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अंत के दिनों के मसीह के लिए गवाहियाँ

अंत के दिनों के मसीह के लिए गवाहियाँ

सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अंतिम दिनों के मसीह, ने कई सच्चाइयों को व्यक्त किया है, बाइबल की हर सच्चाई और रहस्य का खुलासा किया है, और मानव जाति को परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों की अंदर की कहानी के बारे में, परमेश्वर के देह-धारण के रहस्य और परमेश्वर के आखिरी दिनों में न्याय के कार्य इत्यादि के बारे में बताया है। इससे यह बात प्रमाणित होती है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रभु  यीशु की वापसी है और वह अंतिम दिनों में परमेश्वर का प्रकटन है।

सूचीपत्र

(परमेश्वर की गवाही देने के बीस सत्य)

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प्रस्तावना

भाग एक

सुसमाचार फैलाने और परमेश्वर की गवाही देने से संबंधित 20 सत्य

I. परमेश्वर के देहधारण से सम्बंधित सत्य

1प्रभु यीशु ने स्वयं भविष्यवाणी की थी कि परमेश्वर आखिरी दिनों में देहधारण करेगा और कार्य करने के लिए मनुष्य के पुत्र के रूप में प्रकट होगा।
2देहधारण क्या है? देहधारण का तत्व क्या है?
3देहधारी परमेश्वर के कार्य और आत्मा के कार्य के बीच क्या अंतर है?
4अंतिम दिनों में अपने न्याय के कार्य को करने के लिए परमेश्वर मनुष्य का उपयोग क्यों नहीं करता, इसके बजाय उसे देहधारण कर, स्वयं इसे क्यों करना पड़ता है?
5देहधारी परमेश्वर और जो परमेश्वर द्वारा उपयोग में लाए जाते हैं उन लोगों के बीच सारभूत अंतर
6यह क्यों कहा जाता है कि भ्रष्ट मानव जाति को देह बने परमेश्वर के उद्धार की अधिक आवश्यकता है?
7यह क्यों कहा जाता है कि परमेश्वर का दो बार देहधारी होना देहधारण की महत्ता को पूरा करता है?
8यह कैसे समझें कि मसीह सत्य, मार्ग और जीवन है?
9न्याय के कार्य को करने के लिए परमेश्वर का देहधारण करना, किस तरह मानव जाति के अस्पष्ट परमेश्वर में विश्वास को और शैतान के प्रभुत्व के अंधेरे युग को समाप्त करता है?
10क्यों केवल देहधारी परमेश्वर के कार्य के अनुभव और आज्ञा-पालन करने के द्वारा ही कोई परमेश्वर को जान सकता है?

II. मानव जाति के उद्धार के लिए परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों से संबन्धित सत्य

III. अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य से सम्बंधित सत्य

1अनुग्रह के युग में परमेश्वर ने मानव जाति को छुटकारा दिलाया था, तो क्यों आखिरी दिनों में उसे न्याय के अपने कार्य को करने की अब भी आवश्यकता है?
2अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय का कार्य महान श्वेत सिंहासन का न्याय है, जिसकी प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में भविष्यवाणी की गई है।
3अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय का कार्य किस तरह मानवजाति को शुद्ध करता और बचाता है?
4अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय के महत्व को, अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य से प्राप्त परिणामों में, देखा जा सकता है।
5अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य को धार्मिक दुनिया द्वारा अस्वीकार कर दिए जाने का प्रभाव और परिणाम क्या है?

IV. परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों और उसके नामों के बीच रहे संबंध के विषय से जुड़े सत्य

V. अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य और अनुग्रह के युग में उसके छुटकारे के कार्य के बीच के अंतर

VI. अनुग्रह के युग में बचाए जाने और राज्य के युग में पूर्ण उद्धार पाने के बीच के अंतर

VII. अनुग्रह के युग के पश्चाताप के मार्ग और अंत के दिनों के अनंत जीवन के मार्ग के बीच के अंतर

VIII. परमेश्वर के कार्य और मनुष्य के काम के बीच अंतर

IX. मसीह स्वयं परमेश्वर की अभिव्यक्ति है

X. परमेश्वर को कैसे जाना जाए, इससे सम्बंधित सत्य

XI. परमेश्वर और बाइबल के मध्य के सम्बन्ध से जुड़े सत्य

1बाइबल केवल व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग में परमेश्वर के कार्य के दो चरणों का एक आलेख (रिकॉर्ड) है; यह परमेश्वर के कार्य की संपूर्णता का आलेख नहीं है।
2धार्मिक दुनिया का मानना है कि सभी शास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से दिए गए हैं और ये सब परमेश्वर के ही वचन हैं; इस कथन के प्रति हर किसी को क्या विवेक रखना चाहिए?
3बाइबल मनुष्य द्वारा संकलित की गई थी, परमेश्वर द्वारा नहीं; बाइबल परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती।
4बाइबल में अनन्त जीवन का कोई मार्ग नहीं है; यदि मनुष्य बाइबल को थामे रहता है और उसकी आराधना करता है, तो वह अनन्त जीवन को प्राप्त नहीं करेगा।
5परमेश्वर में सच्चा विश्वास क्या है? किसी को परमेश्वर में कैसे विश्वास करना चाहिए कि वह परमेश्वर से प्रशंसा प्राप्त कर सके?
6बाइबल के साथ कैसे पेश आना चाहिए और उसका उपयोग किस तरह से करना चाहिए कि वह परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप हो? बाइबल का मूलभूत मूल्य क्या है?

XII. परमेश्वर की वाणी सुनती समझदार कुँवारियों से संबंधित सत्य

XIII. अंतिम दिनों में चीन में परमेश्वर के देहधारण का महत्व

XIV. परमेश्वर की कलीसिया और धार्मिक संगठनों के बीच की भिन्नतायेँ

XV. परमेश्वर का विरोध करती धार्मिक दुनिया के सार को किस तरह पहचानें

1प्रभु यीशु ने फरीसियों को क्यों शाप दिया था? फरीसियों का सार क्या था?
2यह क्यों कहा जाता है कि धार्मिक पादरी और प्राचीन लोग सभी फरीसियों के मार्ग पर चल रहे हैं? उनका सार क्या है?
3क्यों परमेश्वर के कार्य का हर नया चरण धार्मिक दुनिया की प्रचंड अवज्ञा और निंदा का सामना करता है? इसका मूल कारण क्या है?
4क्या धार्मिक पादरी और प्राचीन लोग सभी वास्तव में परमेश्वर द्वारा प्रतिष्ठित हैं? क्या धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों के प्रति स्वीकृति और आज्ञाकारिता, परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता और उसके अनुसरण को दर्शा सकती हैं?
5किसी ऐसे व्यक्ति का क्या अंजाम होता है जो धर्म में परमेश्वर पर विश्वास करता है और फरीसियों और मसीह-विरोधियों के भ्रम और नियंत्रण से पीड़ित है? क्या इस तरह से परमेश्वर में विश्वास करने वाला कोई व्यक्ति परमेश्वर द्वारा बचाया जा सकता है?
6क्या धार्मिक दुनिया में सच्चाई और परमेश्वर की सत्ता होती है, या मसीह-शत्रु और शैतान की सत्ता है?

XVI. परमेश्वर त्रिविध परमेश्वर है, या एकमात्र सच्चा परमेश्वर?

XVII. सत्य की वास्तविकता और धर्म संबंधी ज्ञान के बीच मेंकैसे किया जाए

XVIII. परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना क्या है और सच्ची गवाही क्या है?

XIX. सच्चे मार्ग ने प्राचीन काल से ही उत्पीड़न का सामना क्यों किया है?

XX. स्वर्गारोहण और परमेश्वर के सिंहासन के सामने उठाये जाने का वास्तविक अर्थ

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