सत्य को खोजने वाले सभी लोगों का हम से सम्पर्क करने का स्वागत करते हैं

अंतिम दिनों के मसीह के कथन - संकलन

अंत के दिनों के मसीह के कथन (संकलन)

—कलीसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचन

सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अंत के दिनों का मसीह, लोगों का न्याय करने व उन्हें शुद्ध करने के लिए, और उन्हें नए युग : राज्य के युग में ले जाने के लिए वचन बोलता है। जो लोग अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर का न्याय स्वीकार करते हैं और परमेश्वर के वचनों के सिंचन और प्रावधान का आनंद लेते हैं, वे वास्तव में प्रकाश में जी पाएँगे, और इस तरह सत्य, मार्ग, और जीवन को भी प्राप्त करेंगे।

सूचीपत्र

संकलन

  • 1
  • 2
  • 3

भाग दो

कलीसियाओं में चलने के दौरान मसीह द्वारा बोले गए वचन

(चयनित अंश)

1परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है
2परमेश्वर संपूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियंता है
3परमेश्वर के प्रकटन को उसके न्याय और ताड़ना में देखना
4विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए
5भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है
6धार्मिक सेवाओं को अवश्य शुद्ध करना चाहिए
7परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए
8प्रतिज्ञाएँ उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं
9दुष्टों को निश्चित ही दंड दिया जाएगा
10परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप सेवा कैसे करें
11वास्तविकता को कैसे जानें
12नये युग की आज्ञाएँ
13सहस्राब्दि राज्य आ चुका है
14तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है
15आज परमेश्वर के कार्य को जानना
16क्या परमेश्वर का कार्य उतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है?
17तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है
18सात गर्जनाएँ—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे
19देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर
20विश्वास में, वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, धार्मिक रीति-रिवाजों में संलग्न होना विश्वास नहीं है
21जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं
22जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे
23राज्य का युग वचन का युग है
24परमेश्वर के वचन के द्वारा सब-कुछ प्राप्त हो जाता है
25केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है
26"सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता
27केवल वे लोग ही परमेश्वर की गवाही दे सकते हैं जो परमेश्वर को जानते हैं
28पतरस ने यीशु को कैसे जाना
29परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे
30क्या तुम ऐसे व्यक्ति हो जो जीवित हो उठा है?
31एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता में होना है
32वे सभी लोग जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे वो लोग हैं जो परमेश्वर का विरोध करते हैं
33"कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के दस अंशों से एक संकलन
34"परमेश्वर के कार्य का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से एक संकलन
35"बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से एक संकलन
36"देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से एक संकलन
37"विजय के कार्यों का आंतरिक सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से एक संकलन
38दो देहधारण पूरा करते हैं देहधारण के मायने
39क्या त्रित्व का अस्तित्व है?
40पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान
41तुझे अपने भविष्य के मिशन पर कैसे ध्यान देना चाहिए?
42परमेश्वर के बारे में तुम्हारी समझ क्या है?
43एक वास्तविक व्यक्ति होने का क्या अर्थ है
44तुम विश्वास के बारे में क्या जानते हो?
45देह की चिन्ता करने वालों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है
46उद्धारकर्त्ता पहले ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है
47सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है
48व्यवस्था के युग का कार्य
49छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी
50तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई
51उपाधियों और पहचान के सम्बन्ध में
52केवल पूर्ण बनाया गया मनुष्य ही सार्थक जीवन जी सकता है
53वो मनुष्य, जिसने परमेश्वर को अपनी ही धारणाओं में सीमित कर दिया है, किस प्रकार उसके प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है?
54जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं, केवल वे ही परमेश्वर को संतुष्ट कर सकते हैं
55देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर
56परमेश्वर संपूर्ण सृष्टि का प्रभु है
57सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है
58परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य
59परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है
60भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है
61परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार
62परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास
63स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है
64मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना
65परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे
66जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा
67वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं
68बुलाए गए लोग बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं
69तुम्हें मसीह के साथ अनुकूलता का तरीका खोजना चाहिए
70क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो?
71मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है
72क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है
73केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है
74अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो
75तुम किसके प्रति वफादार हो?
76तीन चेतावनियाँ
77परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है
78पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें
79दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए
80तुम लोगों को अपने कर्मों पर विचार करना चाहिए
81परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है
82सर्वशक्तिमान की आह
83केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है
  • 1
  • 2
  • 3

डाउनलोड