभु के वचनों के अनुसार, स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करना उतना आसान नहीं है जितना हम सोचते हैं। प्रभु पवित्र है, तो ऐसे लोग जो प्रभु के वचन का अभ्यास नहीं कर सकते और जो अक्सर उसका विरोध करते हैं, स्वर्ग के राज्य में कैसे जा सकते हैं? केवल वे लोग जो बदल गए हैं और जो प्रभु की इच्छा का पालन करते हैं, वे ही स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं!"

मेरी पत्नी ने एक पल के लिए सोचा और कहा, "तुम जो कह रहे हो वह समझ में आता है। प्रभु पवित्र है और हम अभी भी पापी हैं। हम प्रभु के राज्य के योग्य नहीं हैं। बस बात यह है ... मुझे अचानक याद आता है ... क्या पादरी ल्यू ने कलीसिया के लिए कोरियाई पादरी किम को आमंत्रित नहीं किया है? क्यों न इस बार हम इस मुद्दे पर खोज करें?" मैंने कहा: "ठीक है, वह भी सही है। प्रभु यीशु ने कहा: 'मांगो, तो तुम्हें दिया जाएगा; ढूंढ़ो, तो तुम पाओगे; खटखटाओ, तो तुम्हारे लिये खोला जाएगा' (मत्ती 7:7)। जब तक हम खोजते हैं, मुझे विश्वास है कि प्रभु हमारी अगुआई करेगा। एक पादरी होने के नाते, मुझे अपने भाइयों और बहनों के जीवन पर विचार करना चाहिए। मुझे बिना समझे प्रभु पर विश्वास नहीं करना चाहिए, वर्ना मैं भाइयों और बहनों को एक उलझन में रखूँगा और खुद को भी फँसा लूँगा। तो चलो, हम कोरियाई पादरी किम के आने की प्रतीक्षा करें और फिर इस मुद्दे के बारे में उससे पूछें।"

क्योंकि मैं पादरी किम से मिलना चाहता था, मैंने पादरी किम के बारे में कुछ जानना चाहा। तो मैंने इंटरनेट पर कोरियाई कलीसिया की जाँच की। उभर आए पृष्ठों पर, मैंने वेबसाइट https://www.holyspiritspeaks.org देखी। मैंने वेबसाइट खोली और कुछ शब्दों ने मुझे आकर्षित किया: "मनुष्य ने बहुतायत से अनुग्रह प्राप्त किया, जैसे देह की शांति और खुशी, एक व्यक्ति के विश्वास करने पर पूरे परिवार की आशीष, और बीमारियों से चंगाई के इत्यादि। शेष मनुष्य भले कर्म और उनका ईश्वरीय प्रकटन था; यदि मनुष्य इस तरह के आधार पर जीवन जी सकता था, तो उसे एक अच्छा विश्वासी माना जाता था। केवल ऐसे विश्वासी ही मृत्यु के बाद स्वर्ग में प्रवेश कर सकते थे, जिसका अर्थ है कि उन्हें बचा लिया गया था। परन्तु, अपने जीवन काल में, उन्होंने जीवन के मार्ग को बिलकुल भी नहीं समझा था। उन्होंने बस पाप किए थे, फिर परिवर्तित स्वभाव की ओर बिना किसी मार्ग वाले निरंतर चक्र में पाप-स्वीकारोक्ति की थी; अनुग्रह के युग में मनुष्य की दशा ऐसी ही थी। क्या मनुष्य ने पूर्ण उद्धार पा लिया था? नहीं!" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "देहधारण का रहस्य (4)")। ये वचन इतने अच्छे थे कि मैं आगे पढ़ना जारी रखने से खुद को रोक नहीं सका: "इसलिए, उस चरण के पूरा हो जाने के पश्चात्, अभी भी न्याय और ताड़ना का काम है। यह चरण वचन के माध्यम से मनुष्य को शुद्ध बनाता है ताकि मनुष्य को अनुसरण करने का एक मार्ग प्रदान किया जाए। यह चरण फलप्रद या अर्थपूर्ण नहीं होगा यदि यह दुष्टात्माओं को निकालना जारी रखता है, क्योंकि मनुष्य के पापी स्वभाव को दूर नहीं जाएगा और मनुष्य केवल पापों की क्षमा पर आकर रुक जाएगा। पापबलि के माध्यम से, मनुष्य के पापों को क्षमा किया गया है, क्योंकि सलीब पर चढ़ने का कार्य पहले से ही पूरा हो चुका है और परमेश्वर शैतान को जीत लिया है। परन्तु मनुष्य का भ्रष्ट स्वभाव अभी भी उनके भीतर बना हुआ है और मनुष्य अभी भी पाप कर सकता है और परमेश्वर का प्रतिरोध कर सकता है; परमेश्वर ने मानवजाति को प्राप्त नहीं किया है। इसीलिए कार्य के इस चरण में परमेश्वर मनुष्य के भ्रष्ट स्वभाव को प्रकट करने के लिए वचन का उपयोग करता है और मनुष्य से सही मार्ग के अनुसार अभ्यास करने के लिए कहता है। यह चरण पिछले चरण की अपेक्षा अधिक अर्थपूर्ण और साथ ही अधिक लाभदायक भी है, क्योंकि अब वचन ही है जो सीधे तौर पर मनुष्य के जीवन की आपूर्ति करता है और मनुष्य के स्वभाव को पूरी तरह से नया बनाए जाने में सक्षम बनाता है; यह कार्य का ऐसा चरण है जो अधिक विस्तृत है" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "देहधारण का रहस्य (4)")। इसे पढ़कर, मैं बेहद उत्साहित हुआ। हालांकि मैं इन वचनों को पूरी तरह से समझ नहीं पाया था और कुछ वचनों ने मुझे परेशान भी किया, फिरे भी उन्होंने मुझे आशा दी। मुझे लगा कि यहाँ मुझे शुद्ध होने और खुद को बदलने का एक तरीक़ा मिल सकता है। मैंने अपनी प्रार्थना सुनने के लिए प्रभु का तहेदिल से शुक्रिया अदा किया। मैंने फिर से कुछ सामग्री पढ़ी और महसूस किया कि ये वचन इतनी अच्छी तरह से लिखे गए थे कि उन्होंने मेरी प्यासी आत्मा को पानी पिलाया और इसकी चरवाही की। जब मैंने वेबसाइट पर यह लिखा हुआ देखा: "यदि तुम्हें अपने देश या क्षेत्र में सुसमाचार हॉटलाइन नहीं मिल रही है, तो कृपया एक संदेश भेजो और जितनी जल्दी हो सकेगा, हम तुमसे संपर्क करेंगे," मैंने तुरंत जाँच की, लेकिन फिलीपींस की कोई सुसमाचार हॉटलाइन नहीं थी, और इसलिए मैंने तुरंत एक संदेश छोड़ा और मेरा संपर्क नंबर और ईमेल पता देने में संकोच नहीं किया।

उस शाम घर लौटने के बाद, मैंने अपनी पत्नी को यह समाचार बताया, और मैंने जो कहा उसे सुनने के बाद, मेरी पत्नी भी खोज करने को तैयार थी। मैं वास्तव में प्रभु का शुक्रिया अदा करता हूँ कि अगले दिन उन्होंने मेरे संदेश का जवाब दिया और दोपहर को हमसे ऑनलाइन बात करने की व्यवस्था की। दोपहर को, हमने बहन ल्यू और बहन स्यू से बात की। वार्तालाप से, मुझे लगा कि उन्होंने सरलता से, कुशलता से, और अंतर्दृष्टि के साथ बात की थी। मेरी पत्नी मुझसे भी ज्यादा चिंतित थी और बोली, "मेरे पास कुछ है जो मैं तुमसे पूछना चाहती हूँ। क्या यह ठीक होगा?" उन्होंने उत्साहपूर्वक कहा, "निश्चित रूप से।" मेरी पत्नी ने कहा, "आपकी कलीसिया की वेबसाइट पर यह लिखा है, 'अंत के दिनों के प्रभु ने न्याय और ताड़ना के कार्य का एक चरण किया है।' मेरे पति और मैं, हम यह जानते हैं कि पवित्रता के बिना, कोई भी प्रभु को नहीं देख पाएगा क्योंकि प्रभु पवित्र है, लेकिन रोमियों में यह कहा गया है,' कि यदि तू अपने मुंह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे और अपने मन से विश्वास करे, कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा' (रोमियों 10:9)। 'क्योंकि जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा' (रोमियों 10:13)। अगर हम प्रभु यीशु में विश्वास करते हैं तो हम पहले से ही बचाए जा चुके हैं और हम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं, तो क्यों अंत के दिनों में प्रभु न्याय और ताड़ना के कार्य के एक चरण को करने का बीड़ा उठाता है? मैं इस मुद्दे को समझ नहीं पा रही हूँ और उम्मीद करती हूँ कि तुम इसके बारे में बात कर सकते हो।"

ल्यू यूमेई ने जवाब दिया, "प्रभु को धन्यवाद हो! चलो, हम मिलकर सहभागिता करते हैं और परमेश्वर को हमारा मार्गदर्शन करने देते हैं। आओ, पहले हम देखें कि यहाँ 'बचाए जाने' का अर्थ क्या है। व्यवस्था के युग के उत्तरार्ध में, सभी लोगों ने परमेश्वर को छोड़ दिया था, और वे परमेश्वर के प्रति अपना सम्मान खो बैठे थे। वे अधिक से अधिक पापी हो गए थे और यहाँ तक कि वे बलि के लिए अंधे, लंगड़े और रोगग्रस्त मवेशी, भेड़ और कबूतर लाया करते थे। उस युग के लोग अब व्यवस्था को कायम नहीं रखते थे और वे सभी कानून तोड़ने के लिए मौत की सज़ा पाने के खतरे में थे। ऐसी परिस्थितियों में, लोगों को व्यवस्था के तहत निश्चित मौत से बचाने के लिए, परमेश्वर ने व्यक्तिगत रूप से देहधारण किया और छुटकारे के कार्य को शुरू किया था और अंत में, पूरी मानव जाति को पाप से छुड़ाने के लिए वह क्रूस पर चढ़ाया गया था। मनुष्य को उसके पापों के लिए क्षमा कर दिया गया था क्योंकि वह प्रभु यीशु में विश्वास करता था और इस प्रकार वह प्रभु के सामने आने, प्रभु से प्रार्थना करने और परमेश्वर की कृपा के आशीर्वाद का आनंद लेने के योग्य था। अनुग्रह के युग में 'बचाए जाने' का यह वास्तविक अर्थ है। दूसरे शब्दों में, 'बचाए जाना' केवल मनुष्यों के पापों की क्षमा है। अर्थात, परमेश्वर लोगों को पापी नहीं मानता है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अपने आप में लोगों के पास कोई पाप नहीं हैं। इसलिए, बचाए जाने का मतलब यह नहीं है कि हम पूरी तरह शुद्ध हो गए और बचा लिए गए हैं। अगर हम शुद्ध होना चाहते हैं, तो हमें अंतिम दिनों के परमेश्वर के न्याय के कार्य को स्वीकार करना होगा।"

उनकी सहभागिता को सुनकर, मेरी पत्नी और मैं यह समझ गए कि "बचाए जाना", जैसा कि रोमियों के धर्म-पत्र में कहा गया है, प्रभु यीशु द्वारा दिए गए छुटकारे की स्वीकृति को, और कानून तोड़ने के लिए अब मृत्यु की सज़ा न पाने को, संदर्भित करता था। "बचाए जाने" का अर्थ पूरी तरह से शुद्ध हो जाना नहीं था, जिसकी हमने कल्पना की थी। उन्होंने जो कहा, वह अर्थपूर्ण लगा। "बचाए जाने" को इस तरह से समझाना पाप करने और पापों को स्वीकार करने की हमारी स्थिति के विपरीत नहीं था। तो प्रभु यीशु ने जो किया वह केवल छुटकारे का कार्य था, यह इंसान को पूरी तरह से शुद्ध करने और बचाने का कार्य नहीं था। हालांकि लोग प्रभु में विश्वास करते हैं और बचाए जाते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि वे पूरी तरह से शुद्ध हो गए हैं। उनकी सहभागिता को सुनकर, मुझे लगा कि इसमें खोज करने के लिए सच्चाई मौजूद थी, इसलिए मैंने उनकी सहभागिता को और आगे सुनने की मेरी इच्छा व्यक्त की। मैंने कहा, "प्रभु को धन्यवाद हो! तुम वास्तव में बहुत अच्छा बोलती हो। इस तरह तुमसे बात करने से, हम "बचाए जाने" के वास्तविक अर्थ को समझते हैं। कृपया अपनी सहभागिता जारी रखो। प्रभु हमारा मार्गदर्शन करे।" बहन स्यू ने कहा, "ठीक है, आओ सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन के कुछ अनुच्छेद पढ़ें और यह सब स्पष्ट हो जाएगा। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने कहा: 'उस समय यीशु का कार्य समस्त मानव जाति का छुटकारा था। उन सभी के पापों को क्षमा कर दिया गया था जो उसमें विश्वास करते थे; जितने समय तक तुम उस पर विश्वास करते थे, उतने समय तक वह तुम्हें छुटकारा देगा; यदि तुम उस पर विश्वास करते थे, तो तुम अब और पापी नहीं थे, तुम अपने पापों से मुक्त हो गए थे। यही है बचाए जाने, और विश्वास द्वारा उचित ठहराए जाने का अर्थ। फिर भी जो विश्वास करते थे उन लोगों के बीच, वह रह गया था जो विद्रोही था और परमेश्वर का विरोधी था, और जिसे अभी भी धीरे-धीरे हटाया जाना था। उद्धार का अर्थ यह नहीं था कि मनुष्य पूरी तरह से यीशु द्वारा प्राप्त कर लिया गया था, लेकिन यह कि मनुष्य अब और पापी नहीं था, कि उसे उसके पापों से क्षमा कर दिया गया था: बशर्ते कि तुम विश्वास करते थे, तुम कभी भी अब और पापी नहीं बनोगे' ("वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर के कार्य का दर्शन (2)")। 'मनुष्य को उसकी बीमारी से चंगा किया गया था और उसके पापों को क्षमा किया गया था, परन्तु बस वह कार्य, कि किस प्रकार मनुष्य के भीतर से उन शैतानी स्वभावों को निकला जा सकता है, उसमें नहीं किया गया था। मनुष्य को केवल उसके विश्वास के कारण ही बचाया गया था और उसके पापों को क्षमा किया गया था, परन्तु उसका पापी स्वभाव उसमें से निकाला नहीं गया था और वह तब भी उसके अंदर बना रहा था। मनुष्य के पापों को देहधारी परमेश्वर के द्वारा क्षमा किया गया था, परन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि मनुष्य के भीतर कोई पाप नहीं है। पाप बलि के माध्यम से मनुष्य के पापों को क्षमा किया जा सकता है, परन्तु मनुष्य इस मसले को हल करने में असमर्थ रहा है कि वह कैसे आगे और पाप नहीं कर सकता है और कैसे उसके पापी स्वभाव को पूरी तरह से दूर किया जा सकता है और उसे रूपान्तरित किया जा सकता है। परमेश्वर के सलीब पर चढ़ने के कार्य की वजह से मनुष्य के पापों को क्षमा किया गया था, परन्तु मनुष्य पुराने, भ्रष्ट शैतानी स्वभाव में जीवन बिताता रहा। वैसे तो, मनुष्य को भ्रष्ट शैतानी स्वभाव से अवश्य पूरी तरह से बचाया जाना चाहिए ताकि मनुष्य का पापी स्वभाव पूरी तरह से दूर किया जाए और फिर कभी विकसित न हो, इस प्रकार मनुष्य के स्वभाव को बदले जाने की अनुमति दी जाए। इसके लिए मनुष्य से अपेक्षा की जाती है कि वह जीवन में उन्नति के पथ को, जीवन के मार्ग को, और अपने स्वभाव को परिवर्तित करने के मार्ग को समझे। साथ ही इसके लिए मनुष्य को इस मार्ग के अनुरूप कार्य करने की आवश्यकता है ताकि मनुष्य के स्वभाव को धीरे-धीरे बदला जा सके और वह प्रकाश की चमक में जीवन जी सके, और यह कि वह परमेश्वर की इच्छा के अनुसार सभी चीज़ों को कर सके, और भ्रष्ट शैतानी स्वभाव को दूर कर सके, और शैतान के अंधकार के प्रभाव को तोड़कर आज़ाद हो सके, उसके परिणामस्वरूप पाप से पूरी तरह से ऊपर उठ सके। केवल तभी मनुष्य पूर्ण उद्धार प्राप्त करेगा' ("वचन देह में प्रकट होता है" से "देहधारण का रहस्य (4)")। 'यद्यपि यीशु ने मनुष्यों के बीच अधिक कार्य किया है, उसने केवल समस्त मानवजाति के छुटकारे के कार्य को पूरा किया और वह मनुष्य की पाप-बलि बना, मनुष्य को उसके भ्रष्ट स्वभाव से छुटकारा नहीं दिलाया। शैतान के प्रभाव से मनुष्य को पूरी तरह बचाने के लिये यीशु को न केवल पाप-बलि के रूप में मनुष्यों के पापों को लेना आवश्यक था, बल्कि मनुष्य को उसके भ्रष्ट स्वभाव से पूरी तरह मुक्त करने के लिए परमेश्वर को और भी बड़े कार्य करने की आवश्यकता थी जिसे शैतान द्वारा भ्रष्ट कर दिया गया था। और इसलिए, मनुष्य को उसके पापों के लिए क्षमा कर दिए जाने के बाद, एक नये युग में मनुष्य की अगुवाई करने के लिए परमेश्वर वापस देह में लौटा, और उसने ताड़ना एवं न्याय के कार्य को आरंभ किया, और इस कार्य ने मनुष्य को एक उच्चतर क्षेत्र में पहुँचा दिया। वे सब जो परमेश्वर के प्रभुत्व के अधीन समर्पण करेंगे उच्चतर सत्य का आनंद लेंगे और अधिक बड़ी आशीषें प्राप्त करेंगे। वे वास्तव में ज्योति में निवास करेंगे, और सत्य, मार्ग और जीवन को प्राप्त करेंगे' ("वचन देह में प्रकट होता है" के लिए प्रस्तावना)। हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों से देख सकते हैं कि यदि हम केवल अनुग्रह के युग से प्रभु के छुटकारे के कार्य को बनाए रखते हैं और परमेश्वर के अंत के दिनों के न्याय के कार्य को स्वीकार नहीं करते हैं, तो हमारे पाप की जड़ की समस्या का समाधान नहीं होगा। अंत के दिनों का सर्वशक्तिमान परमेश्वर आ चुका है और उसने छुटकारे की नींव पर इंसान के न्याय और शुद्धिकरण के कार्य का एक चरण पूरा किया है—उसने इंसान की भ्रष्टता की सच्चाई को प्रकट करने और उसकी शैतानी प्रकृति का न्याय करने के लिए सत्य वचन बोले हैं। वह लोगों की शैतानी प्रकृति को बदलने और शैतान के प्रभाव से लोगों को पूरी तरह से मुक्त करने और उन्हें बचाने के लिए आया है। यह स्पष्ट है कि अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के न्याय का कार्य लोगों को शुद्ध करने, बचाने और पूर्ण करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और मौलिक कार्य है। इसलिए, केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के न्याय के कार्य को स्वीकार करके हम अपने भ्रष्ट सार और प्रभु के धार्मिक स्वभाव की पूरी समझ पा सकते हैं, पूरी तरह से शैतान के प्रभाव से मुक्त हो सकते हैं, परमेश्वर द्वारा बचाए जा सकते हैं और ऐसे लोग बन सकते हैं जो आज्ञा-पालन, आराधना करते हों और परमेश्वर के साथ अनुकूल हों।"

इन सहभागिताओं को सुनकर, मेरा दिल उज्ज्वल हुआ और मुझे लगा जैसे लम्बे समय से चल रही मेरी समस्याओं का अंततः समाधान हो गया था। तो अनुग्रह के युग में परमेश्वर सिर्फ छुटकारे का कार्य कर रहा था, न कि लोगों को उनके भ्रष्ट शैतानी स्वभाव से मुक्त करने का काम। परमेश्वर के अंत के दिनों में देहधारण के सत्य वचनों द्वारा किया गया न्याय का कार्य, इंसान के पूर्ण शुद्धिकरण और उद्धार का कार्य है। तो परमेश्वर कैसे लोगों को शुद्ध करता, बदलता और उन्हें पूरी तरह से बचाता है? मैं इस सवाल का जवाब जानने के लिए उत्सुक था। तो मैं यह पूछने के लिए इंतज़ार नहीं कर सका, "तुमने अभी जो बात की है उसे मैं समझ गया हूँ और जानता हूँ कि केवल प्रभु के दूसरे आगमन के द्वारा न्याय के कार्य के एक चरण को करने से ही हम शुद्धिकरण प्राप्त कर सकते हैं। यह वही है जो मैंने लंबे समय से चाहा है। अब मैं जो वास्तव में जानना चाहता हूँ वह यह है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर कैसे लोगों को शुद्ध करने और बचाने के लिए न्याय का कार्य करता है? कृपया अपनी सहभागिता साझा करो।"

बहन स्यू ने आगे कहा, "यह सवाल कि लोगों को शुद्ध करने और बचाने के लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर कैसे न्याय का कार्य करता है, विशेष रूप से किसी भी उस व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है जो परिवर्तन और शुद्धिकरण प्राप्त करना चाहता है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन इस मामले की सच्चाई को बताते हैं। मैं तुम्हें सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन भेज दूँगी। भाई, कृपया उन्हें पढ़ना!"

मैंने उत्साहित होकर सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ा: "अंत के दिनों में, मसीह मनुष्य को सिखाने के लिए विभिन्न प्रकार की सच्चाइयों का उपयोग करता है, मनुष्य के सार को उजागर करता है, और उसके वचनों और कर्मों का विश्लेषण करता है। इन वचनों में विभिन्न सच्चाइयों का समावेश है, जैसे कि मनुष्य का कर्तव्य, मनुष्य को किस प्रकार परमेश्वर का आज्ञापालन करना चाहिए, हर व्यक्ति जो परमेश्वर के कार्य को मनुष्य को किस प्रकार परमेश्वर के प्रति निष्ठावान होना चाहिए, मनुष्य को किस प्रकार सामान्य मानवता से, और साथ ही परमेश्वर की बुद्धि और उसके स्वभाव इत्यादि को जीना चाहिए। ये सभी वचन मनुष्य के सार और उसके भ्रष्ट स्वभाव पर निर्देशित हैं। खासतौर पर, वे वचन जो यह उजागर करते हैं कि मनुष्य किस प्रकार से परमेश्वर का तिरस्कार करता है इस संबंध में बोले गए हैं कि किस प्रकार से मनुष्य शैतान का मूर्त रूप और परमेश्वर के विरूद्ध दुश्मन की शक्ति है। अपने न्याय का कार्य करने में, परमेश्वर केवल कुछ वचनों से ही मनुष्य की प्रकृति को स्पष्ट नहीं करता है; वह लम्बे समय तक इसे उजागर करता है, इससे निपटता है, और इसकी काट-छाँट करता है। उजागर करने की इन विधियों, निपटने, और काट-छाँट को साधारण वचनों से नहीं, बल्कि सत्य से प्रतिस्थापित किया जा सकता है, जिसे मनुष्य बिल्कुल भी धारण नहीं करता है। केवल इस तरीके की विधियाँ ही न्याय समझी जाती हैं; केवल इसी तरह के न्याय के माध्यम से ही मनुष्य को वश में किया जा सकता है और परमेश्वर के प्रति समर्पण में पूरी तरह से आश्वस्त किया जा सकता है, और इसके अलावा मनुष्य परमेश्वर का सच्चा ज्ञान प्राप्त कर सकता है। न्याय का कार्य जिस चीज़ को उत्पन्न करता है वह है परमेश्वर के असली चेहरे और उसकी स्वयं की विद्रोहशीलता के सत्य के बारे में मनुष्य में समझ। न्याय का कार्य मनुष्य को परमेश्वर की इच्छा की, परमेश्वर के कार्य के उद्देश्य की, और उन रहस्यों की अधिक समझ प्राप्त करने देता है जो उसके लिए अबोधगम्य हैं। यह मनुष्य को उसके भ्रष्ट सार तथा उसकी भ्रष्टता के मूल को पहचानने और जानने, साथ ही मनुष्य की कुरूपता को खोजने देता है। ये सभी प्रभाव न्याय के कार्य के द्वारा निष्पादित होते हैं, क्योंकि इस कार्य का सार वास्तव में उन सभी के लिए परमेश्वर के सत्य, मार्ग और जीवन का मार्ग प्रशस्त करने का कार्य है जिनका उस पर विश्वास है। यह कार्य परमेश्वर के द्वारा किया गया न्याय का कार्य है" ("वचन देह में प्रकट होता है" से "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है")।

जब मैंने परमेश्वर के वचनों को पढ़ लिया, बहन स्यू ने अपनी सहभागिता जारी रखी, "सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन बहुत स्पष्ट रूप से बताते हैं कि परमेश्वर कैसे लोगों का न्याय करता है और उन्हें शुद्ध करता है। अंत के दिनों में परमेश्वर मुख्य रूप से इंसान का न्याय करने, उसे शुद्ध करने और बचाने के लिए इंसान के भ्रष्ट स्वभाव और प्रभु का विरोध करने वाली इंसान की शैतानी प्रकृति के बारे में सच्चाई बताता है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने कई पहलुओं पर सच्चाई बताई है—कैसे शैतान ने लोगों को भ्रष्ट कर दिया है, कैसे प्रभु ने लोगों को बचाया है, लोगों का अनुसरण करना क्या है, प्रभु का अनुपालन करना क्या है, परमेश्वर में विश्वास करने वाले व्यक्ति का क्या दृष्टिकोण होना चाहिए, किसी के स्वभाव में परिवर्तन क्या होता है, प्रभु से डरना और बुराई का त्याग करना क्या होता है, प्रभु के स्वभाव को नाराज करना क्या है, ईमानदार व्यक्ति कैसे बनें, आदि। ये सभी सच्चाइयाँ अधिकार और सामर्थ्य रखती हैं और लोगों को जीवन की आपूर्ति दे सकती हैं। यह अनन्त जीवन का मार्ग है जिसे परमेश्वर मानव जाति को प्रदान करता है। जब तक लोग परमेश्वर के वचन को स्वीकार करते हैं और उसका अभ्यास करते हैं, वे शुद्धिकरण और उद्धार प्राप्त कर सकते हैं। हमने कुछ वर्षों के लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर के न्याय के कार्य का अनुभव किया है और हमारे पास इन बातों का व्यक्तिगत अनुभव रहा है। जब हम इंसान के न्याय, ताड़ना और प्रकाशन के बारे में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ते हैं, तो हम महसूस करते हैं कि परमेश्वर के वचन, एक दुधारी तलवार की तरह, हमारे विद्रोह, भ्रष्टता, प्रतिरोध, गलत इरादों, अवधारणाओं और कल्पनाओं और यहाँ तक कि हमारे दिलों की गहराई में छिपे शैतानी विषाक्त पदार्थों को उजागर करते हैं। वे हमें दिखाते हैं कि हम घमंडी और आत्मतुष्ट, कुटिल और चालाक, स्वार्थी और नीच, और निज हितों को छोड़कर सभी के प्रति अंधे हैं, लेकिन हमें प्रभु का शायद ही कोई डर है। हम देखते हैं कि हम जो कुछ भी करते हैं और हमारे दिल जिससे भरे हुए हैं, वह सब गंदगी और भ्रष्टाचार है, जैसे कि हम एक इंसान की समानता से रहित जीते-जागते भूत हों। हम सभी अपने चेहरे दिखाने में शर्मिंदा महसूस करते हैं। हमें एहसास होता है कि यदि हम शैतान के भ्रष्ट स्वभाव से जीना जारी रखते हैं, तो हम हमेशा ऐसे लोग होंगे जो परमेश्वर को उकता देते हैं, हम कभी भी परमेश्वर की सराहना हासिल करने में सक्षम नहीं होंगे और हम हटाये जाने और सज़ा पाने के लिए नियत होंगे। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का न्याय, और वे वचन जिसे प्रकट करते हैं, वे हमें यह महसूस कराते हैं कि प्रभु आमने-सामने रहकर हमारा न्याय कर रहा है, जिससे हम प्रभु के प्रतापी, क्रोधपूर्ण और धार्मिक स्वभाव को पहचान पाते हैं, और हम धीरे-धीरे प्रभु का भय मानने वाला एक दिल, सच्चा पश्चाताप और परिवर्तन विकसित करते हैं। तब ऐसा लगता है कि हम इंसान की समानता में कुछ-कुछ जी रहे हैं और हम देखते हैं कि हमने वास्तव में परमेश्वर के महान उद्धार को प्राप्त कर लिया है। अगर परमेश्वर का न्याय हम पर नहीं आया होता, तो हम परमेश्वर के धार्मिक स्वभाव को जो मनुष्य के अपराध को सहन नहीं करता है, और उसके पवित्र और अच्छे सार को, नहीं जान पाते और हम अपने विद्रोह और अपनी भ्रष्टता के लिए घृणा विकसित नहीं करेंगे, और न ही हम हमारी भ्रष्टता को दूर कर शुद्ध होने में सक्षम होंगे। इसलिए हम जितना अधिक परमेश्वर के न्याय और ताड़ना का अनुभव करते हैं, उतना ही हम देखते हैं कि परमेश्वर का न्याय और उसकी ताड़ना ही हमारी सर्वोत्तम सुरक्षा है, हमारे लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद, और सबसे वास्तविक उद्धार है!"

बहन ल्यू ने भी सहभागिता की, "अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर का न्याय और ताड़ना का कार्य, लोगों पूरी तरह से शुद्ध करने, बचाने और पूर्ण करने का काम है। यदि हम अंतिम दिनों के मसीह के सिंहासन के सामने न्याय को स्वीकार नहीं करते हैं, तो हम शुद्धिकरण और हमारे जीवन स्वभाव में परिवर्तन प्राप्त करने में सक्षम नहीं होंगे, और निश्चित रूप से इसका नतीजा परमेश्वर द्वारा अस्वीकार किया जाना और हटा दिया जाना होगा, हम विनाश का सामना करेंगे और नष्ट हो जाएँगे। फिर उद्धार और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने का मौका कभी नहीं रहेगा। यह सत्य है।"

मैंने खुशी से कहा, "परमेश्वर को धन्यवाद हो! तुम्हारी सहभागिता को सुनने के बाद मैं अपने दिल में बहुत उज्ज्वल महसूस कर रहा हूँ। मैंने प्रभु में इतने सालों से विश्वास किया है, लेकिन वास्तव में मैं पाप में जीता रहा हूँ और इससे मुक्त होने में असमर्थ रहा हूँ। अब मैं समझता हूँ कि यदि मैं अंत के दिनों में परमेश्वर के न्याय और उसकी ताड़ना का अनुभव नहीं करता हूँ, तो मैं पाप के बंधन और अंकुश से मुक्त नहीं हो पाऊंगा। अब मुझे शुद्धिकरण और उद्धार का मार्ग मिल गया है।" कई दिनों की सहभागिता के बाद, मेरी पत्नी ने और मैंने कुछ सच्चाइयों को समझ लिया और सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार कर लिया।

मुझसे प्रेम करने और मुझे बचाने के लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर को धन्यवाद हो! एक पादरी के रूप में, उन सभी पादरियों और भाइयों और बहनों को जिन्हें मैं जानता हूँ, परमेश्वर के सामने लाने की मेरी ज़िम्मेदारी और मेरा दायित्व है। सहयोग की एक अवधि के बाद, न केवल कलीसिया के दर्जनों भाइयों और बहनों ने जो सभी बैठक में आते थे, सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार किया, बल्कि वे एक और पारिवारिक कलीसिया के पादरी को परिवार में ले आये और उस कलीसिया के अधिकांश भाई-बहन परमेश्वर के सामने लौट आए। मुझे यह देखकर खुशी हुई थी कि उन भाइयों और बहनों ने अंत के दिनों में परमेश्वर के उद्धार को स्वीकार कर लिया था और वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने उठाए गए थे। यह सब सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य का सुफल है और इस सारी महिमा को हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर को देना चाहते हैं!

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