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"केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है" (अंश)

परमेश्वर के कथन "केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है" (अंश)

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "आज, परमेश्वर के पास नया कार्य है। हो सकता है कि तुम इन वचनों को स्वीकार नहीं कर सको, ये तुम्हें अजीब लग सकते हैं, किंतु मैं तुम्हें सलाह देता हूँ कि तुम अपनी स्वाभाविकता प्रकट मत करो क्योंकि केवल वे जो परमेश्वर के समक्ष धार्मिकता के लिये सच्ची भूख-प्यास रखते हैं, सत्य को पा सकते हैं, और केवल वे जो वास्तव में धर्मनिष्ठ हैं, परमेश्वर के द्वारा प्रबुद्ध किए जा सकते हैं और मार्गदर्शन पा सकते हैं। लड़ने-झगड़ने के माध्यम से सत्य की खोज में कुछ नहीं मिलेगा। केवल शांति के साथ खोज करने से ही हम परिणामों को प्राप्त कर सकते हैं। जब मैं यह कहता हूँ कि "आज, परमेश्वर के पास नया कार्य है," तो मैं परमेश्वर के देह में लौटने की बात कर रहा हूँ। शायद तुम इन वचनों पर ध्यान न दो, शायद तुम उनका तिरस्कार करो, या शायद ये तुम्हारे लिए बड़े रुचिकर हों। चाहे जो भी मामला हो, मुझे आशा है कि वे सब जो परमेश्वर के प्रकट होने के लिए वास्तव में लालायित हैं, इस तथ्य का सामना कर सकते हैं और इस पर सावधानीपूर्वक विचार कर सकते हैं, निष्कर्षों पर न पहुँचना सर्वोत्तम है। बुद्धिमान लोगों को इसी तरह से कार्य करना चाहिए। ऐसी बात का अध्ययन करना कठिन नहीं है, परंतु हम में से प्रत्येक के लिए इस सत्य को जानने की अपेक्षा की जाती है: जो देहधारी परमेश्वर है, वह परमेश्वर का सार धारण करेगा, और जो देहधारी परमेश्वर है, वह परमेश्वर की अभिव्यक्ति धारण करेगा। चूँकि परमेश्वर देहधारी हुआ, वह उस कार्य को प्रकट करेगा जो उसे अवश्य करना चाहिए, और चूँकि परमेश्वर ने देह धारण किया, तो वह उसे अभिव्यक्त करेगा जो वह है, और मनुष्यों के लिए सत्य को लाने के समर्थ होगा, मनुष्यों को जीवन प्रदान करने, और मनुष्य को मार्ग दिखाने में सक्षम होगा। जिस शरीर में परमेश्वर का सार नहीं है, निश्चित रूप से वह देहधारी परमेश्वर नहीं है; इस बारे में कोई संदेह नहीं है। यह पता लगाने के लिए कि क्या यह देहधारी परमेश्वर है, मनुष्य को इसका निर्धारण उसके द्वारा अभिव्यक्त स्वभाव से और उसके द्वारा बोले वचनों से अवश्य करना चाहिए। कहने का अभिप्राय है, कि वह परमेश्वर का देहधारी शरीर है या नहीं, और यह सही मार्ग है या नहीं, इसे परमेश्वर के सार से तय करना चाहिए। और इसलिए, यह निर्धारित करने में कि यह देहधआरी परमेश्वर का शरीर है या नहीं, बाहरी रूप-रंग के बजाय, उसके सार (उसका कार्य, उसके वचन, उसका स्वभाव और बहुत सी अन्य बातें) पर ध्यान देना ही कुंजी है। यदि मनुष्य केवल उसके बाहरी रूप-रंग को ही देखता है, उसके तत्व की अनदेखी करता है, तो यह मनुष्य की अज्ञानता और उसके अनाड़ीपन को दर्शाता है। बाहरी बातें सार का निर्धारण नहीं करती हैं; उससे भी बढ़कर, परमेश्वर का कार्य मनुष्यों की अवधारणाओं से अनुरूप कभी भी नहीं रहा है। क्या यीशु का बाहरी रूपरंग मनुष्य की अवधारणाओं से संघर्ष नहीं करता था? क्या उसका रूपरंग और पहनावा, उसकी वास्तविक पहचान के बारे में कोई सुराग देने में असमर्थ नहीं थे? क्या यही वह कारण नहीं था कि आरंभिक फरीसियों ने यीशु का विरोध किया, क्योंकि उन्होंने केवल उसके बाहरी रूपरंग को ही देखा, और उसके द्वारा बोले गये वचनों को अपने हृदय में ग्रहण नहीं किया? मेरी आशा है कि वे भाई और बहनें जो परमेश्वर के रूपरंग की खोज में हैं, वे इतिहास की इस त्रासदी या दुःखद घटना को नहीं दोहराएँगे। तुम लोगों को आधुनिक काल का फरीसी नहीं बनना चाहिए और परमेश्वर को फिर से सलीब पर नहीं चढ़ाया जाना चाहिए। तुम लोगों को सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए कि परमेश्वर के वापस लौटने का स्वागत कैसे करें, और एक स्पष्ट मन रखना चाहिए कि कैसे ऐसा व्यक्ति बने जो सत्य के प्रति समर्पित होता है। यह यीशु के बादलों पर लौटकर आने की प्रतीक्षा करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। हमें अपनी आध्यात्मिक आँखों को पोंछना चाहिए और कल्पना की उड़ान से भरे शब्दों का शिकार नहीं बनना चाहिए। हमें परमेश्वर के व्यवहारिक कार्य के बारे में सोचना चाहिए, और परमेश्वर के यथार्थ पक्ष पर दृष्टि डालनी चाहिए। तुम लोग अपने आप को दिवास्वप्न में बहने या खोने न दें, सदैव उस दिन की प्रतीक्षा में रहें, जब प्रभु यीशु तुम लोगों को, जिन्होंने कभी भी उसे जाना या उसे देखा नहीं है, और जो नहीं जानते हैं कि उसकी इच्छा को कैसे करें, ले जाने के लिए अचानक हमारे बीच बादलों पर अवरोहण करेगा। व्यवहारिक मसलों पर विचार करना बेहतर है!" — "वचन देह में प्रकट होता है" से उद्धृत

चमकती पूर्वी बिजली, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का सृजन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकट होने और उनका काम, परमेश्वर यीशु के दूसरे आगमन, अंतिम दिनों के मसीह की वजह से किया गया था। यह उन सभी लोगों से बना है जो अंतिम दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करते हैं और उसके वचनों के द्वारा जीते और बचाए जाते हैं। यह पूरी तरह से सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से स्थापित किया गया था और चरवाहे के रूप में उन्हीं के द्वारा नेतृत्व किया जाता है। इसे निश्चित रूप से किसी मानव द्वारा नहीं बनाया गया था। मसीह ही सत्य, मार्ग और जीवन है। परमेश्वर की भेड़ परमेश्वर की आवाज़ सुनती है। जब तक आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ते हैं, आप देखेंगे कि परमेश्वर प्रकट हो गए हैं।

विशेष वक्तव्य: यह वीडियो प्रस्तुति सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया द्वारा लाभ-के-लिए-नहीं (नॉट-फॉर प्रॉफिट) रचना के रूप में तैयार की गई थी। यह वीडियो किसी भी तीसरे पक्ष को लाभ के लिए वितरित नहीं किया जा सकता है, और हमें आशा है कि हर कोई इसे खुले तौर पर साझा और वितरित करेगा। जब आप इसे वितरित करते हैं, तो कृपया स्रोत पर ध्यान दें। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया की सहमति के बिना, कोई भी संगठन, सामाजिक समूह या व्यक्ति इस वीडियो की सामग्री के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता है या इसे गलत तरीके से प्रस्तुत नहीं कर सकता है।